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  • भोपाल में डेला ग्रुप का 2250 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव, 930 विला और पांच सितारा रिसॉर्ट बनाने की योजना

    भोपाल में डेला ग्रुप का 2250 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव, 930 विला और पांच सितारा रिसॉर्ट बनाने की योजना

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में पर्यटन और रियल एस्टेट विकास को बढ़ावा देने के लिए डेला ग्रुप ने 2250 करोड़ रुपये की परियोजना का प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित योजना के तहत 220 एकड़ क्षेत्र में विला, ब्रांडेड आवास और पांच सितारा वन्यजीव पर्यटन रिसॉर्ट विकसित करने की तैयारी है। इस परियोजना को लेकर भोपाल में निवेश और रोजगार की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है। ‘कमाल का भोपाल’ अभियान के संस्थापक और क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है।

    डेला ग्रुप के संस्थापक जिमी मिस्त्री ने मध्यप्रदेश अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की थी। इस बैठक में राज्य में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसी दौरान प्रस्तावित ‘डेला रेसकोर्स भोपाल’ परियोजना की जानकारी सामने आई। इसका विकास मूल्य 2250 करोड़ रुपये बताया गया है। हालांकि, प्रस्तावित परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन से जुड़ी विस्तृत समय-सीमा की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    योजना के अनुसार, 220 एकड़ में विकसित होने वाली इस परियोजना में 930 विला बनाए जाने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त 128 ब्रांडेड आवास और 300 से अधिक कमरों वाला पांच सितारा वन्यजीव पर्यटन रिसॉर्ट भी विकसित करने की योजना है। परियोजना में घुड़सवारी और पोलो जैसी गतिविधियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने की परिकल्पना भी शामिल है। इन सुविधाओं के जरिए पर्यटन, आवास और मनोरंजन को एक ही परिसर में जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

    भोपाल के आसपास पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करने के लिए ‘डेला रातापानी रिजर्व टाउनशिप’ विकसित करने की योजना भी प्रस्ताव का हिस्सा है। इसे आधुनिक जीवनशैली, स्वास्थ्य और वेलनेस सुविधाओं के साथ जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए मास्टर प्लानिंग, आवागमन और पर्यटकों को विशेष अनुभव देने वाली सुविधाओं पर ध्यान देने की परिकल्पना की गई है। परियोजना की योजना में भोपाल के आसपास के प्राकृतिक परिवेश और पर्यटन क्षमता को उपयोग में लाने पर जोर दिया गया है।

    क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज मीक ने प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वस्तरीय पर्यटन और आवास सुविधाएं विकसित होने से पर्यटकों के भोपाल तथा आसपास के क्षेत्रों में अधिक समय तक रुकने की संभावना बढ़ सकती है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा मिलने की उम्मीद है। उनके अनुसार, पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ने से होटल, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी अवसर पैदा हो सकते हैं।

    मीक ने यह भी कहा कि भोपाल की खूबियों को निवेश, रोजगार और स्थानीय लोगों की समृद्धि से जोड़ना जरूरी है। ‘कमाल का भोपाल’ अभियान का उद्देश्य राजधानी की पहचान और संभावनाओं को सामने लाना तथा उन्हें आर्थिक विकास से जोड़ना है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय विकास विभाग और जिमी मिस्त्री की पहल की सराहना की।

    हालांकि, पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण होगा। मनोज मीक ने प्राकृतिक संसाधनों और जल-संपदा को सुरक्षित रखने के साथ स्थानीय लोगों की आर्थिक भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। प्रस्तावित परियोजना में निवेश, आवास और पर्यटन से जुड़ी कई सुविधाओं की योजना सामने आई है, लेकिन इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन निर्माण की प्रगति, पर्यावरणीय व्यवस्थाओं और स्थानीय स्तर पर पैदा होने वाले अवसरों के आधार पर किया जा सकेगा।

    भोपाल में प्रस्तावित यह परियोजना पर्यटन और रियल एस्टेट क्षेत्र में बड़े निवेश की संभावना सामने लाती है। यदि योजना आगे बढ़ती है, तो इससे राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार तथा विभिन्न स्थानीय कारोबारों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

  • MP के बालाघाट में 100 गांवों के विकास का अभियान शुरू, सड़क, पानी, शिक्षा और रोजगार पर रहेगा खास जोर..

    MP के बालाघाट में 100 गांवों के विकास का अभियान शुरू, सड़क, पानी, शिक्षा और रोजगार पर रहेगा खास जोर..

