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  • गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश, इन 3 राशियों की बढ़ सकती है आर्थिक परेशानी; निवेश में सावधानी जरूरी

    गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश, इन 3 राशियों की बढ़ सकती है आर्थिक परेशानी; निवेश में सावधानी जरूरी


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, सुख, समृद्धि और भाग्य का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, 19 अगस्त 2026 को बृहस्पति पुष्य नक्षत्र से निकलकर बुध के स्वामित्व वाले अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। अश्लेषा को संवेदनशील और बदलाव वाला नक्षत्र माना जाता है। माना जा रहा है कि गुरु के इस नक्षत्र परिवर्तन का असर सभी राशियों पर अलग-अलग पड़ेगा, लेकिन मिथुन, धनु और मीन राशि के जातकों को आर्थिक मामलों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    मिथुन राशि: लेन-देन में सतर्क रहें
    मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं और गुरु अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश कर रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह गोचर धन और वाणी से जुड़े मामलों को प्रभावित कर सकता है। इस दौरान बातचीत में सावधानी बरतें, क्योंकि आपकी बात का गलत अर्थ निकाला जा सकता है।

    लेन-देन के मामलों में किसी पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचें। बजट बिगड़ने और अचानक खर्च बढ़ने की स्थिति बन सकती है।

    धनु राशि: जोखिम भरे निवेश से बचें
    धनु राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति हैं। गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश इस राशि के लिए अचानक बदलाव और बाधाओं की स्थिति बना सकता है। बनते हुए कामों में रुकावट आ सकती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान शेयर बाजार या अन्य जोखिम वाले निवेश में पैसा लगाने से बचना बेहतर रहेगा। खान-पान और पेट से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी लापरवाही न बरतें।

    मीन राशि: खर्च बढ़ने से बिगड़ सकता है बजट
    मीन राशि के स्वामी भी बृहस्पति हैं। अश्लेषा नक्षत्र में गुरु का प्रवेश आपकी बौद्धिक क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। विद्यार्थियों और कारोबारियों को एकाग्रता की कमी महसूस हो सकती है।

    बड़े फैसले भावनाओं में बहकर लेने से बचें। संतान से जुड़ी चिंता या अचानक होने वाले खर्च के कारण परिवार का बजट प्रभावित हो सकता है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार ये उपाय कर सकते हैं-
    – गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
    – जरूरतमंदों या मंदिर में चने की दाल, हल्दी या पीले वस्त्रों का दान करें।
    – गुरुवार को गाय को चने की दाल और गुड़ मिलाकर रोटी खिलाएं।

  • आज कर्क राशि में प्रवेश करेंगे बुध, 12 राशियों के जातकों के करियर, धन, परिवार और स्वास्थ्य पर दिखेगा प्रभाव

    आज कर्क राशि में प्रवेश करेंगे बुध, 12 राशियों के जातकों के करियर, धन, परिवार और स्वास्थ्य पर दिखेगा प्रभाव


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में बुद्धि, वाणी, शिक्षा और व्यापार के कारक ग्रह बुध आज कर्क राशि में प्रवेश कर रहे हैं। बुध 22 अगस्त तक इसी राशि में रहेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, बुध का यह राशि परिवर्तन सभी 12 राशियों के जातकों के जीवन पर अलग-अलग प्रभाव डालेगा। किसी को करियर और धन लाभ मिलेगा तो कुछ राशियों को खर्च, स्वास्थ्य और वाणी पर विशेष ध्यान देना होगा।

    राशियों पर बुध गोचर का प्रभाव

    मेष
    पारिवारिक कार्य पूरे होंगे और संपत्ति संबंधी मामलों में प्रगति होगी। करियर में धीरे-धीरे सफलता मिलेगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।

    वृषभ
    आत्मविश्वास और साहस बढ़ेगा। मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा। भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा, लेकिन बातचीत में संयम रखें।

    मिथुन
    मान-सम्मान बढ़ेगा और कार्यक्षेत्र में स्थिति मजबूत होगी। अनावश्यक खर्च से बचें और सोच-समझकर निर्णय लें।

    कर्क
    यह गोचर सबसे अधिक लाभकारी रहेगा। रुके हुए काम पूरे होंगे, संवाद क्षमता बेहतर होगी और करियर में नए अवसर मिलेंगे। नकारात्मक लोगों से दूरी बनाए रखें।

    सिंह
    खर्च बढ़ सकते हैं। बड़े फैसले जल्दबाजी में लेने से बचें। स्वास्थ्य और खान-पान पर विशेष ध्यान दें।

