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  • रिटायरमेंट के लिए EPF या शेयर बाजार? EPFO के मुताबिक ये 6 फायदे देते हैं PF को बढ़त

    रिटायरमेंट के लिए EPF या शेयर बाजार? EPFO के मुताबिक ये 6 फायदे देते हैं PF को बढ़त


    नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट की तैयारी सबसे अहम वित्तीय लक्ष्यों में से एक होती है। हर महीने सैलरी से कटने वाली रकम कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF के खाते में जमा होती है और लंबे समय में यही रकम एक बड़ा फंड तैयार करने में मदद करती है। दूसरी ओर कई लोग बेहतर रिटर्न की उम्मीद में शेयर बाजार का रुख करते हैं। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि EPF में पैसा रखना बेहतर है या शेयर बाजार में निवेश करना। इसी सवाल को लेकर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने एक वीडियो के जरिए दोनों विकल्पों के बीच अंतर बताया है और EPF के छह ऐसे फायदे गिनाए हैं जो इसे रिटायरमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण साधन बनाते हैं।

    सबसे बड़ा अंतर निवेश की प्रकृति को लेकर है। EPF मुख्य रूप से नौकरीपेशा लोगों के लिए लंबी अवधि की बचत व्यवस्था है जिसमें नियमित योगदान किया जाता है। वहीं शेयर बाजार में निवेश व्यक्ति की इच्छा और जोखिम उठाने की क्षमता पर निर्भर करता है। शेयर बाजार में पैसा कभी भी लगाया या निकाला जा सकता है लेकिन बाजार में उतार चढ़ाव के कारण रिटर्न निश्चित नहीं होता। लंबे समय में शेयर बाजार ज्यादा रिटर्न दे सकता है लेकिन इसके साथ बाजार जोखिम भी जुड़ा रहता है।

    EPFO के मुताबिक EPF की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें कर्मचारी के साथ नियोक्ता यानी कंपनी की ओर से भी योगदान किया जाता है। इसका मतलब कर्मचारी को अपनी बचत के साथ नियोक्ता की ओर से मिलने वाले योगदान का भी फायदा मिलता है। शेयर बाजार में निवेश करने वाले व्यक्ति को ऐसा कोई अनिवार्य नियोक्ता योगदान नहीं मिलता। यही वजह है कि नियमित नौकरीपेशा व्यक्ति के लिए EPF एक व्यवस्थित बचत का माध्यम बन जाता है।

    दूसरी बड़ी विशेषता इसकी नियमितता है। EPF में हर महीने योगदान होने के कारण बचत की आदत अपने आप बनी रहती है। कर्मचारी को अलग से हर महीने निवेश करने का फैसला नहीं करना पड़ता। दूसरी ओर शेयर बाजार में निवेश पूरी तरह व्यक्ति के फैसले पर निर्भर करता है। बाजार में तेजी के दौरान निवेश बढ़ सकता है जबकि गिरावट के समय कई निवेशक पीछे हट सकते हैं।

    EPF का एक और महत्वपूर्ण पहलू ब्याज और टैक्स से जुड़े लाभ हैं। EPFO के अनुसार पात्र परिस्थितियों में EPF से जुड़ा योगदान ब्याज और निकासी कर लाभ प्रदान कर सकते हैं। हालांकि टैक्स नियमों और कुछ शर्तों को ध्यान में रखना जरूरी है। शेयर बाजार में निवेश से होने वाले मुनाफे पर लागू नियमों के अनुसार कैपिटल गेन टैक्स लग सकता है। इसलिए निवेश का फैसला लेते समय केवल रिटर्न ही नहीं बल्कि टैक्स प्रभाव को भी समझना जरूरी है।

    EPF की खासियत सिर्फ बचत और ब्याज तक सीमित नहीं है। इससे जुड़े प्रावधानों में पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं भी शामिल हैं। पात्र कर्मचारियों को कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS के तहत लाभ मिल सकता है। वहीं कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा योजना यानी EDLI के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार बीमा लाभ की व्यवस्था भी होती है। शेयर बाजार में इस तरह की सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं सीधे तौर पर शामिल नहीं होतीं।

    रिटायरमेंट के नजरिए से EPF का सबसे बड़ा फायदा इसकी लंबी अवधि और अपेक्षाकृत स्थिर प्रकृति है। शेयर बाजार में निवेश का मूल्य बाजार की चाल के साथ बढ़ या घट सकता है। ऐसे में रिटायरमेंट के करीब बाजार में बड़ी गिरावट होने पर निवेशक को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। EPF का उद्देश्य ही लंबे समय में कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित और व्यवस्थित फंड तैयार करना है।

    हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि शेयर बाजार हमेशा EPF से खराब विकल्प है। शेयर बाजार में जोखिम अधिक होने के साथ लंबे समय में ज्यादा रिटर्न की संभावना भी रहती है। इसलिए दोनों की तुलना करते समय निवेशक की उम्र जोखिम उठाने की क्षमता वित्तीय लक्ष्य और रिटायरमेंट तक बचा समय महत्वपूर्ण होता है। EPF को सुरक्षित और नियमित रिटायरमेंट बचत के तौर पर देखा जा सकता है जबकि शेयर बाजार को अधिक जोखिम के साथ बेहतर रिटर्न की संभावना वाले निवेश विकल्प के रूप में समझना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी निवेश का फैसला अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता को समझकर ही लिया जाए।

  • EPFO का ई-ऑफिस सिस्टम होगा अपग्रेड, शाम 6 से 9:30 बजे तक कई डिजिटल सेवाएं रहेंगी प्रभावित

    EPFO का ई-ऑफिस सिस्टम होगा अपग्रेड, शाम 6 से 9:30 बजे तक कई डिजिटल सेवाएं रहेंगी प्रभावित

    नई दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सभी सदस्यों, नियोक्ताओं और संबंधित अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। संगठन का ई-ऑफिस सिस्टम 5 अगस्त की शाम 6:00 बजे से रात 9:30 बजे तक निर्धारित तकनीकी अपग्रेडेशन के कारण अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं रहेगा। इस दौरान ई-ऑफिस से जुड़ी कई आंतरिक डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए उपयोगकर्ताओं को सलाह दी गई है कि जिन कार्यों की समय-सीमा निकट है, उन्हें निर्धारित समय से पहले पूरा कर लें।

    यह तकनीकी कार्य राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा किया जाएगा। अपग्रेडेशन के तहत ई-ऑफिस पोर्टल के मौजूदा संस्करण को नए और अधिक उन्नत संस्करण में बदला जाएगा। इसके साथ ही ई-फाइल सिस्टम का नया संस्करण भी लागू किया जाएगा, जिससे डिजिटल फाइल प्रबंधन और सिस्टम की कार्यक्षमता में सुधार होने की उम्मीद है। पूरे अपग्रेडेशन की अवधि लगभग साढ़े तीन घंटे निर्धारित की गई है।

    रखरखाव के दौरान ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म पर आंतरिक फाइल प्रोसेसिंग, डिजिटल दस्तावेजों की आवाजाही और कार्यालयी कार्य अस्थायी रूप से रुक सकते हैं। इसका असर कुछ ऑनलाइन सेवाओं और भविष्य निधि से जुड़े कार्यों पर भी पड़ सकता है। विशेष रूप से पीएफ क्लेम की प्रोसेसिंग में मामूली देरी संभव है। इसके अलावा उमंग (UMANG) ऐप के माध्यम से उपलब्ध कुछ संबंधित सेवाओं के संचालन पर भी अस्थायी प्रभाव पड़ सकता है।

    ईपीएफओ ने उपयोगकर्ताओं से अनुरोध किया है कि वे इस निर्धारित समय से पहले अपने आवश्यक ऑनलाइन कार्य, दस्तावेजों की प्रक्रिया और अन्य समयबद्ध गतिविधियां पूरी कर लें। इससे अपग्रेडेशन के दौरान किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सकेगा। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अस्थायी व्यवधान केवल सिस्टम को अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    तकनीकी उन्नयन के बाद ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म की कार्यक्षमता पहले की तुलना में बेहतर होने की उम्मीद है। नए संस्करण के लागू होने से सिस्टम की गति बढ़ेगी, फाइलों की प्रोसेसिंग अधिक तेज होगी और डिजिटल सेवाओं की दक्षता में सुधार आएगा। साथ ही डेटा सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा स्तर भी जोड़े जाएंगे, जिससे उपयोगकर्ताओं की वित्तीय और व्यक्तिगत जानकारी की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर होने वाले ऐसे तकनीकी अपग्रेडेशन से डिजिटल सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ती है। इससे भविष्य में सिस्टम के धीमा होने, अचानक बंद होने या तकनीकी बाधाओं की संभावना कम होती है। ईपीएफओ ने भरोसा दिलाया है कि निर्धारित रखरखाव कार्य पूरा होने के बाद सभी सेवाएं सामान्य रूप से पुनः शुरू कर दी जाएंगी और उपयोगकर्ताओं को पहले से अधिक बेहतर डिजिटल अनुभव मिलेगा।

  • EPFO: 25 हजार रुपये वेतन वालों को भी PF और पेंशन का लाभ…. प्रस्ताव को मिली हरी झंडी