    मध्य प्रदेश: के बालाघाट जिले में लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे 100 गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है। राज्य सरकार की इस पहल के तहत गांवों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य ग्रामीणों की जरूरतों को समझकर ऐसे विकास कार्यों की योजना बनाना है, जिनसे स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं और रोजगार के अवसर मिल सकें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान में विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन अधिकारियों को अपने निर्धारित गांवों का दौरा कर ग्रामीणों से सीधे बातचीत करने, समस्याओं की जानकारी जुटाने और उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह पूरी प्रक्रिया 14 दिनों के भीतर पूरी की जानी है। इसके बाद गांवों की जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे।

    अभियान के लिए बालाघाट जिले के 100 गांवों को चार क्लस्टर में विभाजित किया गया है। इनमें बैहर, बिरसा, लांजी और किरनापुर विकासखंड के गांव शामिल हैं। अलग-अलग विभागों की टीमें अपने निर्धारित क्षेत्रों में पहुंचकर स्थानीय परिस्थितियों और विकास की संभावनाओं का आकलन कर रही हैं। ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर यह तय करने की कोशिश की जा रही है कि किन सुविधाओं की सबसे अधिक जरूरत है और किन कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

    26 अक्टूबर को अधिकारियों की टीमों ने विभिन्न गांवों का दौरा कर लोगों से चर्चा की। लांजी क्षेत्र में कट्टीपार, सतोना, बरगुड़ और देवरबेली गांवों में ग्रामीणों की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली गई। बैहर क्षेत्र की टीम दड़ेकसा, बिलालकसा, सोनगुड्डा, लूद, हिर्री, भर्री, सोनपुरी और बिठरी सहित कई गांवों में पहुंची। वहीं, किरनापुर क्षेत्र के सीतापार और बोरवन गांवों में भी स्थानीय लोगों से बातचीत कर विकास की जरूरतों का पता लगाया गया।

    28 अक्टूबर को कलेक्टर आदित्य सिंह ने लांजी विकासखंड की देवरबेली ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले बरगुड़-सतोना, केराडीह, सायर और संदूका गांवों का भ्रमण किया। जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी और अन्य विभागों की टीमों ने भी अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद किया। इसके अतिरिक्त जनजातीय कार्य, पशु चिकित्सा, मत्स्यपालन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी अपने क्षेत्रों में सुविधाओं की स्थिति की जानकारी जुटाई।

    अभियान में सड़क, पुल-पुलिया, पेयजल, सिंचाई और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, छात्रावासों और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता का भी आकलन किया जा रहा है। जहां सुविधाओं की कमी सामने आएगी, वहां जरूरत के अनुसार विकास कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। पात्र ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    ग्रामीणों की आजीविका मजबूत करना भी इस पहल का अहम हिस्सा है। इसके लिए कृषि, उद्यानिकी, डेयरी, पशुपालन और मत्स्यपालन जैसी गतिविधियों में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। प्रशासन स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ऐसे अवसरों की पहचान करना चाहता है, जिनसे ग्रामीण अपने क्षेत्र में ही आर्थिक गतिविधियों से जुड़ सकें।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इससे पहले बालाघाट जिले के 100 पिछड़े गांवों में विकास कार्यों के लिए लगभग 225 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी। अब जारी सर्वेक्षण और ग्रामीणों से प्राप्त सुझावों के आधार पर योजनाओं की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। अधिकारियों को 14 दिनों के भीतर भ्रमण और रिपोर्ट तैयार करने का काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इस अभियान का लक्ष्य गांवों में जरूरी सुविधाओं का विस्तार करना और स्थानीय लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आजीविका के बेहतर अवसर विकसित करना है।

  • मुरैना में 1500 करोड़ की ग्लास फैक्ट्री से रोजगार की उम्मीद, 2000 युवाओं को मिल सकता है काम, सीएम मोहन यादव ने की समीक्षा

    मुरैना में 1500 करोड़ की ग्लास फैक्ट्री से रोजगार की उम्मीद, 2000 युवाओं को मिल सकता है काम, सीएम मोहन यादव ने की समीक्षा

    मध्य प्रदेश। के मुरैना जिले में औद्योगिक निवेश और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। जिले में करीब 1500 करोड़ रुपये के निवेश से ग्लास फैक्ट्री स्थापित की जा रही है। इस परियोजना से लगभग 2000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुरैना के दौरे के दौरान विकास कार्यों और विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की। इस दौरान उद्योग, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

    ग्लास फैक्ट्री को जिले में निवेश और रोजगार की संभावनाओं से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है। हालांकि, इससे 2000 लोगों को रोजगार मिलने की बात फिलहाल एक संभावना है। वास्तविक रोजगार के अवसर परियोजना की प्रगति और संचालन से जुड़ी परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे। सरकार का जोर इस बात पर है कि जिले में उद्योगों का विस्तार होने के साथ स्थानीय युवाओं को भी काम के अवसर मिलें।

