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  • फ्रांस में हिंसक प्रदर्शन से बिगड़े हालात, ट्रंप ने मैक्रों से सीमाएं बंद करने को कहा, वेंस ने भी उठाए सवाल

    फ्रांस में हिंसक प्रदर्शन से बिगड़े हालात, ट्रंप ने मैक्रों से सीमाएं बंद करने को कहा, वेंस ने भी उठाए सवाल

    नई दिल्ली । फ्रांस में महंगाई, शिक्षा व्यवस्था और सरकारी सेवाओं की स्थिति को लेकर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन हिंसक घटनाओं में बदल गए हैं। 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के बाद 18 अक्टूबर को देश के कई हिस्सों में तोड़फोड़, दुकानों में लूटपाट और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से देश की सीमाएं बंद करने की अपील की। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी फ्रांस में हुई हिंसा को लेकर वहां की सरकारों की नीतियों और विविधता से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए हैं।

    ट्रंप ने फ्रांस में हो रही घटनाओं को लेकर कहा कि देश में बाहर से आने वाले ऐसे लोगों की वजह से हालात बिगड़ रहे हैं, जिनके दिलों में नफरत है। उन्होंने फ्रांस को एक महान देश बताते हुए कहा कि इस तरह की परिस्थितियां देश को कमजोर कर सकती हैं। ट्रंप ने मैक्रों से आग्रह किया कि बहुत देर होने से पहले सीमाओं को बंद कर नियंत्रण स्थापित किया जाए। उनके बयान के बाद फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों और आव्रजन नीतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

    इससे पहले ट्रंप ने फ्रांस की क्रांति से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा था कि फ्रांस क्रांति के लिए प्रसिद्ध है और लोग वहां जाकर क्रांति में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, हिंसक घटनाओं के बाद उनका रुख अधिक सख्त नजर आया। उन्होंने मौजूदा स्थिति को फ्रांस के लिए गंभीर बताते हुए सीमाओं पर नियंत्रण को जरूरी बताया।

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी फ्रांस में हुई हिंसा पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की उदारवादी सरकारों ने दया और विविधता के नाम पर तीसरी दुनिया के लोगों को फ्रांस सहित दूसरे देशों में आने दिया, लेकिन उनके समाज में घुलने-मिलने और अनुकूलता से जुड़े बुनियादी सवालों को नजरअंदाज किया गया। वेंस के अनुसार, सरकारों को पहले ही संभावित समस्याओं को लेकर चेतावनी दी गई थी, लेकिन समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए।

    लिमोजेस शहर के ऐतिहासिक सिटी हॉल में आग लगने की घटना का उल्लेख करते हुए वेंस ने चिंता जताई। यह इमारत करीब 143 साल पुरानी है और आग के कारण इसका कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। वेंस ने उम्मीद जताई कि फ्रांस इस स्थिति पर काबू पाएगा और अपनी ऐतिहासिक इमारतों को आगे होने वाले नुकसान से बचा सकेगा। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों से भी फ्रांस में हो रही घटनाओं पर ध्यान देने की अपील की।

    फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों का मुख्य कारण महंगाई, शिक्षा व्यवस्था की समस्याएं और सरकारी सेवाओं की खराब स्थिति बताई गई है। इन मुद्दों को लेकर छात्र, ट्रेड यूनियन और अन्य समूह सड़कों पर उतरे थे। फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, 17 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों में करीब 5 लाख 50 हजार लोग शामिल हुए। वहीं, आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों की संख्या लगभग 8 लाख बताई। इस तरह प्रदर्शनों में शामिल लोगों की संख्या को लेकर सरकारी आंकड़ों और आयोजकों के दावों में अंतर सामने आया।