    EPFO: 25 हजार रुपये वेतन वालों को भी PF और पेंशन का लाभ…. प्रस्ताव को मिली हरी झंडी


    नई दिल्ली।
    संगठित क्षेत्र में काम करने वाले उन लाखों कर्मचारियों को भी पीएफ (PF) और पेंशन (Pension) का लाभ मिल सकता है, जिनका मासिक बेसिक वेतन (Monthly Basic Salary) 25,000 रुपये है। वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) (Employees’ Provident Fund – EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) (Employees’ Pension Scheme -EPS) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब इसे केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। नया नियम 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली सभी पंजीकृत कंपनियों पर लागू होगा। आखिरी बार इसमें सितंबर, 2014 में संशोधन किया गया था।


    पहले 30,000 रुपये करने का था प्रस्ताव

    सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ ने पहले वेतन सीमा को बढ़ाकर 30,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, वित्त मंत्रालय के साथ गहन समीक्षा के बाद 25,000 रुपये प्रति माह (बेसिक पे और डीए) पर अंतिम मुहर लगाई गई। 


    मौजूदा नियम

    वर्तमान नियमों के अनुसार, 15,000 तक बेसिक वेतन वाले कर्मचारियों के लिए ही ईपीएफओ में योगदान अनिवार्य था। इससे अधिक वेतन वाले कर्मचारियों के पास ईपीएफ से बाहर रहने का विकल्प था।


    कंपनियों और सरकारी खजाने पर पड़ेगा असर

    वेतन सीमा बढ़ने से कंपनियों और सरकार दोनों का वित्तीय बोझ बढ़ेगा। कंपनियों को अधिक कर्मचारियों के लिए पीएफ और पेंशन में 12 फीसदी का योगदान देना होगा, जिससे उनकी पेरोल लागत बढ़ जाएगी। पेंशन फंड में सरकार भी बेसिक वेतन का 1.16 फीसदी योगदान देती है। वेतन सीमा बढ़ने से सरकार का पेंशन सब्सिडी बजट भी बढ़ जाएगा।

  • EPFO की एमनेस्टी स्कीम 2026 से संस्थानों को बड़ी राहत, छह महीने में PF ट्रस्ट रिकॉर्ड नियमित कराने का मिला एकमुश्त अवसर

    EPFO की एमनेस्टी स्कीम 2026 से संस्थानों को बड़ी राहत, छह महीने में PF ट्रस्ट रिकॉर्ड नियमित कराने का मिला एकमुश्त अवसर

    नई दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने उन संस्थानों को बड़ी राहत देने के उद्देश्य से एमनेस्टी स्कीम 2026 लागू की है, जो अपने कर्मचारियों के भविष्य निधि का संचालन स्वयं के छूट प्राप्त पीएफ ट्रस्ट के माध्यम से करते हैं। इस विशेष योजना के तहत पात्र संस्थानों को छह महीने की अवधि में अपने ट्रस्ट की कानूनी स्थिति, रिकॉर्ड और आवश्यक दस्तावेजों को नियमों के अनुरूप नियमित कराने का एकमुश्त अवसर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य ऐसे ट्रस्टों को नियामकीय व्यवस्था के अनुरूप लाना है, जिनके पास आयकर कानून के तहत मान्यता तो है, लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि कानून के तहत औपचारिक छूट आदेश उपलब्ध नहीं है।

    यह योजना वित्त अधिनियम 2026 में किए गए संशोधनों के बाद लागू की गई है। नए प्रावधानों के अनुसार अब केवल उन्हीं भविष्य निधि ट्रस्टों को आयकर कानून के तहत मान्यता मिलेगी, जिन्हें कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम की धारा 17 के अंतर्गत विधिवत छूट प्राप्त होगी। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए EPFO ने यह विशेष योजना शुरू की है ताकि पात्र संस्थान समय रहते अपनी स्थिति को पूरी तरह कानूनी रूप से नियमित कर सकें।

    योजना का लाभ उन संस्थानों को मिलेगा, जो आयकर अधिनियम 1961 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त पीएफ ट्रस्ट का संचालन कर रहे हैं, लेकिन उनके पास केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी औपचारिक छूट आदेश नहीं है। यह योजना 29 जून 2026 से प्रभावी है और इसकी अवधि छह महीने निर्धारित की गई है। इस दौरान आवेदन करने वाले पात्र संस्थानों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का अवसर मिलेगा।

