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  • जेकेआरएलएम की पहल से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों के जरिए रोजगार और आय के बढ़े अवसर

    जेकेआरएलएम की पहल से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों के जरिए रोजगार और आय के बढ़े अवसर


    नई दिल्ली ।
    जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अवंतीपोरा में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने मिशन के सहयोग से फूड सर्विस एंटरप्राइज स्थापित कर यह साबित किया है कि उचित प्रशिक्षण, संसाधन और संस्थागत सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं सफल उद्यम खड़ा कर सकती हैं। इस पहल के जरिए महिलाओं को सम्मानजनक आय का साधन मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार हो रहे हैं।

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को जम्मू-कश्मीर में जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन यानी जेकेआरएलएम के नाम से लागू किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना और उनकी आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना है। अवंतीपोरा में शुरू किया गया फूड सर्विस उद्यम इसी प्रयास का एक उदाहरण है, जहां महिलाओं ने आजीविका के पारंपरिक साधनों से आगे बढ़कर कारोबार की दिशा में कदम रखा है।

    ग्रामीण विकास विभाग के सचिव एजाज असद ने बताया कि जेकेआरएलएम को ‘उम्मीद’ के नाम से भी जाना जाता है और इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक अवसरों का विस्तार किया है। उन्होंने कहा कि पुलवामा जिले में फूड सर्विस एंटरप्राइज शुरू किया गया है। इसके लिए राष्ट्रीय संसाधन संगठन ‘कुडुम्बश्री’ के साथ समझौता किया गया है। कुडुम्बश्री को फूड सर्विस से जुड़े उद्यमों को स्थापित करने और संचालित करने का अनुभव है।

    अधिकारियों के अनुसार पुलवामा सहित जम्मू-कश्मीर के 12 अन्य जिलों में भी इस तरह के उद्यम शुरू किए जा चुके हैं। योजना का लक्ष्य आने वाले समय में प्रदेश के सभी 20 जिलों तक इस मॉडल का विस्तार करना है। इन उद्यमों की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को दी जाएगी। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल समूह आधारित गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थायी आय और कारोबार के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

    जेकेआरएलएम की महिला अधिकारी शाबरा शर्मा ने बताया कि मिशन का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। अवंतीपोरा में स्थापित फूड सर्विस एंटरप्राइज इसी सोच के तहत विकसित किया गया है। महिलाओं को उद्यम संचालन से जोड़कर उन्हें व्यावसायिक अनुभव हासिल करने और अपनी आय बढ़ाने का अवसर दिया जा रहा है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन की समस्या भी महिलाओं के आर्थिक अवसरों में बाधा बनती है। इसे ध्यान में रखते हुए योजना के तहत जरूरतमंद महिलाओं को वाहनों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में करीब 96 हजार स्वयं सहायता समूह हैं, जिनसे लगभग साढ़े आठ लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के जरिए महिलाओं को सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें उद्यमिता की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। अवंतीपोरा का फूड सर्विस उद्यम इसी बदलाव की तस्वीर पेश करता है, जहां ग्रामीण महिलाएं अब केवल आजीविका चलाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने कारोबार को आगे बढ़ाने और दूसरों के लिए रोजगार पैदा करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही हैं।

  • युवा उद्यमिता को नई दिशा देने की तैयारी, 'यूथ अड्डा' से आत्मनिर्भरता पर यूपी सरकार का बड़ा फोकस

    युवा उद्यमिता को नई दिशा देने की तैयारी, 'यूथ अड्डा' से आत्मनिर्भरता पर यूपी सरकार का बड़ा फोकस


    नई दिल्ली । बदलती अर्थव्यवस्था और डिजिटल युग में युवाओं की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। पारंपरिक नौकरी की बजाय बड़ी संख्या में युवा अब स्टार्टअप, नवाचार, डिजिटल कारोबार और स्वरोजगार को अपने भविष्य के रूप में देख रहे हैं। इसी बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने युवाओं को उद्यमिता की ओर प्रोत्साहित करने के लिए ‘यूथ अड्डा’ पहल को विस्तार देने की दिशा में काम तेज किया है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाना है।

    राज्य सरकार का मानना है कि आज की पीढ़ी केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उसे ऐसा मंच चाहिए जहां विचारों को व्यवसाय में बदलने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और बाजार तक पहुंच की सुविधा एक ही स्थान पर मिल सके। इसी सोच के साथ ‘यूथ अड्डा’ को एक समग्र उद्यमिता मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां बिजनेस आइडिया से लेकर वित्तीय सहयोग और व्यवसाय विस्तार तक की पूरी प्रक्रिया में सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    इस पहल का मुख्य फोकस विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, पॉलीटेक्निक संस्थानों और आईटीआई में पढ़ने वाले विद्यार्थियों पर रखा गया है। सरकार चाहती है कि छात्र अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद केवल नौकरी की तलाश तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी क्षमता और नवाचार के आधार पर नए उद्यम स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ें। इसके लिए उन्हें प्रारंभिक स्तर से ही व्यवसाय योजना तैयार करने, बाजार की जरूरतों को समझने और उद्यम संचालन की जानकारी दी जाएगी।

