Tag: Engineering

  • सागर के इंजीनियरिंग कॉलेज हॉस्टल में छात्र का शव फंदे पर मिला, GATE परीक्षा की कर रहा था तैयारी

    सागर के इंजीनियरिंग कॉलेज हॉस्टल में छात्र का शव फंदे पर मिला, GATE परीक्षा की कर रहा था तैयारी

    मध्य प्रदेश: के सागर जिले में बहेरिया स्थित इंदिरा गांधी इंजीनियरिंग कॉलेज (IGEC) के हॉस्टल में एक इंजीनियरिंग छात्र की मौत का मामला सामने आया है। कॉलेज के फाइनल ईयर में पढ़ने वाले छात्र विक्रमादित्य सिंह बघेल का शव हॉस्टल के स्टोर रूम में फंदे से लटका मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद कॉलेज और हॉस्टल परिसर में हलचल मच गई। मृतक मूल रूप से रीवा का निवासी था और इंजीनियरिंग की अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। वह ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) परीक्षा की तैयारी भी कर रहा था।

    जानकारी के मुताबिक, छात्र का शव हॉस्टल परिसर में बने स्टोर रूम में मिला। घटना सामने आने के बाद वहां मौजूद छात्रों और कॉलेज परिसर में चर्चा शुरू हो गई। छात्र की मौत से उसके साथी और परिचित स्तब्ध हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में घटना के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि छात्र किन परिस्थितियों से गुजर रहा था और उसकी मौत के पीछे क्या वजह रही।

    विक्रमादित्य के रूममेट आकाश खरोले ने उसके पिछले कुछ दिनों के व्यवहार के बारे में जानकारी दी। आकाश के अनुसार, विक्रमादित्य पहले की तुलना में काफी शांत और गुमसुम रहने लगा था। वह कमरे में भी कम समय बिताता था। उसके व्यवहार में आए इस बदलाव को उसके साथी महसूस कर रहे थे। रूममेट ने बताया कि वह अपने करियर और भविष्य को लेकर तनाव में रहता था।

    आकाश के मुताबिक, विक्रमादित्य पढ़ाई में अच्छा था और GATE परीक्षा की तैयारी के लिए लगातार मेहनत कर रहा था। वह इस परीक्षा को लेकर गंभीर था और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रहा था। इंजीनियरिंग की अंतिम वर्ष की पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी उसके समय का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। हालांकि, उसके रूममेट की ओर से बताई गई मानसिक स्थिति के आधार पर मौत का कारण तय नहीं किया जा सकता।

    छात्र की मौत की खबर सामने आने के बाद हॉस्टल में रहने वाले अन्य विद्यार्थियों के बीच भी चिंता का माहौल है। कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थी अपने साथी की मौत से दुखी हैं। विक्रमादित्य रीवा का रहने वाला था, इसलिए उसके परिवार और परिचितों के लिए भी यह घटना गहरा झटका है।

    इस घटना ने छात्र जीवन में पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य को लेकर बनने वाले दबाव के मुद्दे को भी सामने रखा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के अंतिम वर्ष में विद्यार्थी अक्सर आगे की पढ़ाई, नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर कई तरह की चुनौतियों का सामना करते हैं। हालांकि, इस मामले में विक्रमादित्य की व्यक्तिगत परिस्थितियों के बारे में सीमित जानकारी ही सामने आई है। उसके रूममेट ने केवल इतना बताया है कि वह कुछ दिनों से शांत रहता था और करियर को लेकर तनाव में था।

    फिलहाल घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी सामने आना बाकी है। छात्र की मौत के वास्तविक कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। हॉस्टल के स्टोर रूम में शव मिलने की घटना के बाद अब यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि उस दिन क्या परिस्थितियां बनी थीं और छात्र की मौत से जुड़े अन्य तथ्य क्या हैं।

  • भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को गति देने के लिए कुशल इंजीनियरों और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर डॉ. प्रीति अदाणी ने दिया जोर

    भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को गति देने के लिए कुशल इंजीनियरों और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर डॉ. प्रीति अदाणी ने दिया जोर

    नई दिल्ली । भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और विनिर्माण संयंत्रों के साथ कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी जरूरी है। अदाणी विश्वविद्यालय की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी ने उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर देते हुए कहा कि देश के सेमीकंडक्टर मिशन की सफलता के लिए ऐसी प्रतिभाओं की आवश्यकता है, जो जटिल तकनीकों को डिजाइन करने, विकसित करने और उनमें सुधार करने की क्षमता रखती हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी प्रगति का वास्तविक महत्व केवल मशीनों की बढ़ती क्षमता में नहीं, बल्कि मानव बुद्धिमत्ता का विवेकपूर्ण उपयोग करके बेहतर भविष्य तैयार करने में है।

