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  • पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार ने दिखाई मजबूती, उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स 130 अंक चढ़कर हरे निशान पर बंद

    पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारतीय बाजार ने दिखाई मजबूती, उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स 130 अंक चढ़कर हरे निशान पर बंद

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को मजबूती का प्रदर्शन किया। शुरुआती कारोबार में अच्छी तेजी के बाद दिनभर उतार-चढ़ाव का दौर देखने को मिला, लेकिन कारोबार समाप्त होने तक प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। निवेशकों ने चुनिंदा क्षेत्रों में खरीदारी जारी रखी, जिससे बाजार को समर्थन मिला और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू निवेशकों का भरोसा कायम दिखाई दिया।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 130.49 अंक यानी 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,185.43 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 26.45 अंक यानी 0.11 प्रतिशत मजबूत होकर 24,078.50 अंक के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में दोनों प्रमुख सूचकांकों ने बेहतर प्रदर्शन किया और दिन के दौरान सेंसेक्स 77,646.27 अंक तथा निफ्टी 24,220.35 अंक के उच्चतम स्तर तक पहुंचने में सफल रहे। हालांकि, बाद में मुनाफावसूली के कारण बढ़त कुछ सीमित हो गई।

    व्यापक बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि केवल बड़ी कंपनियों के शेयर ही नहीं बल्कि मध्यम और छोटी कंपनियों में भी निवेशकों की रुचि बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की निरंतर भागीदारी और मजबूत आर्थिक संकेतकों ने बाजार को वैश्विक दबाव के बीच भी संतुलित बनाए रखा।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली। इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑयल एंड गैस, वित्तीय सेवाएं, फार्मा, हेल्थकेयर और ऑटो सेक्टर में भी खरीदारी का माहौल रहा। दूसरी ओर धातु, सूचना प्रौद्योगिकी, एफएमसीजी, मीडिया और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में दबाव बना रहा। धातु कंपनियों पर कच्चे माल की लागत और वैश्विक मांग को लेकर बनी चिंताओं का असर दिखाई दिया।

    प्रमुख कंपनियों में अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी लाइफ, श्रीराम फाइनेंस, आयशर मोटर्स और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, एलएंडटी, जेएसडब्ल्यू स्टील और इंफोसिस के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इससे स्पष्ट हुआ कि बाजार में सेक्टर आधारित खरीदारी और बिकवाली दोनों का असर बना रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण बाजार पर दबाव बना था, जबकि बुधवार को शुरुआती रिकवरी मुख्य रूप से तकनीकी सुधार के रूप में सामने आई। उनका कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है और पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है तो भारतीय शेयर बाजार को आगे और समर्थन मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और आगामी आर्थिक संकेतकों पर बनी रहेगी, जो आने वाले कारोबारी सत्रों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • भारत की सबसे बड़ी कंपनियों का मिला-जुला प्रदर्शन, चार दिग्गजों की बाजार वैल्यू बढ़ी, छह कंपनियों के मार्केटकैप में आई गिरावट

    भारत की सबसे बड़ी कंपनियों का मिला-जुला प्रदर्शन, चार दिग्गजों की बाजार वैल्यू बढ़ी, छह कंपनियों के मार्केटकैप में आई गिरावट


    नई दिल्ली ।
    भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह उतार-चढ़ाव के बीच देश की शीर्ष 10 सूचीबद्ध कंपनियों का प्रदर्शन मिश्रित रहा। इस दौरान चार प्रमुख कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में कुल 92,995.48 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि छह कंपनियों के मार्केटकैप में गिरावट देखने को मिली। सबसे अधिक लाभ एचडीएफसी बैंक और भारती एयरटेल को हुआ, जिन्होंने निवेशकों की मजबूत रुचि के चलते अपने बाजार मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की।

    समीक्षा अवधि के दौरान एचडीएफसी बैंक सबसे अधिक लाभ हासिल करने वाली कंपनी रही। बैंक के बाजार पूंजीकरण में 35,808.09 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई, जिससे उसका कुल बाजार मूल्य बढ़कर 12.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। इसके बाद भारती एयरटेल का स्थान रहा, जिसके बाजार पूंजीकरण में 34,896.92 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ और कंपनी का कुल मूल्य लगभग 11.99 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार पूंजीकरण में 6,224.97 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कंपनी का कुल मूल्य बढ़कर 17.71 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया। वहीं एलआईसी के मार्केटकैप में 16,065.50 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और उसका कुल बाजार मूल्य 5.60 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।

    दूसरी ओर, शीर्ष 10 कंपनियों में शामिल छह कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में गिरावट दर्ज की गई। सबसे अधिक नुकसान हिंदुस्तान यूनिलीवर को हुआ, जिसके बाजार मूल्य में 12,088.65 करोड़ रुपये की कमी आई। इसके अलावा लार्सन एंड टुब्रो, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक और भारतीय स्टेट बैंक के मार्केटकैप में भी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि इन कंपनियों की बाजार स्थिति मजबूत बनी हुई है, लेकिन सप्ताह के दौरान निवेशकों की धारणा और बाजार की चाल का असर इनके मूल्यांकन पर दिखाई दिया।

    विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक संकेतकों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, ब्याज दरों की संभावनाओं और कॉर्पोरेट प्रदर्शन से जुड़ी उम्मीदों का असर बड़ी कंपनियों के शेयरों पर लगातार बना हुआ है। इसी कारण अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियों में निवेशकों का रुझान भी अलग-अलग देखने को मिल रहा है। बैंकिंग और दूरसंचार क्षेत्र की कुछ कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि उपभोक्ता, आईटी और वित्तीय क्षेत्र की कुछ कंपनियों पर दबाव बना रहा।

    मिश्रित प्रदर्शन के बावजूद बाजार पूंजीकरण के आधार पर रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बनी रही। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, भारतीय जीवन बीमा निगम, लार्सन एंड टुब्रो और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहों में कंपनियों के तिमाही नतीजे, वैश्विक बाजारों की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ऐसे में निवेशकों की नजर प्रमुख कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और व्यापक आर्थिक संकेतकों पर बनी रहेगी, जो आगे बाजार पूंजीकरण में बदलाव का प्रमुख आधार बन सकते हैं।