    EPFO ने योजना के लिए पात्र संस्थानों को दो श्रेणियों में विभाजित किया है। पहली श्रेणी में वे संस्थान शामिल हैं जो अपने ट्रस्ट का पूर्व प्रभाव से नियमितीकरण कराना चाहते हैं और वर्तमान में बिना औपचारिक छूट के नियमों का पालन कर रहे हैं या आगे भी उसी व्यवस्था में काम करना चाहते हैं। दूसरी श्रेणी में वे संस्थान हैं जो अपने ट्रस्ट का नियमितीकरण कराने के साथ भविष्य में भी सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत छूट प्राप्त संस्थान के रूप में कार्य जारी रखना चाहते हैं।

    इस योजना के तहत पात्र ट्रस्टों को उनके गठन की तारीख से निर्धारित कट-ऑफ तिथि तक पूर्व प्रभाव से छूट और मान्यता प्रदान की जा सकती है। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के कुछ प्रावधानों में भी विशेष राहत दी गई है। इनमें न्यूनतम कर्मचारियों की संख्या, ट्रस्ट फंड की न्यूनतम सीमा तथा तीन वर्ष के पूर्व अनुपालन जैसी शर्तों में छूट शामिल है। इससे अनेक संस्थानों के लिए नियामकीय प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल हो जाएगी।

    यदि किसी ट्रस्ट ने अपने कर्मचारियों के खातों में कानून के अनुरूप या उससे अधिक अंशदान और ब्याज जमा किया है, तो उससे संबंधित बकाया राशि, हर्जाना और ब्याज के लंबित मामलों को वापस लेने पर भी विचार किया जा सकता है। इसके साथ ही पहले जारी किए गए कुछ आदेशों को भी शून्य माना जा सकता है, जिससे पात्र संस्थानों को अतिरिक्त राहत मिलने की संभावना है।

    योजना का लाभ लेने के इच्छुक संस्थानों को निर्धारित प्रारूप में आवेदन संबंधित EPFO क्षेत्रीय कार्यालय को ईमेल के माध्यम से भेजना होगा। आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज और वित्तीय अभिलेख प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। संस्थानों को अपने खातों का ऑडिट चार्टर्ड अकाउंटेंट से कराना होगा। यदि EPFO किसी विशेष या अनुपालन ऑडिट का निर्देश देता है, तो आवेदन जमा होने के तीन महीने के भीतर उसे पूरा करना आवश्यक होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना पात्र पीएफ ट्रस्टों के लिए अपने रिकॉर्ड नियमित करने, कानूनी अनुपालन सुनिश्चित करने और भविष्य में नियामकीय जटिलताओं से बचने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है।

  • ईपीएफओ ने यूएएन से जुड़े नियमों में किया बड़ा बदलाव, अब पोर्टल पर नहीं मिलेगी एक्टिवेशन की सुविधा, पीएफ खाताधारकों के लिए बदली पूरी प्रक्रिया

    ईपीएफओ ने यूएएन से जुड़े नियमों में किया बड़ा बदलाव, अब पोर्टल पर नहीं मिलेगी एक्टिवेशन की सुविधा, पीएफ खाताधारकों के लिए बदली पूरी प्रक्रिया

    नई दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि से जुड़े करोड़ों खाताधारकों के लिए यूएएन सेवाओं की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए गए हैं। यूनिफाइड मेंबर पोर्टल के तकनीकी उन्नयन के बाद अब यूएएन एक्टिवेशन और नया यूएएन जारी करने की सुविधा पहले की तरह पोर्टल पर उपलब्ध नहीं रहेगी। इन सेवाओं को नई डिजिटल व्यवस्था के तहत स्थानांतरित किया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, तेज और तकनीक आधारित बनाई जा सके।

    नए बदलाव के तहत यूएएन को सक्रिय करने और नया यूएएन प्राप्त करने के लिए आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य पहचान सत्यापन को अधिक मजबूत बनाना और फर्जीवाड़े की संभावनाओं को कम करना है। नई प्रणाली के लागू होने के बाद सदस्यों को अपनी पहचान की पुष्टि डिजिटल माध्यम से करनी होगी, जिसके बाद ही संबंधित सेवा उपलब्ध होगी।

    तकनीकी अपग्रेड के साथ यूनिफाइड मेंबर पोर्टल के इंटरफेस और प्रोसेसिंग सिस्टम में भी सुधार किया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार यूएएन एक्टिवेशन, नया यूएएन जारी करने और पहली बार यूएएन प्राप्त करने जैसी सेवाओं की प्रक्रिया पूरी तरह नई डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संचालित होगी। इससे डेटाबेस का बेहतर एकीकरण होगा और सेवाओं की गति तथा सुरक्षा दोनों में सुधार आने की उम्मीद है।