    अहमदाबाद में आयोजित कॉन्क्लेव ऑन हार्डवेयर, इनोवेशन, प्रोसेसिंग एंड सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज (चिप्स) 2026 को संबोधित करते हुए डॉ. अदाणी ने भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं के लिए शिक्षा, शोध और उद्योग के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। सम्मेलन का उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में उभरते अवसरों, तकनीकी चुनौतियों और आवश्यक कौशल पर चर्चा करना था। इसमें विभिन्न कंपनियों और संस्थानों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लेकर इस क्षेत्र के भविष्य से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।

    सम्मेलन में क्वालकॉम, एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स, माइक्रोन टेक्नोलॉजी, सिनोप्सिस और इनफिनियन टेक्नोलॉजीज सहित कई कंपनियों के विशेषज्ञ शामिल हुए। कानूनी क्षेत्र से भी विशेषज्ञों ने चर्चा में भाग लिया। विचार-विमर्श के दौरान वायरलेस तकनीक, सेमीकंडक्टर डिजाइन, मेमोरी एवं स्टोरेज, पावर सिस्टम और कानूनी ढांचे से जुड़े विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन क्षेत्रों को सेमीकंडक्टर की पूरी मूल्य शृंखला के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    कार्यक्रम में तीन प्रमुख परिचर्चाएं आयोजित की गईं। पहली चर्चा भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन की संभावनाओं और देश की डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करने के उपायों पर केंद्रित रही। दूसरी परिचर्चा में सेमीकंडक्टर विनिर्माण की भूमिका और भारत के तकनीकी भविष्य पर उसके संभावित प्रभावों पर विचार किया गया। तीसरे सत्र में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रोजगार के अवसरों, जरूरी कौशल और भविष्य में करियर बनाने के रास्तों पर चर्चा हुई। इन सत्रों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा और उद्योग की वास्तविक जरूरतों के बीच अंतर को कम करने पर जोर दिया गया।

    इस सम्मेलन का आयोजन आईआईटी मंडी, वीएलएसआई सोसाइटी ऑफ इंडिया और सिरिल अमरचंद मंगलदास के सहयोग से किया गया। इसमें गुजरात स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन, सेमीकंडक्टर कंपनियों और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। चर्चाओं में शोध को प्रोत्साहित करने, तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की आवश्यकता सामने आई।

    भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र केवल चिप बनाने वाले संयंत्रों तक सीमित नहीं है। चिप डिजाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग में विशेषज्ञता विकसित करना भी देश की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन ने इस दिशा में प्रयासों को गति दी है। गुजरात के धोलेरा और साणंद में चल रही परियोजनाएं भी राज्य में सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास से जुड़ी हैं।

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के तेजी से विस्तार ने उन्नत चिप्स, डेटा सेंटर और भरोसेमंद ऊर्जा अवसंरचना की मांग बढ़ा दी है। ऐसे में सेमीकंडक्टर तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में विकास के लिए तकनीकी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और प्रशिक्षित इंजीनियरों की जरूरत भी बढ़ सकती है।

    अदाणी विश्वविद्यालय ने अहमदाबाद में प्रस्तावित अपने बहुविषयक वैश्विक परिसर में सेमीकंडक्टर डिजाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग के क्षेत्र में विशेष विशेषज्ञता विकसित करने की योजना घोषित की है। इसके तहत युवा इंजीनियरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, उद्योग में कार्यरत पेशेवरों के लिए कार्यकारी शिक्षा और शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसका उद्देश्य शिक्षा और शोध को उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ना तथा भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए भविष्य की कुशल प्रतिभाएं तैयार करना है।

  • भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते से इंजीनियरिंग निर्यात पांच साल में दोगुना होने की उम्मीद

    भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते से इंजीनियरिंग निर्यात पांच साल में दोगुना होने की उम्मीद

    नई दिल्ली । भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता लागू होने से भारतीय इंजीनियरिंग क्षेत्र को नए अवसर मिलने की उम्मीद है। उद्योग जगत का अनुमान है कि इस समझौते के बाद अगले पांच वर्षों में न्यूजीलैंड को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात लगभग दोगुना होकर 28 से 30 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। इससे भारतीय निर्माताओं को न्यूजीलैंड के बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने और नए व्यापारिक अवसर तलाशने में मदद मिलने की संभावना है।

    इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने समझौते को भारतीय इंजीनियरिंग उद्योग के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए अपेक्षाकृत छोटा बाजार है, लेकिन वहां विकास की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। उनके मुताबिक, मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने से इस बाजार में भारतीय कंपनियों के लिए नए रास्ते खुलेंगे।

    भारत का न्यूजीलैंड को इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात वर्ष 2024-25 में 12.98 करोड़ डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 14.05 करोड़ डॉलर हो गया। निर्यात में हुई इस बढ़ोतरी के बीच उद्योग को उम्मीद है कि व्यापार समझौते से दोनों देशों के बीच इंजीनियरिंग उत्पादों का कारोबार और मजबूत होगा। शुल्क संबंधी रियायतों और बेहतर व्यापारिक पहुंच से भारतीय निर्माताओं को न्यूजीलैंड में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति सुधारने का अवसर मिल सकता है।

    भारत से न्यूजीलैंड भेजे जाने वाले प्रमुख इंजीनियरिंग उत्पादों में ऑटोमोबाइल, डेयरी उद्योग में इस्तेमाल होने वाली औद्योगिक मशीनरी, चिकित्सा एवं वैज्ञानिक उपकरण, कार्यालय संबंधी उपकरण तथा लोहा और इस्पात उत्पाद शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के लिए मांग बढ़ने की संभावनाएं हैं। समझौते के बाद निर्यातकों को अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने और न्यूजीलैंड के बाजार की जरूरतों के अनुरूप कारोबार का विस्तार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    पंकज चड्ढा ने विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई के लिए इस समझौते को उपयोगी बताया। उनके अनुसार, मुक्त व्यापार समझौता छोटे और मध्यम स्तर के भारतीय इंजीनियरिंग निर्यातकों को अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अवसर देगा। इससे वे पारंपरिक बाजारों पर निर्भरता कम करने के साथ न्यूजीलैंड में अपनी व्यावसायिक मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में काम कर सकेंगे।

    उद्योग की अपेक्षा है कि आने वाले वर्षों में भारतीय कंपनियां न्यूजीलैंड में इंजीनियरिंग वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ाने के लिए नए ग्राहक तलाशेंगी और कारोबार के नए अवसरों का लाभ उठाएंगी। हालांकि, निर्यात में वास्तविक वृद्धि बाजार की मांग, कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और समझौते से मिलने वाले लाभों का उपयोग करने की उनकी क्षमता पर निर्भर करेगी।

    इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद इंडिया के अनुमान के मुताबिक, अगले पांच वर्षों में न्यूजीलैंड को भारत का इंजीनियरिंग निर्यात बढ़कर 28 से 30 करोड़ डॉलर तक पहुंच सकता है। यह वर्ष 2025-26 के 14.05 करोड़ डॉलर के निर्यात की तुलना में लगभग दोगुना होगा। दोनों देशों के बीच इंजीनियरिंग व्यापार संबंध मजबूत होने से वर्ष 2030 तक भारत के 250 अरब डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की व्यापक कोशिशों को भी बल मिलने की उम्मीद है।

  • हैदराबाद के इंजीनियरिंग कॉलेज में डांडिया नाइट के दौरान बड़ा हादसा, स्ट्रक्चर गिरने से छात्रा की मौत, बहन गंभीर रूप से घायल

    हैदराबाद के इंजीनियरिंग कॉलेज में डांडिया नाइट के दौरान बड़ा हादसा, स्ट्रक्चर गिरने से छात्रा की मौत, बहन गंभीर रूप से घायल

    नई दिल्ली । तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के नादरगुल स्थित एमवीएसआर इंजीनियरिंग कॉलेज में डांडिया नाइट के दौरान बड़ा हादसा हो गया। कॉलेज में आयोजित उत्सव के दौरान लाइटिंग या लिफ्टिंग के लिए लगाया गया एक स्ट्रक्चर अचानक गिर गया। इस घटना में इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग (ईईई) की प्रथम वर्ष की छात्रा सोना नारायण दास की मौत हो गई, जबकि उसकी बहन मीना नारायण दास गंभीर रूप से घायल हो गई। हादसे में कई अन्य छात्र भी घायल हुए हैं।

