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  • 8वें वेतन आयोग से EPF ब्याज और शेयर बाजार की तेजी तक, जानिए दिनभर की 5 सबसे बड़ी कारोबारी हलचलें

    8वें वेतन आयोग से EPF ब्याज और शेयर बाजार की तेजी तक, जानिए दिनभर की 5 सबसे बड़ी कारोबारी हलचलें

    नई दिल्ली । कारोबारी जगत के लिए शुक्रवार का दिन कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से भरा रहा। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ा नया अपडेट सामने आया, वहीं करोड़ों कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाताधारकों के लिए ब्याज जमा होने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई। इसके अलावा पूंजी बाजार में अदाणी एंटरप्राइजेज की बड़ी फंड जुटाने की पहल, सोने-चांदी की कीमतों में तेजी और घरेलू शेयर बाजार की मजबूत बढ़त दिनभर चर्चा का केंद्र बनी रही।

    सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े 8वें वेतन आयोग ने आवश्यक आंकड़े उपलब्ध कराने की समय-सीमा बढ़ा दी है। आयोग के लिए विभिन्न विभागों से प्राप्त होने वाला यह डेटा भविष्य में वेतन, पेंशन और भत्तों से संबंधित सिफारिशों का आधार बनेगा। समय-सीमा बढ़ाए जाने से संबंधित विभागों और संस्थानों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है।

    इधर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़े करोड़ों खाताधारकों के लिए भी राहतभरी खबर रही। वित्त वर्ष के लिए घोषित ब्याज राशि खातों में जमा किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में चरणबद्ध तरीके से पात्र खाताधारकों के खातों में ब्याज की राशि पहुंचाई जाएगी। इससे नौकरीपेशा वर्ग को अपनी बचत पर अतिरिक्त लाभ मिलेगा और लंबे समय से जारी इंतजार समाप्त होगा।

    कॉरपोरेट क्षेत्र में अदाणी एंटरप्राइजेज की क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) को निवेशकों का मजबूत समर्थन मिला। घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से उम्मीद से अधिक रुचि दिखाई गई, जिसके बाद कंपनी ने अपने फंड जुटाने के आकार में भी वृद्धि की। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेशकों के बढ़ते विश्वास और कंपनी की दीर्घकालिक योजनाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का संकेत है।

    कीमती धातुओं के बाजार में भी शुक्रवार को तेजी का रुख देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कमजोरी और वैश्विक आर्थिक संकेतकों के प्रभाव से सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो आने वाले समय में दोनों धातुओं की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों की सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ती रुचि भी इस तेजी का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है।

    शेयर बाजार ने भी सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। प्रमुख सूचकांकों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई और निवेशकों की खरीदारी से बाजार का रुख सकारात्मक बना रहा। बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और चुनिंदा बड़े शेयरों में खरीदारी का असर पूरे बाजार पर दिखाई दिया। हालांकि विशेषज्ञों ने निवेशकों को वैश्विक बाजारों, विशेषकर प्रौद्योगिकी क्षेत्र में जारी उतार-चढ़ाव पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम घरेलू बाजार की दिशा को भी प्रभावित कर सकते हैं।

    कुल मिलाकर शुक्रवार का कारोबारी दिन नौकरीपेशा वर्ग, निवेशकों और पूंजी बाजार से जुड़े सभी वर्गों के लिए महत्वपूर्ण रहा। वेतन आयोग और EPF से जुड़े अपडेट जहां आम कर्मचारियों के लिए अहम रहे, वहीं पूंजी बाजार, बुलियन और कॉरपोरेट गतिविधियों में आई तेजी ने आर्थिक गतिविधियों को नई चर्चा का विषय बना दिया।

  • नौकरी बदलने से पहले पीएफ ट्रांसफर को लेकर रखें विशेष सावधानी, EPFO 3.0 के बावजूद रिकॉर्ड त्रुटि बनी रहेगी बड़ी चुनौती

    नौकरी बदलने से पहले पीएफ ट्रांसफर को लेकर रखें विशेष सावधानी, EPFO 3.0 के बावजूद रिकॉर्ड त्रुटि बनी रहेगी बड़ी चुनौती

