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  • जबलपुर में नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी पर ईओडब्ल्यू का शिकंजा, आय से अधिक संपत्ति मामले में घर पर छापा

    जबलपुर में नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी पर ईओडब्ल्यू का शिकंजा, आय से अधिक संपत्ति मामले में घर पर छापा


    जबलपुर जबलपुर में मंगलवार को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की टीम ने नगर निगम के प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पोला राव के निवास पर छापामार कार्रवाई कर हड़कंप मचा दिया। आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिलने के बाद कोर्ट से सर्च वारंट प्राप्त कर यह कार्रवाई की गई। सुबह शुरू हुई जांच देर तक जारी रही, जिसमें अधिकारियों ने संपत्ति, बैंक खातों और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की पड़ताल की।

    जानकारी के अनुसार, पोला राव वर्तमान में जबलपुर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं। मूल रूप से आंध्रप्रदेश निवासी पोला राव का निवास विजय नगर क्षेत्र स्थित मुस्कान प्लाजा में है, जहां ईओडब्ल्यू की टीम ने पहुंचकर तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने घर के भीतर मौजूद दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, बीमा पॉलिसियों और अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच की।

    प्रारंभिक जांच में ईओडब्ल्यू को जबलपुर में पोला राव के नाम एक फ्लैट और लगभग 10 हजार वर्गफुट का प्लॉट होने की जानकारी मिली है। इसके अलावा आंध्रप्रदेश में करीब एक एकड़ कृषि भूमि से संबंधित दस्तावेज भी जांच के दौरान सामने आए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन संपत्तियों का वास्तविक मूल्य और उनकी खरीद के स्रोत की जांच करना आवश्यक है।

    ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के अनुसार जांच में चार दोपहिया वाहन और एक चारपहिया वाहन की जानकारी भी मिली है, जिनकी अनुमानित कीमत 15 से 16 लाख रुपए बताई जा रही है। टीम ने इन वाहनों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी है। साथ ही बैंक खातों में हुए लेन-देन, निवेश और बीमा योजनाओं से संबंधित अभिलेखों को भी जब्त किया गया है।

    जांच के दौरान अधिकारियों का ध्यान पोला राव के पारिवारिक संबंधों और उनसे जुड़े संपत्ति विवरणों पर भी गया है। ईओडब्ल्यू के अनुसार उनकी बहन और बहनोई भी जबलपुर में निवास करते हैं। उनके मकान और उससे संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि संबंधित संपत्ति नजूल भूमि पर बनी हुई है, इसलिए उसके वैधानिक पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

    ईओडब्ल्यू के डीएसपी मनजीत सिंह ने बताया कि फिलहाल सभी दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अधिकारी की घोषित आय और उनके नाम पर मौजूद संपत्तियों के बीच कितना अंतर है। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति के प्रमाण मिलते हैं तो आगे नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    गौरतलब है कि पोला राव वर्तमान में नगर निगम के कई महत्वपूर्ण वार्डों का प्रभार संभाल रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ हुई यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बन गई है। देर शाम तक जारी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उनके पास कुल कितनी चल-अचल संपत्ति है और उसका स्रोत क्या है। फिलहाल ईओडब्ल्यू की कार्रवाई जारी है और अधिकारी पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं।

  • आय से अधिक संपत्ति मामला: पूर्व डिप्टी डायरेक्टर की 11.81 करोड़ की संपत्ति PMLA के तहत अटैच

    आय से अधिक संपत्ति मामला: पूर्व डिप्टी डायरेक्टर की 11.81 करोड़ की संपत्ति PMLA के तहत अटैच


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के भोपाल जोनल ऑफिस ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक बड़ी कार्रवाई की है। आदिम जाति कल्याण विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जगदीश सरवटे के खिलाफ PMLA 2002 के तहत 11.81 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को प्रोविजनल रूप से अटैच किया गया है। यह कार्रवाई भोपाल जोनल ऑफिस की ओर से आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई थी जिसमें संपत्ति के स्रोत और उसके दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