    मुख्यमंत्री ने उद्यमियों और संबंधित अधिकारियों के साथ हुई चर्चा में जिले में निवेश बढ़ाने और औद्योगिक इकाइयों के विस्तार पर जोर दिया। जानकारी के अनुसार, जिले में औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए जमीन आवंटित की गई है। इनमें से कुछ उद्योगों ने निर्धारित समय के अनुसार निर्माण कार्य पूरा कर उत्पादन भी शुरू कर दिया है। सरकार का उद्देश्य नए निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ औद्योगिक गतिविधियों को आगे बढ़ाना है।

    स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण की योजना पर भी जोर दिया गया। इसके तहत उद्यमियों और अधिकारियों को पहले से यह आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं कि आने वाले समय में उद्योगों को कितने कर्मचारियों की जरूरत होगी और उनके पास किस तरह का कौशल होना चाहिए। इस जानकारी के आधार पर युवाओं को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा सकती है, जिससे उन्हें स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नौकरियों के लिए तैयार किया जा सके।

    मुख्यमंत्री ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देना और रोजगार के अवसर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है। इसके अलावा चंबल एक्सप्रेसवे के आसपास आर्थिक कॉरिडोर विकसित करने की पहल पर भी चर्चा हुई। इस योजना के माध्यम से ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में उद्योग तथा कारोबार से संबंधित गतिविधियों को प्रोत्साहन देने की संभावना है।

    शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी मुरैना के लिए कई परियोजनाओं का उल्लेख किया गया। जिले में 75 करोड़ रुपये की लागत से आयुर्वेदिक कॉलेज बनाने की तैयारी है। इसके साथ निजी क्षेत्र में स्थापित नए मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण भी किया गया। इन परियोजनाओं का संबंध जिले में शैक्षणिक और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से है।

    खाद्य प्रसंस्करण और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने मुरैना में फूड पार्क विकसित करने की जरूरत बताई। इसका उद्देश्य कृषि उपज से खाद्य उत्पाद तैयार करने वाले उद्योगों को प्रोत्साहित करना है। वहीं, दुग्ध उत्पादन को गति देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड यानी एनडीडीबी की मदद से प्रयास किए जा रहे हैं।

    खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार राशि की भी घोषणा की गई। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को दो-दो लाख रुपये देने की बात कही गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के लिए एक-एक लाख रुपये की राशि घोषित की गई। राज्य स्तर के उत्कृष्ट खिलाड़ियों को भी पुरस्कृत किया जाएगा।

    दौरे के दौरान सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों की समीक्षा भी की गई। जहां आवश्यक समझा गया, वहां संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। कलेक्टरों से विधानसभा क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करने को भी कहा गया। इसके अलावा घड़ियाल अभयारण्य सहित जिले की पर्यटन संभावनाओं पर चर्चा हुई। मेडिकल टूरिज्म, वेलनेस सेंटर और धार्मिक पर्यटन के माध्यम से रोजगार के नए अवसर विकसित करने की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया गया।

  • भारत के सर्विसेज सेक्टर की गतिविधियां सितंबर में तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचीं, पीएमआई बढ़कर 55.2 रहा

    भारत के सर्विसेज सेक्टर की गतिविधियां सितंबर में तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचीं, पीएमआई बढ़कर 55.2 रहा

    नई दिल्ली ।भारत के सर्विसेज सेक्टर में सितंबर के दौरान गतिविधियों में तेजी देखने को मिली और पीएमआई तीन महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। सितंबर में सर्विसेज पीएमआई बढ़कर 55.2 रहा, जबकि अगस्त में यह 54.1 पर था। यह जून के बाद पीएमआई का सबसे ऊंचा स्तर है। आंकड़ों के मुताबिक, सेवा क्षेत्र में गतिविधियों को मजबूत घरेलू मांग और नए ऑर्डर्स में तेज बढ़ोतरी से समर्थन मिला।

    सितंबर में नए बिजनेस में पिछले तीन महीनों की तुलना में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। कंपनियों को डिजिटल समाधान, खाने-पीने की चीजों, इंश्योरेंस, लोन, सॉफ्टवेयर, ट्रांसपोर्टेशन और टूर-एंड-ट्रैवल जैसी सेवाओं के लिए ज्यादा मांग मिली। फाइनेंस, इंश्योरेंस और कंज्यूमर सर्विस सेक्टर में बिक्री में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे सेवा क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों को सितंबर में बेहतर गति मिली।

    सितंबर के दौरान भारतीय सेवाओं की अंतरराष्ट्रीय मांग में भी सुधार दर्ज किया गया। कंपनियों ने जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, यूके और अमेरिका से बेहतर कारोबार मिलने की जानकारी दी। हालांकि नए निर्यात बिजनेस में बढ़ोतरी की रफ्तार अगस्त की तुलना में धीमी रही। इसके बावजूद बेहतर ऑर्डर बुक और पाइपलाइन में मौजूद प्रोजेक्ट्स ने कंपनियों को कारोबार बढ़ाने और अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती करने के लिए प्रोत्साहित किया।