    नई दिल्ली । कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ द्वारा प्रस्तावित EPFO 3.0 सिस्टम के तहत प्रोविडेंट फंड ट्रांसफर प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। नई तकनीक के माध्यम से कर्मचारियों को नौकरी बदलने के बाद पीएफ ट्रांसफर में कम कागजी कार्रवाई और तेज प्रोसेसिंग का लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सिस्टम कितना भी आधुनिक क्यों न हो, यदि कर्मचारी अपने रिकॉर्ड को समय पर अपडेट नहीं करते हैं तो ट्रांसफर प्रक्रिया में देरी की संभावना बनी रहेगी।

    नौकरी बदलने के दौरान पीएफ ट्रांसफर को लेकर सबसे बड़ी चुनौती डेटा में असमानता की होती है। नाम, जन्मतिथि, आधार, पैन और बैंक डिटेल्स में छोटे-छोटे अंतर भी सिस्टम को ऑटोमैटिक वेरिफिकेशन से रोक सकते हैं। इसी वजह से कई मामलों में आवेदन लंबे समय तक लंबित रह जाते हैं और कर्मचारियों को अतिरिक्त दस्तावेजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि EPFO 3.0 में भले ही ऑटोमेशन बढ़ेगा, लेकिन आधारभूत डेटा की शुद्धता सबसे महत्वपूर्ण बनी रहेगी।

    एक अन्य प्रमुख समस्या कई यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी यूएएन का बन जाना है। अक्सर नई नौकरी के दौरान गलत तरीके से नया UAN जारी हो जाता है, जिससे पुराने और नए खाते को जोड़ने में समय लगता है। यह स्थिति पीएफ ट्रांसफर को जटिल बना देती है और कर्मचारियों को ईपीएफओ कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। इसलिए सलाह दी जाती है कि नई नौकरी में हमेशा पुराना UAN ही साझा किया जाए और नया UAN बनाने से बचा जाए।

    पीएफ ट्रांसफर प्रक्रिया में समय पर कार्रवाई न करना भी देरी का कारण बनता है। कई कर्मचारी यह मान लेते हैं कि नई कंपनी द्वारा ट्रांसफर अपने आप पूरा हो जाएगा, जबकि वास्तविकता में आवेदन की प्रक्रिया को सक्रिय रूप से शुरू करना आवश्यक होता है। शुरुआती चरण में आवेदन करने से किसी भी त्रुटि को समय रहते सुधारा जा सकता है और प्रक्रिया सुचारू रहती है।

    KYC दस्तावेजों की अद्यतन स्थिति भी ट्रांसफर प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आधार, पैन और बैंक खाते का UAN से लिंक और सत्यापित होना आवश्यक है। यदि इनमें से कोई भी दस्तावेज असत्यापित रहता है तो आवेदन आगे नहीं बढ़ पाता और प्रक्रिया लंबित हो जाती है। इसलिए नौकरी बदलने से पहले सभी दस्तावेजों की स्थिति की जांच करना आवश्यक माना जा रहा है।

    इसके अलावा पुराने नियोक्ता की ओर से रोजगार संबंधी रिकॉर्ड का अपडेट न होना भी एक बड़ी बाधा बन सकता है। नौकरी छोड़ने की तारीख, वेतन विवरण और अन्य सेवा रिकॉर्ड यदि सही तरीके से अपडेट नहीं किए गए हैं तो ट्रांसफर प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों में नियोक्ता और ईपीएफओ के बीच अतिरिक्त सत्यापन की आवश्यकता पड़ती है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि EPFO 3.0 के आने के बाद सिस्टम भले ही तेज और डिजिटल हो जाएगा, लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह सही डेटा और समय पर की गई कार्रवाई पर निर्भर करेगी। कर्मचारियों को सलाह दी जा रही है कि नौकरी बदलने से पहले सभी विवरणों की जांच कर लें ताकि भविष्य में किसी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

  • 26 से 30 जून तक EPFO पोर्टल रहेगा ठप, पीएफ क्लेम और UMANG समेत कई ऑनलाइन सेवाएं रहेंगी अस्थायी रूप से बंद

    26 से 30 जून तक EPFO पोर्टल रहेगा ठप, पीएफ क्लेम और UMANG समेत कई ऑनलाइन सेवाएं रहेंगी अस्थायी रूप से बंद

    नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के करोड़ों सदस्यों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की गई है। संगठन अपने डिजिटल सिस्टम को अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाने के लिए डेटाबेस माइग्रेशन तथा क्लेम प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर का अपग्रेडेशन कर रहा है। इस तकनीकी प्रक्रिया के चलते 26 जून से 30 जून तक ईपीएफओ की कई प्रमुख ऑनलाइन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रहेंगी। इस दौरान सदस्य और नियोक्ता दोनों ही कई जरूरी सुविधाओं का उपयोग नहीं कर सकेंगे।

    ईपीएफओ के अनुसार, 26 जून की मध्यरात्रि से 30 जून की रात 11:59 बजे तक मेंबर पोर्टल, एम्प्लॉयर पोर्टल और उमंग ऐप के माध्यम से उपलब्ध अधिकांश ऑनलाइन सेवाएं प्रभावित रहेंगी। इन पांच दिनों के दौरान उपयोगकर्ता अपने खाते में लॉग इन नहीं कर पाएंगे, जिससे ऑनलाइन माध्यम से होने वाले कई कार्य पूरी तरह बाधित रहेंगे। संगठन को उम्मीद है कि सभी सेवाएं 1 जुलाई से दोबारा सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगी।

    इस अवधि में कर्मचारी नया पीएफ क्लेम जमा नहीं कर सकेंगे और पहले से जमा क्लेम की स्थिति भी ऑनलाइन नहीं देख पाएंगे। इसके अलावा ई-पासबुक डाउनलोड करने या खाते का विवरण देखने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं रहेगी। जिन कर्मचारियों को अपने भविष्य निधि खाते से संबंधित किसी प्रक्रिया को पूरा करना है, उन्हें सेवाएं बहाल होने तक इंतजार करना होगा।

    नियोक्ताओं पर भी इस तकनीकी अपग्रेडेशन का असर पड़ेगा। वे इलेक्ट्रॉनिक चालान-कम-रिटर्न (ईसीआर) दाखिल नहीं कर सकेंगे और नए कर्मचारियों के लिए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) से जुड़ी ऑनलाइन प्रक्रिया भी अस्थायी रूप से बंद रहेगी। इससे नई नियुक्तियों और नियमित मासिक अनुपालन से जुड़े कुछ कार्य निर्धारित अवधि तक प्रभावित रह सकते हैं।

    ईपीएफओ ने स्पष्ट किया है कि यह कदम संगठन की डिजिटल व्यवस्था को अधिक आधुनिक, तेज और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। सिस्टम माइग्रेशन पूरा होने के बाद क्लेम प्रोसेसिंग और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के पहले से अधिक प्रभावी और सुचारु रूप से संचालित होने की उम्मीद है। इसलिए यह अस्थायी असुविधा भविष्य में बेहतर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    देशभर में सात करोड़ से अधिक कर्मचारी ईपीएफओ की सेवाओं से जुड़े हुए हैं। निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि योजना सामाजिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में संगठन ने सदस्यों और नियोक्ताओं से अपील की है कि जिन कार्यों के लिए ऑनलाइन सेवाओं की आवश्यकता है, वे उन्हें 1 जुलाई के बाद पूरा करने की योजना बनाएं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी उन्नयन से भविष्य में क्लेम निपटान की गति बेहतर होगी और ऑनलाइन सेवाओं की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी। हालांकि जिन कर्मचारियों को तत्काल पीएफ निकासी, क्लेम स्टेटस या अन्य डिजिटल सेवाओं की आवश्यकता है, उन्हें अगले कुछ दिनों तक इंतजार करना पड़ सकता है। 1 जुलाई से सभी सेवाएं सामान्य रूप से बहाल होने की संभावना जताई गई है।

  • EPFO ने EPF की ब्याज दर को 8.25% पर रखा बरकार….. करोड़ों सदस्यों को होगा फायदा

    EPFO ने EPF की ब्याज दर को 8.25% पर रखा बरकार….. करोड़ों सदस्यों को होगा फायदा


    नई दिल्ली।
    ईपीएफओ (EPFO) ने वित्तवर्ष 2026 के लिए 8.25% ब्याज दर बरकरार रखी है और यह कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees Provident Fund Organization- EPFO) के करोड़ों सदस्यों के लिए राहत की खबर है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 2 मार्च 2026 को इसकी जानकारी दी थी। हालांकि ब्याज दर (Interest Rate) की घोषणा हुए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक अधिकांश खाताधारकों के खातों में ब्याज की राशि दिखाई नहीं दी है।


    कब खाते में आएगा EPF का ब्याज?

