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  • रामदेव अग्रवाल को भारतीय शेयरों से अगले पांच साल में 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न की उम्मीद, पोर्टफोलियो दोगुना होने का अनुमान

    रामदेव अग्रवाल को भारतीय शेयरों से अगले पांच साल में 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न की उम्मीद, पोर्टफोलियो दोगुना होने का अनुमान

    नई दिल्ली ।दिग्गज निवेशक और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने भारतीय शेयर बाजार के भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख जताया है। उनका मानना है कि अगले पांच वर्षों में भारतीय शेयरों से सालाना करीब 15 प्रतिशत रिटर्न मिल सकता है। इस तरह के रिटर्न से लंबी अवधि में निवेशकों का पोर्टफोलियो लगभग दोगुना होने की संभावना बनती है।

    अग्रवाल के अनुमान का आधार भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि और कंपनियों की कमाई में संभावित बढ़ोतरी है। उनके मुताबिक आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर करीब 7.5 से 8.5 प्रतिशत के बीच रह सकती है, जबकि कॉर्पोरेट मुनाफे में लगभग 13 से 14 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिल सकती है। ऐसे माहौल में प्रमुख बाजार सूचकांकों के रिटर्न के लिए भी सकारात्मक संभावना बनती है।

    हालांकि उन्होंने निकट अवधि के बाजार को लेकर बहुत तेज बढ़त की उम्मीद नहीं जताई। उनके मुताबिक लगभग दो साल की सुस्ती के बाद भारतीय शेयर बाजार अगले विकास चरण में प्रवेश करने से पहले कुछ समय तक सीमित दायरे में रह सकता है। एक और साल तक बाजार में इसी तरह की स्थिति बने रहने की संभावना से भी उन्होंने इनकार नहीं किया।

    मौजूदा वैल्यूएशन को लेकर भी अग्रवाल ने कमाई की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। निफ्टी की कमाई के मुकाबले ऊंचे मूल्यांकन के बीच यदि कंपनियों की कमाई में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो बाजार की वैल्यूएशन अपेक्षाकृत कम हो सकती है। उनका अनुमान है कि इस स्थिति में बाजार में आगे बढ़ने की गुंजाइश बनी रह सकती है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई के भारत में सीमित रुझान को लेकर अग्रवाल ने वैश्विक बाजारों की स्थिति का उल्लेख किया। उनके मुताबिक अमेरिका के अलावा कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में मजबूत तेजी और कमाई की संभावनाओं के कारण विदेशी निवेशकों का ध्यान वहां अधिक गया है। वैश्विक पूंजी के लिए अमेरिकी बाजार से मुकाबला करना भी भारतीय बाजारों के लिए चुनौती बना हुआ है।

    अग्रवाल ने कहा कि भारत कुछ ऐसे उभरते बाजारों के लिए पूंजी का स्रोत भी बन रहा है, जिन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश रुझान से फायदा मिल रहा है। हालांकि उन्हें एफआईआई की लगातार बिकवाली में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव कम होता है तो भारतीय बाजार के लिए यह महत्वपूर्ण सकारात्मक कारक साबित हो सकता है।

    विदेशी निवेशकों के लिए भारत की कर व्यवस्था पर भी अग्रवाल ने अपनी राय रखी। उन्होंने कैपिटल गेन्स टैक्स व्यवस्था को विदेशी निवेशकों के लिए कुछ हद तक चुनौतीपूर्ण बताया, लेकिन इसे भारत से निवेश कम होने का सबसे बड़ा कारण नहीं माना। उनके अनुसार मुद्रा विनिमय में होने वाला बदलाव विदेशी निवेशकों के लिए अधिक महत्वपूर्ण चिंता हो सकता है।

    विदेशी निवेशक भारत में डॉलर के माध्यम से पूंजी लगाते हैं, जबकि कैपिटल गेन्स की गणना रुपये में होती है। ऐसे में रुपये की कमजोरी के कारण डॉलर में वास्तविक रिटर्न कम होने के बावजूद निवेशक को रुपये में बने लाभ पर कर देना पड़ सकता है। अग्रवाल के अनुसार विदेशी निवेशकों के लिए लंबे समय तक आकर्षक माहौल बनाए रखने के लिए कर व्यवस्था को दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी रखना जरूरी है।

