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  • तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं के बीच कई देशों में आपातकालीन तैयारी पर जोर, नागरिकों को जरूरी सामान जुटाने की सलाह

    तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं के बीच कई देशों में आपातकालीन तैयारी पर जोर, नागरिकों को जरूरी सामान जुटाने की सलाह


    नई दिल्ली ।
    दुनिया के कई देशों में संभावित आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए नागरिकों को पहले से तैयार रहने की सलाह दी जा रही है। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और यूरोप के कई देशों ने लोगों से घरों में पर्याप्त भोजन, पीने का पानी, जरूरी दवाएं और अन्य आवश्यक वस्तुएं रखने पर जोर दिया है। इन तैयारियों का उद्देश्य किसी संकट के दौरान सामान्य आपूर्ति व्यवस्था बाधित होने पर लोगों को शुरुआती दिनों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

    जर्मनी, नॉर्वे, फिनलैंड, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, आयरलैंड, स्वीडन, चेकिया और लिथुआनिया सहित कई देशों में आपातकालीन तैयारियों को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा रही है। यूरोपीय संघ भी संकट प्रबंधन और नागरिकों की तैयारी को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। सरकारों की इन सलाहों में प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ साइबर हमले, बिजली संकट और संभावित सैन्य संघर्ष जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया है।

    अलग-अलग देशों में जरूरी सामान जमा रखने की अवधि को लेकर अलग-अलग सुझाव दिए गए हैं। कुछ देशों में कम से कम तीन दिन की जरूरतों के लिए तैयारी करने को कहा गया है, जबकि अन्य जगहों पर सात से दस दिनों तक का भोजन, पानी और दवाएं उपलब्ध रखने पर जोर दिया जा रहा है। इसका मकसद यह है कि किसी आपात स्थिति में बाजार, परिवहन या अन्य आपूर्ति सेवाएं प्रभावित होने पर परिवारों को तत्काल परेशानी का सामना न करना पड़े।

    अमेरिका में भी आपातकालीन तैयारियों को लेकर चर्चा हो रही है। हालांकि, सैन्य ठिकानों को 90 दिनों तक बाहरी आपूर्ति पर निर्भरता कम रखते हुए काम करने में सक्षम बनाने की योजना का उल्लेख नागरिकों के लिए 90 दिनों का राशन जमा करने के निर्देश के रूप में नहीं किया जा सकता। सैन्य प्रतिष्ठानों की यह तैयारी रक्षा व्यवस्था से संबंधित है और इसे आम नागरिकों के लिए जारी किसी समान निर्देश से अलग समझना जरूरी है।

    ब्रिटेन ने अपने ‘बी रेडी’ अभियान के माध्यम से नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए जरूरी सामान तैयार रखने की सलाह दी है। इस तैयारी में पीने का पानी, लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला भोजन, आवश्यक दवाएं, टॉर्च, अतिरिक्त बैटरियां, रेडियो, पावर बैंक और कुछ नकदी शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह है कि बिजली, संचार या अन्य सार्वजनिक सेवाएं बाधित होने की स्थिति में लोग कुछ समय तक अपनी बुनियादी जरूरतें खुद पूरी कर सकें।

    जापान में भी आपदा प्रबंधन और नागरिकों की तैयारी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। भूकंप की आशंका और उसके बाद बिजली, पानी तथा परिवहन सेवाओं में संभावित रुकावट को ध्यान में रखते हुए लोगों को कम से कम तीन दिन और संभव हो तो एक सप्ताह तक के जरूरी सामान का इंतजाम रखने की सलाह दी जाती है। जापान में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए ऐसी तैयारियों को नागरिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    इन देशों में बढ़ती सतर्कता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के तीसरे विश्व युद्ध को लेकर दिए गए बयान ने भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चर्चाओं को ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि, विभिन्न देशों की ओर से जारी आपातकालीन तैयारियों की सलाह को सीधे तौर पर विश्व युद्ध की शुरुआत या किसी निश्चित सैन्य टकराव का संकेत नहीं माना जा सकता। इन निर्देशों का दायरा प्राकृतिक आपदाओं से लेकर तकनीकी और सुरक्षा संबंधी संकटों तक फैला हुआ है।

