Tag: EPF

  • EPFO ने EPF की ब्याज दर को 8.25% पर रखा बरकार….. करोड़ों सदस्यों को होगा फायदा

    EPFO ने EPF की ब्याज दर को 8.25% पर रखा बरकार….. करोड़ों सदस्यों को होगा फायदा


    नई दिल्ली।
    ईपीएफओ (EPFO) ने वित्तवर्ष 2026 के लिए 8.25% ब्याज दर बरकरार रखी है और यह कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees Provident Fund Organization- EPFO) के करोड़ों सदस्यों के लिए राहत की खबर है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 2 मार्च 2026 को इसकी जानकारी दी थी। हालांकि ब्याज दर (Interest Rate) की घोषणा हुए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक अधिकांश खाताधारकों के खातों में ब्याज की राशि दिखाई नहीं दी है।


    कब खाते में आएगा EPF का ब्याज?

    EPFO द्वारा ब्याज दर की घोषणा के बाद उसे केंद्र सरकार की मंजूरी मिलनी होती है। इसके बाद करोड़ों खातों का मिलान और रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसी वजह से ब्याज जमा होने में कुछ समय लगता है। आमतौर पर EPF खातों में पिछले वित्त वर्ष का ब्याज जून से सितंबर के बीच जमा किया जाता है। इसलिए सदस्य आने वाले महीनों में अपने खाते में ब्याज की एंट्री देख सकते हैं।


    देरी हो सकती है, लेकिन पूरा ब्याज मिलेगा

    EPFO ने स्पष्ट किया है कि भले ही ब्याज जमा होने में कुछ समय लगे, लेकिन सभी पात्र सदस्यों को पूरा ब्याज मिलेगा। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सभी खातों की पासबुक में ब्याज की एंट्री एक साथ दिखाई नहीं देती। अलग-अलग खातों में यह अपडेट अलग-अलग समय पर नजर आ सकता है।


    कैसे चेक करें कि ब्याज जमा हुआ या नहीं?

    EPF सदस्य कई तरीकों से यह जांच सकते हैं कि उनके खाते में ब्याज जमा हुआ है या नहीं।
    1. UMANG ऐप: UMANG ऐप में लॉगिन कर EPF पासबुक देख सकते हैं।
    2. EPFO पोर्टल: EPFO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पासबुक चेक की जा सकती है।
    3. मिस्ड कॉल सेवा: रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से EPFO की मिस्ड कॉल सेवा का उपयोग किया जा सकता है।
    4. SMS सुविधा: UAN से जुड़े मोबाइल नंबर से SMS भेजकर खाते की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।


    EPFO 3.0 में मिलेगा UPI से पैसा निकालने का विकल्प

    EPFO जल्द ही अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म EPFO 3.0 के तहत बड़ी सुविधा शुरू करने जा रहा है। इसके बाद सदस्य अपने पीएफ खाते से सीधे बैंक खाते में राशि ट्रांसफर कर सकेंगे।

    EPFO 3.0 के तहत UPI के माध्यम से सीधे बैंक खाते में PF राशि ट्रांसफर, UMANG ऐप पर उपलब्ध निकासी राशि की जानकारी और QR कोड के जरिए सुरक्षित ट्रांसफर की सुविधा मिलेगी। बैंक खाते में पैसा आने के बाद ATM या UPI से उपयोग की सुविधा भी मिलेगी। वहीं, ऑटो-सेटलमेंट की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की गई है।


    अब नहीं होगी लंबी प्रक्रिया

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद पीएफ निकासी के लिए लंबी प्रतीक्षा और कई स्तर की मंजूरी की जरूरत कम हो जाएगी। सदस्य सीधे अपने लिंक्ड बैंक खाते में राशि प्राप्त कर सकेंगे और जरूरत के अनुसार उसका उपयोग कर सकेंगे।