    डिजिटल अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस मंच पर आधुनिक तकनीकों से जुड़े प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया गया है। युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डिजिटल कॉमर्स, ई-कॉमर्स और अन्य उभरती तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश के युवा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप अपने कौशल को विकसित कर सकें और भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के लिए तैयार रहें।

    ‘यूथ अड्डा’ केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा। यहां युवाओं को व्यवसाय योजना तैयार करने, परियोजना रिपोर्ट बनाने, बैंक ऋण प्राप्त करने, उद्यम पंजीकरण, जीएसटी प्रक्रिया, डिजिटल ब्रांडिंग, ऑनलाइन मार्केटिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ने तक निरंतर सहयोग प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही नए उद्यमियों के जोखिम को कम करने के लिए विभिन्न फ्रेंचाइजी मॉडल और अनुभवी विशेषज्ञों की मेंटरशिप भी उपलब्ध कराई जाएगी।

    राज्य सरकार इस पहल को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती। लक्ष्य है कि ‘यूथ अड्डा’ की सुविधाएं प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुंचें, ताकि ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं को भी समान अवसर मिल सकें। महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय उत्पादों और सूक्ष्म उद्योगों को भी इस पहल से जोड़कर उन्हें पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन संबंधी सहयोग उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सके।

    इस मंच पर वर्षभर विभिन्न गतिविधियां आयोजित करने की भी योजना है। बैंकर्स मीट, स्टार्टअप क्लिनिक, टेक्नोलॉजी वर्कशॉप, बिजनेस आइडिएशन कार्यक्रम, फाउंडर्स टॉक और उद्योग विशेषज्ञों के संवाद जैसे आयोजन युवाओं को व्यावहारिक अनुभव और नेटवर्किंग का अवसर देंगे। सरकार ने वर्ष 2027 तक लाखों युवाओं को इस पहल से जोड़ने, हजारों नए उद्यम स्थापित कराने और बड़े स्तर पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

    सरकार का मानना है कि यदि युवा रोजगार मांगने की बजाय रोजगार उपलब्ध कराने वाले बनते हैं, तो इससे प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी। इसी उद्देश्य से विभिन्न विभागों, वित्तीय संस्थानों और उद्योग विशेषज्ञों के सहयोग से ‘यूथ अड्डा’ को एक दीर्घकालिक उद्यमिता इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है।

  • मोबाइल फोन से शुरू की ब्रांडिंग, हेयर स्टार्टअप को बनाया करोड़ों का बिजनेस; पारुल गुलाटी की प्रेरक सफलता की कहानी

    मोबाइल फोन से शुरू की ब्रांडिंग, हेयर स्टार्टअप को बनाया करोड़ों का बिजनेस; पारुल गुलाटी की प्रेरक सफलता की कहानी

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री और उद्यमी पारुल गुलाटी ने यह साबित किया है कि सफल कारोबार की नींव केवल बड़ी पूंजी पर नहीं, बल्कि सही विचार, लगातार मेहनत और ग्राहकों की जरूरत को समझने पर टिकती है। महज ₹5,000 के शुरुआती निवेश से शुरू हुआ उनका हेयर एक्सटेंशन स्टार्टअप आज करीब 50 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंच चुका है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने व्यवसाय को जिस तरह आगे बढ़ाया, वह नए उद्यमियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।

    पारुल गुलाटी ने अभिनय के साथ-साथ उद्यमिता की राह तब चुनी, जब उन्होंने महसूस किया कि कई लोग बाल झड़ने और बाल पतले होने जैसी समस्याओं का सामना तो करते हैं, लेकिन इस विषय पर खुलकर बात नहीं करते। उस समय हेयर एक्सटेंशन को लेकर भी लोगों के मन में कई तरह की झिझक और गलत धारणाएं थीं। उन्होंने इसी समस्या को अवसर में बदलने का निर्णय लिया और वर्ष 2017 में अपने स्टार्टअप की शुरुआत की।

    शुरुआती दौर में उनके पास न तो बड़ा निवेश था और न ही महंगी मार्केटिंग का बजट। ऐसे में उन्होंने सोशल मीडिया को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। उन्होंने अपने मोबाइल फोन से ही वीडियो बनाकर लोगों को हेयर एक्सटेंशन के उपयोग, गुणवत्ता और फायदे समझाने शुरू किए। वह स्वयं अपने ब्रांड का चेहरा बनीं और नियमित रूप से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सामग्री साझा करती रहीं। इससे धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ा और उनके उत्पाद की पहचान बनने लगी।