    जगदीश सरवटे मध्यप्रदेश के जबलपुर में आदिम जाति कल्याण विभाग में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर तैनात रहे हैं। उनके खिलाफ यह मामला आय से अधिक संपत्ति के संदेह पर दर्ज किया गया था। आरोप है कि उनके पास घोषित आय से कहीं अधिक संपत्ति पाई गई है जिसके चलते विभाग ने PMLA की धाराओं के तहत यह कठोर कदम उठाया है।

    आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अचल संपत्तियों को प्रोविजनल रूप से अटैच किया गया है और मामले की आगे की जांच जारी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि संपत्ति के वैध दस्तावेज और स्रोत की पुष्टि होने पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    यह कार्रवाई EOW की पिछली कार्रवाई से जुड़ी हुई है जब जबलपुर EOW की टीम ने छापेमारी के दौरान करोड़ों की संपत्ति के साथ बाघ की खाल भी बरामद की थी। उस जांच में EOW को आरोपी की आय से अधिक करोड़ों रुपए की संपत्ति मिलने की जानकारी मिली थी।

    अब इस मामले में PMLA के तहत अटैचमेंट की प्रक्रिया पूरी की गई है जिससे आरोपी की संपत्ति को किसी भी तरह की बिक्री या हस्तांतरण से रोक दिया गया है। PMLA 2002 के तहत अटैचमेंट का अर्थ है कि संपत्ति को अस्थायी रूप से सीज कर दिया जाता है ताकि जांच पूरी होने तक उसका उपयोग या हेरफेर न हो सके।

    इस मामले में EOW की जांच जारी है और आगे की जांच में यह देखा जाएगा कि आरोपी ने संपत्ति के स्रोत को सही तरीके से दिखाया या नहीं। यदि जांच में आरोप साबित होते हैं तो आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ संपत्ति को फॉरफिट भी किया जा सकता है। मामले की गूंज अब पूरे राज्य में सुनाई दे रही है क्योंकि यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के खिलाफ सरकार की सख्त नीति को दर्शाती है।

  • ED की बड़ी कार्रवाई: नगर निगम के पूर्व सहायक राजस्व अधिकारी की 1.06 करोड़ की संपत्ति कुर्क, आय से अधिक संपत्ति का आरोप

    ED की बड़ी कार्रवाई: नगर निगम के पूर्व सहायक राजस्व अधिकारी की 1.06 करोड़ की संपत्ति कुर्क, आय से अधिक संपत्ति का आरोप


    इंदौर । प्रवर्तन निदेशालय ED ने इंदौर में आय से अधिक संपत्ति आनुपातिक संपत्ति मामले में बड़ी कार्रवाई की है। नगर निगम में पदस्थ रहे पूर्व सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार और उनके परिजनों की कुल 1 करोड़ 6 लाख रुपए की संपत्ति कुर्क की गई है। यह कार्रवाई ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर की जा रही जांच के दौरान की गई है।

    ED की जांच में यह तथ्य सामने आया कि 2007 से 2022 के बीच राजेश परमार ने अपनी आय से अधिक 175 प्रतिशत संपत्ति अर्जित की थी। इस दौरान उन्होंने अपनी आय और संपत्ति के संबंध में कोई पुख्ता दस्तावेज या प्रमाण पेश नहीं कर सके।कुर्क की गई संपत्ति में एक रहवासी मकान, प्लॉट, फ्लैट और कृषि भूमि शामिल है।

    ED ने इस कार्रवाई के बाद संबंधित संपत्तियों को जब्ती में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति निर्माण के खिलाफ सरकार की नीतियों और ED की सख्ती को दर्शाती है। अब जांच एजेंसी यह देखेगी कि संपत्ति का स्रोत कहां से आया और क्या कोई अन्य संदिग्ध लेन-देन जुड़ा है।