    जिन कर्मचारियों का यूएएन अभी तक सक्रिय नहीं हुआ है, उन्हें नई प्रक्रिया के तहत अपनी पहचान का डिजिटल सत्यापन कराना होगा। वहीं जिन कर्मचारियों को पहली बार यूएएन जारी किया जाना है, उनके लिए भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सफल सत्यापन के बाद नया यूएएन संबंधित कर्मचारी के भविष्य निधि खाते से जोड़ दिया जाएगा, जिससे आगे की सभी ऑनलाइन सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।

    संगठन ने यूएएन भूल जाने वाले सदस्यों के लिए रिकवरी प्रक्रिया को भी पहले की तुलना में अधिक सरल बनाया है। अब पंजीकृत मोबाइल नंबर के सत्यापन, आवश्यक व्यक्तिगत जानकारी और पहचान संबंधी दस्तावेजों की पुष्टि के बाद सदस्य अपना यूएएन दोबारा प्राप्त कर सकेंगे। इससे ऐसे कर्मचारियों को राहत मिलेगी जिन्हें लंबे समय बाद अपने खाते की जानकारी प्राप्त करनी होती है।

    हालांकि यूएएन से जुड़ी अधिकांश सेवाओं की प्रक्रिया नई व्यवस्था के अंतर्गत स्थानांतरित कर दी गई है, लेकिन ऑनलाइन डेथ क्लेम दाखिल करने की सुविधा पहले की तरह यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। इसके लिए आधार से जुड़े मोबाइल नंबर, बैंक खाते का विवरण, मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में अपलोड करने होंगे। दस्तावेजों का आकार और फाइल प्रारूप भी तय मानकों के अनुरूप होना आवश्यक होगा।

    तकनीकी उन्नयन के बाद शुरुआती दिनों में ऑनलाइन क्लेम और अन्य अनुरोधों के निपटारे में सामान्य से थोड़ा अधिक समय लग सकता है। अतिरिक्त सत्यापन और सिस्टम जांच के कारण यह स्थिति अस्थायी मानी जा रही है। सदस्यों को सलाह दी गई है कि एक ही अनुरोध को बार-बार जमा करने या अनावश्यक रूप से बार-बार लॉगिन करने से बचें, ताकि सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और सभी उपयोगकर्ताओं को सुचारु सेवाएं मिल सकें।

    नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य भविष्य निधि सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाना है। फेस ऑथेंटिकेशन आधारित सत्यापन प्रणाली लागू होने से पहचान संबंधी धोखाधड़ी की संभावना कम होगी और खाताधारकों को भविष्य में तेज, विश्वसनीय और अधिक सुरक्षित ऑनलाइन सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।

  • 8वें वेतन आयोग से EPF ब्याज और शेयर बाजार की तेजी तक, जानिए दिनभर की 5 सबसे बड़ी कारोबारी हलचलें

    8वें वेतन आयोग से EPF ब्याज और शेयर बाजार की तेजी तक, जानिए दिनभर की 5 सबसे बड़ी कारोबारी हलचलें

    नई दिल्ली । कारोबारी जगत के लिए शुक्रवार का दिन कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से भरा रहा। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ा नया अपडेट सामने आया, वहीं करोड़ों कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाताधारकों के लिए ब्याज जमा होने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई। इसके अलावा पूंजी बाजार में अदाणी एंटरप्राइजेज की बड़ी फंड जुटाने की पहल, सोने-चांदी की कीमतों में तेजी और घरेलू शेयर बाजार की मजबूत बढ़त दिनभर चर्चा का केंद्र बनी रही।

    सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े 8वें वेतन आयोग ने आवश्यक आंकड़े उपलब्ध कराने की समय-सीमा बढ़ा दी है। आयोग के लिए विभिन्न विभागों से प्राप्त होने वाला यह डेटा भविष्य में वेतन, पेंशन और भत्तों से संबंधित सिफारिशों का आधार बनेगा। समय-सीमा बढ़ाए जाने से संबंधित विभागों और संस्थानों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।

    इधर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़े करोड़ों खाताधारकों के लिए भी राहतभरी खबर रही। वित्त वर्ष के लिए घोषित ब्याज राशि खातों में जमा किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में चरणबद्ध तरीके से पात्र खाताधारकों के खातों में ब्याज की राशि पहुंचाई जाएगी। इससे नौकरीपेशा वर्ग को अपनी बचत पर अतिरिक्त लाभ मिलेगा और लंबे समय से जारी इंतजार समाप्त होगा।

    कॉरपोरेट क्षेत्र में अदाणी एंटरप्राइजेज की क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) को निवेशकों का मजबूत समर्थन मिला। घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से उम्मीद से अधिक रुचि दिखाई गई, जिसके बाद कंपनी ने अपने फंड जुटाने के आकार में भी वृद्धि की। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेशकों के बढ़ते विश्वास और कंपनी की दीर्घकालिक योजनाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का संकेत है।