    नई पीढ़ी की कंपनियों और स्टार्टअप को लेकर भी अग्रवाल ने सावधानी बरतने की सलाह दी। उनका कहना है कि किसी कंपनी को सार्वजनिक बाजार में आने से पहले या तो मुनाफे में होना चाहिए या उसके पास मुनाफे तक पहुंचने का स्पष्ट रास्ता होना चाहिए। सार्वजनिक बाजार निवेशक कंपनियों की कमाई और तिमाही प्रदर्शन को काफी महत्व देते हैं।

    जेप्टो में अपने निवेश का उल्लेख करते हुए अग्रवाल ने कहा कि किसी निवेश की सफलता या विफलता का फैसला तुरंत नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक उनके निवेश का अंतिम आकलन 10 साल बाद ही किया जा सकेगा। इससे उनका जोर स्पष्ट होता है कि शेयर बाजार में लंबी अवधि का नजरिया तत्काल उतार-चढ़ाव से अधिक महत्वपूर्ण है।

  • वैश्विक संकेतों और मजबूत खरीदारी से बाजार में लौटी रफ्तार, सेंसेक्स-निफ्टी मजबूती के साथ बंद, ऑटो और रियल्टी शेयरों ने दिखाई ताकत

    वैश्विक संकेतों और मजबूत खरीदारी से बाजार में लौटी रफ्तार, सेंसेक्स-निफ्टी मजबूती के साथ बंद, ऑटो और रियल्टी शेयरों ने दिखाई ताकत

    नई दिल्ली । सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चौथे सत्र में मजबूती का सिलसिला कायम रखते हुए बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। सकारात्मक वैश्विक संकेतों, प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी और निवेशकों के बेहतर भरोसे के चलते बाजार में पूरे दिन उत्साह का माहौल बना रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे बाजार की सकारात्मक धारणा और मजबूत हुई।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 521.16 अंकों की बढ़त के साथ 78,285.07 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 159.50 अंक चढ़कर 24,430.35 अंक के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार से ही दोनों सूचकांकों में तेजी का रुख दिखाई दिया और दिनभर खरीदारी का दबदबा बना रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 78,398.06 अंक और निफ्टी 24,458.65 अंक के उच्चतम स्तर तक पहुंचने में सफल रहे।

    व्यापक बाजार में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि केवल बड़ी कंपनियों तक ही नहीं बल्कि मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की रुचि बनी रही। बाजार की व्यापक मजबूती को निवेशकों ने सकारात्मक संकेत के रूप में देखा।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑटो तथा ऑयल एंड गैस कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा मेटल, फार्मा, हेल्थकेयर और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि आईटी, मीडिया और पीएसयू बैंकिंग सेक्टर में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली, जिसके कारण इन क्षेत्रों के सूचकांक दबाव में रहे।

    प्रमुख कंपनियों में एचडीएफसी बैंक, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी, बजाज ऑटो और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर कोटक महिंद्रा बैंक, टीसीएस, कोल इंडिया, बजाज फिनसर्व और मैक्स हेल्थकेयर के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद बाजार की समग्र दिशा सकारात्मक बनी रही।

    बाजार में आई इस तेजी का सीधा लाभ निवेशकों को भी मिला। कारोबार समाप्त होने तक सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर लगभग 482.33 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति में करीब दो लाख करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का मनोबल और मजबूत हुआ।

    विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव में नरमी, कच्चे तेल की अपेक्षाकृत स्थिर कीमतें, पहली तिमाही के वित्तीय परिणामों से पहले सकारात्मक माहौल तथा घरेलू स्तर पर मजबूत खरीदारी ने बाजार को मजबूती प्रदान की है। इन कारकों ने निवेशकों के विश्वास को बढ़ाया और बाजार में लगातार चौथे दिन तेजी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    तकनीकी संकेतक भी फिलहाल बाजार के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। प्रमुख सूचकांक महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के ऊपर टिके हुए हैं, जिससे निकट अवधि में सकारात्मक रुझान बने रहने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निफ्टी आने वाले सत्रों में प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार करने में सफल रहता है तो बाजार में तेजी का अगला चरण देखने को मिल सकता है। वहीं, किसी भी सीमित गिरावट की स्थिति में निचले स्तरों पर खरीदारी का समर्थन मिलने की संभावना बनी हुई है, जिससे बाजार की मजबूती आगे भी बरकरार रह सकती है।

  • तिमाही नतीजों से लेकर कच्चे तेल तक कई फैक्टर रहेंगे अहम, अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर रहेगी निवेशकों की नजर

    तिमाही नतीजों से लेकर कच्चे तेल तक कई फैक्टर रहेंगे अहम, अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर रहेगी निवेशकों की नजर

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए आगामी कारोबारी सप्ताह कई महत्वपूर्ण घटनाओं के कारण बेहद अहम माना जा रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों की शुरुआत, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया के हालात बाजार की दिशा तय करने में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। निवेशकों की निगाहें घरेलू और वैश्विक दोनों मोर्चों पर बने घटनाक्रमों पर बनी रहेंगी।

    आने वाले सप्ताह में पहली तिमाही के नतीजों का सिलसिला शुरू होने जा रहा है। इसकी शुरुआत देश की प्रमुख आईटी कंपनी टीसीएस के वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के नतीजों से होगी। बाजार को उम्मीद है कि इस तिमाही के नतीजे आईटी सेक्टर के साथ-साथ अन्य कॉर्पोरेट कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर शुरुआती संकेत देंगे। यही कारण है कि निवेशकों के लिए यह परिणाम विशेष महत्व रखते हैं।

    वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे घटनाक्रम भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं। यदि दोनों देशों के बीच तनाव नियंत्रित रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रह सकती है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। ऊर्जा कीमतों में किसी भी बड़े बदलाव का असर भारतीय बाजार, महंगाई और आयात लागत पर भी देखने को मिल सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की रणनीति भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत देगी। बीते सप्ताह शुरुआती दिनों में विदेशी निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपनाया, हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में उन्होंने फिर से खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया। यदि आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों का निवेश बढ़ता है तो इससे बाजार की धारणा मजबूत हो सकती है, जबकि लगातार बिकवाली दबाव बढ़ा सकती है।

    पिछला कारोबारी सप्ताह घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रहा। प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मजबूती के साथ सप्ताह का समापन किया। निवेशकों की खरीदारी का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। इससे व्यापक बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत होता दिखाई दिया।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी और फार्मा कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक मजबूती दर्ज की गई। हेल्थकेयर, डिफेंस, एफएमसीजी, मेटल और सर्विसेज सेक्टर के शेयरों ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर पीएसयू बैंक, एनर्जी और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में कुछ दबाव देखने को मिला, जिससे इन सूचकांकों ने सप्ताह का समापन गिरावट के साथ किया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि तिमाही नतीजों के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक संकेत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि कंपनियों के परिणाम उम्मीद के अनुरूप रहते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ा नकारात्मक घटनाक्रम नहीं होता, तो बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है। वहीं वैश्विक तनाव या कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल जैसी परिस्थितियां निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं।

    ऐसे में आगामी सप्ताह निवेशकों के लिए सतर्कता और अवसर दोनों लेकर आ सकता है। बाजार की चाल काफी हद तक कॉर्पोरेट प्रदर्शन, वैश्विक संकेतों और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करेगी, इसलिए कारोबारियों की नजर हर प्रमुख आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर बनी रहेगी।

  • दिनभर की मजबूत तेजी के बाद बाजार ने संभाली बढ़त, सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद; ऑटो शेयरों ने दिखाई दमदार रफ्तार