    EPFO द्वारा ब्याज दर की घोषणा के बाद उसे केंद्र सरकार की मंजूरी मिलनी होती है। इसके बाद करोड़ों खातों का मिलान और रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसी वजह से ब्याज जमा होने में कुछ समय लगता है। आमतौर पर EPF खातों में पिछले वित्त वर्ष का ब्याज जून से सितंबर के बीच जमा किया जाता है। इसलिए सदस्य आने वाले महीनों में अपने खाते में ब्याज की एंट्री देख सकते हैं।


    देरी हो सकती है, लेकिन पूरा ब्याज मिलेगा

    EPFO ने स्पष्ट किया है कि भले ही ब्याज जमा होने में कुछ समय लगे, लेकिन सभी पात्र सदस्यों को पूरा ब्याज मिलेगा। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सभी खातों की पासबुक में ब्याज की एंट्री एक साथ दिखाई नहीं देती। अलग-अलग खातों में यह अपडेट अलग-अलग समय पर नजर आ सकता है।


    कैसे चेक करें कि ब्याज जमा हुआ या नहीं?

    EPF सदस्य कई तरीकों से यह जांच सकते हैं कि उनके खाते में ब्याज जमा हुआ है या नहीं।
    1. UMANG ऐप: UMANG ऐप में लॉगिन कर EPF पासबुक देख सकते हैं।
    2. EPFO पोर्टल: EPFO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पासबुक चेक की जा सकती है।
    3. मिस्ड कॉल सेवा: रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से EPFO की मिस्ड कॉल सेवा का उपयोग किया जा सकता है।
    4. SMS सुविधा: UAN से जुड़े मोबाइल नंबर से SMS भेजकर खाते की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।


    EPFO 3.0 में मिलेगा UPI से पैसा निकालने का विकल्प

    EPFO जल्द ही अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म EPFO 3.0 के तहत बड़ी सुविधा शुरू करने जा रहा है। इसके बाद सदस्य अपने पीएफ खाते से सीधे बैंक खाते में राशि ट्रांसफर कर सकेंगे।

    EPFO 3.0 के तहत UPI के माध्यम से सीधे बैंक खाते में PF राशि ट्रांसफर, UMANG ऐप पर उपलब्ध निकासी राशि की जानकारी और QR कोड के जरिए सुरक्षित ट्रांसफर की सुविधा मिलेगी। बैंक खाते में पैसा आने के बाद ATM या UPI से उपयोग की सुविधा भी मिलेगी। वहीं, ऑटो-सेटलमेंट की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की गई है।


    अब नहीं होगी लंबी प्रक्रिया

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद पीएफ निकासी के लिए लंबी प्रतीक्षा और कई स्तर की मंजूरी की जरूरत कम हो जाएगी। सदस्य सीधे अपने लिंक्ड बैंक खाते में राशि प्राप्त कर सकेंगे और जरूरत के अनुसार उसका उपयोग कर सकेंगे।

    करोड़ों कर्मचारियों को मिलेगा फायदा: EPFO 3.0 को कर्मचारियों के लिए एक बड़ा डिजिटल सुधार माना जा रहा है। इससे पीएफ निकासी प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, आसान और पारदर्शी होने की उम्मीद है।

  • EPFO Update: मार्च खत्म हुए दो महीने बीते, पीएफ खाते में कब आएगा 8.25% ब्याज? जानिए ताजा अपडेट

    EPFO Update: मार्च खत्म हुए दो महीने बीते, पीएफ खाते में कब आएगा 8.25% ब्याज? जानिए ताजा अपडेट

    नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों खाताधारकों को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घोषित ब्याज राशि का इंतजार है। मार्च में ब्याज दर तय किए जाने के बावजूद जून की शुरुआत तक खातों में ब्याज जमा नहीं होने से कई कर्मचारियों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पीएफ खाते में ब्याज कब आएगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें चिंता की कोई बात नहीं है, क्योंकि ब्याज दर घोषित होने और उसे खातों में जमा किए जाने के बीच कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं।