    कन्या
    आय के नए स्रोत बनेंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। अधूरे कार्य पूरे होंगे और रिश्तों में मधुरता आएगी।

    तुला
    करियर में उन्नति के योग हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। मार्केटिंग और संचार से जुड़े लोगों को विशेष लाभ होगा।

    वृश्चिक
    धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। करियर में प्रगति के अवसर मिलेंगे। खर्चों पर नियंत्रण रखें।

    धनु
    विदेश से जुड़े कार्यों में सफलता मिल सकती है। रुके हुए काम पूरे होंगे। आर्थिक मामलों में सतर्क रहना जरूरी होगा।

    मकर
    वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी। करियर में लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य और खान-पान का विशेष ध्यान रखें।

    कुंभ
    वाणी पर संयम रखें। प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए समय अनुकूल रहेगा। धैर्य के साथ प्रयास करते रहें।

    मीन
    नई योजनाएं शुरू करने के लिए समय शुभ है। आय बढ़ने के अवसर मिलेंगे। परिवार और संतान से सुख मिलेगा तथा मान-सम्मान में वृद्धि होगी।

    बुध को मजबूत करने के उपाय
    ज्योतिषाचार्य के अनुसार बुध के शुभ प्रभाव के लिए बुधवार के दिन भगवान शिव की पूजा करें, शिवलिंग पर जल अर्पित करें तथा जरूरतमंदों को दान करें। इससे बुध के सकारात्मक परिणामों में वृद्धि होने की मान्यता है।

  • 20 अगस्त से रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेंगे शनिदेव, मेष, कर्क और वृश्चिक राशि वालों को रहना होगा सावधान!

    20 अगस्त से रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेंगे शनिदेव, मेष, कर्क और वृश्चिक राशि वालों को रहना होगा सावधान!


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कर्मफलदाता शनिदेव 20 अगस्त को रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण में प्रवेश करेंगे। द्रिक पंचांग के मुताबिक शनि इस नक्षत्र में 9 अक्टूबर तक रहेंगे। रेवती नक्षत्र के स्वामी बुध ग्रह हैं, ऐसे में शनि और बुध का यह संयोग सभी 12 राशियों पर प्रभाव डालेगा। हालांकि मेष, कर्क और वृश्चिक राशि के जातकों को इस अवधि में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

    मेष राशि
    इस दौरान आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लें। बिना पूरी जानकारी के किसी भी निवेश से बचें, अन्यथा नुकसान हो सकता है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, इसलिए जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें। गुस्से पर नियंत्रण रखें और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न करें।

    कर्क राशि
    कर्क राशि के जातकों को मानसिक तनाव और अधिक सोचने की प्रवृत्ति से बचने की जरूरत होगी। नया व्यवसाय या कोई बड़ा काम शुरू करने से पहले पूरी योजना तैयार करें। रिश्तों में पारदर्शिता बनाए रखें और यात्रा के दौरान स्वास्थ्य व सामान दोनों का ध्यान रखें।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि वालों को इस अवधि में अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखना चाहिए। बजट के अनुसार खर्च करें और धन संबंधी मामलों में किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा न करें। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने में समय लग सकता है, इसलिए धैर्य रखें। बेवजह के विवादों से दूर रहें और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज न करें।

    शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय
    – प्रत्येक शनिवार हनुमान जी की पूजा करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
    – शनिवार को काली उड़द, काले तिल या जूते-चप्पल का जरूरतमंदों को दान करें।
    – वाणी में मधुरता रखें, अच्छे आचरण का पालन करें और किसी को अनावश्यक कष्ट न पहुंचाएं।

  • 30 साल बाद मेष राशि में आएंगे शनि, 2027 में इन 4 राशियों पर बरसेगी धन-समृद्धि की कृपा

    30 साल बाद मेष राशि में आएंगे शनि, 2027 में इन 4 राशियों पर बरसेगी धन-समृद्धि की कृपा


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार कर्मफलदाता शनि देव वर्तमान में मीन राशि में विराजमान हैं। 3 जून 2027 को शनि लगभग 30 वर्षों बाद मेष राशि में प्रवेश करेंगे। मेष को शनि की नीच राशि माना जाता है। इस राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार मिथुन, सिंह, धनु और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह गोचर विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकता है।