    सरकारों की चिंता केवल युद्ध तक सीमित नहीं है। बाढ़, भीषण मौसम, भूकंप, लंबे समय तक बिजली गुल रहने, इंटरनेट सेवाओं में रुकावट और साइबर हमलों जैसी घटनाएं भी जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों में खाद्य सामग्री की आपूर्ति, पेयजल उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं और संचार व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। पहले से जरूरी सामान रखने से परिवारों को संकट के शुरुआती दौर में राहत मिल सकती है।

    आपातकालीन तैयारी को लेकर अलग-अलग देशों के निर्देशों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अंतर है। इसलिए नागरिकों को अपने देश और क्षेत्र में जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक तैयारी करने की सलाह दी जाती है। कुल मिलाकर, कई देशों में नागरिक सुरक्षा को लेकर बढ़ता जोर इस बात को दर्शाता है कि सरकारें अब केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाने के बजाय लोगों को पहले से तैयार करने पर भी ध्यान दे रही हैं।

  • बच्चों को पढ़ाई के साथ सिखाएं ये 10 जरूरी स्किल, मुश्किल हालात में समझदारी से फैसला लेने में आएंगी काम

    बच्चों को पढ़ाई के साथ सिखाएं ये 10 जरूरी स्किल, मुश्किल हालात में समझदारी से फैसला लेने में आएंगी काम


    नई दिल्ली ।
    बच्चों की परवरिश में पढ़ाई, होमवर्क और अच्छे व्यवहार के साथ उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जरूरी स्किल सिखाना भी बेहद अहम है। कई बार ऐसी परिस्थितियां सामने आ सकती हैं, जहां किताबों का ज्ञान पर्याप्त नहीं होता और बच्चे को अपनी सुरक्षा के लिए व्यावहारिक समझ की जरूरत पड़ती है। उम्र के अनुसार कुछ जरूरी बातें सिखाकर बच्चों को मुश्किल समय में घबराने के बजाय समझदारी से कदम उठाने के लिए तैयार किया जा सकता है।

    सबसे पहले बच्चे को अपना पूरा नाम, माता-पिता का नाम और जरूरत के मुताबिक घर से जुड़ी जरूरी जानकारी याद करानी चाहिए। छोटी उम्र में इसे खेल-खेल में दोहराकर सिखाया जा सकता है, ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चा बिना घबराए अपनी पहचान और जरूरी जानकारी बता सके।

    बच्चों को यह भी पता होना चाहिए कि आपात स्थिति में किससे मदद मांगनी है। परिवार के जरूरी फोन नंबर याद कराने के साथ उन्हें यह समझाना जरूरी है कि फोन पर अपनी स्थिति और परेशानी को साफ शब्दों में कैसे बताया जाए।

    अनजान लोगों से सावधानी बरतना भी बच्चों के लिए महत्वपूर्ण स्किल है। उन्हें समझाएं कि हर व्यक्ति पर तुरंत भरोसा करना जरूरी नहीं है। अगर कोई अनजान व्यक्ति कुछ देने, कहीं ले जाने या माता-पिता के बारे में गलत जानकारी देने की कोशिश करे, तो बच्चे को वहां से हटकर किसी भरोसेमंद बड़े से मदद मांगनी चाहिए।

    अगर बच्चा भीड़ या किसी सार्वजनिक स्थान पर परिवार से अलग हो जाए, तो उसे इधर-उधर भागने के बजाय सुरक्षित जगह पर रुकना चाहिए। पुलिसकर्मी या किसी जिम्मेदार कर्मचारी से मदद मांगने की आदत उसे ऐसी स्थिति में सुरक्षित रहने में मदद कर सकती है।

    घर में आग लगने जैसी स्थिति के लिए भी बच्चों को पहले से सामान्य सुरक्षा नियम समझाना जरूरी है। उन्हें बताया जाना चाहिए कि घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान की ओर जाना है और आग या धुएं वाली जगह पर वापस जाकर सामान लेने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

    पानी के आसपास सुरक्षा को लेकर भी बच्चों को जागरूक करना जरूरी है। स्विमिंग पूल, तालाब या किसी जलाशय के पास अकेले नहीं जाने और जरूरत पड़ने पर तुरंत किसी बड़े को बुलाने की आदत डालनी चाहिए।