    ईपीएफओ ने मार्च 2026 की शुरुआत में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर बनाए रखने का फैसला किया था। यह निर्णय केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक के बाद लिया गया था। इसके बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से इस संबंध में जानकारी भी साझा की गई थी। हालांकि ब्याज दर की घोषणा के बाद इसे लागू करने के लिए केंद्र सरकार की औपचारिक अधिसूचना जारी होना आवश्यक होता है। इसी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ईपीएफओ अपने करोड़ों सदस्यों के खातों में ब्याज की राशि जमा करता है।

    देशभर में लगभग सात करोड़ से अधिक पीएफ खाताधारक हैं, जिनकी नजर हर साल अपने खाते में जमा होने वाले ब्याज पर रहती है। वित्त वर्ष समाप्त होने के दो महीने बाद भी ब्याज राशि जमा नहीं होने से कर्मचारियों के बीच चर्चा बढ़ गई है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि जब ब्याज दर मार्च में ही तय हो चुकी है तो राशि अब तक खातों में क्यों नहीं पहुंची। विशेषज्ञों के अनुसार ब्याज क्रेडिट करने से पहले सरकार की मंजूरी, तकनीकी अपडेट और खातों का सत्यापन जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं, जिनमें कुछ समय लगना सामान्य बात है।

    वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों के अनुभव को देखें तो ईपीएफओ आमतौर पर जून या जुलाई के दौरान खातों में ब्याज की राशि जमा करता है। पहले यह प्रक्रिया सितंबर या अक्टूबर तक चलती थी, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें तेजी आई है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि इस वर्ष भी सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद जून या जुलाई के दौरान करोड़ों खाताधारकों के खातों में ब्याज की राशि दिखाई देने लगेगी। हालांकि अंतिम समयसीमा को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    ईपीएफओ सदस्य अपने खाते में ब्याज जमा हुआ है या नहीं, इसकी जानकारी घर बैठे मोबाइल फोन के जरिए भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए उमंग ऐप एक आसान विकल्प माना जाता है। उपयोगकर्ता सबसे पहले अपने मोबाइल फोन में उमंग ऐप डाउनलोड कर सकते हैं और मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। इसके बाद ईपीएफओ सेवाओं के विकल्प में जाकर ‘व्यू पासबुक’ पर क्लिक करना होगा। ओटीपी सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सदस्य अपने खाते का बैलेंस और ब्याज से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं।

    इसके अलावा ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी पीएफ खाते का विवरण देखा जा सकता है। सदस्य पोर्टल पर लॉग इन करने के बाद ‘मेंबर पासबुक’ विकल्प पर क्लिक करके अपने खाते में जमा राशि, मासिक योगदान और ब्याज संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यदि ब्याज की राशि खाते में जमा कर दी गई होगी तो वह पासबुक में दिखाई देने लगेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पीएफ खाताधारकों को फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है। ब्याज राशि में किसी प्रकार की कटौती या देरी की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद ईपीएफओ निर्धारित प्रक्रिया के तहत सभी पात्र खातों में ब्याज जमा करेगा। ऐसे में कर्मचारियों को समय-समय पर अपनी पासबुक जांचते रहना चाहिए और किसी भी अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

