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  • विकसित भारत के लिए मंत्रालयों में बेहतर तालमेल, स्वदेशी तकनीक और साइबर सुरक्षा पर जोर: प्रधानमंत्री मोदी

    विकसित भारत के लिए मंत्रालयों में बेहतर तालमेल, स्वदेशी तकनीक और साइबर सुरक्षा पर जोर: प्रधानमंत्री मोदी


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को केंद्र सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय बैठक में विकसित भारत के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने के लिए मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल, महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीक के विकास, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़ी गलत सूचनाओं का प्रभावी जवाब देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को हमेशा युवा सोच, गतिशील और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप काम करना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने अपने आवास पर बैठक में वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी से जुड़े मंत्रालयों के कामकाज और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा की।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी मंत्रालयों और विभागों को टीम भावना के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच बेहतर तालमेल होगा तो योजनाओं का लाभ लोगों तक तेजी और प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।

    उन्होंने कहा कि सरकार की हर नीति और फैसला आम नागरिक को ध्यान में रखकर होना चाहिए। लोगों का हित और उनकी अपेक्षाएं ही शासन का आधार होना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना भी जरूरी है। उन्होंने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देश की अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और लोगों के हित के लिए जरूरी है। इसके लिए नवाचार, नए ऊर्जा स्रोतों और क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि अच्छी व्यवस्था के लिए समय-समय पर सुधार जरूरी हैं। कार्यप्रणाली, कामकाज की संस्कृति और संस्थागत क्षमता में लगातार सुधार किया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा को भी मजबूत करना होगा। उन्होंने युवाओं, स्टार्टअप और नवाचार करने वाले उद्यमियों को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार की बड़ी पहलों के बारे में सही जानकारी लोगों तक समय पर पहुंचनी चाहिए, ताकि गलत सूचनाओं और अफवाहों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि भविष्य के उद्योगों की जरूरतों के अनुसार उद्योग जगत के सहयोग से नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को हमेशा नई सोच के साथ काम करना चाहिए और बदलती चुनौतियों के अनुसार खुद को लगातार तैयार रखना चाहिए।

    बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्रगति, प्राथमिकताओं, नई संभावनाओं और कामकाज में आने वाली चुनौतियों पर अपने विचार रखे। बैठक में कैबिनेट सचिव, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव, प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

    बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि बैठक में वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी जैसे अहम क्षेत्रों पर चर्चा हुई। उन्होंने नागरिक-केंद्रित शासन, बेहतर बुनियादी ढांचे, स्वदेशी तकनीक के विकास और युवाओं की अधिक भागीदारी पर जोर देने की बात कही।

  • PM मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री से की बात… ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर पर जोर

    PM मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री से की बात… ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर पर जोर


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को नीदरलैंड (Netherlands) के अपने समकक्ष रॉब जेटेन (PM Rob Jetten) से फोन पर बात की, जिसमें सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, व्यापार और रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें पीएम मोदी ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता को शीघ्र बहाल किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में मोदी ने कहा कि उन्होंने और जेटेन ने भारत-नीदरलैंड संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमने सेमीकंडक्टर, वृहद जल परियोजनाएं, ग्रीन हाइड्रोजन समेत विभिन्न क्षेत्रों में हमारी साझेदारी की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। मोदी ने कहा कि हमने पश्चिम एशिया के हालात पर भी विचार-विमर्श किया और क्षेत्र में शांति और स्थिरता शीघ्र बहाल किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    वहीं, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत के साथ हमारे संबंध और भी मजबूत हो रहे हैं। इस साल की शुरुआत में यूरोपीय संघ और भारत ने एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, तथा नीदरलैंड और भारत रक्षा, जल प्रबंधन, नवाचार और व्यापार सहित एक रणनीतिक साझेदारी विकसित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है, उसे देखते हुए, अब हमारे सहयोग को मजबूत करने का समय है।

    जेटेन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मैंने आज फोन पर बातचीत में इस विषय पर चर्चा की। मैं जल्द ही नीदरलैंड में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हूं, ताकि हम इन मुद्दों पर आगे और चर्चा कर सकें। जनवरी में प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय संघ के नेतृत्व के बीच हुई शिखर वार्ता के बाद भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप दिया।

  • राजधानी में युवा विधायकों का मंथन: 2047 के विकसित भारत का रोडमैप, अनुशासन-लोकतंत्र और जनसेवा पर जोर

    राजधानी में युवा विधायकों का मंथन: 2047 के विकसित भारत का रोडमैप, अनुशासन-लोकतंत्र और जनसेवा पर जोर


    भोपाल । राजधानी भोपाल में आयोजित युवा विधायक सम्मेलन में सोमवार को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के कुल 45 युवा जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह दो दिवसीय सम्मेलन न केवल अनुभव साझा करने का मंच बना, बल्कि लोकतंत्र, विकास और राजनीतिक मूल्यों पर गंभीर मंथन का अवसर भी साबित हुआ। सम्मेलन के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए राजनीति में अनुशासन, संवाद, पारदर्शिता और जनसेवा की अहमियत पर जोर दिया।

    युवा विधायकों को जिम्मेदार नेतृत्व का संदेश
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में युवा विधायकों को जिम्मेदार नेतृत्व का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति में सफलता केवल पद पाने से नहीं, बल्कि जनता के बीच निरंतर सक्रिय रहने और उनके विश्वास को बनाए रखने से मिलती है। उन्होंने विनम्रता को जनप्रतिनिधि का सबसे बड़ा गुण बताते हुए कहा कि अपने क्षेत्र की अच्छाइयों के साथ उसकी कमियों को समझना भी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है, क्योंकि देश 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। ऐसे समय में जनप्रतिनिधियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

    लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने पर जोर
    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने पर जोर देते हुए छात्र संघ चुनावों की बहाली की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि नेतृत्व की असली शुरुआत कॉलेज जीवन से होती है, जहां युवाओं में सिस्टम को समझने और उससे सवाल करने की ऊर्जा होती है। उनके अनुसार, यदि छात्र राजनीति को प्रोत्साहन मिलेगा तो देश में लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव जीतना ही सब कुछ नहीं है, बल्कि जनता के साथ दिल से जुड़ाव बनाना ज्यादा जरूरी है।

    आधुनिक राजनीति में सोशल मीडिया की भूमिका
    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आधुनिक राजनीति में सोशल मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया एक शक्तिशाली माध्यम है, जो सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से प्रभाव डाल सकता है। इसलिए जनप्रतिनिधियों को अपनी सोशल मीडिया टीम को जिम्मेदार और सकारात्मक बनाना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि आलोचनाओं से घबराने के बजाय सकारात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, क्योंकि अंततः जनता सच्चाई को पहचानती है।

    अन्‍य विधायकों का संबोधन
    सम्मेलन में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने संसदीय परंपराओं और संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन वह तार्किक और रचनात्मक होना चाहिए। उन्होंने युवा विधायकों को सलाह दी कि वे सदन में अधिक समय बिताएं, अनुभवी नेताओं के विचार सुनें और अध्ययन के आधार पर अपनी पहचान बनाएं।

    विभिन्न विधायकों ने अपने-अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। राजस्थान के विधायक गुरवीर सिंह ने खेलों के विकास पर जोर देते हुए कहा कि हर राज्य को कम से कम एक खेल को प्राथमिकता देनी चाहिए, जैसे ओडिशा ने हॉकी को अपनाया है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपने प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने अपने क्षेत्र में कई पुस्तकालय स्थापित किए हैं, जिससे युवाओं को पढ़ाई के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

    सतना के विधायक सिद्धार्थ कुशवाह ने लोकतंत्र की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जनता का विश्वास आज भी राजनीतिक व्यवस्था में बना हुआ है। उन्होंने कहा कि चुनावों में बढ़ते खर्च और अनैतिक तरीकों से लोकतंत्र की गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है। उनके अनुसार, 2047 तक देश को मजबूत बनाने के लिए राजनीतिक व्यवस्था में सुधार जरूरी है।

    नेपानगर की विधायक मंजू दादू ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र में ऐसे लोगों की पहचान करनी चाहिए, जिन्हें सबसे ज्यादा मदद की जरूरत है, और उनके साथ संवाद बढ़ाना चाहिए। इसी तरह, चाचौड़ा की विधायक प्रियंका मीणा ने कहा कि विधायक जनता और सरकार के बीच एक सेतु का काम करता है, इसलिए उसे दोनों के बीच प्रभावी संवाद सुनिश्चित करना चाहिए।

    भोपाल उत्तर के विधायक आतिफ अकील ने प्रशासनिक स्तर पर आने वाली चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारी जनप्रतिनिधियों को अपेक्षित सहयोग नहीं देते, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं। वहीं, छत्तीसगढ़ की विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने नक्सल समस्या को लेकर कहा कि अभी इसे पूरी तरह समाप्त घोषित करना जल्दबाजी होगी।

    सम्मेलन का समापन पारंपरिक लोक नृत्य और समूह फोटो के साथ हुआ। दो दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में कुल पांच सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में युवा विधायकों की भूमिका पर चर्चा हो रही है। 31 मार्च को दूसरे दिन ‘विकसित भारत 2047: युवा विधायकों के दायित्व एवं चुनौतियां’ विषय पर मंथन होगा।

  • भारत-अमेरिका रिश्तों को नई गति, टैरिफ में कटौती और सहयोग बढ़ाने पर जोर

    भारत-अमेरिका रिश्तों को नई गति, टैरिफ में कटौती और सहयोग बढ़ाने पर जोर


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच आर्थिक व रणनीतिक सहयोग को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (American President Donald Trump) से हुई हालिया फोन वार्ता को उपयोगी और सौहार्दपूर्ण बताया है। सोशल मीडिया पर साझा संदेश में उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान द्विपक्षीय व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।

    प्रधानमंत्री ने खुशी जताई कि “मेक इन इंडिया” उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18% किए जाने की घोषणा भारतीय निर्यात के लिए फायदेमंद होगी। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने वाला कदम बताया और इसके लिए अमेरिकी नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।

    संदेश में यह भी रेखांकित किया गया कि जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और प्रमुख लोकतंत्र साथ मिलकर काम करते हैं तो इससे जनता को लाभ और आपसी सहयोग के नए अवसर पैदा होते हैं। भारत ने वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रयासों में अमेरिका के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

    प्रधानमंत्री ने भविष्य में द्विपक्षीय साझेदारी को “अभूतपूर्व ऊंचाइयों” तक ले जाने की उम्मीद जताई। विश्लेषकों का मानना है कि टैरिफ में संभावित राहत और बढ़ता आर्थिक सहयोग आने वाले समय में व्यापार, तकनीक और निवेश के क्षेत्रों में नए अवसर खोल सकता है।