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  • सऊदी अरब-फ्रांस के बीच उच्चस्तरीय संवाद, ईरान-अमेरिका समझौते, होर्मुज संकट और क्षेत्रीय स्थिरता पर हुई विस्तृत चर्चा

    सऊदी अरब-फ्रांस के बीच उच्चस्तरीय संवाद, ईरान-अमेरिका समझौते, होर्मुज संकट और क्षेत्रीय स्थिरता पर हुई विस्तृत चर्चा

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लगातार बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच सऊदी अरब और फ्रांस ने क्षेत्रीय शांति तथा सुरक्षा को लेकर अपने समन्वय को और मजबूत करने के संकेत दिए हैं। इसी क्रम में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस एवं प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच टेलीफोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई, जिसमें क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के साथ-साथ दोनों देशों के साझा हितों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया ज्ञापन समझौते से जुड़े ताजा घटनाक्रम की समीक्षा की। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जारी कूटनीतिक प्रयासों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि तनाव कम करने के लिए संवाद और सहयोग की प्रक्रिया को लगातार आगे बढ़ाना आवश्यक है।

    वार्ता में समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी प्रमुख विषय रही। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय नौवहन की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि समुद्री व्यापार को किसी भी प्रकार के तनाव या टकराव से प्रभावित नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने क्षेत्रीय विवादों के समाधान के लिए सैन्य विकल्पों के बजाय कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता दोहराई।

    बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने सऊदी अरब और फ्रांस के द्विपक्षीय संबंधों की भी समीक्षा की। आर्थिक, रणनीतिक और राजनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की गई। इसके अलावा साझा वैश्विक चुनौतियों और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करते हुए भविष्य में सहयोग को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

    गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को हस्ताक्षरित ज्ञापन समझौते का उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करना और संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ना था। हालांकि समझौते के बावजूद दोनों देशों के बीच समय-समय पर तनावपूर्ण घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बनी हुई है।

    हालिया घटनाक्रमों के बीच अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच आगे की बातचीत को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों ने फिलहाल आपसी हमलों को रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े विवादों के समाधान के लिए कतर की राजधानी दोहा में वार्ता करने पर सहमति जताई है। पहले यह बैठक स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित थी, लेकिन क्षेत्र में बढ़े तनाव को देखते हुए इसका स्थान बदल दिया गया।

    सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्ष तकनीकी स्तर की वार्ताओं को जारी रखते हुए समुद्री मार्गों पर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब और फ्रांस के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुआ यह संवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रमुख देशों के बीच निरंतर कूटनीतिक संपर्क और सहयोग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। ऐसे प्रयास क्षेत्रीय तनाव कम करने और दीर्घकालिक शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • भारत की कला का वैश्विक प्रदर्शन पीएम मोदी ने फ्रांस में मैक्रों दंपति को दिए पारंपरिक हस्तशिल्प उपहार

    भारत की कला का वैश्विक प्रदर्शन पीएम मोदी ने फ्रांस में मैक्रों दंपति को दिए पारंपरिक हस्तशिल्प उपहार


    नई द‍िल्‍ली । फ्रांस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हस्तशिल्प परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजिट मैक्रों को विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों के माध्यम से भारत की कला, संस्कृति और पारंपरिक शिल्प कौशल की गहराई और विविधता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया गया।

    राष्ट्रपति मैक्रों को प्रधानमंत्री मोदी ने आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध हस्तनिर्मित कलमकारी महाभारत पेंटिंग भेंट की। यह पेंटिंग पारंपरिक कलमकारी शैली में तैयार की गई है और इसे बनाने में लगभग छह महीने का समय लगा। इस कलाकृति में महाभारत के विभिन्न प्रसंगों को अत्यंत सूक्ष्म और कलात्मक ढंग से दर्शाया गया है, जिसमें धर्म, न्याय, कर्तव्य और नैतिकता जैसे शाश्वत मूल्यों को उभारा गया है।

    इस पेंटिंग का सबसे महत्वपूर्ण संदेश भगवद्गीता से प्रेरित है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्म, आत्मसंयम और जीवन के कर्तव्य का मार्ग दिखाते हैं। यह कलाकृति केवल एक पौराणिक दृश्य प्रस्तुति नहीं बल्कि नैतिक नेतृत्व, मानवीय गरिमा और शांति जैसे सार्वभौमिक मूल्यों का प्रतीक भी मानी जाती है, जो आज की वैश्विक परिस्थितियों में भी प्रासंगिक हैं।

    वहीं, ब्रिजिट मैक्रों को प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना का पारंपरिक पोचमपल्ली सिल्क स्टोल उपहार स्वरूप भेंट किया। यह स्टोल हाथ से बुनी गई इकत रेजिस्ट-डाइंग तकनीक से तैयार किया जाता है और अपनी विशिष्ट ज्यामितीय और पुष्पीय डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध है। इसकी उत्कृष्ट बनावट और पारंपरिक शिल्पकला इसे भारतीय वस्त्र विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बनाती है।

    भारत की यह हस्तशिल्प परंपरा न केवल सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है बल्कि फैशन और कला की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान रखती है। फ्रांस जैसे देश, जहां कला और फैशन को विशेष महत्व दिया जाता है, वहां ऐसे उपहार सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आपसी संबंधों को और मजबूत करने का माध्यम बनते हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी अक्सर अपने विदेशी दौरों के दौरान विभिन्न वैश्विक नेताओं को भारत की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जुड़े उपहार भेंट करते हैं। इसका उद्देश्य भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना और विश्व समुदाय को भारतीय शिल्प परंपरा से परिचित कराना है।