  • EPFO का बड़ा कदम: प्राइवेट PF ट्रस्ट्स पर कसा शिकंजा, मनमानी ब्याज दरों पर रोक

    EPFO का बड़ा कदम: प्राइवेट PF ट्रस्ट्स पर कसा शिकंजा, मनमानी ब्याज दरों पर रोक

    नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने निजी क्षेत्र के प्राइवेट पीएफ ट्रस्ट्स पर निगरानी कड़ी कर दी है। नए नियमों के तहत अब कंपनियां अपने कर्मचारियों को मनमानी ब्याज दरें नहीं दे सकेंगी। यह कदम कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग्स को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
    ब्याज दर पर सख्त लिमिट लागू
    EPFO के नए नियमों के अनुसार अब कोई भी प्राइवेट या छूट प्राप्त PF ट्रस्ट EPFO द्वारा तय की गई सालाना ब्याज दर से अधिकतम 2 प्रतिशत तक ही ज्यादा ब्याज दे सकेगा। इससे पहले कुछ कंपनियां अधिक ब्याज दरों का वादा कर कर्मचारियों को आकर्षित कर रही थीं, जिससे भविष्य में वित्तीय जोखिम बढ़ने की आशंका थी।
    ऑडिट सिस्टम में बड़ा बदलाव
    EPFO ने अब सभी ट्रस्ट्स के लिए हर साल अनिवार्य ऑडिट को खत्म कर दिया है। इसकी जगह अब रिस्क बेस्ड ऑडिट सिस्टम लागू किया गया है। इसका मतलब है कि केवल उन्हीं कंपनियों का ऑडिट होगा जहां नियमों के उल्लंघन या वित्तीय गड़बड़ी की संभावना होगी। इससे अनुपालन करने वाली कंपनियों पर अनावश्यक दबाव कम होगा।
    कर्मचारियों की बचत पर फोकस
    देश में हजारों कंपनियां अपने कर्मचारियों के लिए अलग PF ट्रस्ट चलाती हैं। EPFO ने स्पष्ट किया है कि इन ट्रस्ट्स को कर्मचारियों को कम से कम EPFO जैसी या उससे बेहतर सुविधाएं देनी होंगी। साथ ही अगर कोई कंपनी अपना छूट प्राप्त दर्जा छोड़ती है, तो उसे सार्वजनिक सूचना जारी करनी होगी ताकि कर्मचारियों को किसी तरह का नुकसान न हो।
    क्यों जरूरी हुआ यह कदम?
    हाल के समय में कुछ प्राइवेट ट्रस्ट्स द्वारा ज्यादा ब्याज दरों का लालच देकर निवेश आकर्षित करने की शिकायतें सामने आई थीं। इससे भविष्य में फंड की स्थिरता पर सवाल उठने लगे थे। इसी को देखते हुए EPFO ने यह सख्त फैसला लिया है ताकि कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत सुरक्षित रहे।
  • EPFO अपडेट: नया फॉर्म 121 से टैक्स प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

    EPFO अपडेट: नया फॉर्म 121 से टैक्स प्रक्रिया में बड़ा बदलाव


    नई दिल्ली।  Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने PF खाताधारकों के लिए बड़ा बदलाव (EPFO New Rule) करते हुए नया Form 121 लागू किया है। यह फॉर्म पहले इस्तेमाल होने वाले Form 15G और Form 15H की जगह लेगा। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुका है और इसका मकसद टैक्स से जुड़े नियमों को आसान बनाना है।

    अब EPF सदस्य एक ही फॉर्म के जरिए यह घोषित कर सकते हैं कि उनकी कुल आय टैक्स के दायरे में नहीं आती, जिससे उनके PF पर TDS (टैक्स कटौती) नहीं लगेगा। पहले अलग-अलग उम्र के हिसाब से 15G और 15H भरना पड़ता था, लेकिन अब यह प्रक्रिया आसान कर दी गई है।

    क्या है Form 121 और किसे भरना जरूरी है?
    Form 121 एक यूनिफाइड डिक्लेरेशन फॉर्म है, जिसे वह व्यक्ति भर सकता है जिसकी कुल टैक्स देनदारी शून्य (Nil) है। यानी अगर आपकी सालाना आय टैक्स लिमिट से कम है, तो आप यह फॉर्म भरकर TDS कटने से बच सकते हैं।

    यह फॉर्म खासतौर पर PF निकासी, बैंक ब्याज, डिविडेंड और अन्य इनकम पर लागू होता है। हालांकि, यह सभी के लिए अनिवार्य नहीं है सिर्फ वही लोग इसे भरेंगे जिन्हें TDS से बचना है।

    EPFO New Rule में क्या बदला?
    EPFO ने Form 121 के साथ कुछ नए नियम भी लागू किए हैं। अब हर फॉर्म को एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) दिया जाएगा, जिससे इसकी ट्रैकिंग आसान होगी। इसके अलावा, यह डेटा नियमित रूप से इनकम टैक्स विभाग को भेजा जाएगा।

    फॉर्म भरते समय अब पिछले दो साल के ITR की जानकारी देना भी जरूरी हो सकता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि व्यक्ति वास्तव में टैक्स छूट के योग्य है।

    इसके अलावा EPFO डिजिटल सिस्टम भी तैयार कर रहा है, जिससे भविष्य में यह फॉर्म ऑनलाइन भरना और आसान हो जाएगा।