    यह घटना शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को कॉलेज में आयोजित डांडिया कार्यक्रम के दौरान हुई। उत्सव में छात्र शामिल हुए थे और कार्यक्रम चल रहा था। इसी बीच लाइटिंग या लिफ्टिंग के लिए लगाए गए स्ट्रक्चर के गिरने से वहां मौजूद लोगों में हादसे की स्थिति पैदा हो गई। घटना में कई छात्रों को चोटें आईं। गंभीर रूप से घायल सोना नारायण दास को बचाने और इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    मृत छात्रा की पहचान सोना नारायण दास के रूप में हुई है। वह एमवीएसआर इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की प्रथम वर्ष की छात्रा थी। डांडिया कार्यक्रम के दौरान हुए इस हादसे ने कॉलेज के उत्सवी माहौल को दुखद घटना में बदल दिया। सोना की बहन मीना नारायण दास भी हादसे की चपेट में आ गई। उसे गंभीर चोटें आई हैं और उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है।

    घायल मीना नारायण दास को इलाज के लिए नादरगुल के पास स्थित प्रत्युषा अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल में उसका उपचार जारी है। हादसे में घायल हुए अन्य छात्रों को भी चिकित्सा सहायता के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद घायलों के इलाज पर ध्यान दिया गया, जबकि मृत छात्रा की पहचान और हादसे से जुड़ी शुरुआती जानकारी सामने आई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे की मुख्य वजह कार्यक्रम के दौरान लगाया गया स्ट्रक्चर गिरना है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि स्ट्रक्चर किन परिस्थितियों में गिरा। यह भी अभी साफ नहीं है कि उसके गिरने के पीछे तकनीकी खराबी, असंतुलन या कोई अन्य कारण था। घटना के समय कार्यक्रम स्थल पर कितने छात्र मौजूद थे, इसकी भी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    हादसे से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब अभी सामने आने बाकी हैं। स्ट्रक्चर लगाने की व्यवस्था कैसी थी, उसे किस उद्देश्य से स्थापित किया गया था और कार्यक्रम के दौरान उसकी सुरक्षा के क्या इंतजाम थे, इन बिंदुओं पर अभी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, स्ट्रक्चर गिरने से कई छात्र घायल हुए और सोना नारायण दास की इलाज के दौरान मौत हो गई।

    इस घटना में सबसे गंभीर स्थिति सोना की बहन मीना की है, जिसका अस्पताल में उपचार जारी है। फिलहाल उसकी सेहत को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। कॉलेज में डांडिया नाइट के दौरान हुई इस दुर्घटना में एक छात्रा की मौत और कई विद्यार्थियों के घायल होने से कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारण और परिस्थितियों की पूरी तस्वीर सामने आने के लिए अधिक जानकारी का इंतजार है।

  • सीएम डॉ. मोहन यादव का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर जोर, CSIR-AMPRI और PWD के बीच हुआ अहम समझौता

    सीएम डॉ. मोहन यादव का इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर जोर, CSIR-AMPRI और PWD के बीच हुआ अहम समझौता


    मध्यप्रदेश:  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता देते हुए तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय अभियंता दिवस समारोह में उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग तकनीक के साथ नए प्रयोग कर रहा है और अपने स्तर पर संसाधन जुटाकर अधोसंरचना तैयार कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान सीएसआईआर-एम्प्री भोपाल और मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान भी किया गया।

    मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। इसके बाद वंदे मातरम का गायन हुआ। उन्होंने कहा कि अभियंता दिवस समारोह अभियांत्रिकी कार्यों में गुणवत्ता और नवाचार की संस्कृति को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने महान अभियंता मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी बनाई संरचनाएं उनकी सोच और तकनीकी क्षमता को दर्शाती हैं।

    डॉ. यादव ने कहा कि इंजीनियर शब्द में उन्हें इंजन का आभास होता है। इंजन वह होता है जो पूरी ताकत और क्षमता के साथ संचालन करता है। उन्होंने मध्यप्रदेश की स्थापत्य और शिल्प परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में ऐतिहासिक इमारतों, चट्टानों को काटकर बनाए गए मंदिरों और उत्कृष्ट प्रतिमाओं के रूप में इंजीनियरिंग तथा कला-कौशल के अनेक उदाहरण मौजूद हैं। अजंता-एलोरा का कैलाश मंदिर, मंदसौर का धर्मराजेश्वर और अन्य प्राचीन संरचनाएं हजारों वर्षों पुरानी कला साधना की पहचान हैं।

    मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विभाग ने रानी दुर्गावती, सम्राट विक्रमादित्य और राजा भोज जैसी ऐतिहासिक विभूतियों को स्मरण किया है। उन्होंने कहा कि विभाग तकनीक के साथ नवाचार कर रहा है और अधोसंरचना निर्माण के लिए स्वयं संसाधन जुटाना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश के सभी विभाग विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और इसमें लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों का टीम वर्क महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग केवल तकनीक नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता भी है। उन्होंने इंजीनियरों के लिए खोजी स्वभाव, अनुभव और परफेक्शन को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार पिछले नौ महीनों में प्रदेश के 85 प्रतिशत इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया गया है।