    रोजगार के मोर्चे पर भी सेवा क्षेत्र में बढ़ोतरी दर्ज की गई। सितंबर में नौकरियों में वृद्धि की रफ्तार ठीक-ठाक रही, हालांकि रोजगार पैदा होने की दर अगस्त के मुकाबले थोड़ी कम रही। कंपनियों के पास मौजूद ऑर्डर्स और आगे आने वाले प्रोजेक्ट्स के कारण कर्मचारियों की जरूरत बनी रही। इस तरह नए कारोबार में बढ़ोतरी के साथ रोजगार में भी वृद्धि का सिलसिला जारी रहा।

    इनपुट लागत के मोर्चे पर सेवा कंपनियों को कुछ राहत मिली। सितंबर में इनपुट कीमतों में महंगाई नवंबर 2025 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई। लागत दबाव कम होने से सर्विस प्रोवाइडर्स पर अपनी बिक्री कीमतें बढ़ाने की जरूरत भी कम हुई। घरेलू मांग में मजबूती के बीच लागत दबाव में कमी ने सेवा कंपनियों के लिए कारोबारी परिस्थितियों को कुछ बेहतर बनाया।

    भारत में सेवा क्षेत्र की मजबूती को लेकर अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि पीएमआई सर्वेक्षण से घरेलू मांग बढ़ने के कारण सर्विस सेक्टर में लगातार सुधार का संकेत मिलता है। उनके मुताबिक, निर्यात कारोबार में भी वृद्धि जारी रही, हालांकि उसकी रफ्तार धीमी हुई। उन्होंने यह भी कहा कि सितंबर में इनपुट लागत का दबाव कम रहने से सेवा प्रदाताओं को बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की जरूरत कम पड़ी।

    हालांकि मासिक स्तर पर सितंबर का प्रदर्शन बेहतर रहा, लेकिन जुलाई-सितंबर तिमाही में सर्विसेज पीएमआई का औसत पिछली तिमाही की तुलना में कम रहा। इस तिमाही ने मार्च 2022 को समाप्त हुई तिमाही के बाद से अपना सबसे कमजोर तिमाही प्रदर्शन दर्ज किया। दूसरी ओर, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों को शामिल करने वाला एचएसबीसी इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स अगस्त के 54.3 से बढ़कर सितंबर में 55.9 हो गया। इससे सितंबर में निजी क्षेत्र की कुल कारोबारी गतिविधियों में बढ़ोतरी का संकेत मिला।

  • लाल परेड मैदान में कल 20 हजार से ज्यादा युवाओं से संवाद करेंगे CM मोहन यादव, जुबिन नौटियाल का कंसर्ट भी

    लाल परेड मैदान में कल 20 हजार से ज्यादा युवाओं से संवाद करेंगे CM मोहन यादव, जुबिन नौटियाल का कंसर्ट भी

    भोपाल ।  सीएम यूथ कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन छह अक्टूबर को भोपाल के लाल परेड मैदान में किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 हजार से अधिक युवाओं से सीधा संवाद करेंगे। उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में युवा शक्ति से जुड़े विषयों पर संवाद और मार्गदर्शन के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। कार्यक्रम में पार्श्व गायक जुबिन नौटियाल और मुंबई के कबीर कैफे की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। आयोजन को लेकर उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार ने लाल परेड मैदान पहुंचकर कार्यक्रम स्थल, प्रदर्शनी कक्षों और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

    निरीक्षण के दौरान अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन, आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कॉन्क्लेव में युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष फोकस किया जाएगा। इसमें रोजगार, कौशल विकास, स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार, अनुसंधान और उभरती प्रौद्योगिकियों को प्रमुखता दी जाएगी। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को शिक्षा और रोजगार की बदलती आवश्यकताओं के साथ उपलब्ध संभावनाओं की जानकारी देने की व्यवस्था की गई है।

    कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों और नवोदित उद्यमों की सहभागिता रहेगी। इनके माध्यम से युवाओं को रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में बदलती जरूरतों तथा उपलब्ध अवसरों से परिचित कराया जाएगा। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही युवा प्रतिभागियों के लिए सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया गया है, जिसमें जुबिन नौटियाल और कबीर कैफे की प्रस्तुतियां शामिल रहेंगी।

    आयोजन में 17 शासकीय विभागों और विभिन्न संस्थाओं की सहभागिता रहेगी। उच्च शिक्षा, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, तकनीकी शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, श्रम, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, परिवहन, आयुष तथा पुलिस एवं साइबर सुरक्षा से जुड़े विभाग इसमें शामिल होंगे। सभी विभाग अपने-अपने क्षेत्र से संबंधित योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी युवाओं को देंगे। इस तरह कॉन्क्लेव में युवाओं के लिए रोजगार, कौशल, उद्यमिता, नवाचार और तकनीक से जुड़े विषयों के साथ विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी।