    कुल मिलाकर, Form 121 का उद्देश्य PF सदस्यों के लिए टैक्स प्रक्रिया को सरल बनाना और पारदर्शिता बढ़ाना है। अब एक ही फॉर्म के जरिए TDS से बचना आसान होगा, लेकिन सही जानकारी देना बेहद जरूरी है।

  • प्राइवेट कर्मचारियों को कब और कैसे मिलती है पेंशन? 10 साल की सर्विस और 58 साल की उम्र का पूरा गणित समझिए

    प्राइवेट कर्मचारियों को कब और कैसे मिलती है पेंशन? 10 साल की सर्विस और 58 साल की उम्र का पूरा गणित समझिए


    नई दिल्ली । निजी क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद पेंशन एक बड़ा सहारा होती है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत चलाई जा रही कर्मचारी पेंशन योजना इसी उद्देश्य से बनाई गई है लेकिन इसके नियम और गणित अक्सर लोगों को उलझा देते हैं। कई कर्मचारी यह नहीं समझ पाते कि पेंशन कब मिलेगी कितनी मिलेगी और इसके लिए कौनकौन सी शर्तें जरूरी हैं। अगर आप भी प्राइवेट नौकरी करते हैं तो ईपीएफ और ईपीएस के इस सिस्टम को समझना बेहद जरूरी है। सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आपकी सैलरी से कटने वाला पीएफ दो हिस्सों में बंटता है। पहला है ईपीएफ जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान जमा होता है और इस पर ब्याज मिलता है।
    दूसरा है ईपीएस जिसमें केवल नियोक्ता के योगदान का 8.33 प्रतिशत हिस्सा जाता है। यही ईपीएस फंड आगे चलकर आपकी मासिक पेंशन का आधार बनता है। प्राइवेट कर्मचारियों को पेंशन पाने के लिए दो सबसे अहम शर्तें पूरी करनी होती हैं। पहली शर्त है कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य सेवा। इसका मतलब यह है कि आपने कुल मिलाकर 10 साल तक ईपीएस में योगदान किया हो। अगर आप बीच-बीच में नौकरी बदलते हैं तो अपना पीएफ अकाउंट ट्रांसफर कराना बेहद जरूरी है ताकि आपकी सर्विस की अवधि जुड़ती रहे। दूसरी शर्त है उम्र। ईपीएस नियमों के अनुसार नियमित पेंशन 58 साल की उम्र पूरी होने के बाद ही शुरू होती है।

    हालांकि ईपीएफओ कुछ मामलों में समय से पहले पेंशन का विकल्प भी देता है। यदि आपकी उम्र 50 साल हो चुकी है और आपने 10 साल की पेंशन योग्य सेवा पूरी कर ली है तो आप अर्ली पेंशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन इसमें एक नुकसान भी है आपकी पेंशन की राशि हर साल के लिए 4 प्रतिशत कम कर दी जाती है। यानी 58 साल से पहले जितने साल पेंशन लेंगे उतनी कटौती होगी। अगर कोई कर्मचारी 10 साल की सेवा पूरी करने से पहले नौकरी छोड़ देता है तो उसे मासिक पेंशन नहीं मिलती। ऐसे मामलों में वह ईपीएस का पैसा एकमुश्त निकाल सकता है। वहीं अगर 10 साल की सेवा पूरी हो चुकी है लेकिन उम्र 58 साल नहीं हुई है तो कर्मचारी स्कीम सर्टिफिकेट ले सकता है। यह सर्टिफिकेट भविष्य में पेंशन पाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

    पेंशन की गणना एक तय फॉर्मूले से होती है। इसका सामान्य फॉर्मूला है मासिक पेंशन = पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा ÷ 70 यहां पेंशन योग्य वेतन आमतौर पर अंतिम वर्षों का औसत वेतन माना जाता है जिस पर ईपीएस का योगदान हुआ हो। कुल मिलाकर प्राइवेट कर्मचारियों के लिए पेंशन का गणित 10 साल की सेवा और 58 साल की उम्र के इर्द-गिर्द घूमता है। अगर आप समय रहते नियम समझ लें और पीएफ ट्रांसफर जैसी प्रक्रियाएं सही से पूरी करें तो रिटायरमेंट के बाद एक सुनिश्चित मासिक आय का लाभ उठा सकते हैं।

