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  • इंदौर विकास की नई रफ्तार, 100 से ज्यादा अतिक्रमण हटाकर चौड़ी होगी प्रमुख सड़क

    इंदौर विकास की नई रफ्तार, 100 से ज्यादा अतिक्रमण हटाकर चौड़ी होगी प्रमुख सड़क

    इंदौर शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने और यातायात व्यवस्था को अधिक सुचारु बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण सड़क विस्तार योजना पर काम तेज कर दिया गया है। मधु मिलन से छावनी को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग को अब 60 फीट चौड़ा करने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत सड़क किनारे बने अवैध निर्माणों को हटाने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है।

    यह मार्ग शहर के व्यस्ततम इलाकों में से एक माना जाता है, जहां दिनभर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। समय के साथ बढ़ते अतिक्रमण और सीमित सड़क चौड़ाई के कारण यहां लगातार जाम की स्थिति उत्पन्न होती रही है, जिससे आम नागरिकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए अब प्रशासन ने सख्त कदम उठाने की तैयारी की है।

    योजना के अनुसार इस पूरे मार्ग पर मौजूद 100 से अधिक बाधक संरचनाओं को हटाया जाएगा। इसके लिए संबंधित क्षेत्र के लोगों को पहले ही सूचित किया जा चुका है और उन्हें अपने स्तर पर अतिक्रमण हटाने के लिए समय दिया गया है। इसके बाद भी यदि कोई निर्माण नहीं हटाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें हटाया जाएगा।

    प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर और सुरक्षित बनाना है। इसी को ध्यान में रखते हुए लोगों से सहयोग की अपील की गई है, ताकि इस कार्य को बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके। कई स्थानीय निवासी इस पहल के प्रति सकारात्मक रुख दिखा रहे हैं और स्वेच्छा से अपने निर्माण हटाने पर सहमत भी हुए हैं।

    इस सड़क को शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह कई प्रमुख इलाकों को आपस में जोड़ती है। बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या में वृद्धि के कारण इस मार्ग पर दबाव लगातार बढ़ता गया, जिससे चौड़ीकरण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। अब इस योजना को प्राथमिकता देते हुए इसे मास्टर प्लान के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है।

    इस परियोजना का उद्देश्य केवल सड़क को चौड़ा करना ही नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में शहर की बढ़ती आबादी और यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक स्थायी समाधान तैयार करना भी है। पहले भी इस मार्ग के विस्तार की योजना बनाई गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से वह आगे नहीं बढ़ पाई थी। अब एक बार फिर इस कार्य को तेजी से पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं।

    स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस सड़क के विस्तार से न केवल ट्रैफिक जाम की समस्या में कमी आएगी, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में विकास की गति भी तेज होगी। साथ ही, आवागमन आसान होने से शहर के अन्य हिस्सों तक पहुंच भी सुगम हो जाएगी।

    फिलहाल प्रशासन की नजर इस पूरे अभियान पर है और इसे तय समयसीमा में पूरा करने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही इस क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिससे इंदौर की यातायात व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

  • सिंहस्थ 2028 की तैयारी: उज्जैन में शंकराचार्य मठ की तीन मंजिला इमारत पर चला बुलडोजर, अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई

    सिंहस्थ 2028 की तैयारी: उज्जैन में शंकराचार्य मठ की तीन मंजिला इमारत पर चला बुलडोजर, अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई


    उज्जैन । उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर नगर निगम ने व्यापक अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू कर दिया है। बुधवार को जोन क्रमांक 03 क्षेत्र में नृसिंह घाट से लालपुल ब्रिज मार्ग तक 2016 के बाद बने पक्के निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की गई। निगम अमले ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया। प्रशासन का कहना है कि सिंहस्थ मेले के दौरान साधु संतों के डेरों टेंट व्यवस्था और श्रद्धालुओं की पार्किंग के लिए पर्याप्त स्थान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

    कार्रवाई के दौरान नर्मदा घाट क्षेत्र स्थित शंकराचार्य मठ में पुण्यानंद गिरी महाराज के आश्रम पर भी बुलडोजर चला। यहां 54 कमरों का तीन मंजिला भवन निर्मित किया गया था जिसमें एसी और नॉन एसी कमरे उपलब्ध थे। प्रशासन के अनुसार इस भवन में अवैध रूप से होटल का संचालन किया जा रहा था। करीब 10 से 15 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बने इस स्थायी ढांचे को नगर निगम की टीम ने ध्वस्त करना शुरू किया।

    इसी क्रम में नरसिंह घाट रोड पर लगभग 60×80 फीट क्षेत्र में बने माधवानंद आश्रम को हटाया गया। साथ ही करीब 80×150 फीट में निर्मित कलोता समाज की धर्मशाला पर भी कार्रवाई की गई। बागली समाज सहित अन्य स्थानों पर बने अवैध निर्माणों को भी चिह्नित कर हटाया जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सिंहस्थ क्षेत्र में 2016 के बाद बने सभी स्थायी निर्माणों की सूची तैयार कर ली गई है और नियमों के विरुद्ध खड़े किए गए ढांचों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।

    नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने कहा कि सिंहस्थ क्षेत्र में किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद यदि निर्माण किए गए हैं तो वे नियमों का उल्लंघन हैं और उन्हें हटाया जाना अनिवार्य है। अपर आयुक्त संतोष टैगोर ने बताया कि जिला प्रशासन से प्राप्त सूची के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। सिंहस्थ मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं और साधु संतों की आवाजाही रहती है इसलिए सुरक्षा यातायात और व्यवस्था बनाए रखने के लिए खुला क्षेत्र आवश्यक है।

    प्रशासन के अनुसार सिंहस्थ क्षेत्र लगभग 180 हेक्टेयर में फैला हुआ है और इस पूरे क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी विशेष संस्था या व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि मेला व्यवस्था को सुचारु और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। सिंहस्थ 2028 को लेकर शासन प्रशासन पहले से ही तैयारियों में जुटा है और अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जा रहा है। आने वाले दिनों में अन्य चिन्हित स्थलों पर भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।