    उम्र के अनुसार बच्चों को बेसिक फर्स्ट एड की जानकारी भी दी जा सकती है। छोटी चोट या कट लगने पर क्या करना है, यह समझाने के साथ उन्हें यह भी बताना चाहिए कि गंभीर चोट की स्थिति में खुद इलाज करने के बजाय तुरंत किसी बड़े से मदद लें।

    बड़े बच्चों को धीरे-धीरे किचन सेफ्टी के नियम सिखाए जा सकते हैं। गैस, गर्म बर्तन, चाकू और बिजली के उपकरणों से जुड़ी सावधानियां उनकी उम्र और समझ के अनुसार बताना जरूरी है।

    बच्चों को जरूरत पड़ने पर साफ तौर पर ‘ना’ कहना भी सिखाएं। अगर कोई बात या स्थिति उन्हें असहज लगे, तो वे बिना डर अपनी बात कह सकें और तुरंत माता-पिता या किसी भरोसेमंद बड़े को जानकारी दें।

    सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चा परेशानी छिपाने के बजाय समय पर मदद मांगे। गलती होने या डर लगने पर सच बताना जरूरी है। इन स्किल्स को बच्चों पर दबाव डालकर नहीं, बल्कि रोजमर्रा के उदाहरणों, रोल-प्ले और छोटे अभ्यास के जरिए सहज तरीके से सिखाया जा सकता है।

  • हर बीमारी में घरेलू नुस्खे आजमाना पड़ सकता है भारी, सांस की परेशानी, बेहोशी और खून आने पर तुरंत डॉक्टर से लें सलाह

    हर बीमारी में घरेलू नुस्खे आजमाना पड़ सकता है भारी, सांस की परेशानी, बेहोशी और खून आने पर तुरंत डॉक्टर से लें सलाह

    नई दिल्ली ।  घरेलू उपचार सर्दी-खांसी, पेट दर्द जैसी आम समस्याओं में हम सभी अक्सर खुद से ही घरेलू उपचार करना शुरू कर देते हैं। खांसी में शहद, अदरक, हल्दी या काढ़े की सलाह दी जाती है। पेट खराब हुआ तो अजवाइन और गले में दर्द हुआ तो नमक के पानी से गरारे जैसे उपाय भारतीय घरों में लंबे समय से इस्तेमाल होते रहे हैं। वैसे तो कुछ समस्याओं में ये आराम देने वाले भी हो सकते हैं, लेकिन सबसे बड़ी गलती तब होती है जब घरेलू नुस्खे को हर बीमारी का इलाज समझ लिया जाता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार इस बात को लेकर अलर्ट करते रहे हैं कि हर आम दिखने वाली बीमारी में खुद से ही दवा या घरेलू उपचार नहीं शुरू कर देना चाहिए। सांस लेने में परेशानी, बेहोशी, भ्रम, बहुत तेज दर्द या अचानक बिगड़ती हालत को केवल घरेलू उपचार से ठीक करने की कोशिश आपके लिए बड़ी मुश्किलों का कारण बन सकती है।

    आइए समझते हैं कि किन समस्याओं में हमें घरेलू उपायों में फंसने की जगह समय रहते डॉक्टर के पास जाना जरूरी है?

    सांस की समस्या

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वायरल बुखार, हल्के पेट दर्द या गैस जैसी कभी-कभार होने वाली समस्याओं में कुछ उपाय लाभ दे सकते हैं। पर अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें या बार-बार वही समस्या हो रही है तो इसके कारणों का पता लगाने के लिए जांच कराना और समय रहते डॉक्टर की मदद लेना जरूरी हो जाता है।

    सांस लेने में परेशानी या सीने में दिक्कत

    सांस लेने में अचानक या गंभीर परेशानी को केवल भाप, अदरक की चाय या काढ़े से ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। सांस फूलना कई अलग-अलग स्थितियों का संकेत हो सकता है और कई बार ये गंभीर समस्याओं की ओर इशारा भी कर सकता है।