  • सितंबर में भारत की निजी अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, कंपोजिट पीएमआई बढ़कर 56.5 पर पहुंचा

    सितंबर में भारत की निजी अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, कंपोजिट पीएमआई बढ़कर 56.5 पर पहुंचा

    नई दिल्ली ।भारत के निजी क्षेत्र में सितंबर के दौरान आर्थिक गतिविधियों में मजबूती देखने को मिली है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में बेहतर प्रदर्शन के चलते कंपोजिट पीएमआई बढ़कर 56.5 पर पहुंच गया। अगस्त में यह आंकड़ा 54.3 था। सितंबर का स्तर जून के बाद निजी क्षेत्र की गतिविधियों में सबसे तेज विस्तार को दर्शाता है।

    एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट पीएमआई में देश के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों की गतिविधियों को शामिल किया जाता है। सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, दोनों क्षेत्रों की कंपनियों ने कारोबार में विस्तार दर्ज किया। नए ऑर्डर और रोजगार में भी बढ़ोतरी हुई, जबकि महंगाई का दबाव कम होने और कारोबारी भरोसे में सुधार के संकेत मिले।

    आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियां अपने दीर्घकालिक औसत से ऊपर पहुंच गईं। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की मजबूती ने संयुक्त गतिविधियों की रफ्तार बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान उत्पादन और घरेलू नए ऑर्डर में तेज वृद्धि दर्ज की गई।

    सितंबर में कंपनियों के कुल नए कारोबार में भी मजबूत बढ़ोतरी हुई। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों में मांग बढ़ी, लेकिन सामान बनाने वाली कंपनियों में इसका असर ज्यादा स्पष्ट रहा। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की बिक्री में वृद्धि सात महीनों के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई।

    सर्विस सेक्टर की कंपनियों ने नए ऑर्डर हासिल करने में मार्केटिंग गतिविधियों को उपयोगी बताया। सर्वेक्षण के गुणात्मक हिस्से में प्रॉपर्टी सेवाओं, परिवहन सेवाओं और नई यात्रा बुकिंग से जुड़ी मांग में बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया।

    मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी कई उत्पादों की मांग बढ़ने की जानकारी सामने आई। कंपनियों ने एल्युमीनियम उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक सामान, खाद्य एवं पेय पदार्थों और फार्मास्युटिकल उत्पादों के साथ नए मॉडलों की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की।

    सितंबर के दौरान रोजगार के मोर्चे पर भी सकारात्मक गतिविधि देखने को मिली। कंपनियों ने उत्पादन और नए ऑर्डर में लगातार वृद्धि के बीच अपनी स्टाफिंग क्षमता बढ़ाई। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों में नई नौकरियां पैदा हुईं। दोनों क्षेत्रों में रोजगार विस्तार की दर लगभग समान रही।

    आर्थिक गतिविधियों में तेजी के साथ कंपनियों ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इनपुट खरीद भी बढ़ाई। तैयार माल के स्टॉक से जुड़े सूचकांक में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह सूचकांक करीब साढ़े 11 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

    हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए लागत से जुड़ा दबाव बढ़ने के संकेत भी मिले। इनपुट कीमतों में बढ़ोतरी के बीच कंपनियों ने अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए आउटपुट की कीमतों में भी वृद्धि की। इससे उत्पादों की कीमतों पर महंगाई का दबाव बढ़ने की स्थिति बनी।

    आर्थिक गतिविधियों के मजबूत रहने के बावजूद कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर मौजूद अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियां बढ़ाईं। मध्य पूर्व में बढ़े तनाव के बीच कंपनियों ने संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए बफर तैयार करने पर ध्यान दिया।

    सितंबर के पीएमआई आंकड़ों से निजी क्षेत्र में उत्पादन, नए कारोबार और रोजगार के स्तर पर व्यापक सुधार के संकेत मिले हैं। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों की गतिविधियों में विस्तार के चलते संयुक्त पीएमआई अगस्त के मुकाबले काफी ऊपर रहा और जून के बाद सबसे मजबूत स्तर दर्ज किया गया।

  • MP में युवाओं के रोजगार पर सरकार का बड़ा फोकस, IT पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस से बढ़ेंगे शिक्षा और कौशल के अवसर

    MP में युवाओं के रोजगार पर सरकार का बड़ा फोकस, IT पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस से बढ़ेंगे शिक्षा और कौशल के अवसर

    मध्यप्रदेश: में युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर बढ़ाने को लेकर सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की बात कही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में युवाओं को बेहतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है, जिनसे शिक्षा, तकनीक, कौशल और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।

