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  • आर्थिक मजबूती की नई मिसाल, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर नीति बनी बड़ी ताकत

    आर्थिक मजबूती की नई मिसाल, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर नीति बनी बड़ी ताकत

    नई दिल्ली।
    भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक नया वैश्विक आकलन सामने आया है, जिसमें देश को उभरते बाजारों में सबसे मजबूत स्थिति में रखा गया है। यह आकलन इस आधार पर किया गया है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई वैश्विक आर्थिक झटकों के बावजूद अपनी स्थिरता और विकास क्षमता को बनाए रखा है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे तीन प्रमुख आधार हैं। इनमें विशाल विदेशी मुद्रा भंडार, स्थिर और संतुलित आर्थिक नीतियां तथा मजबूत घरेलू पूंजी बाजार शामिल हैं। ये तीनों तत्व मिलकर देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी दबावों से सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2020 के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार कई चुनौतियों से गुजरती रही है। महामारी का प्रभाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव, अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी और बैंकिंग क्षेत्र में आए संकट जैसी परिस्थितियों ने कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। इन कठिन हालातों के बीच भारत ने अपेक्षाकृत स्थिर प्रदर्शन किया है।

    इस मूल्यांकन में यह भी सामने आया है कि भारत ने फंडिंग लागत में अचानक वृद्धि या अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों तक पहुंच में किसी बड़ी बाधा का सामना नहीं किया, जो कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुई।

    देश की मौद्रिक नीति को भी स्पष्ट और स्थिर बताया गया है, जिससे महंगाई की उम्मीदें नियंत्रित रहती हैं और निवेशकों का भरोसा बना रहता है। साथ ही जरूरत के अनुसार मुद्रा विनिमय दर में लचीलापन बनाए रखना भी भारत की आर्थिक मजबूती का एक महत्वपूर्ण पहलू माना गया है।

    आकलन में यह भी कहा गया है कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौरान भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहेगा। इसका कारण यह है कि देश के पास पहले से मौजूद आर्थिक सुरक्षा ढांचा किसी भी बाहरी झटके को संभालने में सक्षम है।

    भारत की तुलना कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से की गई, जहां यह पाया गया कि विभिन्न देशों ने महामारी के बाद आर्थिक दबावों को अलग-अलग स्तर पर झेला है, लेकिन भारत ने अपेक्षाकृत अधिक स्थिरता दिखाई है।

  • मोदी-ट्रंप की दोस्ती ने आसान की राह, लेकिन डील वार्ताकारों ने गढ़ी: मोबियस

    मोदी-ट्रंप की दोस्ती ने आसान की राह, लेकिन डील वार्ताकारों ने गढ़ी: मोबियस


    नई दिल्ली । अरबपति निवेशक और उभरते बाजारों के दिग्गज विशेषज्ञ मार्क मोबियस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत का यूरोपीय संघ के साथ हालिया व्यापारिक समझौता अमेरिका के लिए एक स्पष्ट संकेत था, जिसके बाद उसने भारत के साथ अपने समझौते को तेजी से अंतिम रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाए।

    नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत के दौरान मोबियस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अच्छे व्यक्तिगत संबंधों ने इस प्रक्रिया को आसान जरूर बनाया, लेकिन समझौते को वास्तविक आकार दोनों देशों के पेशेवर वार्ताकारों ने ही दिया है।मोबियस ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को फादर ऑफ ऑल ट्रेड डील कहना सही नहीं होगा। उनके अनुसार, भारत का यूरोपीय संघ के साथ हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से कहीं अधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

    उन्होंने कहा कि भारत का यूरोपीय संघ के साथ आगे बढ़ना उसकी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है। इसी कदम ने संभवतः अमेरिका को यह एहसास कराया कि भारत वैश्विक व्यापार में विकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है, जिससे अमेरिका को भी अपने समझौते में तेजी लानी पड़ी।जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी अपनी व्यक्तिगत कूटनीति के चलते अमेरिका से बेहतर शर्तें हासिल कर पाए, तो मोबियस ने कहा कि अच्छे नेताओं के संबंध प्रक्रिया को सुगम बना सकते हैं, लेकिन किसी भी समझौते की बुनियाद पेशेवर बातचीत और तकनीकी वार्ताओं पर ही टिकी होती है।

    भारत की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए मोबियस ने भरोसा जताया कि देश निकट भविष्य में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर मजबूती से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की विकास दर कहीं अधिक स्थिर और मजबूत है।शेयर बाजार को लेकर मोबियस ने सतर्क रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भारतीय शेयर बाजार का एक लाख का आंकड़ा छूना मुश्किल दिखता है, क्योंकि इसके लिए लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि जरूरी होगी, जो मौजूदा परिस्थितियों में बहुत तेज़ मानी जाएगी।

    हालांकि, उन्होंने भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को बेहद सकारात्मक बताया। मोबियस के अनुसार, देश की युवा आबादी, तेज़ शहरीकरण और बढ़ता उपभोक्ता आधार आर्थिक मजबूती की बड़ी वजह हैं। इसके साथ ही निर्यात में लगातार हो रही बढ़ोतरी भी भारत को आने वाले वर्षों में उच्च विकास दर बनाए रखने में मदद करेगी।