    करोड़ों कर्मचारियों को मिलेगा फायदा: EPFO 3.0 को कर्मचारियों के लिए एक बड़ा डिजिटल सुधार माना जा रहा है। इससे पीएफ निकासी प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, आसान और पारदर्शी होने की उम्मीद है।

  • EPF और EPS में क्या है अंतर? रिटायरमेंट से पहले समझ लें पूरा गणित

    EPF और EPS में क्या है अंतर? रिटायरमेंट से पहले समझ लें पूरा गणित


    नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों की सैलरी स्लिप में हर महीने PF यानी प्रोविडेंट फंड की कटौती जरूर दिखाई देती है, लेकिन ज्यादातर कर्मचारियों को यह नहीं पता होता कि यह पैसा आखिर कहां जमा होता है और रिटायरमेंट के समय इससे कितना फायदा मिलता है। दरअसल, PF केवल एक सेविंग स्कीम नहीं, बल्कि भविष्य की आर्थिक सुरक्षा और पेंशन का मजबूत आधार है। यही वजह है कि लंबे समय तक नौकरी करने वालों के लिए EPF और EPS दोनों बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और डीए का 12 प्रतिशत हिस्सा हर महीने PF के रूप में काटा जाता है। इतनी ही राशि कंपनी की ओर से भी जमा की जाती है। हालांकि, कंपनी का पूरा 12 प्रतिशत सीधे EPF खाते में नहीं जाता। यही वह हिस्सा है जिसे लेकर अधिकांश कर्मचारियों के मन में भ्रम रहता है।

    कर्मचारी के योगदान का पूरा 12 प्रतिशत Employees’ Provident Fund यानी EPF खाते में जमा होता है। वहीं कंपनी के 12 प्रतिशत योगदान में से केवल 3.67 प्रतिशत EPF में जाता है, जबकि 8.33 प्रतिशत हिस्सा Employees’ Pension Scheme यानी EPS में ट्रांसफर कर दिया जाता है। EPS का मकसद कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन उपलब्ध कराना होता है।

    अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 25 हजार रुपये है, तो कर्मचारी की ओर से हर महीने 3 हजार रुपये EPF में जमा होंगे। कंपनी भी 3 हजार रुपये देगी, लेकिन इसमें से करीब 1,250 रुपये EPS में चले जाएंगे और बाकी राशि EPF खाते में जुड़ जाएगी। यानी कर्मचारी के EPF अकाउंट में हर महीने कर्मचारी और कंपनी दोनों के हिस्से मिलाकर रकम जमा होती रहती है, जिस पर सालाना ब्याज भी मिलता है।

    फिलहाल EPFO कर्मचारियों के EPF बैलेंस पर करीब 8.25 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दे रहा है। यही वजह है कि लंबे समय तक लगातार नौकरी करने पर PF का फंड लाखों से बढ़कर करोड़ों तक पहुंच सकता है। कंपाउंडिंग का फायदा इसमें सबसे बड़ा रोल निभाता है।

    वहीं EPS में जमा राशि पर ब्याज नहीं मिलता, क्योंकि यह पेंशन स्कीम के तहत संचालित होती है। हालांकि, 10 साल या उससे अधिक नौकरी करने वाले कर्मचारियों को 58 साल की उम्र के बाद मासिक पेंशन का लाभ मिलता है। पेंशन की राशि नौकरी की अवधि और सैलरी के आधार पर तय की जाती है।

    आजकल सोशल मीडिया और Reddit जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी लोग EPS को लेकर सवाल पूछते नजर आते हैं। कई कर्मचारियों को लगता है कि उनका EPS बैलेंस दिखाई क्यों नहीं देता। विशेषज्ञों के मुताबिक EPS राशि सीधे पेंशन फंड में मैनेज होती है, इसलिए यह सामान्य EPF बैलेंस की तरह अलग से नहीं दिखती।

    कुल मिलाकर, PF केवल सैलरी से होने वाली कटौती नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद आर्थिक मजबूती का बड़ा सहारा है। सही जानकारी और लंबी अवधि तक नियमित निवेश से यही छोटी कटौती भविष्य में बड़ी वित्तीय सुरक्षा में बदल सकती है।