    मिथुन राशि
    शनि का यह गोचर मिथुन राशि वालों के लिए आर्थिक प्रगति के संकेत दे रहा है। आय के नए स्रोत बनने और अप्रत्याशित धन लाभ मिलने की संभावना है। पुराने निवेश से अच्छा रिटर्न मिल सकता है। नौकरीपेशा लोगों को करियर में नए अवसर मिलेंगे, जबकि कारोबारियों को नई डील और विस्तार का लाभ मिल सकता है। विदेश यात्रा या विदेश से जुड़े कार्यों में भी सफलता के योग बन रहे हैं।

    सिंह राशि
    सिंह राशि के जातकों के लिए शनि का राशि परिवर्तन भाग्य को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और कार्यक्षेत्र में आपके काम की सराहना मिलेगी। लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। इस दौरान संपत्ति या वाहन खरीदने के योग बन सकते हैं। साथ ही अचानक आर्थिक लाभ मिलने के भी संकेत हैं।

    धनु राशि
    धनु राशि वालों के लिए यह गोचर करियर और वित्तीय मामलों में सकारात्मक परिणाम दे सकता है। मनचाही नौकरी मिलने के अवसर बन सकते हैं और आय में बढ़ोतरी के संकेत हैं। व्यापार में बड़े निवेश का मौका मिल सकता है, जो भविष्य में लाभदायक साबित हो सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को भी सफलता मिलने की संभावना जताई गई है।

    कुंभ राशि
    कुंभ राशि के जातकों के लिए भी शनि का मेष राशि में प्रवेश शुभ फल देने वाला माना जा रहा है। निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी और व्यापार में नए प्रयोग लाभकारी साबित हो सकते हैं। नए आय स्रोत बनने से आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। धन संबंधी परेशानियां कम होंगी और बैंक बैलेंस में लगातार बढ़ोतरी होने के संकेत मिल रहे हैं।

  • भोजशाला मामले में अब जैन समाज की एंट्री…. मांगी पूजा की इजाजत… ASI पर लगाया ये आरोप

    भोजशाला मामले में अब जैन समाज की एंट्री…. मांगी पूजा की इजाजत… ASI पर लगाया ये आरोप


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में धार (Dhar ) की ऐतिहासिक भोजशाला (Historic Bhojshala) को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर खंडपीठ (Indore Bench) में चल रही सुनवाई अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। अब इस बहुचर्चित विवाद में जैन समाज की एंट्री ने कानूनी और धार्मिक बहस को और तेज कर दिया है। जैन समाज की ओर से दायर जनहित याचिका में दावा किया गया है कि भोजशाला मूल रूप से जैन धरोहर रही है, जहां प्राचीन काल में जैन गुरुकुल और मंदिर संचालित होते थे।

    सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जैन समाज की जनहित याचिका को मुख्य याचिका के साथ टैग कर लिया। इसके बाद अब भोजशाला विवाद में जैन पक्ष की कानूनी मौजूदगी भी मजबूत से दर्ज हो गई है। इस मामले में बुधवार को इंदौर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जैन समाज की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश प्रसाद राजभर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा।

    राजभर ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्राचीन संदर्भों का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि राजा भोज ने यह भूमि जैन आचार्य मानतुंग को दान में दी थी। मानतुंग वही आचार्य हैं जिन्होंने जैन धर्म के प्रसिद्ध धार्मिक सूत्र ‘भक्तामर स्तोत्र’ की रचना की थी। उन्होंने दावा किया कि भोजशाला परिसर में कभी जैन मंदिर और गुरुकुल हुआ करता था, साथ ही उन्होंने भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर जोर देते हुए कहा, ‘देश के संविधान के तहत जैन धर्म के अनुयायियों को भोजशाला परिसर में पूजा का अधिकार है।’


    भोजशाला की संरचना में जैन वास्तुकला का स्पष्ट उल्लेख

    राजभर ने तर्क दिया कि धार के राजा भोज हिंदू और जैन, दोनों धर्मों के विद्वानों के संरक्षक थे। उनके अनुसार भोजशाला में संचालित शिक्षण केंद्र में जैन विद्वान भी मौजूद थे। राजभर ने ऐतिहासिक लेखों और पुरातात्विक सामग्री के हवाले से दावा किया कि भोजशाला की संरचना के कुछ हिस्सों में जैन वास्तुकला का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है।