    कीमती धातुओं के बाजार में भी शुक्रवार को तेजी का रुख देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमजोरी और वैश्विक आर्थिक संकेतकों के प्रभाव से सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो आने वाले समय में दोनों धातुओं की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों की सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ती रुचि भी इस तेजी का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है।

    शेयर बाजार ने भी सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। प्रमुख सूचकांकों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई और निवेशकों की खरीदारी से बाजार का रुख सकारात्मक बना रहा। बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और चुनिंदा बड़े शेयरों में खरीदारी का असर पूरे बाजार पर दिखाई दिया। हालांकि विशेषज्ञों ने निवेशकों को वैश्विक बाजारों, विशेषकर प्रौद्योगिकी क्षेत्र में जारी उतार-चढ़ाव पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम घरेलू बाजार की दिशा को भी प्रभावित कर सकते हैं।

    कुल मिलाकर शुक्रवार का कारोबारी दिन नौकरीपेशा वर्ग, निवेशकों और पूंजी बाजार से जुड़े सभी वर्गों के लिए महत्वपूर्ण रहा। वेतन आयोग और EPF से जुड़े अपडेट जहां आम कर्मचारियों के लिए अहम रहे, वहीं पूंजी बाजार, बुलियन और कॉरपोरेट गतिविधियों में आई तेजी ने आर्थिक गतिविधियों को नई चर्चा का विषय बना दिया।

  • नौकरी बदलने से पहले पीएफ ट्रांसफर को लेकर रखें विशेष सावधानी, EPFO 3.0 के बावजूद रिकॉर्ड त्रुटि बनी रहेगी बड़ी चुनौती

    नौकरी बदलने से पहले पीएफ ट्रांसफर को लेकर रखें विशेष सावधानी, EPFO 3.0 के बावजूद रिकॉर्ड त्रुटि बनी रहेगी बड़ी चुनौती

    नई दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ द्वारा प्रस्तावित EPFO 3.0 सिस्टम के तहत प्रोविडेंट फंड ट्रांसफर प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। नई तकनीक के माध्यम से कर्मचारियों को नौकरी बदलने के बाद पीएफ ट्रांसफर में कम कागजी कार्रवाई और तेज प्रोसेसिंग का लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सिस्टम कितना भी आधुनिक क्यों न हो, यदि कर्मचारी अपने रिकॉर्ड को समय पर अपडेट नहीं करते हैं तो ट्रांसफर प्रक्रिया में देरी की संभावना बनी रहेगी।

    नौकरी बदलने के दौरान पीएफ ट्रांसफर को लेकर सबसे बड़ी चुनौती डेटा में असमानता की होती है। नाम, जन्मतिथि, आधार, पैन और बैंक डिटेल्स में छोटे-छोटे अंतर भी सिस्टम को ऑटोमैटिक वेरिफिकेशन से रोक सकते हैं। इसी वजह से कई मामलों में आवेदन लंबे समय तक लंबित रह जाते हैं और कर्मचारियों को अतिरिक्त दस्तावेजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि EPFO 3.0 में भले ही ऑटोमेशन बढ़ेगा, लेकिन आधारभूत डेटा की शुद्धता सबसे महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

    एक अन्य प्रमुख समस्या कई यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी यूएएन का बन जाना है। अक्सर नई नौकरी के दौरान गलत तरीके से नया UAN जारी हो जाता है, जिससे पुराने और नए खाते को जोड़ने में समय लगता है। यह स्थिति पीएफ ट्रांसफर को जटिल बना देती है और कर्मचारियों को ईपीएफओ कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। इसलिए सलाह दी जाती है कि नई नौकरी में हमेशा पुराना UAN ही साझा किया जाए और नया UAN बनाने से बचा जाए।

    पीएफ ट्रांसफर प्रक्रिया में समय पर कार्रवाई न करना भी देरी का कारण बनता है। कई कर्मचारी यह मान लेते हैं कि नई कंपनी द्वारा ट्रांसफर अपने आप पूरा हो जाएगा, जबकि वास्तविकता में आवेदन की प्रक्रिया को सक्रिय रूप से शुरू करना आवश्यक होता है। शुरुआती चरण में आवेदन करने से किसी भी त्रुटि को समय रहते सुधारा जा सकता है और प्रक्रिया सुचारू रहती है।

