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  • दो दिन में 97 लाख से ज्यादा LPG सिलेंडर की डिलीवरी, ऑनलाइन बुकिंग 99% तक पहुंची: सरकार

    दो दिन में 97 लाख से ज्यादा LPG सिलेंडर की डिलीवरी, ऑनलाइन बुकिंग 99% तक पहुंची: सरकार


    नई दिल्ली।  पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह से सामान्य और सुचारू बनी हुई है। मंत्रालय के अनुसार, पिछले दो दिनों में करीब 87.66 लाख सिलेंडर की बुकिंग के मुकाबले 97 लाख से अधिक सिलेंडर की डिलीवरी की गई है।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब एलपीजी की ऑनलाइन बुकिंग का स्तर बढ़कर लगभग 99 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो डिजिटल प्रणाली की ओर बढ़ते उपभोक्ता व्यवहार को दर्शाता है। मंत्रालय ने बताया कि उपभोक्ताओं को रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए ऑथेंटिकेशन कोड के आधार पर लगभग 95 प्रतिशत डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर किसी भी तरह की गड़बड़ी या हेराफेरी को रोका जा सके।

    पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बावजूद देश में एलपीजी सप्लाई पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है और किसी भी रिटेल गैस एजेंसी पर स्टॉक खत्म होने जैसी स्थिति नहीं देखी गई है।

    इसके अलावा, पिछले दो दिनों में 1.11 लाख छोटे 5 किलोग्राम वाले सिलेंडरों की भी बिक्री हुई है। सरकार के अनुसार, यह छोटे सिलेंडर खासतौर पर शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों और छोटे उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं।

    सरकारी तेल कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम लगातार एलपीजी वितरण व्यवस्था को मजबूत करने में लगी हुई हैं। साथ ही कमर्शियल एलपीजी की बिक्री भी पिछले दो दिनों में 15,493 मीट्रिक टन से अधिक दर्ज की गई, जो लगभग 8.15 लाख 19 किलो वाले सिलेंडरों के बराबर है।

    मंत्रालय ने यह भी बताया कि देश में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन का विस्तार तेजी से हो रहा है। अब तक करीब 6.5 लाख कनेक्शनों में गैस सप्लाई शुरू हो चुकी है, जबकि कुल कनेक्शन संख्या 9.16 लाख तक पहुंच गई है। इसके अलावा, 7.08 लाख नए उपभोक्ताओं ने कनेक्शन के लिए आवेदन किया है।

    सरकार ने बताया कि एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए देशभर में सख्त कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में 2,000 से अधिक जगहों पर छापेमारी की गई, जिसमें 378 डिस्ट्रीब्यूटरों पर जुर्माना लगाया गया और 76 एजेंसियों को निलंबित किया गया।

    पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। सभी सरकारी तेल कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं।

    सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर अतिरिक्त खरीदारी न करें। साथ ही उपभोक्ताओं को डिजिटल माध्यम से बुकिंग करने और गैस एजेंसियों पर अनावश्यक भीड़ से बचने की सलाह दी गई है।

  • अदाणी पावर का न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा कदम नई सहायक कंपनी बनाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में बढ़ाया कदम

    अदाणी पावर का न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा कदम नई सहायक कंपनी बनाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में बढ़ाया कदम


    नई दिल्ली: देश के ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही अदाणी पावर लिमिटेड ने न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है कंपनी ने एक नई पूर्ण स्वामित्व वाली स्टेप डाउन सहायक इकाई के गठन की घोषणा की है जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में काम करेगी इस कदम को भारत के दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप एक रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है

    कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड ने रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड नामक एक नई इकाई का गठन किया है यह नई कंपनी 20 अप्रैल 2026 को स्थापित की गई है और इसे 5 लाख रुपए की अधिकृत पूंजी के साथ शुरू किया गया है इस पूंजी को 10 रुपए प्रति शेयर के 50 हजार इक्विटी शेयरों में विभाजित किया गया है

    इस नई इकाई की संरचना को देखें तो यह पूरी तरह से समूह के नियंत्रण में है रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड के पास है और अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की पूरी हिस्सेदारी अदाणी पावर लिमिटेड के पास है इस प्रकार यह कंपनी समूह की एक स्टेप डाउन सहायक इकाई के रूप में कार्य करेगी जो न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में संभावनाओं को तलाशेगी

    इसी क्रम में समूह की एक अन्य इकाई ने भी न्यूक्लियर क्षेत्र में अपनी सक्रियता दिखाई है अदाणी एनर्जी ने कोस्टल महा एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड नामक एक और स्टेप डाउन पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी का गठन किया है यह इकाई परमाणु ऊर्जा के उत्पादन ट्रांसमिशन और वितरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में संलग्न रहेगी जिससे ऊर्जा क्षेत्र में विविधता और मजबूती आएगी

    ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल व्यावसायिक विस्तार तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के स्वच्छ और सतत ऊर्जा भविष्य की दिशा में भी एक बड़ा संकेत है देश तेजी से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से हटकर स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों की ओर बढ़ रहा है और न्यूक्लियर एनर्जी इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है

    वर्तमान समय में भारत की स्थापित न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता लगभग 8 दशमलव 7 गीगावाट है लेकिन देश ने वर्ष 2047 तक इसे बढ़ाकर 100 गीगावाट तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है

    अदाणी समूह का यह कदम दर्शाता है कि वह भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने पोर्टफोलियो को विविध बना रहा है और नई तकनीकों तथा क्षेत्रों में निवेश कर रहा है न्यूक्लियर एनर्जी में यह विस्तार न केवल कंपनी के लिए नए अवसर खोलेगा बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेगा

  • कहां बना है भारत का पहला परमाणु संयंत्र, यह अब भी कितनी बिजली करता है पैदा?

    कहां बना है भारत का पहला परमाणु संयंत्र, यह अब भी कितनी बिजली करता है पैदा?

    नई दिल्ली । भारत में परमाणु एनर्जी के क्षेत्र में एक लंबा इतिहास रहा है. देश ने विज्ञान और तकनीक के माध्यम से अपने एनर्जी संसाधनों को सुरक्षित और स्वच्छ बनाने के लिए हमेशा प्रयास किया है. ऐसे ही प्रयासों में सबसे जरूरी भारत का पहला परमाणु एनर्जी संयं थात्र, जिसे 1969 में स्थापित किया गया. यह संयंत्र भारत के लिए सिर्फ बिजली उत्पादन का साधन नहीं था, बल्कि यह उस समय आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में देश की उपलब्धियों का प्रतीक भी माना गया.

    कहां बना है भारत का पहला परमाणु संयंत्र

    भारत का पहला परमाणु एनर्जी संयंत्र तारापुर परमाणु एनर्जी स्टेशन महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित है. यह मुंबई के पास स्थित है और इसे 28 अक्टूबर 1969 को शुरू किया गया था. इस संयंत्र की स्थापना के पीछे उद्देश्य था कि देश को स्वच्छ और लॉन्ग टर्म एनर्जी उपलब्ध कराई जा सके. तारापुर में दो उबलते जल रिएक्टर लगे हुए थे, जिनकी कुल क्षमता लगभग 200 मेगावाट थी. जब यह संयंत्र चालू हुआ, तब यह एशिया का दूसरा सबसे बड़ा परमाणु एनर्जी स्टेशन था. इस संयंत्र के जरिए भारत ने परमाणु एनर्जी के क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता साबित की और दुनिया के लिए अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों को भी दिखाया.

    यह अब भी कितनी बिजली करता है पैदा?

    तारापुर परमाणु एनर्जी संयंत्र की यूनिट 1 अब 160 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रही है. इसके अलावा, यूनिट 2 का नवीनीकरण भी अंतिम चरण में है और उसे जुड़ने के बाद कुल उत्पादन और बढ़कर लगभग 200 मेगावाट से ज्यादा हो जाएगा. तारापुर संयंत्र ने वर्षों तक देश को स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराई. हाल ही में इस संयंत्र की यूनिट 1 का रिनोवेशन किया गया और अब यह फिर से 160 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रही है. यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि यह पूरी तरह भारतीय तकनीक से पुरानी यूनिट को नया जीवन देने का पहला प्रयास है.

    यूनिट 1 के नवीनीकरण में छह साल का समय लगा. इसमें रिएक्टर की पाइपिंग, टरबाइन जनरेटर और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को अपग्रेड किया गया. इसके अलावा, 3डी लेजर स्कैनिंग, जंग-रोधी सामग्री, नई सुरक्षा प्रणालियां और कंट्रोल रूम का आधुनिकीकरण भी किया गया. संयंत्र का संचालन न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड करता है. अधिकारियों का कहना है कि यूनिट 2 का नवीनीकरण भी अंतिम चरण में है और आने वाले महीनों में इसे भी राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ दिया जाएगा.

    भारत की एनर्जी सुरक्षा और स्वच्छ एनर्जी में योगदान

    तारापुर संयंत्र की नई तकनीक और नवीनीकरण ने न केवल बिजली उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि देश को स्वच्छ एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद की है. इससे कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम होगी और कार्बन एमिशन में भी कमी आएगी. विशेषज्ञों के अनुसार, इस सफलता से भविष्य में पुराने रिएक्टरों का नवीनीकरण आसान होगा.