    कुछ-कुछ देलवाड़ा के जैन मंदिरों जैसी है स्थापत्य कला

    उन्होंने शिमला की ‘गवर्नमेंट सेंट्रल प्रेस’ द्वारा 1882 में प्रकाशित रिपोर्ट और अन्य प्रकाशनों का जिक्र भी किया जिसमें विवादित परिसर की मस्जिद के कुछ हिस्सों को जैन समुदाय से जुड़ी इमारतों के अवशेषों से निर्मित बताया गया था और इसके कुछ गुंबदों तथा खंभों की तुलना माउंट आबू स्थित प्रसिद्ध देलवाड़ा जैन मंदिरों से की गई थी।


    ‘लंदन में रखी मूर्ति जैन यक्षिणी अम्बिका देवी की’

    राजभर ने कुछ चित्रों और संग्रहालय के विवरणों का हवाला देते हुए कहा कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा बता रहा है, वह असल में जैन यक्षिणी अम्बिका की मूर्ति है। उन्होंने तर्क दिया कि इस मूर्ति में जैन तीर्थंकरों के प्रतीक चिन्ह हैं और यह विशिष्ट खूबी इसे देवी सरस्वती की हिंदू शैली की प्रतिमाओं से अलग करती है।


    राजभर बोले- सरकार का रवैया संदेह पैदा कर रहा

    राजभर ने यह भी कहा कि एएसआई ने भोजशाला के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में इस स्मारक से जैन समुदाय के ऐतिहासिक संबंधों को नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार विवादित स्मारक को लेकर एक वर्ग के दावों का सीधे तौर पर समर्थन कर रही है और उसका यह रवैया संदेह उत्पन्न करता है।


    ASI पर लगाया जैन सबूतों को अनदेखा करने का आरोप

    उधर जैन समाज की तरफ से अधिवक्ता प्रिया जैन ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस मामले की जानकारी दी और दावा किया कि ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) की हालिया सर्वे रिपोर्ट में भोजशाला में मिले जैन सबूतों को अनदेखा किया गया। प्रिया के अनुसार ASI की खुदाई व सर्वे में भोजशाला से जैन तीर्थंकरों और यक्ष-यक्षणियों की कई खंडित मूर्तियां मिली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में इन अवशेषों को स्पष्ट रूप से जैन धर्म से जुड़ा नहीं बताया।


    जैन तीर्थकरों और यक्ष-यक्षणियों की खंडित मूर्तियां मिलीं

    प्रिया जैन के मुताबिक सर्वे के दौरान सात फणों वाली ‘सप्त फणी कैनोपी’ संरचना भी सामने आई है, जो जैन प्रतीकों से मेल खाती है। उन्होंने कहा कि जैन समाज की यह लड़ाई किसी धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सच्चाई और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर है। जैन समाज ने यह भी दावा किया कि लंदन में संरक्षित वाग्देवी प्रतिमा और उससे जुड़े शिलालेख भोजशाला के जैन इतिहास की पुष्टि करते हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर समाज ने भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना के समान अधिकार की मांग हाईकोर्ट से की है।

    हिंदू समाज जिसे देवी सरस्वती की मूर्ति बताता है, वह असल में जैन धर्म की यक्षिणी अम्बिका देवी की मूर्ति है। फोटो में लंदन म्यूजियम में रखी मूर्ति व उसके साथ लिखा उसका परिचय दिख रहा है।


    खुर्शीद ने लंदन में रखी मूर्ति को लेकर भी किया था अलग दावा

    इससे पहले कुछ दिनों पहले हुई मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा था कि धार में स्थित भोजशाला पर पहला हमला मुस्लिमों ने नहीं, बल्कि गुजरात के सोलंकी शासकों ने किया था, साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि लंदन के म्यूजियम में रखी जिस प्रतिमा को हिंदू समाज वाग्देवी की बता रहा है वह असल में जैन समुदाय की देवी अम्बिका की मूर्ति है। अपने दावे के समर्थन में खुर्शीद ने लेखक रामसेवक गर्ग की लिखी पुस्तक और 2003 में लिखे गए ब्रिटिश म्यूजियम के पत्र का हवाला भी दिया था। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि ‘धार को पहले गुजरात के सोलंकी शासकों ने तहस-नहस किया था, जबकि मुस्लिम शासकों ने उजड़े ढांचे को फिर से व्यवस्थित किया था।’

    इसके साथ ही खुर्शीद ने साल 2003 में ब्रिटिश उच्चायोग की ओर से मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भेजे पत्र का हवाला दिया था और यह दावा भी किया कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता भोजशाला की वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा बता रहे हैं, वह असल में जैन समुदाय की देवी अम्बिका की मूर्ति है। बता दें कि भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।