    अगर सांस लेने में कठिनाई हो रही है तो इसमें आपातकालीन मदद की जरूरत होती है। इसी तरह सीने में तेज और असामान्य दर्द, बेहोशी या हालत तेजी से बिगड़ने में भी घरेलू इलाज की जगह विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

    बेहोशी या बहुत ज्यादा कमजोरी

    अगर आपके आसपास या घर में कोई अचानक बेहोश हो जाए या अत्यधिक कमजोर महसूस करे तो इसे सामान्य थकान मानकर इग्नोर करना या खुद से कोई उपाय शुरू कर देना ठीक नहीं है।

    सांस लेने में परेशानी, दौरे पड़ना या त्वचा-होंठों के रंग में बदलाव जैसे संकेत गंभीर हो सकते हैं। कई बार हार्ट अटैक या शरीर में ऑक्सीजन की कमी में भी ऐसी दिक्कतें देखी जाती हैं। इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टरी मदद की जरूरत होती है।

    बहुत तेज बुखार या लगातार बिगड़ते लक्षण

    हर बुखार में डॉक्टर के पास जाना जरूरी नहीं होता, लेकिन बहुत तेज बुखार, लगातार बिगड़ते लक्षण या कई दिनों तक सुधार न होने जैसी स्थिति में घरेलू उपचार करते रहना नुकसानदायक हो सकता है।

    दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों स्वाइन फ्लू का खतरा देखा जा रहा है जिसमें होने वाला बुखार भी सामान्य लग सकता है। पर इसमें समय रहते डॉक्टरी सलाह जरूरी है। घरेलू उपाय कुछ लक्षणों में अस्थायी आराम दे सकते हैं, लेकिन अगर समय के साथ हालत सुधरने के बजाय बिगड़ रही हो तो विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

    खून की उल्टी या मल में खून

    शरीर से किसी भी तरह की ब्लीडिंग में सिर्फ खानपान या घरेलू उपचार के भरोसे बैठे रहना ठीक नहीं है। खून वाली उल्टी और मल में खून जैसे लक्षणों में तुरंत डॉक्टर की सलाह और जांच जरूरी है।

    लिवर या फेफड़ों की गंभीर बीमारियों में उल्टी के साथ खून आने की दिक्कत देखी जाती है। इसी तरह से डेंगू के गंभीर मामले में मल से खून आ सकता है। इन बीमारियों में समय रहते डॉक्टरी मदद जरूरी है। बिना कारण समझे घरेलू उपाय करते रहना स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

  • छिंदवाड़ा में भीषण सड़क हादसा: दो बाइक की आमने-सामने टक्कर में 4 युवकों की मौत, 1 गंभी

    छिंदवाड़ा में भीषण सड़क हादसा: दो बाइक की आमने-सामने टक्कर में 4 युवकों की मौत, 1 गंभी

    छिंदवाड़ा जिले के चौरई क्षेत्र से एक दर्दनाक खबर सामने आई है, जिसने सभी को हिला कर रख दिया। यहां दो बाइक आमने-सामने टकरा गईं, जिसमें चार युवकों की मौके पर ही मौत हो गई और एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। यह हादसा सिहोरा-माचागोरा रोड पर धनोरा गोसाई पुलिया के पास हुआ।

    जानकारी के अनुसार, एक बाइक पर तीन युवक और दूसरी बाइक पर दो युवक सवार थे। दोनों बाइक तेज रफ्तार में विपरीत दिशा से आ रही थीं। पुलिया के पास जब वे आमने-सामने टकराए, तो टक्कर इतनी भीषण थी कि सभी युवक सड़क से दूर तक जा गिरे। आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस तथा एंबुलेंस को सूचना दी।

    घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने चार युवकों को मृत घोषित कर दिया। जबकि एक युवक का इलाज जारी है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पताल में घायलों की आपातकालीन स्थिति देखी गई, जैसे किसी फिल्म का सीन हो। घायल को बाइक सहित इमरजेंसी वार्ड तक ले जाना पड़ा।