    मुख्यमंत्री के मुताबिक IT पार्क और इंजीनियरिंग कैंपस के माध्यम से युवाओं को केवल शिक्षा प्राप्त करने तक सीमित अवसर नहीं मिलेंगे, बल्कि उन्हें रोजगार और कौशल विकास से जुड़े नए विकल्प भी उपलब्ध होंगे। तकनीकी क्षेत्र के विस्तार के साथ युवाओं को बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में तकनीक, नवाचार और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक आधार तैयार किया जा रहा है। IT क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों का उद्देश्य रोजगारपरक प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना और युवाओं को आधुनिक तकनीकी अवसरों से जोड़ना है। इससे शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों और रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को नए क्षेत्रों में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने इंदौर और भोपाल के विकास को लेकर भी सरकार की योजना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों शहरों को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस दिशा में सुनियोजित शहरी विकास, बेहतर सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    इंदौर और भोपाल को बड़े शहरी और आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित करने का असर रोजगार के अवसरों पर भी पड़ सकता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन शहरों में नई तकनीक, नवाचार और उद्योगों को बढ़ावा मिलने से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके साथ ही प्रदेश के समग्र विकास को भी गति मिलेगी।

    प्रदेश में तकनीकी और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ IT क्षेत्र को भी महत्व दिया जा रहा है। तकनीकी बुनियादी ढांचे और रोजगारपरक कौशल को बढ़ाने से युवाओं के लिए नए अवसर तैयार करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इससे कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़े अवसरों के विस्तार की संभावना बढ़ेगी।

    सरकार का जोर विकास को केवल बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति को गति देने पर भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में विकास और प्रगति के लिए सरकार प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इसी क्रम में उद्योग, तकनीक, शिक्षा और कौशल विकास को रोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में प्रगति के लिए काम कर रही है। साथ ही आगामी सिंहस्थ की तैयारियों को भी गति दी जा रही है और उससे जुड़े आवश्यक विकास कार्यों को तेजी से किए जाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    इन पहलों के जरिए सरकार का लक्ष्य युवाओं को शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। IT पार्क, इंजीनियरिंग कैंपस, औद्योगिक गतिविधियों और मेट्रोपॉलिटन शहरों के विकास को रोजगार और आर्थिक विकास से जोड़कर आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

  • अमेरिका में विदेशी छात्रों के OPT पर 1 लाख डॉलर फीस का प्रस्ताव, भारतीय छात्रों के लिए बढ़ सकती है नौकरी की लागत

    अमेरिका में विदेशी छात्रों के OPT पर 1 लाख डॉलर फीस का प्रस्ताव, भारतीय छात्रों के लिए बढ़ सकती है नौकरी की लागत

    नई दिल्ली ।अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी का रास्ता महंगा होने की संभावना है। ट्रंप प्रशासन ने Optional Practical Training यानी OPT से संबंधित करीब 1 लाख डॉलर की फीस लगाने का प्रस्ताव रखा है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 96 लाख रुपये बताई गई है। प्रस्ताव को व्हाइट हाउस की मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे आगे नियम के रूप में लाया जा सकता है।

    OPT अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद सीमित अवधि तक काम करने की अनुमति देता है। इसका उद्देश्य छात्रों को उनके अध्ययन से जुड़े क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर देना है। आम तौर पर OPT के तहत छात्र 12 महीने तक काम कर सकते हैं। STEM यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स से जुड़े पाठ्यक्रमों के छात्रों को इसके अलावा 24 महीने का अतिरिक्त समय मिल सकता है। इस तरह पात्र छात्रों को पढ़ाई के बाद कुल तीन साल तक काम करने का अवसर मिल सकता है।

    प्रस्तावित बदलाव के तहत OPT से जुड़ी फीस 1 लाख डॉलर निर्धारित करने की बात सामने आई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इतनी बड़ी रकम का भुगतान कौन करेगा। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के प्रस्ताव में इस जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं होने की बात कही गई है।

    फीस का भुगतान छात्र को करना होगा या उसे नौकरी देने वाली कंपनी को, यह फिलहाल तय नहीं है। कुछ कानूनी जानकारों के मुताबिक, OPT वाले विदेशी छात्र को नौकरी देने वाली कंपनी पर यह खर्च डाला जा सकता है। वहीं, इस बात को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं कि यदि भुगतान की जिम्मेदारी विश्वविद्यालयों पर आती है तो किसी दूसरी कंपनी में काम करने वाले छात्र के लिए कॉलेज इतनी बड़ी राशि क्यों वहन करेगा।

    प्रस्तावित फीस भारतीय छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद OPT के जरिए नौकरी करना वहां काम का अनुभव हासिल करने का एक प्रमुख रास्ता है। इसी अवधि में कुछ छात्रों को आगे चलकर नियोक्ता की मदद से H-1B वीजा के लिए अवसर मिल सकता है।