    व्यवसाय के शुरुआती दिनों में पारुल खुद अपने हाथों से हेयर एक्सटेंशन तैयार करती थीं। ग्राहक जुटाना सबसे बड़ी चुनौती थी, लेकिन उन्होंने अलग तरीका अपनाया। विभिन्न कार्यक्रमों, ऑडिशन और सार्वजनिक आयोजनों में वह अपने उत्पाद का उपयोग करतीं, जिससे लोगों की जिज्ञासा बढ़ती। इसके बाद संभावित ग्राहक उनके उत्पाद के बारे में जानकारी लेने लगे और धीरे-धीरे ऑर्डर मिलने शुरू हो गए।

    ऑनलाइन लोकप्रियता मिलने से पहले पारुल अलग-अलग शहरों में आयोजित फ्ली मार्केट और प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाकर सीधे ग्राहकों से संवाद करती थीं। वह लोगों को उत्पाद का अनुभव करातीं और उन्हें तस्वीरें लेने के लिए प्रेरित करतीं। कई ग्राहक तत्काल खरीदारी नहीं करते थे, लेकिन बाद में सोशल मीडिया या तस्वीरों के माध्यम से दोबारा संपर्क कर उत्पाद खरीदते थे। इस रणनीति ने उनके व्यवसाय को शुरुआती गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    बाद में पारुल गुलाटी ने लोकप्रिय बिजनेस रियलिटी शो शार्क टैंक इंडिया में भी हिस्सा लिया। इस अनुभव को उन्होंने अपने उद्यमी जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उनके अनुसार, इस मंच ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि किसी भी स्टार्टअप की सफलता के लिए केवल अच्छा उत्पाद ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि वित्तीय योजना, व्यावसायिक रणनीति और निवेशकों की सोच को समझना भी उतना ही आवश्यक है।

    आज उनका स्टार्टअप देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है और हेयर एक्सटेंशन श्रेणी में प्रमुख ब्रांडों में गिना जाता है। पारुल की यात्रा यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि किसी समस्या का व्यावहारिक समाधान तैयार किया जाए और उसे सही तरीके से ग्राहकों तक पहुंचाया जाए, तो छोटा निवेश भी बड़े व्यवसाय में बदल सकता है। उनकी सफलता नए उद्यमियों को नवाचार, धैर्य और डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग की दिशा में प्रेरित करती है।

  • गौतम अदाणी की ‘वंदे भारतम्’ पहल लॉन्च, देश के हर कोने से उभरते इनोवेटर्स और उद्यमियों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच

    गौतम अदाणी की ‘वंदे भारतम्’ पहल लॉन्च, देश के हर कोने से उभरते इनोवेटर्स और उद्यमियों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच

    नई दिल्ली । देश के स्टार्टअप और नवाचार परिदृश्य को व्यापक आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उद्योगपति गौतम अदाणी ने ‘वंदे भारतम्’ नामक नई पहल की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के उन प्रतिभाशाली लोगों तक अवसर पहुंचाना है, जो बड़े शहरों से दूर रहते हैं लेकिन अपने विचारों, नवाचारों और उद्यमशीलता की क्षमता के बल पर समाज और अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने का सामर्थ्य रखते हैं।

    अपने 64वें जन्मदिन के अवसर पर शुरू की गई इस पहल को देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा। यह कार्यक्रम 800 से अधिक जिलों तक पहुंचेगा और विभिन्न भारतीय भाषाओं में संचालित होगा, जिससे अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इस पहल का उद्देश्य केवल स्थापित स्टार्टअप्स तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों को भी अवसर देना है जिनके पास कोई नया विचार, समाधान या व्यवसाय शुरू करने की इच्छा है।

    गौतम अदाणी ने कहा कि उनका अपना सफर भी सीमित संसाधनों से शुरू हुआ था और जो कुछ उन्होंने हासिल किया है, उसमें भारत की मिट्टी और अवसरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन अवसरों का समान वितरण अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में ‘वंदे भारतम्’ का लक्ष्य उन लोगों तक पहुंचना है, जिन्हें अब तक उचित पहचान और सहयोग नहीं मिल पाया है।

    इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए किसी विशेष आयु, शैक्षणिक योग्यता, पेशे या व्यवसायिक अनुभव की अनिवार्यता नहीं रखी गई है। प्रतिभागी अपने विचार, प्रोटोटाइप, शुरुआती चरण के स्टार्टअप या पहले से संचालित व्यवसाय के साथ आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए किसी कंपनी का औपचारिक रूप से पंजीकृत होना भी आवश्यक नहीं होगा। इससे बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को अवसर मिलेगा जो पारंपरिक ढांचे से बाहर रहकर भी नवाचार पर काम कर रहे हैं।