    कार्यक्रम में CSIR-AMPRI भोपाल और लोक निर्माण विभाग के बीच हुए MoU के तहत फ्लायऐश आधारित सीमेंट से सड़क निर्माण की दिशा में काम किया जाएगा। इसके अलावा सीमेंट के बिना कांक्रीट सड़क निर्माण की तकनीक विकसित करने और सरकारी भवनों में ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी अपनाने की दिशा में भी काम होगा।

    समारोह में अधोसंरचना निर्माण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अभियंताओं, अधिकारियों, संयुक्त दलों और निर्माण एजेंसियों को लोक निर्माण पुरस्कार प्रदान किए गए। इस दौरान लोक निर्माण विभाग द्वारा तैयार कम्पेंडियम सर्कुलर का विमोचन भी किया गया। कई अधिकारियों और अभियंताओं को सम्मानित किया गया, जबकि सेवानिवृत्त सचिव लोक निर्माण विभाग सतीश चंद्र पांडे और सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता जीएस पल्नितकर को विशेष सम्मान दिया गया।

  • सरकारी नौकरी अलर्ट: DRDO-RAC ने निकाली साइंटिस्ट भर्ती, 19 जून तक करें आवेदन, जानें पूरी प्रक्रिया

    सरकारी नौकरी अलर्ट: DRDO-RAC ने निकाली साइंटिस्ट भर्ती, 19 जून तक करें आवेदन, जानें पूरी प्रक्रिया


    नई दिल्ली ।
    देश की रक्षा अनुसंधान एवं विकास से जुड़ी प्रमुख संस्था डीआरडीओ-आरएसी ने वैज्ञानिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो इंजीनियरिंग और विज्ञान क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 33 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, जिनमें वैज्ञानिक-ई, वैज्ञानिक-डी और वैज्ञानिक-सी स्तर के पद शामिल हैं। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और योग्य उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    इस भर्ती में विभिन्न तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों के लिए पदों का वितरण किया गया है। वैज्ञानिक-ई के दो पदों में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग तथा मैकेनिकल, प्रोडक्शन और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के उम्मीदवारों के लिए अवसर उपलब्ध हैं। इसके अलावा वैज्ञानिक-डी के 11 पद कंप्यूटर विज्ञान, एयरोस्पेस, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, भौतिकी, रासायनिक इंजीनियरिंग और अन्य संबंधित क्षेत्रों के लिए निर्धारित किए गए हैं। वहीं वैज्ञानिक-सी के 20 पदों में इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस, गणित, समुद्र विज्ञान, रिमोट सेंसिंग, फार्माकोलॉजी, फिजियोलॉजी और अन्य वैज्ञानिक विषयों से जुड़े उम्मीदवारों को मौका दिया गया है।

    इन पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास संबंधित विषय में इंजीनियरिंग या विज्ञान में प्रथम श्रेणी स्नातक या मास्टर डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उम्मीदवारों के पास निर्धारित क्षेत्र में अनुभव और अन्य आवश्यक योग्यताएं भी होनी चाहिए, जो पद के अनुसार अलग-अलग तय की गई हैं। आयु सीमा की बात करें तो अधिकतम आयु 35 से 45 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है, जिसकी गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।

    चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्टिंग के बाद व्यक्तिगत साक्षात्कार, दस्तावेज़ सत्यापन और अन्य मूल्यांकन चरणों से गुजरना होगा। अंतिम चयन पूरी तरह से उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और इंटरव्यू प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार आकर्षक वेतनमान प्रदान किया जाएगा, जो लगभग 67,700 रुपये से लेकर 1,23,100 रुपये प्रति माह तक होगा। यह वेतन सरकारी वैज्ञानिक पदों के स्तर के अनुसार तय किया गया है और इसके साथ अन्य भत्ते भी लागू हो सकते हैं।

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से की जा रही है। उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आधिकारिक पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा और सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के पुरुष उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 100 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि एससी, एसटी, दिव्यांग और महिला उम्मीदवारों को शुल्क में छूट दी गई है।

    इस भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 19 जून तय की गई है और उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम समय का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। यह अवसर उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो देश की रक्षा अनुसंधान परियोजनाओं में वैज्ञानिक के रूप में योगदान देना चाहते हैं और एक प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान में करियर बनाना चाहते हैं।