    प्रारंभिक जांच में पुलिस ने हादसे का मुख्य कारण तेज रफ्तार बताया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और शवों का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। यह हादसा इस बात का प्रमाण है कि सड़क पर तेज गति, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और लापरवाही जीवन के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकती है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुलिया और रोड अक्सर दुर्घटनाग्रस्त होते रहते हैं। कुछ ग्रामीणों ने प्रशासन से रोड पर सुरक्षा उपायों और चेतावनी संकेत लगाने की मांग की है। परिवारों में मातम का माहौल है और मृतकों के परिजन हादसे की इस भयावहता से सदमे में हैं।

    हादसे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सड़क सुरक्षा और वाहन की गति पर नियंत्रण न होने पर परिणाम हमेशा गंभीर होते हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना छिंदवाड़ा जिले और आसपास के इलाकों के लिए चेतावनी है कि सड़क पर सतर्कता, हेलमेट का उपयोग और निर्धारित गति सीमा का पालन जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाता है।

  • मुंबई-आगरा फोरलेन पर केमिकल से भरे ट्रक में आग दूसरे ट्रक को भी लपेटा

    मुंबई-आगरा फोरलेन पर केमिकल से भरे ट्रक में आग दूसरे ट्रक को भी लपेटा


    महू । इंदौर जिले के मानपुर क्षेत्र में सोमवार सुबह मुंबई-आगरा फोरलेन पर दो ट्रकों में आग लग गई जिससे पूरा इलाका हड़बड़ी में आ गया। आग की लपटें और धुआं इतना विकराल था कि वह करीब एक किलोमीटर तक दिखाई देने लगा। ट्रकों में से एक ट्रक केमिकल से भरा हुआ था जबकि दूसरा ट्रक आग की चपेट में आ गया। इस हादसे से फोरलेन पर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह ठप हो गया जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
    घटना के बारे में जानकारी मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। मानपुर और महू की फायर ब्रिगेड की टीम ने एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान पुलिस ने जाम में फंसे वाहनों को हटाकर यातायात व्यवस्था बहाल की और स्थिति को नियंत्रण में किया।
    आगजनी का यह मामला मानपुर थाना क्षेत्र के पास हुआ। ट्रक चालक राकेश ने बताया कि वह मुंबई के भिवंडी इलाके से इंदौर की लोहा मंडी के लिए केमिकल से भरे डिब्बे लेकर जा रहा था। रास्ते में वह मानपुर में चाय पीने के लिए रुका था लेकिन अचानक ढाबे के एक कर्मचारी ने बाहर खड़े ट्रक में आग लगने की सूचना दी। चालक के अनुसार ट्रक में कल ही माल भरा गया था और जब वह बाहर गया तो देखा कि आग तेजी से फैल रही थी।
    यह ट्रक आग की चपेट में आते ही पास खड़ा दूसरा ट्रक भी प्रभावित हो गया जिसके चलते दोनों ट्रकों में जलन के कारण आसपास के इलाके में धुआं और लपटें दिखाई देने लगीं। चूंकि यह ट्रक केमिकल से भरा हुआ था यह आग और भी खतरनाक हो सकती थी। मौके पर मौजूद लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन आग की लपटों ने धीरे-धीरे विकराल रूप ले लिया। फिर दमकल कर्मियों की मदद से आग को काबू किया गया।
    पुलिस अधिकारी लोकेंद्र हीहोर ने बताया कि आग के कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है लेकिन यह घटना दोनों ट्रकों के बीच हुई थी। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है ताकि आग के कारणों का स्पष्ट पता लगाया जा सके। इस मामले में ट्रक चालक राकेश और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ की जा रही है।
    आग लगने के कारण फोरलेन पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया था जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि दमकल की टीम की तत्परता और पुलिस की सजगता से एक घंटे में स्थिति पर नियंत्रण पाया गया। इसके बाद यातायात को फिर से बहाल किया गया और मार्ग खोल दिया गया।
    इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों और सड़क पर दुर्घटनाओं के प्रति जागरूकता की जरूरत को उजागर किया। खासकर केमिकल या अन्य खतरनाक सामग्री ढोने वाले ट्रकों के लिए सुरक्षा उपायों का पालन करना और ट्रक ड्राइवरों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। आग की घटनाओं से बचने के लिए नियमित रूप से ट्रकों की जांच और रख-रखाव करना आवश्यक है। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और यह देखने के लिए जांच करेगी कि आग कैसे लगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।