    पहल के तहत तकनीक, विनिर्माण, कृषि, पर्यावरणीय स्थिरता, पारंपरिक शिल्प, स्थानीय उद्योगों और सामुदायिक समाधान जैसे विविध क्षेत्रों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। विशेष रूप से महिलाओं, आदिवासी समुदायों, ग्रामीण क्षेत्रों के नवाचारकर्ताओं, दिव्यांग उद्यमियों और स्थानीय समस्याओं के समाधान विकसित करने वाले लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

    आवेदनों के मूल्यांकन के दौरान नवाचार की गुणवत्ता, उद्यमशीलता की क्षमता, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव तथा विस्तार की संभावनाओं को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। चयन प्रक्रिया विभिन्न चरणों में पूरी होगी, जिसमें राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर मूल्यांकन शामिल रहेगा। इसके बाद चुने गए 75 फाइनलिस्ट को अहमदाबाद में आयोजित विशेष कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाएगा।

    इस कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को अनुभवी मेंटर्स, उद्योग विशेषज्ञों, निवेशकों और व्यवसायिक नेताओं से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। साथ ही उन्हें इनक्यूबेशन सपोर्ट, रणनीतिक साझेदारी और संभावित निवेश तक पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनके विचारों को व्यवहारिक और टिकाऊ व्यवसाय में बदला जा सके।

    कार्यक्रम का ग्रैंड फिनाले स्वतंत्रता दिवस के आसपास आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से एक ऐसा राष्ट्रीय नेटवर्क विकसित करने की योजना है, जो नवाचारकर्ताओं, निवेशकों और उद्योग जगत के प्रमुख लोगों को एक साझा मंच पर जोड़ सके। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में उद्यमशीलता और नवाचार की व्यापक भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ऐसे में ‘वंदे भारतम्’ जैसी पहलें देश के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं।

  • एक लाख रुपये में किराए पर ली गई आलीशान कार के जरिए चाय बेचने का यह अनोखा प्रयोग शहर में चर्चा का विषय बना।

    एक लाख रुपये में किराए पर ली गई आलीशान कार के जरिए चाय बेचने का यह अनोखा प्रयोग शहर में चर्चा का विषय बना।

    नई दिल्ली:   भारतीय बाजार में चाय केवल एक पेय पदार्थ नहीं बल्कि एक गहरी भावना है जो समाज के हर वर्ग को आपस में जोड़ती है। हाल ही में व्यापार और मार्केटिंग की दुनिया में एक ऐसा अनूठा प्रयोग देखने को मिला जिसने न केवल आम जनता बल्कि विशेषज्ञों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। एक उत्साही युवा उद्यमी ने पारंपरिक चाय के व्यवसाय को एक नए और बेहद आलीशान कलेवर में पेश करने का साहसिक प्रयास किया। इस प्रयोग का मुख्य आकर्षण दुनिया की सबसे महंगी और प्रतिष्ठित कारों में शुमार होने वाली एक सवारी थी जिसे विशेष रूप से इस कार्य के लिए किराए पर लिया गया था। इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य यह परखना था कि क्या विलासिता और साधारण खान-पान का मेल एक सफल बिजनेस मॉडल के रूप में स्थापित हो सकता है।

    इस विशिष्ट अभियान को शुरू करने के लिए उद्यमी ने सबसे पहले एक प्रीमियम कार एजेंसी से संपर्क किया और लगभग एक लाख रुपये की भारी भरकम राशि खर्च करके एक आलीशान विदेशी कार को एक दिन के लिए किराए पर लिया। योजना को धरातल पर उतारने के लिए उसने एक स्थानीय चाय विक्रेता के साथ साझेदारी की और एक विस्तृत विज्ञापन अभियान चलाया। विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को सूचित किया गया कि अब वे सड़क किनारे मिलने वाली चाय का आनंद दुनिया की सबसे महंगी कार के अंदर बैठकर ले सकते हैं। इस प्रस्ताव ने देखते ही देखते शहर में उत्सुकता पैदा कर दी और लोग इस दुर्लभ अनुभव का हिस्सा बनने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचने लगे।