    KYC दस्तावेजों की अद्यतन स्थिति भी ट्रांसफर प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आधार, पैन और बैंक खाते का UAN से लिंक और सत्यापित होना आवश्यक है। यदि इनमें से कोई भी दस्तावेज असत्यापित रहता है तो आवेदन आगे नहीं बढ़ पाता और प्रक्रिया लंबित हो जाती है। इसलिए नौकरी बदलने से पहले सभी दस्तावेजों की स्थिति की जांच करना आवश्यक माना जा रहा है।

    इसके अलावा पुराने नियोक्ता की ओर से रोजगार संबंधी रिकॉर्ड का अपडेट न होना भी एक बड़ी बाधा बन सकता है। नौकरी छोड़ने की तारीख, वेतन विवरण और अन्य सेवा रिकॉर्ड यदि सही तरीके से अपडेट नहीं किए गए हैं तो ट्रांसफर प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों में नियोक्ता और ईपीएफओ के बीच अतिरिक्त सत्यापन की आवश्यकता पड़ती है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि EPFO 3.0 के आने के बाद सिस्टम भले ही तेज और डिजिटल हो जाएगा, लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह सही डेटा और समय पर की गई कार्रवाई पर निर्भर करेगी। कर्मचारियों को सलाह दी जा रही है कि नौकरी बदलने से पहले सभी विवरणों की जांच कर लें ताकि भविष्य में किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

  • 26 से 30 जून तक EPFO पोर्टल रहेगा ठप, पीएफ क्लेम और UMANG समेत कई ऑनलाइन सेवाएं रहेंगी अस्थायी रूप से बंद

    26 से 30 जून तक EPFO पोर्टल रहेगा ठप, पीएफ क्लेम और UMANG समेत कई ऑनलाइन सेवाएं रहेंगी अस्थायी रूप से बंद

    नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के करोड़ों सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। संगठन अपने डिजिटल सिस्टम को अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने के लिए डेटाबेस माइग्रेशन तथा क्लेम प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर का अपग्रेडेशन कर रहा है। इस तकनीकी प्रक्रिया के चलते 26 जून से 30 जून तक ईपीएफओ की कई प्रमुख ऑनलाइन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रहेंगी। इस दौरान सदस्य और नियोक्ता दोनों ही कई जरूरी सुविधाओं का उपयोग नहीं कर सकेंगे।

    ईपीएफओ के अनुसार, 26 जून की मध्यरात्रि से 30 जून की रात 11:59 बजे तक मेंबर पोर्टल, एम्प्लॉयर पोर्टल और उमंग ऐप के माध्यम से उपलब्ध अधिकांश ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित रहेंगी। इन पांच दिनों के दौरान उपयोगकर्ता अपने खाते में लॉग इन नहीं कर पाएंगे, जिससे ऑनलाइन माध्यम से होने वाले कई कार्य पूरी तरह बाधित रहेंगे। संगठन को उम्मीद है कि सभी सेवाएं 1 जुलाई से दोबारा सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगी।

    इस अवधि में कर्मचारी नया पीएफ क्लेम जमा नहीं कर सकेंगे और पहले से जमा क्लेम की स्थिति भी ऑनलाइन नहीं देख पाएंगे। इसके अलावा ई-पासबुक डाउनलोड करने या खाते का विवरण देखने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं रहेगी। जिन कर्मचारियों को अपने भविष्य निधि खाते से संबंधित किसी प्रक्रिया को पूरा करना है, उन्हें सेवाएं बहाल होने तक इंतजार करना होगा।

    नियोक्ताओं पर भी इस तकनीकी अपग्रेडेशन का असर पड़ेगा। वे इलेक्ट्रॉनिक चालान-कम-रिटर्न (ईसीआर) दाखिल नहीं कर सकेंगे और नए कर्मचारियों के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) से जुड़ी ऑनलाइन प्रक्रिया भी अस्थायी रूप से बंद रहेगी। इससे नई नियुक्तियों और नियमित मासिक अनुपालन से जुड़े कुछ कार्य निर्धारित अवधि तक प्रभावित रह सकते हैं।

    ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि यह कदम संगठन की डिजिटल व्यवस्था को अधिक आधुनिक, तेज और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। सिस्टम माइग्रेशन पूरा होने के बाद क्लेम प्रोसेसिंग और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के पहले से अधिक प्रभावी और सुचारु रूप से संचालित होने की उम्मीद है। इसलिए यह अस्थायी असुविधा भविष्य में बेहतर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    देशभर में सात करोड़ से अधिक कर्मचारी ईपीएफओ की सेवाओं से जुड़े हुए हैं। निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि योजना सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में संगठन ने सदस्यों और नियोक्ताओं से अपील की है कि जिन कार्यों के लिए ऑनलाइन सेवाओं की आवश्यकता है, वे उन्हें 1 जुलाई के बाद पूरा करने की योजना बनाएं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी उन्नयन से भविष्य में क्लेम निपटान की गति बेहतर होगी और ऑनलाइन सेवाओं की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। हालांकि जिन कर्मचारियों को तत्काल पीएफ निकासी, क्लेम स्टेटस या अन्य डिजिटल सेवाओं की आवश्यकता है, उन्हें अगले कुछ दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है। 1 जुलाई से सभी सेवाएं सामान्य रूप से बहाल होने की संभावना जताई गई है।