  • EPFO में बड़ा सुधार: सिंगल-विंडो सेवा, सुविधा प्रोवाइडर और मिशन मोड KYC के साथ मार्च 2026 तक 100 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा

    EPFO में बड़ा सुधार: सिंगल-विंडो सेवा, सुविधा प्रोवाइडर और मिशन मोड KYC के साथ मार्च 2026 तक 100 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा


    नई दिल्ली।कर्मचारी भविष्य निधि संगठनEPFOमें बड़े स्तर पर सुधार और डिजिटल बदलाव लागू किए जा रहे हैं, जिससे देशभर के लाखों कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने शुक्रवार को घोषणा की कि सभी EPFO कार्यालय अब सिंगल-विंडो सर्विस सेंटर में तब्दील किए जाएंगे। इस बदलाव के बाद पीएफ खाताधारक किसी भी शहर के EPFO कार्यालय में जाकर अपने दावे, शिकायतें या सुधार करा सकेंगे।मौजूदा व्यवस्था में खाताधारकों को केवल अपने “होम ऑफिस” में ही लेन-देन करना पड़ता था, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ते थे। नई सिंगल-विंडो सेवा से अब यह बाधा खत्म हो जाएगी और प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी। इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट दिल्ली में पहले ही शुरू हो चुका है।

    मंत्री ने कहा कि EPFO के सभी कार्यालयों को आधुनिक तकनीक के जरिए डिजिटल रूप से जोड़ा जा रहा है। साथ ही सरकार ईपीएफ सुविधा प्रोवाइडर नाम से एक नया मैकेनिज्म भी शुरू करने जा रही है। ये अधिकृत सुविधा प्रदाता उन कर्मचारियों की मदद करेंगे, जिन्हें ऑनलाइन सिस्टम समझने में कठिनाई होती है या जो पहली बार पीएफ के दायरे में आते हैं। ये प्रोवाइडर क्लेम फाइलिंग, KYC और अन्य प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन देंगे, जिससे दलालों पर निर्भरता कम होगी।एक और अहम पहल मिशन मोड KYC अभियान है। इसके तहत लंबे समय से निष्क्रिय पड़े EPF खातों को सक्रिय करने के लिए एक अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा। इससे खाताधारकों या उनके कानूनी वारिसों की पहचान कर फंसी हुई राशि को सुरक्षित तरीके से लौटाया जा सकेगा। देश में ऐसे लाखों खाते हैं, जिनमें लंबे समय से पैसे पड़े हैं, लेकिन KYC या अन्य जानकारी के अभाव में निकासी नहीं हो पा रही थी।

    विदेश में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों के लिए भी राहत की खबर है। सरकार अब अपने मुक्त व्यापार समझौतोंFTAमें सोशल सिक्योरिटी क्लॉज शामिल कर रही है। इससे विदेश में काम करने वाले कर्मचारियों का वहां जमा PF योगदान भारत लौटने पर लाभकारी रहेगा।मनसुख मांडविया ने EPFO की वित्तीय स्थिति पर भरोसा जताते हुए बताया कि संगठन के पास लगभग 28 लाख करोड़ रुपये का फंड कॉर्पस है और यह वर्तमान में 8.25 प्रतिशत की दर से ब्याज दे रहा है। उन्होंने कहा कि EPFO में जमा राशि पूरी तरह सुरक्षित है और इसे भारत सरकार की गारंटी प्राप्त है।

    सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि 2014 में देश की केवल 19 प्रतिशत आबादी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में थी, जो अब बढ़कर 64 प्रतिशत हो चुकी है। वर्तमान में लगभग 94 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े हैं। सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक इस संख्या को 100 करोड़ तक पहुंचाना है।इस सुधार से EPFO सेवाएं अधिक कर्मचारी-केंद्रित, पारदर्शी और त्वरित होंगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सुविधा प्रदाता कर्मचारियों को मार्गदर्शन देने के साथ-साथ दलालों पर निर्भरता कम करेंगे। मिशन मोड KYC अभियान से लंबे समय से निष्क्रिय खातों का फंड सक्रिय होगा और विदेश में काम करने वाले भारतीय कर्मचारियों के लिए PF लाभ सुनिश्चित होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम देश की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित होगा।