    बिजनेस मॉडल को इस तरह तैयार किया गया था कि अनुभव के आधार पर अलग-अलग कीमतें तय की गई थीं। जहां एक साधारण कप चाय की कीमत तीन सौ रुपये रखी गई थी वहीं असली आकर्षण कार के अंदर बैठकर चाय पीने और एक छोटी सवारी का आनंद लेने का था जिसके लिए एक हजार रुपये प्रति व्यक्ति का शुल्क निर्धारित किया गया था। ग्राहकों के स्वागत के लिए रेड कार्पेट बिछाया गया था और उन्हें एक विशिष्ट अनुभव देने के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे। चाय के साथ स्वादिष्ट बिस्कुट भी परोसी जा रही थी ताकि अनुभव को और भी यादगार बनाया जा सके। देखते ही देखते वहां भारी भीड़ जमा हो गई और कई परिवारों ने केवल उस महंगी कार के अंदर बैठने की चाहत में ऊंची कीमत चुकाकर चाय पी।

    हालांकि यह प्रयोग देखने में काफी आकर्षक और सफल लग रहा था लेकिन जब दिन के अंत में आंकड़ों का मिलान किया गया तो परिणाम उम्मीद के विपरीत निकले। पूरे आयोजन पर किया गया खर्च जिसमें कार का भारी किराया विज्ञापन का खर्च और अन्य प्रशासनिक प्रबंध शामिल थे लगभग एक लाख आठ हजार रुपये तक पहुंच गया था। इसके मुकाबले दिन भर की कुल कमाई केवल अठासी हजार चार सौ रुपये ही रही। इस तरह इस भव्य प्रयोग के बाद उद्यमी को लगभग उन्नीस हजार छह सौ रुपये का शुद्ध घाटा उठाना पड़ा। यह वित्तीय परिणाम यह साबित करता है कि केवल चर्चा बटोरना या किसी विषय का सुर्खियों में आना हमेशा मुनाफे की गारंटी नहीं होता। व्यापार में केवल मार्केटिंग ही पर्याप्त नहीं है बल्कि लागत और शुद्ध मुनाफे का सही संतुलन होना भी अनिवार्य है।

    इस घटना ने व्यापारिक जगत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक तरफ जहां कुछ लोग इसे एक साहसिक मार्केटिंग प्रयोग मान रहे हैं वहीं दूसरी तरफ कुछ विशेषज्ञ इसे बिना सोचे समझे किया गया एक महंगा स्टंट करार दे रहे हैं। विलासिता की वस्तुओं का उपयोग साधारण उत्पादों को बेचने के लिए करना एक जोखिम भरा कदम हो सकता है क्योंकि ग्राहक अनुभव के लिए एक बार तो मोटी रकम दे सकता है लेकिन उसे एक स्थाई आदत बनाना बहुत मुश्किल होता है। फिर भी इस प्रयोग ने यह तो साबित कर दिया कि भारतीय जनता नए और अनोखे अनुभवों के लिए हमेशा तैयार रहती है। घाटे के बावजूद इस युवा उद्यमी के साहस की सराहना की जा रही है क्योंकि उसने एक नया विचार दुनिया के सामने रखने का प्रयास किया।

  • इनोवेशन अपनाकर मध्य प्रदेश बनेगा उद्यमिता का हब : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    इनोवेशन अपनाकर मध्य प्रदेश बनेगा उद्यमिता का हब : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है। आज प्रदेश का युवा अपनी सोच को आकार देकर नए-नए इनोवेशन कर आईटी तकनीकी के माध्यम से स्टार्टअप कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की मंशा के अनुरूप वर्ष 2047 तक मध्य प्रदेश स्टार्टअप एवं इनोवेशन को अपनाते हुए उद्यमिता विकास का हब बन जाएगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इंदौर के सिंहासा में स्थित आईटी पार्क में बने लॉन्चपैड इनक्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर के लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आज दुनिया तेजी से बदल रही है। वर्तमान समय में इंसान को उसके ज्ञान से ही मापा जाता है। उन्होंने कहा कि युवा नवीन तकनीकी को अपनाएं और स्टार्टअप करें एवं दूसरों को रोजगार देने वाले सफल उद्यमी बने। उन्होंने कहा कि भोपाल में प्रदेश की पहली नॉलेज और एआई सिटी बन रही है। उज्जैन को साइंस सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। नवाचार और विज्ञान के माध्यम से अनेक कार्य हो रहे हैं। लोग कभी जमीन और प्रापर्टी को अपना सब कुछ समझते थे। अब तो ज्ञान ही सबसे बड़ा खजाना है। ज्ञान होने से मनुष्य अपने आप धनवान हो जाता है। नॉलेज के बलबूते पर उन्नति के मार्ग पर तेजी से जा सकते हैं। सत्यवादी मार्ग पर बढ़ने का यही समय है। भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन रहा है।

    उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भोपाल के अलावा इंदौर और उज्जैन क्षेत्र मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित होने वाले हैं। हमारे सभी संसाधन भविष्य की दृष्टि से विकसित किए जाएंगे। मध्य प्रदेश को इनोवेशन हब बनाकर प्रदेश की भूमिका को सशक्त करना है। मध्य प्रदेश नवाचार और उद्यमिता का केंद्र बन रहा है। मध्य प्रदेश स्टार्ट-अप पॉलिसी, फंडिंग सपोर्ट के माध्यम से इन्क्यूबेशन नेटवर्क स्थापित कर भारत की स्टार्टअप क्रान्ति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश के युवा एआई पर आधारित एग्रीटेक स्टार्टअप, हेल्थटेक, स्किलटेक, ग्रीन इनोवेशन और डिजिटल सॉल्यूशन में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर स्टार्टअप हब बन रहे हैं।


    लांचपैड सेंटर का किया निरीक्षण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लॉन्चपेड इनोवेशन सेंटर के लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान युवाओं द्वारा अपनी सोच को नवीन तकनीकी से आकर देकर निर्मित की गई अत्याधुनिक मशीनों का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि गत वर्ष इस सेंटर का भूमि-पूजन किया था और आज उसके लोकार्पण अवसर पर युवाओं की आधुनिक सोच एवं आइडियाज को देखकर अति प्रसन्नता हो रही है।


    स्टार्टअप वाले युवाओं से किया संवाद

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अपने आइडिया से स्टार्टअप शुरू करने वाले युवा उद्यमियों से संवाद किया। उन्होंने युवा उद्यमियों से जाना की वे किस क्षेत्र में कार्य कर रहे है। युवाओं के कार्यों के बारे में जानकर उनका हौंसला बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी कार्य को करने की अगर हमारी मंशा सही है तो उस कार्य में सफलता अवश्य मिलती है।

    भारतीय औद्योगिक प्रबंध संस्थान इंदौर के निदेशक सुभाष एस जोशी ने बताया कि “लॉन्चपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” की स्थापना आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन (आईआईटी इंदौर का टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन एवं रिसर्च पार्क) तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के संयुक्त सहयोग से की गई है। इस केंद्र का उद्देश्य डीप-टेक नवाचार को प्रोत्साहित करना, उच्च प्रभाव वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना, उन्नत विनिर्माण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में प्रदेश को सशक्त बनाना और उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच सहयोग को मजबूत करना है।


    विभिन्न कंपनियों के उद्यमियों से की चर्चा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्य कर रही विभिन्न कंपनियों के उद्यमियों से चर्चा भी की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी उद्यमियों से कहा कि अपनी कंपनियों में युवाओं को काम करने का मौका दें एवं उन्हें अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। हमारे देश में युवाओं के पास एक नई एवं आधुनिक सोच है हमारा देश चौथी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर कर आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक गोलू शुक्ला, मालिनी गौड़, राजेश मेंदोला, मनोज पटेल, अध्यक्ष सुमित मिश्रा, पवन सोनकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

    मध्य प्रदेश में नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में इंदौर के सिंहासा आईटी पार्क में स्थापित “लाँचपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” एक महत्वपूर्ण पहल है। इस केंद्र की स्थापना आईआईटीआई दृष्टि सीपीएस फाउंडेशन (आईआईटी इंदौर का टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन एवं रिसर्च पार्क) तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) के संयुक्त सहयोग से की गई है।


    “लॉन्चपैड : इन्क्यूबेशन एवं इनोवेशन सेंटर” एक महत्वपूर्ण पहल

    इंदौर के सिंहासा में स्थित आईटी पार्क में बने लगभग 10 हजार वर्ग फुट क्षेत्र में विकसित इस अत्याधुनिक केंद्र में 5 हजार वर्ग फुट का को-वर्किंग एवं इन्क्यूबेशन स्पेस और 5 हजार वर्ग फुट की उन्नत प्रयोगशाला अवसंरचना विकसित की गई है। केंद्र में स्थापित इंटेलिजेंट मैन्युफैक्चरिंग लैब के माध्यम से उत्पादों की प्रोटोटाइपिंग, परीक्षण और सत्यापन की सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। यह केंद्र विचार से लेकर व्यावसायीकरण तक संपूर्ण नवाचार प्रक्रिया को सहयोग प्रदान करेगा। साथ ही एआई,एमएल,इंडस्ट्री 4.0, रोबोटिक्स, डिजिटल हेल्थकेयर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं, एमएसएमई और नवाचारकर्ताओं को आवश्यक तकनीकी एवं संस्थागत समर्थन उपलब्ध कराया जाएगा।

    लगभग 10 करोड़ रुपये के अवसंरचना निवेश और 20 करोड़ रुपये के स्टार्टअप समर्थन प्रावधान के साथ यह केंद्र आगामी 7 वर्षों में 100 स्टार्टअप्स को विकसित करने और 200 से 300 रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य लेकर कार्य करेगा। यह केंद्र डीप-टेक नवाचार को प्रोत्साहित करने, उच्च प्रभाव वाले स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने, उन्नत विनिर्माण तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में प्रदेश की क्षमताओं को मजबूत करने और उद्योग तथा अकादमिक जगत के बीच सहयोग को सुदृढ़ करने का कार्य करेगा।