  • EPFO ने EPF की ब्याज दर को 8.25% पर रखा बरकार….. करोड़ों सदस्यों को होगा फायदा

    EPFO ने EPF की ब्याज दर को 8.25% पर रखा बरकार….. करोड़ों सदस्यों को होगा फायदा


    नई दिल्ली।
    ईपीएफओ (EPFO) ने वित्तवर्ष 2026 के लिए 8.25% ब्याज दर बरकरार रखी है और यह कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees Provident Fund Organization- EPFO) के करोड़ों सदस्यों के लिए राहत की खबर है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 2 मार्च 2026 को इसकी जानकारी दी थी। हालांकि ब्याज दर (Interest Rate) की घोषणा हुए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक अधिकांश खाताधारकों के खातों में ब्याज की राशि दिखाई नहीं दी है।


    कब खाते में आएगा EPF का ब्याज?

    EPFO द्वारा ब्याज दर की घोषणा के बाद उसे केंद्र सरकार की मंजूरी मिलनी होती है। इसके बाद करोड़ों खातों का मिलान और रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसी वजह से ब्याज जमा होने में कुछ समय लगता है। आमतौर पर EPF खातों में पिछले वित्त वर्ष का ब्याज जून से सितंबर के बीच जमा किया जाता है। इसलिए सदस्य आने वाले महीनों में अपने खाते में ब्याज की एंट्री देख सकते हैं।


    देरी हो सकती है, लेकिन पूरा ब्याज मिलेगा

    EPFO ने स्पष्ट किया है कि भले ही ब्याज जमा होने में कुछ समय लगे, लेकिन सभी पात्र सदस्यों को पूरा ब्याज मिलेगा। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सभी खातों की पासबुक में ब्याज की एंट्री एक साथ दिखाई नहीं देती। अलग-अलग खातों में यह अपडेट अलग-अलग समय पर नजर आ सकता है।


    कैसे चेक करें कि ब्याज जमा हुआ या नहीं?

    EPF सदस्य कई तरीकों से यह जांच सकते हैं कि उनके खाते में ब्याज जमा हुआ है या नहीं।
    1. UMANG ऐप: UMANG ऐप में लॉगिन कर EPF पासबुक देख सकते हैं।
    2. EPFO पोर्टल: EPFO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पासबुक चेक की जा सकती है।
    3. मिस्ड कॉल सेवा: रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से EPFO की मिस्ड कॉल सेवा का उपयोग किया जा सकता है।
    4. SMS सुविधा: UAN से जुड़े मोबाइल नंबर से SMS भेजकर खाते की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।


    EPFO 3.0 में मिलेगा UPI से पैसा निकालने का विकल्प

    EPFO जल्द ही अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म EPFO 3.0 के तहत बड़ी सुविधा शुरू करने जा रहा है। इसके बाद सदस्य अपने पीएफ खाते से सीधे बैंक खाते में राशि ट्रांसफर कर सकेंगे।

    EPFO 3.0 के तहत UPI के माध्यम से सीधे बैंक खाते में PF राशि ट्रांसफर, UMANG ऐप पर उपलब्ध निकासी राशि की जानकारी और QR कोड के जरिए सुरक्षित ट्रांसफर की सुविधा मिलेगी। बैंक खाते में पैसा आने के बाद ATM या UPI से उपयोग की सुविधा भी मिलेगी। वहीं, ऑटो-सेटलमेंट की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की गई है।


    अब नहीं होगी लंबी प्रक्रिया

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद पीएफ निकासी के लिए लंबी प्रतीक्षा और कई स्तर की मंजूरी की जरूरत कम हो जाएगी। सदस्य सीधे अपने लिंक्ड बैंक खाते में राशि प्राप्त कर सकेंगे और जरूरत के अनुसार उसका उपयोग कर सकेंगे।

    करोड़ों कर्मचारियों को मिलेगा फायदा: EPFO 3.0 को कर्मचारियों के लिए एक बड़ा डिजिटल सुधार माना जा रहा है। इससे पीएफ निकासी प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, आसान और पारदर्शी होने की उम्मीद है।