Tag: Environmental conservation

  • बिना बैंड बाजा और बिना दिखावे की शादी पर्यावरण संरक्षण का देगा खास संदेश

    बिना बैंड बाजा और बिना दिखावे की शादी पर्यावरण संरक्षण का देगा खास संदेश

     
    इंदौर । शादियों में बढ़ते दिखावे और फिजूलखर्ची के दौर में इंदौर का एक परिवार समाज के सामने नई मिसाल पेश करने जा रहा है। शहर के व्यवसायी और समाजसेवी अक्षय जैन ने अपने पुत्र पार्थ जैन के 12 जुलाई को होने वाले विवाह समारोह को केवल पारिवारिक आयोजन तक सीमित रखने का फैसला किया है। इस विवाह की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें न बैंड बाजा होगा और न ही भव्य सजावट व दिखावे पर खर्च किया जाएगा। इसके बजाय पूरा आयोजन सादगी संस्कार और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ संपन्न होगा।

    जैन परिवार ने विवाह में शामिल होने वाले सभी मेहमानों से विशेष आग्रह किया है कि वे किसी भी प्रकार का उपहार लिफाफा या भेंट लेकर न आएं। परिवार का कहना है कि नवदंपती के लिए सबसे बड़ा उपहार बड़ों का आशीर्वाद और अपने लोगों का स्नेह ही है। इसलिए किसी भी तरह की भौतिक भेंट की आवश्यकता नहीं है।

    इसके साथ ही परिवार ने एक अनूठी अपील भी की है। सभी मेहमानों से कहा गया है कि वे नवदंपती को आशीर्वाद देने के लिए अपने घर आंगन खेत या आसपास किसी भी उपयुक्त स्थान पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी नियमित देखभाल का संकल्प भी लें। उनका मानना है कि यदि हर शुभ अवसर को प्रकृति से जोड़ दिया जाए तो समाज में पर्यावरण संरक्षण को लेकर नई जागरूकता पैदा होगी और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ तथा हराभरा वातावरण मिल सकेगा।

    अक्षय जैन का कहना है कि इस निर्णय के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा समय समय पर दिए गए सादगी मितव्ययता और पर्यावरण संरक्षण के संदेशों से प्रेरणा मिली है। उनका मानना है कि विवाह जैसे सामाजिक आयोजनों में अनावश्यक खर्च के बजाय समाज और प्रकृति के हित में सकारात्मक पहल की जानी चाहिए ताकि ऐसे आयोजन दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकें।

    विवाह समारोह पूरी तरह जैन परंपराओं के अनुसार आयोजित किया जाएगा। सभी धार्मिक अनुष्ठान नवकार महामंत्र और मंगलाचरण के बीच संपन्न होंगे। जैन धर्म की परंपरा का पालन करते हुए किसी भी प्रकार का रात्रिकालीन कार्यक्रम नहीं रखा गया है। विवाह से जुड़ी सभी रस्में दिन के समय पूरी की जाएंगी। मेहमानों के लिए जमीकंद रहित सात्विक भोजन की व्यवस्था भी की गई है।

    सामाजिक संगठनों और शहर के कई लोगों ने इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि आज जब शादियां अक्सर दिखावे और प्रतिस्पर्धा का माध्यम बनती जा रही हैं तब इस तरह का आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला प्रयास है। यदि अधिक से अधिक परिवार इस सोच को अपनाएं तो विवाह समारोह केवल खुशियों का अवसर ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का माध्यम भी बन सकते हैं। इंदौर का यह विवाह सादगी संस्कार और हरियाली का संदेश देकर समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनने जा रहा है।

  • चित्रकूट में अनोखी पहल: चीफ जस्टिस समेत जज और स्टाफ साइकिल से पहुंचे कोर्ट, दिया पर्यावरण बचाने का संदेश

    चित्रकूट में अनोखी पहल: चीफ जस्टिस समेत जज और स्टाफ साइकिल से पहुंचे कोर्ट, दिया पर्यावरण बचाने का संदेश



    चित्रकूट । चित्रकूट में पर्यावरण संरक्षण का एक अनोखा संदेश देखने को मिला जब प्रधान न्यायाधीश राकेश कुमार यादव अपने सहयोगी जजों और स्टाफ के साथ साइकिल से न्यायालय पहुंचे। इस पहल में सिविल जज अंशुमान यादव समेत अन्य कर्मचारी भी शामिल रहे और सभी ने मिलकर साइकिल चलाकर पर्यावरण बचाने का संदेश दिया।

    जानकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम सुबह करीब छह बजे शुरू हुआ और सभी लोग साइकिल से यात्रा करते हुए लगभग साढ़े छह बजे न्यायालय पहुंचे। इस दौरान उन्होंने लोगों को ईंधन बचाने और प्रदूषण कम करने के लिए साइकिल के उपयोग को अपनाने का संदेश दिया।

    न्यायालय पहुंचने के बाद प्रधान न्यायाधीश राकेश कुमार यादव ने अधिवक्ताओं, शहरवासियों और वादकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण और ईंधन संकट को देखते हुए साइकिल का उपयोग एक महत्वपूर्ण और आवश्यक कदम है।