  • पीएम मोदी के नेतृत्व में तेजी से बढ़ा भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से कारोबार हुआ आसान

    पीएम मोदी के नेतृत्व में तेजी से बढ़ा भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से कारोबार हुआ आसान


    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम पिछले आठ वर्षों में अभूतपूर्व गति से बढ़ा है। केवल नीति समर्थन ही नहींबल्कि मजबूत डिजिटल और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण स्टार्टअप्स को अब व्यापार करना आसान हो गया है। यह बात स्टार्टअप फाउंडर्स ने गुरुवार को साझा की।हेल्थकेयर स्टार्टअप 1एमजी के सीईओ प्रशांत टंडन ने कहा कि आज भारत में एक उद्यमी को वही सुविधाएँ मिलती हैंजिनकी उसे ज़रूरत होती है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद स्टार्टअप्स को स्टॉपलाइट में रखा गयाजिससे भारत को ग्लोबल स्टार्टअप मैप पर मान्यता मिली। टंडन के अनुसार सरकार कॉरपोरेट्स और आम जनता भी अब स्टार्टअप्स की अहमियत समझ रही है।

    उन्होंने आगे बताया कि इस बदलाव के पीछे जेएएम ट्रिनिटी (जनधन आधार मोबाइल) और यूपीआई जैसे मजबूत पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इससे उद्यमियों को ऐसी प्रणालियाँ विकसित करने का अवसर मिला जिनसे देश की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।अर्बन कंपनी के सह-संस्थापक और सीईओ अभिराज सिंह बहल ने कहा कि जब उन्होंने अर्बन कंपनी शुरू की थी तब भारत में केवल एक-दो यूनिकॉर्न मौजूद थे। लेकिन पिछले आठ वर्षों में स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है। आज देश में 110 यूनिकॉर्न और हजारों स्टार्टअप्स विभिन्न सेक्टर्स में अपनी पहचान बना चुके हैं। उनके मुताबिक इस विकास और विस्तार का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है।

    प्रिस्टिन केयर के सह-संस्थापक हरसिमरबीर सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी के 2015 के न्यूयॉर्क भाषण को उनके जीवन में परिवर्तनकारी बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री में स्टार्टअप्स के लिए CEO जैसी विशेषताएं हैं-समस्याओं को तुरंत पहचानना और उनका समाधान करना। उन्होंने सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के हालिया उदाहरण का जिक्र किया जहां सरकार ने समय रहते निवेश और सुधार के लिए पहल की।

    रेज कॉफी के संस्थापक भरत सेठी ने 2016 में स्टार्टअप इंडिया मिशन के उद्घाटन का अनुभव साझा किया। उनके मुताबिकउस समय भारत परिवर्तन के दौर से गुजर रहा था और इस मिशन ने स्टार्टअप्स के लिए एक नई दिशा तय की। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप इंडिया मिशन ने न केवल व्यवसायियों को प्रोत्साहित किया बल्कि पूरे देश में उद्यमिता के लिए जागरूकता भी बढ़ाई।स्टार्टअप फाउंडर्स का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नीति  डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रेरणा का अनोखा मिश्रण भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सक्षम रहा है।

  • मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 11 और 12 जनवरी को: सशक्त स्टार्ट-अप ईको-सिस्टम में मिलेगी मदद

    मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 11 और 12 जनवरी को: सशक्त स्टार्ट-अप ईको-सिस्टम में मिलेगी मदद


    नई दिल्ली । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘विकसित एम.पी. @2047’विज़न को सकारात्मक गति देने और अधिक सुदृढ़ करने के साथ ही स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को अगले स्तर तक ले जाने के उद्देश्य से 11 एवं 12 जनवरी 2026 को रवींद्र भवन, भोपाल में मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप समिट 2026 का आयोजन होने जा रहा है। सोमवार 12 जनवरी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसमें सहभागिता करेंगे। समिट में राज्य एवं देश भर से स्टार्ट-अप्स, निवेशक, इनक्यूबेटर्स, उद्योग प्रतिनिधि, शैक्षणिक संस्थान एवं अन्य हितधारक सहभागिता करेंगे। यह समिट स्टार्ट-अप्स को निवेश, नेटवर्किंग, नीति संवाद एवं नवाचार प्रदर्शन का एक सशक्त मंच प्रदान करेगी।