    प्रदर्शन शुरुआत में आर्थिक परेशानियों और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों को लेकर किए गए थे, लेकिन बाद में कई जगहों पर स्थिति हिंसक हो गई। कुछ समूहों की पुलिस के साथ झड़प हुई, दुकानों में लूटपाट की गई और कई शहरों में इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, घटनाओं के बाद करीब 1800 लोगों को गिरफ्तार किया गया। हिंसा के दौरान सैकड़ों पुलिसकर्मी और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कर्मचारी भी घायल हुए।

    लिमोजेस में ऐतिहासिक सिटी हॉल को नुकसान पहुंचने की घटना ने स्थिति की गंभीरता को और स्पष्ट किया है। विरोध प्रदर्शनों के पीछे आर्थिक और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी शिकायतें हैं, जबकि अमेरिकी नेतृत्व ने आव्रजन और विविधता की नीतियों को लेकर अलग दृष्टिकोण सामने रखा है। फिलहाल फ्रांस में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और हिंसक घटनाओं के बाद स्थिति को नियंत्रित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है।

  • होर्मुज स्ट्रेट संकट खत्म होने के करीब! अमेरिका-ईरान समझौते से भारत समेत दुनिया को मिल सकती है बड़ी राहत

    होर्मुज स्ट्रेट संकट खत्म होने के करीब! अमेरिका-ईरान समझौते से भारत समेत दुनिया को मिल सकती है बड़ी राहत


    नई दिल्ली। होरमुज़ जलसंधि में जारी तनाव अब कम होता नजर आ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम समझौते पर सहमति बन गई है, जिसके बाद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे फिर से शुरू हो सकती है। इससे भारत  समेत दुनिया भर को तेल और गैस संकट से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

    रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को चरणबद्ध तरीके से हटाएगा, जबकि ईरान बदले में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलेगा। माना जा रहा है कि आने वाले घंटों में वहां फंसे सैकड़ों जहाजों की आवाजाही शुरू हो सकती है।

    दुनिया भर में मचा था तेल और गैस संकट
    अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में पाबंदियां बढ़ा दी थीं। इसके कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी सप्लाई पर असर पड़ा। भारत समेत कई देशों में ऊर्जा संकट और महंगे ईंधन की चिंता बढ़ गई थी।होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई होती है।

    ट्रंप ने भी दिए समझौते के संकेत
    अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी हाल में संकेत दिए थे कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच वार्ता अच्छी रही है और संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है।

    फ्रांस ने भी की हस्तक्षेप की अपील
    इमैनुएल मैक्रों  ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से बातचीत के बाद सभी पक्षों से बिना शर्त नाकेबंदी हटाने की अपील की। फ्रांस ने समुद्री सुरक्षा और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए बहुराष्ट्रीय मिशन का भी सुझाव दिया है।

    परमाणु समझौते पर भी बन सकती है बात
    रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान युद्ध खत्म करने के साथ-साथ परमाणु संवर्धन और प्रतिबंधों को लेकर भी समझौते के करीब पहुंच गए हैं। अगर यह डील पूरी होती है तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बड़ी राहत मिल सकती है।

  • ईरान-अमेरिका तनाव के बीच फ्रांस की सक्रिय कूटनीति, क्या मैक्रों दिला पाएंगे राहत?

    ईरान-अमेरिका तनाव के बीच फ्रांस की सक्रिय कूटनीति, क्या मैक्रों दिला पाएंगे राहत?


    वाशिंगटन
    । मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब इमैनुएल मैक्रों ने शांति बहाली की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी है। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेश्कियन से अलग-अलग बातचीत कर गतिरोध तोड़ने की कोशिश की है।

    होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का केंद्र

    होर्मुज जलडमरूमध्य में बनी तनावपूर्ण स्थिति इस पूरे विवाद की मुख्य वजह है। अमेरिका द्वारा यहां नौसैनिक नाकाबंदी लगाए जाने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। इस बीच ईरान ने संकेत दिया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन शर्त यह है कि चर्चा अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में हो।