    दिनभर की मजबूत तेजी के बाद बाजार ने संभाली बढ़त, सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद; ऑटो शेयरों ने दिखाई दमदार रफ्तार

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। शुरुआती घंटों में बाजार में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ आगे बढ़े, हालांकि दिन के अंतिम चरण में मुनाफावसूली और कुछ प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली के दबाव के कारण बढ़त सीमित हो गई। इसके बावजूद बाजार हरे निशान में बंद होने में सफल रहा, जिससे निवेशकों का भरोसा कायम रहने के संकेत मिले।

    कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 109 अंक की बढ़त के साथ 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी 34 अंकों की मजबूती के साथ 24,056 के स्तर पर पहुंच गया। सुबह के कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों ने तेज रफ्तार दिखाई थी और एक समय सेंसेक्स 77,800 के पार तथा निफ्टी 24,260 के ऊपर पहुंच गया था। हालांकि दिन चढ़ने के साथ बाजार में कुछ क्षेत्रों में दबाव बढ़ा और शुरुआती बढ़त का बड़ा हिस्सा कम हो गया।

    बाजार की शुरुआत सकारात्मक वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के बीच हुई थी। निवेशकों ने ऑटो, एफएमसीजी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी दिखाई, जिससे सूचकांकों को मजबूती मिली। हालांकि आईटी, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में बिकवाली ने बाजार की रफ्तार को सीमित कर दिया। इन क्षेत्रों में कमजोरी के कारण दिन के अंतिम घंटों में बाजार पर दबाव बढ़ा।

    क्षेत्रवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो ऑटो सेक्टर सबसे मजबूत रहा। वाहन कंपनियों के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। उद्योग जगत का मानना है कि कच्चे माल की लागत में कमी, सप्लाई चेन की स्थिति में सुधार और उपभोक्ता मांग में बढ़ोतरी से ऑटो कंपनियों के प्रदर्शन को समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा एफएमसीजी और रियल्टी क्षेत्र ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया।

    दूसरी ओर आईटी और धातु क्षेत्र के शेयर दबाव में रहे। वैश्विक मांग को लेकर बनी अनिश्चितता और निर्यात आधारित कंपनियों पर संभावित असर के कारण निवेशकों ने इन क्षेत्रों में सतर्क रुख अपनाया। कुछ बड़े आईटी और मेटल शेयरों में कमजोरी का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखाई दिया।

    वृहद बाजार में तस्वीर थोड़ी अलग रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जिससे दोनों सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। यह संकेत देता है कि निवेशक फिलहाल चुनिंदा बड़े और मजबूत शेयरों पर अधिक भरोसा जता रहे हैं, जबकि छोटे शेयरों में सतर्कता बरती जा रही है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम बनी हुई हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार विदेशी बिकवाली तेजी की गति को सीमित कर सकती है। हालांकि घरेलू निवेशकों की सक्रिय भागीदारी फिलहाल बाजार को समर्थन दे रही है।

    इस बीच भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले बढ़त के साथ बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने रुपये को सहारा दिया है, जिससे आयात लागत और महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर पहली तिमाही के कारोबारी नतीजों, मानसून की प्रगति और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर रहेगी। यदि ये कारक अनुकूल रहते हैं तो बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है, हालांकि उतार-चढ़ाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • कच्चे तेल में नरमी से शेयर बाजार को मिला नया दम, सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार उछाल, आईटी और रियल्टी शेयरों में बढ़ी चमक

    कच्चे तेल में नरमी से शेयर बाजार को मिला नया दम, सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार उछाल, आईटी और रियल्टी शेयरों में बढ़ी चमक

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को मजबूत शुरुआत दर्ज की। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का भरोसा बढ़ने से प्रमुख सूचकांक तेजी के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार में आईटी, रियल्टी और बैंकिंग क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान प्रमुख रूप से देखने को मिला, जिससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा और कारोबारी माहौल सकारात्मक बना रहा।

    कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल करते हुए ऊंचे स्तर पर कारोबार किया, जबकि निफ्टी भी मजबूती के साथ आगे बढ़ा। शुरुआती घंटों में बाजार की चाल से यह संकेत मिला कि निवेशक घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर पहले की तुलना में अधिक आश्वस्त दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा बाजार में स्थिरता और तेल कीमतों में गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है, जिसका सकारात्मक असर इक्विटी बाजार पर दिखाई दे रहा है।

    बाजार में सबसे अधिक मजबूती सूचना प्रौद्योगिकी और रियल्टी क्षेत्र के शेयरों में देखने को मिली। आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से इस क्षेत्र का सूचकांक तेजी से ऊपर गया। वहीं रियल एस्टेट क्षेत्र में भी निवेशकों की सक्रियता बढ़ी, जिससे संबंधित कंपनियों के शेयरों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में भी सकारात्मक रुझान दिखाई दिया।

    लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। व्यापक बाजार में खरीदारी के संकेत इस बात को दर्शाते हैं कि तेजी केवल कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, व्यापक भागीदारी किसी भी तेजी को अधिक टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    वैश्विक बाजारों से मिले संकेत भी भारतीय शेयर बाजार के पक्ष में रहे। एशियाई बाजारों में अधिकांश प्रमुख सूचकांक हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। इससे निवेशकों की धारणा को समर्थन मिला। हालांकि कुछ बाजारों में मिश्रित रुख देखने को मिला, फिर भी क्षेत्रीय स्तर पर जोखिम लेने की प्रवृत्ति में सुधार का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों का 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचना भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। तेल कीमतों में कमी से आयात बिल पर दबाव घट सकता है, जिससे चालू खाता घाटा नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी। साथ ही परिवहन और उत्पादन लागत पर पड़ने वाला दबाव कम होने से महंगाई को नियंत्रित रखने में भी सहायता मिल सकती है।

    अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक नियंत्रित रहती हैं तो इसका लाभ आर्थिक विकास दर पर भी दिखाई दे सकता है। कम लागत वाले आर्थिक माहौल में उद्योगों की लाभप्रदता बढ़ सकती है और निवेश गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। यही वजह है कि बाजार ने तेल कीमतों में आई गिरावट को सकारात्मक संकेत के रूप में लिया है।

    फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की दिशा और आगामी आर्थिक आंकड़ों पर बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी जारी रह सकता है। गुरुवार की शुरुआती तेजी ने यह संकेत जरूर दिया है कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल मजबूत बना हुआ है और बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहा है।

  • गिरावट के बाद शेयर बाजार की शानदार वापसी, आईटी और बैंकिंग शेयरों ने भरी रफ्तार; निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    गिरावट के बाद शेयर बाजार की शानदार वापसी, आईटी और बैंकिंग शेयरों ने भरी रफ्तार; निवेशकों की बढ़ी उम्मीदें

    नई दिल्ली । पिछले कारोबारी सत्र की कमजोरी को पीछे छोड़ते हुए भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को शानदार वापसी दर्ज की। दिनभर खरीदारी का मजबूत रुख देखने को मिला, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। निवेशकों की सकारात्मक भागीदारी और प्रमुख क्षेत्रों में खरीदारी के कारण बाजार ने एक बार फिर मजबूती का संकेत दिया। सेंसेक्स में करीब 800 अंकों की तेजी दर्ज हुई, जबकि निफ्टी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर को पार करने में सफल रहा।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 790.54 अंकों की बढ़त के साथ 76,991.22 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 सूचकांक 197.55 अंक चढ़कर 24,021.65 पर पहुंच गया। बाजार की शुरुआत भी सकारात्मक रही और दिनभर निवेशकों का रुझान खरीदारी की ओर बना रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 77,190.37 का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 24,090.05 तक पहुंच गया।