    यदि प्रस्तावित 1 लाख डॉलर की राशि छात्रों को स्वयं देनी पड़ती है, तो पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में नौकरी शुरू करना उनके लिए काफी महंगा हो सकता है। यदि इसका भुगतान कंपनियों या विश्वविद्यालयों को करना पड़ता है, तो इसका असर विदेशी छात्रों की भर्ती और रोजगार के अवसरों पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

    प्रस्ताव का असर केवल छात्रों तक सीमित रहने की बात भी सामने आई है। यदि विश्वविद्यालयों पर बड़ी वित्तीय जिम्मेदारी आती है, तो कुछ संस्थान विदेशी छात्रों की संख्या कम करने पर विचार कर सकते हैं। इससे अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए उपलब्ध अध्ययन विकल्पों पर असर पड़ सकता है। इसी तरह कंपनियों को भी विदेशी छात्रों से मिलने वाले प्रशिक्षित प्रतिभाशाली कर्मचारियों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले साल करीब 3 लाख विदेशी छात्रों के पास OPT के जरिए अमेरिका में नौकरी करने की अनुमति थी। ऐसे में प्रस्तावित फीस का दायरा बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंच सकता है। फिलहाल प्रस्ताव से जुड़े प्रमुख सवालों में यह शामिल है कि 1 लाख डॉलर की फीस का भुगतान कौन करेगा और अंतिम नियम लागू होने पर उसकी वास्तविक शर्तें क्या होंगी।

  • दुबई में AIM-2026 के मंच से सीएम मोहन यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश आने और रोजगार बढ़ाने का दिया निमंत्रण

    दुबई में AIM-2026 के मंच से सीएम मोहन यादव ने निवेशकों को मध्यप्रदेश आने और रोजगार बढ़ाने का दिया निमंत्रण

    मध्यप्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 7 सितंबर को दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित एआईएम कांग्रेस-2026 में भाग लिया। Annual Investment Meeting के इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं और रोजगार के अवसरों को लेकर निवेशकों से संवाद किया। उन्होंने भोपाल में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में शामिल होने के लिए निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया।

    एआईएम कांग्रेस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश और कारोबारी अवसरों के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। कार्यक्रम में 180 से अधिक देशों के करीब 20 हजार प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी दी गई। इसमें विभिन्न देशों की सरकारों के साथ बड़े निवेशक, कंपनियां और सोवरिन वेल्थ फंड्स निवेश से जुड़े अवसरों पर चर्चा कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने दुबई प्रवास के दौरान मध्यप्रदेश के स्थानीय उत्पादों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार के सामने रखा। बिजनेस बे स्थित ताज दुबई में आयोजित वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट और भौगोलिक संकेतक उत्पादों की प्रदर्शनी का उन्होंने उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी के जरिए राज्य की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की संभावनाएं सामने आईं।

    प्रदर्शनी में बैतूल का बेल मेटल क्राफ्ट, अशोकनगर की चंदेरी साड़ी, खरगोन के महेश्वर की महेश्वरी साड़ी, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, भोपाल की जरी-जरदोजी और ग्वालियर का कारपेट प्रदर्शित किया गया। इन उत्पादों के जरिए मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के साथ स्थानीय कारीगरों की उत्पादन क्षमता और निर्यात की संभावनाओं को भी सामने रखा गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद अहमद अल यामाही से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश, कृषि, पर्यटन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अरब देशों के निवेशकों को मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा, औषधि निर्माण, चिकित्सा उपकरण, वस्त्र, लॉजिस्टिक्स, उन्नत विनिर्माण और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़े अवसरों की जानकारी दी।

    बैठक के दौरान अरब व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल को मध्यप्रदेश आने और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में भाग लेने का निमंत्रण भी दिया गया। राज्य सरकार की कोशिश है कि अंतरराष्ट्रीय निवेश को मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास, स्थानीय कारोबार और रोजगार सृजन से जोड़ा जाए।

    दुबई यात्रा के दौरान कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश की संभावनाओं को महत्वपूर्ण बताया गया। संयुक्त अरब अमीरात खाद्य जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे बाजार में मध्यप्रदेश अपने कृषि उत्पादों और प्रसंस्कृत खाद्य सामग्री के लिए संभावित अवसर तलाश सकता है।

    आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार मध्यप्रदेश दाल उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है। राज्य अनाज उत्पादन में दूसरे स्थान पर है और देश के कुल अनाज उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 13.04 प्रतिशत बताई गई है। मक्का उत्पादन में मध्यप्रदेश पहले और गेहूं उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। गेहूं में राज्य की हिस्सेदारी 20.78 प्रतिशत बताई गई है।