  • मार्च से पहले पीएफ से यूपीआई लिंक, एटीएम से भी निकलेगा पैसा; प्रोसेस होगा और आसान…

    मार्च से पहले पीएफ से यूपीआई लिंक, एटीएम से भी निकलेगा पैसा; प्रोसेस होगा और आसान…


    नई दिल्ली/केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने प्रोविडेंट फंड (PF) से जुड़ी नई डिजिटल पहल का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि मार्च 2026 से पहले कर्मचारी अपने पीएफ खाते को UPI और एटीएम से लिंक कर सकेंगे। इसका मतलब यह होगा कि भविष्य में पीएफ निकालना अब पहले से कहीं आसान और डिजिटल हो जाएगा।

    पीएफ निकालने की मौजूदा प्रक्रिया में कठिनाई

    आज की तारीख में पीएफ निकालने के लिए कर्मचारियों को कई फॉर्म भरने और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कई बार लोग फार्म भरते-भरते थक जाते हैं और प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते। मनसुख मांडविया ने कहा कि यही परेशानी ध्यान में रखकर सरकार ने नियमों में बदलाव किया है। अब कर्मचारी अपने पीएफ का 75 प्रतिशत हिस्सा बिना किसी वजह के निकाल सकेंगे।

    क्यों रखा जाएगा 25 प्रतिशत पीएफ?

    केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएफ में 25 प्रतिशत राशि इसलिए सुरक्षित रखी जाएगी ताकि कर्मचारियों की नौकरी की निरंतरता बनी रहे। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई कर्मचारी 7 महीने काम करने के बाद पूरी राशि निकाल लेता है और बाद में नई नौकरी ज्वाइन करता है, तो उसकी पीएफ कंटिन्यूटी टूट जाती है। वहीं पेंशन के लिए 10 साल की लगातार नौकरी जरूरी होती है। 25 प्रतिशत राशि जमा रहने से कर्मचारी पेंशन के लिए पात्र बने रहेंगे और नई नौकरी मिलने तक सुरक्षा भी मिलती है।

    एटीएम और यूपीआई से पीएफ निकासी कैसे होगी

    मनसुख मांडविया ने बताया कि सरकार ने पीएफ खाते को बैंक खाता, आधार और यूएन से पहले ही जोड़ दिया है। अब इसमें डेबिट कार्ड और एटीएम फंक्शनैलिटी जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसका मतलब यह है कि मार्च 2026 से पहले कर्मचारी सीधे एटीएम से अपने पीएफ का पैसा निकाल सकेंगे। इसके अलावा, पीएफ खाते को UPI से भी लिंक किया जा सकेगा। इससे कर्मचारियों को डिजिटल प्लेटफार्म पर पैसा ट्रांसफर करने की सुविधा मिलेगी और उन्हें कागजी प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी। मंत्री ने कहा कि यह फैसला कर्मचारियों के जीवन को आसान बनाने और डिजिटल सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।

    सरल और डिजिटल भविष्य की ओर

    पीएफ से जुड़े यह बदलाव कर्मचारियों के लिए बड़ा लाभ हैं। अब उन्हें बैंक, ऑफिस या सरकारी विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। डिजिटल प्लेटफार्म और एटीएम के माध्यम से कभी भी, कहीं भी पीएफ निकालने की सुविधा उपलब्ध होगी। यह नई पहल सरकारी सेवाओं को और पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    सरकार की तैयारी और अगला कदम

    मनसुख मांडविया ने यह भी स्पष्ट किया कि यह योजना केवल शुरुआत है। भविष्य में और भी डिजिटल सुधार किए जाएंगे, जिससे पीएफ खाताधारकों को तेजी से और सुरक्षित तरीके से पैसा निकालने की सुविधा मिले। यह पहल कर्मचारियों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित और आसान बनाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।