    बाजार में तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी निवेशकों ने सक्रियता दिखाई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा विभिन्न वर्गों के शेयरों में बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि व्यापक स्तर पर निवेशकों की भागीदारी बाजार की मजबूती का सकारात्मक संकेत मानी जाती है।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो सूचना प्रौद्योगिकी और रियल्टी क्षेत्र के शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इन दोनों क्षेत्रों के सूचकांकों में दो प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। बैंकिंग और निजी बैंकिंग शेयरों में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिसने बाजार को ऊपर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दूसरी ओर ऑटोमोबाइल और धातु क्षेत्र के कुछ शेयरों में दबाव दिखाई दिया, जिसके कारण इन सेक्टरों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

    दिनभर के कारोबार में कई प्रमुख कंपनियों के शेयर निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। एविएशन, वित्तीय सेवाओं और तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में मजबूत तेजी देखने को मिली। इसके विपरीत ऊर्जा और धातु क्षेत्र की कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली का असर दिखाई दिया। हालांकि इन चुनिंदा शेयरों की कमजोरी बाजार की समग्र तेजी को प्रभावित नहीं कर सकी।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हालिया गिरावट के बाद निवेशकों द्वारा की गई खरीदारी ने बाजार को नई ऊर्जा प्रदान की है। तकनीकी चार्ट पर निफ्टी ने मजबूत तेजी का संकेत देने वाला पैटर्न बनाया है, जिससे निकट भविष्य में बाजार की दिशा को लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रमुख सूचकांक का महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के ऊपर बने रहना निवेशकों के विश्वास को मजबूत करता है।

    तकनीकी विश्लेषण के आधार पर निफ्टी ने एक बार फिर अपने महत्वपूर्ण औसत स्तर के ऊपर जगह बनाई है। साथ ही बाजार की गति को मापने वाले प्रमुख संकेतकों में भी सुधार दर्ज किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि हालिया करेक्शन के बाद बाजार में खरीदारी की वापसी हो रही है और निवेशकों का रुझान फिर से सकारात्मक बना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निफ्टी के लिए 24,140 से 24,170 के बीच का क्षेत्र महत्वपूर्ण प्रतिरोध साबित हो सकता है। यदि सूचकांक इस दायरे को पार कर स्थिरता बनाए रखने में सफल रहता है तो आगे और तेजी की संभावना बन सकती है। वहीं नीचे की ओर 23,900 से 23,870 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है। जब तक निफ्टी इस दायरे के ऊपर बना रहेगा, तब तक बाजार की समग्र धारणा सकारात्मक रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

  • अमेरिकी फेड के सख्त संकेतों के बीच भारतीय बाजार की सतर्क शुरुआत, सेंसेक्स-निफ्टी फ्लैट; 24,100 के अहम स्तर पर टिकी निवेशकों की नजर

    अमेरिकी फेड के सख्त संकेतों के बीच भारतीय बाजार की सतर्क शुरुआत, सेंसेक्स-निफ्टी फ्लैट; 24,100 के अहम स्तर पर टिकी निवेशकों की नजर

    नई दिल्ली । वैश्विक वित्तीय बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की हालिया मौद्रिक नीति के प्रभाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को कारोबार की शुरुआत बेहद सीमित दायरे में की। शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जबकि निवेशकों का रुख फिलहाल सतर्क लेकिन सकारात्मक बना हुआ दिखाई दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में आई तेजी के बाद निवेशक अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

    कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर के मुकाबले हल्की गिरावट के साथ खुला, जबकि एनएसई निफ्टी भी मामूली कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया। हालांकि शुरुआती मिनटों में ही दोनों प्रमुख सूचकांकों ने कुछ हद तक स्थिरता दिखाई और सीमित दायरे में कारोबार जारी रखा। इससे संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल बड़े दांव लगाने के बजाय बाजार की अगली दिशा का इंतजार कर रहे हैं।

    व्यापक बाजार की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया गया। दोनों श्रेणियों के सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है। विश्लेषकों का कहना है कि मजबूत घरेलू आर्थिक गतिविधियों और कॉर्पोरेट आय की उम्मीदों के कारण मिडकैप तथा स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी हुई है।

