Tag: energysaving

  • ‘मन की बात’ एपिसोड 135 में पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन, आत्मनिर्भरता, बचत और जनभागीदारी पर दिया जोर

    ‘मन की बात’ एपिसोड 135 में पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन, आत्मनिर्भरता, बचत और जनभागीदारी पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए जनभागीदारी, आत्मनिर्भरता और संसाधन संरक्षण पर विशेष जोर दिया। इस दौरान उन्होंने हाल की अपनी अपीलों का सकारात्मक प्रभाव सामने आने पर नागरिकों को धन्यवाद भी दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में कई परिवारों ने विवाह समारोहों में सोना खरीदने के बजाय पुराने आभूषणों के पुनर्चक्रण को प्राथमिकता दी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग पेट्रोल और डीजल की बचत के लिए कार पूलिंग जैसे उपाय अपना रहे हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत के नागरिकों ने जिस तरह सामूहिक जिम्मेदारी दिखाई है, वह सराहनीय है। उन्होंने इसे देश की बदलती सोच और जागरूक समाज का प्रतीक बताया और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

    कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने हाल ही में की गई उस अपील का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने पेट्रोल-डीजल की बचत, अनावश्यक विदेश यात्राओं में कमी और एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि इन कदमों से न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बचत होती है, बल्कि राष्ट्रीय संसाधनों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    संबोधन में उन्होंने किसानों से प्राकृतिक और रसायन-मुक्त खेती अपनाने का भी आग्रह दोहराया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पारंपरिक कृषि पद्धतियों की ओर लौटकर न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है, बल्कि खेती की लागत को भी कम किया जा सकता है। इससे पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

    प्रधानमंत्री ने भारतीय नौसेना की हालिया उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए देश की बढ़ती रक्षा क्षमताओं पर गर्व जताया। उन्होंने स्वदेशी युद्धपोतों के शामिल होने को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इसके साथ ही उन्होंने रक्षा क्षेत्र में घरेलू तकनीक के बढ़ते उपयोग को भी देश की बड़ी उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया।

    कार्यक्रम में विज्ञान, संस्कृति और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने युवाओं को खगोल विज्ञान और विज्ञान गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया और विभिन्न एस्ट्रोनॉमी क्लबों की सराहना की। उन्होंने देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हालिया पुरातात्विक खोजों और विदेशों से लौटाई गई ऐतिहासिक धरोहरों को भारत के लिए गर्व का विषय बताया।

    प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के तहत गंगा डॉल्फिन बचाव अभियान और पारंपरिक भारतीय पेय पदार्थों के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये प्रयास न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं, बल्कि भारतीय जीवनशैली की समृद्ध परंपरा को भी दर्शाते हैं।

    अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने नागरिकों से वैज्ञानिक सोच अपनाने, अंधविश्वास से दूर रहने और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी ही भारत को एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे ले जाती है।

  • पीएम मोदी की अपील के बाद सरकार और उद्योग जगत अलर्ट मोड में, ऊर्जा संकट से निपटने की युद्धस्तरीय तैयारी तेज

    पीएम मोदी की अपील के बाद सरकार और उद्योग जगत अलर्ट मोड में, ऊर्जा संकट से निपटने की युद्धस्तरीय तैयारी तेज

    नई दिल्ली । वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों ने भारत की आर्थिक और ऊर्जा रणनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार और उद्योग जगत दोनों अब तेज गति से तैयारी में जुट गए हैं। प्रधानमंत्री की हालिया अपील के बाद देश में ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में नीति और जीवनशैली दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज वृद्धि ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर न केवल पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ता है, बल्कि परिवहन, उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत पर भी दिखाई देता है।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय और संबंधित विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। आंतरिक बैठकों में संभावित आर्थिक प्रभावों का आकलन किया जा रहा है और विभिन्न विकल्पों पर चर्चा हो रही है ताकि देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव को कम किया जा सके। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी निर्णय का असर निवेशकों के भरोसे और बाजार की स्थिरता पर न पड़े, इसलिए हर कदम सोच-समझकर उठाया जा रहा है।

    इस बीच उद्योग जगत भी सक्रिय हो गया है और ऊर्जा खपत को कम करने के लिए नई रणनीतियां तैयार कर रहा है। कई क्षेत्रों में कार्य प्रणाली को अधिक लचीला बनाने पर विचार किया जा रहा है, जिसमें उन जगहों पर वर्क फ्रॉम होम की संभावना भी शामिल है जहां भौतिक उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी बल्कि परिचालन लागत में भी कमी आने की उम्मीद है।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा। परिवहन लागत बढ़ने से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं, जिससे आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इसके अलावा सरकार के राजकोषीय संतुलन पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि विदेशों में निवेश या धन प्रेषण से जुड़ी नीतियों में किसी तरह की सख्ती नहीं की जाएगी। आर्थिक खुलेपन और वैश्विक भागीदारी को बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है ताकि भारत की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहे।

    कुल मिलाकर मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि भारत ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को लेकर एक महत्वपूर्ण संक्रमणकाल से गुजर रहा है। आने वाले दिनों में सरकार और उद्योग जगत की ओर से कई ऐसे कदम देखने को मिल सकते हैं जो न केवल ऊर्जा उपयोग को प्रभावित करेंगे, बल्कि देश की आर्थिक दिशा को भी नया आकार देंगे।