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  • ईरान की शर्तें और रुख

    ईरान ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पूर्ण युद्धविराम के लिए लेबनान में जारी शत्रुता को खत्म करना जरूरी होगा। तेहरान का मानना है कि यूरोप, खासकर फ्रांस, इस गतिरोध को खत्म करने में अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि इस्लामाबाद में हालिया वार्ता बेनतीजा रही, लेकिन ईरान ने आगे बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई है।

    मैक्रों का शांति फॉर्मूला

    मैक्रों ने दोनों नेताओं से बातचीत के बाद तीन अहम प्रस्ताव सामने रखे—

    क्षेत्रीय स्थिरता के लिए युद्धविराम का विस्तार, जिसमें लेबनान को भी शामिल किया जाए
    होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त और शुल्क के तुरंत खोला जाए
    फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में बहुपक्षीय मिशन बनाकर नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जाए

    फ्रांस और ब्रिटेन इस मुद्दे पर पेरिस में एक वीडियो कॉन्फ्रेंस की मेजबानी भी करने जा रहे हैं, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा होगी।

    ट्रंप का दावा—ईरान बातचीत को तैयार

    डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में दावा किया कि ईरान की ओर से बातचीत के संकेत मिले हैं और तेहरान समझौता करने को इच्छुक है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका का रुख सख्त बना रहेगा।

    क्या संभव है समाधान?

    विशेषज्ञों के मुताबिक, हालात बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी छोटी चूक से बड़ा संघर्ष हो सकता है। ऐसे में फ्रांस की मध्यस्थता अहम साबित हो सकती है, लेकिन अंतिम समाधान दोनों पक्षों की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस की पहल एक उम्मीद जरूर जगाती है, लेकिन शांति की राह अभी भी आसान नहीं दिख रही। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कूटनीति जीतती है या टकराव और गहराता है।

  • US-Iran संघर्ष के बीच PM मोदी ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से चर्चा, जानें किन मुद्दों पर हुई बात

    US-Iran संघर्ष के बीच PM मोदी ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से चर्चा, जानें किन मुद्दों पर हुई बात


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तेजी से बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष (US-Iran conflict) के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने गुरुवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (French President Emmanuel Macron) से टेलीफोन पर बातचीत की। इस बातचीत में पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति पर भारत और फ्रांस की साझा चिंताओं पर विस्तार से चर्चा हुई, साथ ही संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांति बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक पश्चिम एशिया के कई नेताओं से बात की है। भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता की बहाली के लिए कूटनीतिक प्रयासों को मजबूती से समर्थन दे रहा है, ताकि यह संघर्ष और व्यापक न हो सके।

    प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आज मैंने अपने मित्र राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बात की। हमने पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति पर अपनी साझा चिंताओं और संवाद एवं कूटनीति की ओर लौटने की आवश्यकता पर चर्चा की। हम क्षेत्र में शांति और स्थिरता की शीघ्र बहाली के लिए घनिष्ठ रूप से जुड़े रहेंगे और प्रयासों का समन्वय करेंगे।

    दरअसल, यह फोन कॉल ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व का संघर्ष तेजी से फैल रहा है और अब यह भारत के निकटवर्ती क्षेत्रों तक पहुंच गया है। बुधवार को श्रीलंका के तट से कुछ दूर अंतरराष्ट्रीय जल में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना को टॉरपीडो से नष्ट कर दिया। इस हमले में कम से कम 80 से अधिक नाविकों की मौत हो गई, जबकि श्रीलंका की नौसेना ने 32 लोगों को बचाया। जहाज में कुल 180 लोग सवार थे। बता दें कि यह ईरानी फ्रिगेट कुछ दिन पहले ही भारत में हुए अंतरराष्ट्रीय नौसेना अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद लौट रहा था।

    बता दें कि ईरान इजरायल और अमेरिका संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य हमलों से हुई, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों पर जवाबी हमलों की शुरूआत की, जिससे स्थिति और भयावह हो गई। पिछले कुछ दिनों में दोनों पक्षों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों का दौर जारी है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने श्रीलंका तट पर हुए हमले की कड़ी निंदा की और इसे ‘बिना किसी चेतावनी के अत्याचार’ करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस मिसाल पर गहरा अफसोस होगा।