    सेक्टोरल प्रदर्शन पर नजर डालें तो सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र दबाव में रहा। आईटी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जिसके पीछे अमेरिकी बाजारों से जुड़े संकेत और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताएं प्रमुख कारण मानी जा रही हैं। दूसरी ओर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, धातु और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं से जुड़े शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे इन सेक्टरों ने बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर भविष्य के संकेत निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रहे हैं। फेडरल रिजर्व द्वारा दरों को यथावत रखने के बावजूद भविष्य में संभावित सख्ती के संकेतों ने वैश्विक बाजारों में सतर्कता बढ़ा दी है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला, जहां शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सीमित गतिविधि दिखाई।

    हालांकि वैश्विक स्तर पर कुछ सकारात्मक घटनाक्रम भी बाजार के लिए सहायक बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जोखिमों में कमी आने से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना है। तेल कीमतों में नरमी भारत जैसे आयातक देशों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते के संतुलन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    तकनीकी संकेतकों की बात करें तो बाजार की मौजूदा संरचना अब भी सकारात्मक बनी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार प्रमुख तकनीकी संकेतक खरीदारी की ताकत को दर्शा रहे हैं। निफ्टी के लिए 24,100 का स्तर निकट अवधि में महत्वपूर्ण अवरोध माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर के ऊपर मजबूती से टिकने में सफल रहता है तो आगे और तेजी का रास्ता खुल सकता है। वहीं नीचे की ओर 23,900 से 23,800 के बीच का क्षेत्र मजबूत समर्थन प्रदान कर सकता है। ऐसे में निवेशकों की नजर आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ इस महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर पर बनी रहेगी।

  • वैश्विक तनाव और कमजोर संकेतों से शेयर बाजार पर दबाव, सेंसेक्स 227 अंक टूटा; आईटी, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

    वैश्विक तनाव और कमजोर संकेतों से शेयर बाजार पर दबाव, सेंसेक्स 227 अंक टूटा; आईटी, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

    नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में दिखाई दिए। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।

    कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से 400 अंकों से अधिक टूटकर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी में भी शुरुआती कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि शुरुआती झटके के बाद बाजार ने कुछ रिकवरी दिखाई, लेकिन दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में ही कारोबार करते रहे। सुबह के सत्र में सेंसेक्स करीब 227 अंक और निफ्टी लगभग 80 अंक की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया।

    बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी, रियल्टी, मेटल और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर दिखाई दिया। प्रमुख आईटी कंपनियों और निजी बैंकों में बिकवाली का माहौल रहा, जबकि कुछ चुनिंदा उपभोक्ता वस्तु, तेल एवं गैस तथा एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सीमित बढ़त दर्ज होने से यह संकेत मिला कि व्यापक बाजार में निवेशकों की रुचि पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

    विश्लेषकों के अनुसार, बाजार की मौजूदा कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव तथा क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली भी भारतीय बाजार पर दबाव बना रही है। विदेशी निवेशक हाल के सत्रों में भारतीय इक्विटी बाजार से पूंजी निकालते दिखाई दिए हैं, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है।

    घरेलू स्तर पर निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों पर टिकी हुई है। शुक्रवार को आने वाले फैसले से ब्याज दरों और आर्थिक गतिविधियों को लेकर नई दिशा मिल सकती है। ऐसे में बड़े निवेशक फिलहाल आक्रामक दांव लगाने से बचते हुए सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और वैश्विक स्तर पर स्थिरता के संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। विदेशी निवेशकों की डेरिवेटिव बाजार में बढ़ती शॉर्ट पोजिशन भी निकट भविष्य में कमजोरी की आशंका को मजबूत करती है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार होता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार की धारणा तेजी से बदल सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा अस्थिरता के दौर में अल्पकालिक ट्रेडिंग जोखिमपूर्ण साबित हो सकती है। वहीं लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश के अवसर भी प्रदान कर सकता है। बैंकिंग, फार्मा, ऑटो और ऑटो एंसिलरी सेक्टर के कई मजबूत शेयर हालिया गिरावट के कारण आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हैं, जो भविष्य में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।