    मध्यप्रदेश सोयाबीन उत्पादन के लिए भी देश में प्रमुख राज्य है और राज्य को ‘सोया प्रदेश’ के रूप में पहचान मिली है। दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कृषि उत्पादों की मांग को देखते हुए खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, भंडारण, ग्रेडिंग और लॉजिस्टिक्स में निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

    मुख्यमंत्री की इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य निवेश आकर्षित करने के साथ मध्यप्रदेश के उत्पादों और कारोबारी क्षमताओं को वैश्विक बाजार से जोड़ना है। सरकार को उम्मीद है कि नए निवेश से उद्योगों का विस्तार होगा, स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। इसके साथ ही किसानों और कारीगरों को भी बड़े बाजारों से जुड़ने का लाभ मिल सकता है।

  • दिल्ली में स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत करने की तैयारी, स्कूलों और कॉलेजों में इनक्यूबेशन केंद्रों के विस्तार पर सरकार का जोर

    दिल्ली में स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत करने की तैयारी, स्कूलों और कॉलेजों में इनक्यूबेशन केंद्रों के विस्तार पर सरकार का जोर

    नई दिल्ली ।दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी को देश के प्रमुख स्टार्टअप केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में स्टार्टअप और इनक्यूबेशन नीति 2026 के क्रियान्वयन को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने रविवार को स्टार्टअप संस्थापकों, उद्यमियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में नीति को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और उद्यमियों के अनुकूल बनाने को लेकर सुझाव लिए गए।

    सरकार की योजना दिल्ली में ऐसा स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने की है, जिसमें युवाओं को अपने कारोबारी विचारों को विकसित करने के साथ शुरुआती स्तर पर आवश्यक मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग मिल सके। इसके लिए विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों में स्टार्टअप से संबंधित बुनियादी ढांचा विकसित करने तथा इनक्यूबेशन केंद्र स्थापित करने की दिशा में रोडमैप तैयार किया गया है।

    मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नई कंपनियों की संख्या बढ़ाना नहीं है। इसके साथ युवाओं के लिए नवाचार, उद्यमिता और रोजगार के अवसर तैयार करना भी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उद्योग जगत से मिले सुझावों को नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और जमीनी जरूरतों के अनुरूप व्यवस्था विकसित करने में उपयोगी माना जा रहा है।

    शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बताया कि दिल्ली सरकार अपने कार्यकाल के दौरान 10 हजार से अधिक स्टार्टअप को समर्थन और प्रोत्साहन देने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। इसके माध्यम से युवाओं के लिए चार लाख से अधिक रोजगार अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मानना है कि स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा मिलने से रोजगार के साथ नवाचार आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

    बैठक में शामिल स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने नीति निर्माण में उद्यमियों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। जिप इलेक्ट्रिक के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आकाश गुप्ता ने कहा कि नए संस्थापकों को मार्गदर्शन और इनक्यूबेशन सहायता उपलब्ध कराने से युवाओं को अपने व्यावसायिक विचारों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कॉलेजों में पढ़ने वाले युवाओं के लिए ऐसी सुविधाओं को विशेष रूप से उपयोगी बताया।

    एस्ट्रोटॉक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत गुप्ता ने भी सरकार द्वारा स्टार्टअप संस्थापकों से सीधे सुझाव लेने की प्रक्रिया की सराहना की। उनके अनुसार, कारोबार से जुड़े लोगों के अनुभवों को नीति निर्माण में शामिल करने से सरकारी योजनाओं को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सकता है। उन्होंने रोजगार सृजन को आर्थिक विकास से जोड़ते हुए स्टार्टअप क्षेत्र को शुरुआती स्तर पर सहयोग देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    कैशकरो और अर्नकरो की सह-संस्थापक स्वाति भार्गवा ने कहा कि नीति निर्माण में वास्तविक उद्यमियों की भागीदारी से उनकी चुनौतियों और जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। इससे नीतियों को जमीन पर लागू करने में भी मदद मिल सकती है।

    दिल्ली सरकार की योजना में शिक्षा संस्थानों को स्टार्टअप गतिविधियों से जोड़ना अहम है। स्कूलों और कॉलेजों में इनक्यूबेशन सुविधाएं विकसित होने से विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर पर उद्यमिता की जानकारी और अपने विचारों पर काम करने का अवसर मिल सकता है। इससे नए संस्थापकों के लिए मार्गदर्शन और नेटवर्किंग का आधार भी तैयार होगा।

    10 हजार स्टार्टअप और चार लाख से अधिक रोजगार का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकारी तंत्र और उद्योग जगत के बीच निरंतर समन्वय जरूरी होगा। वित्तीय सहायता, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, बुनियादी ढांचा और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाओं को मजबूत करना इस नीति की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। दिल्ली सरकार की पहल का उद्देश्य आने वाले वर्षों में राजधानी को नवाचार और उद्यमिता के लिए मजबूत केंद्र के रूप में विकसित करना है।