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  • नेपाल में जलप्रलय के बाद अब महामारी का खतरा, 962 मौतें; 4 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता

    नेपाल में जलप्रलय के बाद अब महामारी का खतरा, 962 मौतें; 4 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता


    काठमांडू।
    नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद तबाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। राहत और बचाव अभियान दूसरे सप्ताह में पहुंच चुका है, लेकिन अब प्रशासन के सामने एक नई और गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। बाढ़ में अब तक 960 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता हैं।

    आपदा के बाद कई इलाकों में शवों के सड़ने और दुर्गंध फैलने की खबरों ने महामारी फैलने का खतरा बढ़ा दिया है। मलबे और दलदल में दबे शवों को निकालना भी राहत टीमों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ अब प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता और संक्रमण रोकने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    ग्लेशियर टूटने से शुरू हुई तबाही

    यह प्राकृतिक आपदा पिछले बुधवार को चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद शुरू हुई। अचानक बड़ी मात्रा में पानी चट्टानों और मलबे के साथ पहाड़ों से नीचे आया और रास्ते में पड़ने वाले गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया।

    तेज बहाव में कई इलाकों में घर और सड़कें बह गईं। बड़ी संख्या में लोग मलबे में दब गए या बाढ़ के पानी में बह गए। भारत में भी बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई कम से कम 17 लाशें बरामद की जा चुकी हैं।

    शवों के सड़ने से बढ़ी चिंता

    आपदा के करीब एक सप्ताह बाद कई प्रभावित इलाकों में शवों के सड़ने से दुर्गंध फैलने लगी है। मलबे और कीचड़ में फंसे शवों को निकालने में लग रहा समय स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए नई चुनौती बन रहा है।

    प्रशासन के सामने अब दोहरी जिम्मेदारी है—एक तरफ मलबे में फंसे लोगों की तलाश और दूसरी तरफ प्रभावित इलाकों में सैनिटेशन व्यवस्था बनाए रखना और संभावित संक्रमण को फैलने से रोकना।

    सुरंगों में फंसे करीब 100 कर्मचारियों की तलाश

    नेपाल के रसुवा जिले में करीब 100 जलविद्युत परियोजना कर्मियों के कई सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका है। बचाव दल मोटी मिट्टी और मलबे को हटाकर सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

    अब तक दो सुरंगों से तीन शव बरामद किए जा चुके हैं। एक भारतीय सेना अधिकारी के मुताबिक, बचाव टीमें लगातार भारी कीचड़ और मलबा हटाकर आगे बढ़ रही हैं। परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन राहतकर्मियों को अब भी कुछ लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीद है।

    नेपाल ने राहत और बचाव अभियान में करीब 20,600 सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों को लगाया है। अब तक 3,100 से ज्यादा लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकाला जा चुका है।

    शवगृहों में जगह कम, अज्ञात शवों को दफनाया जा रहा

    बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण नेपाल में शवगृहों की क्षमता भी कम पड़ने लगी है। अज्ञात शवों के डीएनए सैंपल लेने के बाद उन्हें दफनाया जा रहा है, ताकि भविष्य में पहचान होने पर उन्हें उनके परिवारों को सौंपा जा सके।

    लापता लोगों के परिजन सामुदायिक केंद्रों में पहुंचकर बरामद शवों की तस्वीरें देख रहे हैं। कई परिवार अब भी अपने रिश्तेदारों के मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

    1000 से ज्यादा फ्रीजर यूनिट की जरूरत

    नेपाल सरकार ने शवों को सुरक्षित रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक, शवों को संरक्षित रखने के लिए 1,000 से ज्यादा फ्रीजर यूनिट की जरूरत है।

    वहीं, लापता लोगों में 592 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। इससे बचाव और पहचान की प्रक्रिया और जटिल हो गई है।

    रेस्क्यू के साथ अब स्वास्थ्य संकट से निपटने की चुनौती

    नेपाल में राहत अभियान जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आपदा का दूसरा पहलू सामने आ रहा है। हजारों लोगों की तलाश अभी बाकी है, सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश जारी है और दूसरी ओर शवों के सड़ने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहा है।

    ऐसे में आने वाले दिनों में नेपाल के लिए सिर्फ लापता लोगों को ढूंढना ही चुनौती नहीं होगी, बल्कि स्वच्छता, शवों के सुरक्षित निस्तारण और संभावित महामारी को रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

  • विश्व में उभर सकते हैं युद्ध, आपदाएं और नई बीमारियां: ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर दी चेतावनी

    विश्व में उभर सकते हैं युद्ध, आपदाएं और नई बीमारियां: ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर दी चेतावनी


    नई दिल्ली। ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनके अनुसार, आगामी वर्षों में विश्व स्तर पर कई संकट और अप्रत्याशित घटनाएं घटित हो सकती हैं। पं. गौतम का कहना है कि युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं और नई बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहेगा, और इसे केवल भविष्यवाणी के रूप में ही नहीं, बल्कि सतर्क रहने के लिए एक संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए।

    विशेष रूप से भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में भूकंप जैसी घटनाओं की आशंका जताई गई है। इसके अलावा, मौसम संबंधी आपदाओं, महामारी और असामान्य प्राकृतिक घटनाओं की संभावना भी बनी रहेगी। ज्योतिषाचार्य ने जोर देकर कहा कि इस चेतावनी का उद्देश्य भय फैलाना नहीं है, बल्कि समाज को संभावित परिस्थितियों के प्रति सचेत करना है।

    पं. गौतम ने सभी लोगों से अपील की है कि वे व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर तैयार रहें। उन्होंने बताया कि यदि सही समय पर सतर्कता और तैयारी रखी जाए, तो इन संभावित आपदाओं का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।