    प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति–2025 का फ़रवरी 2025 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट भोपाल में विमोचन के साथ राज्य में नवाचार एवं उद्यमिता को एक नई दिशा प्राप्त हुई। नीति के सफल क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप प्रदेश के स्टार्ट-अप इको-सिस्टम को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान एवं तीव्र गति प्राप्त हुई है। नवीन नीति से स्टार्ट-अप्स के प्रत्येक चरण के लिए वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन, निवेश, पेटेंट सहयोग एवं बाजार से जुड़ाव जैसे अनेक सशक्त प्रावधान सुनिश्चित किए गए, जिससे प्रदेश में नवाचार-आधारित आर्थिक विकास को गति मिली है।

    आयुक्त एमएसएमई श्री दिलीप कुमार ने स्टार्ट-अप्स, नव प्रवर्तकों, उद्यमियों, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स एवं स्टार्ट-अप इको-सिस्टम से जुड़े हितधारकों का आह्वान किया है कि वे इस स्टार्ट-अप समिट में सक्रिय रूप से सहभागिता करें। आयुक्त एमएसएमई ने कहा कि स्टार्ट-अप्स नवाचार-आधारित विकास एवं रोजगार सृजन की आधारशिला है। यह समिट स्टार्ट-अप्स के लिए अपने विचारों, उत्पादों एवं समाधानों को प्रदर्शित करने, निवेशकों एवं नीति-निर्माताओं से संवाद स्थापित करने तथा मध्यप्रदेश के सशक्त स्टार्ट-अप इको-सिस्टम का हिस्सा बनने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

  • गुजरात बन रहा स्टार्टअप और नवाचार का हब, आई-हब से युवा स्टार्टअप्स को मिल रही प्रगति की राह

    गुजरात बन रहा स्टार्टअप और नवाचार का हब, आई-हब से युवा स्टार्टअप्स को मिल रही प्रगति की राह


    अहमदाबाद । गुजरात देश के उन राज्यों में तेजी से शामिल हो रहा है जहां नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत आधार मिल रहा है। सक्रिय सरकारी नीतियों और युवाओं को आगे बढ़ाने वाले दृष्टिकोण के चलते गुजरात आज युवा उद्यमिता का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। गुजरात सरकार की स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी के तहत स्थापित आई-हब गुजरात ने नए विचारों को सफल व्यवसायों में बदलने में अहम भूमिका निभाई है।

    एसएसआईपी को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए वर्ष 2019 में ई-हब गुजरात की स्थापना की गई थी। यह एक सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है जहां छात्रों नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप्स को विचार से लेकर बाजार तक की पूरी यात्रा में सहयोग मिलता है। आइडिया की पहचान उसकी जांच इनक्यूबेशन और बाजार तक पहुंच बनाने तक ई-हब हर चरण में मार्गदर्शन मेंटरशिप और संस्थागत समर्थन प्रदान करता है।

    अहमदाबाद में स्थित अत्याधुनिक ई-हब परिसर में इस समय सैकड़ों स्टार्टअप्स को तैयार किया जा रहा है। यहां स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन सुविधाएं अनुभवी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और फंडिंग के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं जिससे युवा उद्यमियों को शुरुआती चुनौतियों से उबरने और अपने विचारों को टिकाऊ व्यवसाय में बदलने में मदद मिलती है।

    गुजरात की नवाचार केंद्रित सोच को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। भारत सरकार की स्टेट स्टार्टअप रैंकिंग 2018 में गुजरात को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया था। यह उपलब्धि एसएसआईपी जैसी नीतियों और राज्य के मजबूत स्टार्टअप ढांचे की सफलता को दर्शाती है। गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग के अंतर्गत काम करने वाला ई-हब छात्रों शैक्षणिक संस्थानों उद्योग और समाज के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रहा है।

    गुजरात लगातार भारत सरकार की स्टार्टअप रैंकिंग में शीर्ष राज्यों में शामिल रहा है। इसका श्रेय एसएसआईपी ई-हब गुजरात सेक्टर आधारित इनक्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाओं को जाता है। राज्य में फिनटेक एग्रीटेक हेल्थटेक मैन्युफैक्चरिंग क्लीन एनर्जी और डीप टेक जैसे क्षेत्रों में हजारों पंजीकृत स्टार्टअप्स सक्रिय हैं।

    अहमदाबाद गांधीनगर सूरत वडोदरा और राजकोट जैसे शहर स्टार्टअप हब के रूप में उभर चुके हैं। यहां 100 से अधिक इनक्यूबेशन सेंटर विश्वविद्यालयों से जुड़े इनोवेशन सेल सरकारी सीड फंडिंग और मजबूत एमएसएमई व औद्योगिक क्लस्टर मौजूद हैं। विश्वस्तरीय बंदरगाह बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी निवेशकों के अनुकूल शासन और व्यापार व निर्माण से जुड़ी उद्यमशील संस्कृति गुजरात को देशभर के स्टार्टअप्स और नवाचारकर्ताओं के लिए पसंदीदा राज्य बना रही है।