    उन्होंने यह भी कहा कि साइकिल न केवल पर्यावरण को सुरक्षित रखने में मदद करती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।

    जजों और स्टाफ की इस पहल को न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों ने सराहा और इसे एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि छोटी दूरी के लिए मोटर वाहनों के बजाय साइकिल का उपयोग करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सके।

    यह पहल पर्यावरण जागरूकता की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम मानी जा रही है, जो समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराती है।

  • पीएम मोदी की अपील का असर, उत्तराखंड में सीएम धामी ने घटाया काफिला, ऊर्जा संरक्षण पर दिया जोर

    पीएम मोदी की अपील का असर, उत्तराखंड में सीएम धामी ने घटाया काफिला, ऊर्जा संरक्षण पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री Narendra Modi की ऊर्जा बचत और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की अपील का असर अब राज्यों में भी देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने एक बड़ा और प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए अपने सरकारी काफिले की गाड़ियों की संख्या आधी कर दी है।

    मुख्यमंत्री ने इस पहल को केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि राष्ट्रहित से जुड़ा संकल्प बताया है। उनका कहना है कि ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों का सही उपयोग आज की आवश्यकता है, और हर स्तर पर इसके लिए जिम्मेदारी निभाना जरूरी है। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर और पर्यावरण के प्रति जागरूक भारत के निर्माण की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

    धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री की यह अपील सिर्फ ऊर्जा बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सोच है जो देश को अधिक जिम्मेदार और सतत विकास की ओर ले जाती है। इसी सोच के तहत उन्होंने अपने मंत्रियों, अधिकारियों और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी अपील की है कि वे अनावश्यक वाहनों के उपयोग से बचें और जहां संभव हो, सार्वजनिक परिवहन को अपनाएं।

    राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि इस पहल को आगे बढ़ाते हुए ऊर्जा संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए सरकारी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाएगा।

    इससे पहले भी प्रधानमंत्री ने कई मौकों पर ऊर्जा बचत और ईंधन के कम उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन के अधिक इस्तेमाल और अनावश्यक खपत को कम करने की सलाह दी थी, ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत किया जा सके।

    इसी दिशा में यह कदम एक प्रतीकात्मक संदेश देता है कि यदि नेतृत्व स्तर पर बदलाव आता है, तो उसका असर समाज के अन्य वर्गों तक भी तेजी से पहुंचता है।

  • भिंड में चंबल नदी किनारे ऊंट सफारी की शुरुआत सस्ती कीमतों में ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थल होंगे दिखाए

    भिंड में चंबल नदी किनारे ऊंट सफारी की शुरुआत सस्ती कीमतों में ऐतिहासिक व प्राकृतिक स्थल होंगे दिखाए


    भिंड । भिंड जिले के अटेर में वन विभाग ने चंबल नदी के किनारे ऊंट सफारी की शुरुआत की है। इस सफारी के जरिए पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक स्थलों की सैर कर सकेंगे। सफारी का ट्रैक करीब 10 किमी लंबा है और इसमें अटेर किला चामुंडा देवी मंदिर और वन्य जीवों को दिखाया जा रहा है। इस सफारी के लिए पर्यटकों को 200 रुपये और 500 रुपये के टिकट मिल रहे हैं और यह सफारी सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगी।

    वन विभाग ने सफारी के संचालन के लिए एक विस्तृत योजना बनाई है। पर्यटक अटेर स्थित वन विभाग कार्यालय से आफलाइन टिकट प्राप्त कर सकते हैं। चंबल क्षेत्र प्राकृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और यह इको-टूरिज्म गतिविधियां क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरणीय संरक्षण में योगदान करेंगी। इस पहल के तहत वन विभाग स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन के अवसर भी पैदा कर रहा है जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

    वन विभाग की रेंजर कृतिका शुक्ला ने बताया कि सफारी में स्थानीय व्यंजन पेश करने की योजना भी बनाई जा रही है। इसके जरिए स्थानीय समुदाय को आर्थिक लाभ मिलेगा। वर्तमान में 11 ऊंटों का उपयोग सफारी में किया जा रहा है और जैसे-जैसे सफारी की लोकप्रियता बढ़ेगी इस में और भी ऊंटों को शामिल किया जाएगा।

    सुरक्षा और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए वन विभाग ने सफारी के मार्ग को विशेष रूप से तैयार किया है। सफारी में आने वाले पर्यटकों को चंबल क्षेत्र के इतिहास और वन्य जीवन के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा विभाग उत्तराखंड के ऋषिकेश की तर्ज पर यहां कैंपिंग की सुविधा भी शुरू करने की योजना बना रहा है। इससे पर्यटकों को एक अलग अनुभव मिलेगा जो स्थानीय पर्यटन को और आकर्षक बना देगा।

    यह सफारी क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और कारीगरी को भी प्रदर्शित करने का एक अवसर है। इसे वन्य जीवों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है जो आने वाले समय में स्थानीय वन्य जीवन और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में मदद करेगा।