  • ऋचा चड्ढा ने फ्रांस के राष्ट्रपति से मिलने पर ट्रोल;रने वालों को करारा जवाब दिया बोलीं प्लीज कुछ बेहतर करें

    ऋचा चड्ढा ने फ्रांस के राष्ट्रपति से मिलने पर ट्रोल;रने वालों को करारा जवाब दिया बोलीं प्लीज कुछ बेहतर करें


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की बेबाक एक्ट्रेस Richa Chadha ने सोशल मीडिया पर ट्रोल्स को करारा जवाब दिया है जिन्होंने हाल ही में इमैनुएल मैक्रों से उनकी मुलाकात पर नकारात्मक टिप्पणियाँ की थीं। ऋचा हमेशा ही अपने विचारों को स्पष्ट रूप से रखने के लिए जानी जाती हैं और इस बार भी उन्होंने बिना नाम लिए ट्रोलर्स को खरी-खोटी सुना दी।

    ऋचा चड्ढा हाल ही में मुंबई में एक इवेंट में फ्रांस के राष्ट्रपति से मिलीं जहां कई बॉलीवुड सेलेब्स भी मौजूद थे। मैक्रों ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीरें शेयर कीं और भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के कुछ कलाकारों को लेजेंड ऑफ इंडियन सिनेमा के रूप में संबोधित किया। ऋचा ने भी ये तस्वीरें अपने प्लेटफॉर्म पर साझा की थीं जिसके बाद कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी मौजूदगी और राय पर सवाल उठाए।

    ट्रोल्स की प्रतिक्रियाओं के बीच ऋचा ने इंस्टाग्राम पर स्पष्ट संदेश साझा किया और कहा अगर किसी को किसी और से मिलने का निमंत्रण मिलने पर जलन से लूज मोशन होने लगता है तो याद रखें कि ईर्ष्या ठहराव की पहली निशानी है। बेहतर करें। अपनी ग्रोथ विकास पर ध्यान दें और आप देखेंगे कि बाकी लोग मायने नहीं रखते। इस जवाब में उन्होंने ट्रोलर्स को यह संदेश दिया कि दूसरों की उपलब्धियों से परेशान होने के बजाय खुद को बेहतर बनाने पर फोकस करें।

    ऋचा ने अपने सोशल पोस्ट में श्रीमैक्रों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता भी जताई थी। उन्होंने लिखा था कि मिस्टर प्रेजिडेंट के साथ मुलाकात करना अच्छा अनुभव रहा और इंडिपेंडेंट सिनेमा के भविष्य की दिशा में राष्ट्रपति के इंटरेस्ट को सराहा था।  ऋचा ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में बताया कि यह मुलाकात फ्रांस और भारत के बीच सिनेमा और सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से थी। उनके अनुसार दोनों देशों के सिनेमा के बीच तालमेल से इंडिपेंडेंट फिल्म निर्माण और वैश्विक पहुंच को बढ़ावा मिल सकता है।

    कुछ ट्रोलर्स ने ऋचा की आलोचना उनके राजनीतिक विचारों और मुखर प्रवृत्ति के कारण भी की थी लेकिन एक्ट्रेस ने हर तरह की आलोचना का सामना अलग अंदाज में किया और साफ संदेश दिया कि नकारात्मकता और जलन दूसरों की सफलता को नहीं बदल सकती।  ऋचा चड्ढा की प्रोफेशनल लाइफ भी काफी सक्रिय रही है। वह आखिरी बार फिल्म Girls Will Be Girls में नजर आईं और उन्होंने हीरामंडी: द डायमंड बाजार जैसे प्रोजेक्ट्स में भी काम किया। अब वह आगामी फिल्म अभी तो पार्टी शुरू हुई है में भी दिखाई देंगी।