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  • मिडिल ईस्ट जंग और भड़केगी? ट्रंप के बड़े सैन्य कदम के संकेत

    मिडिल ईस्ट जंग और भड़केगी? ट्रंप के बड़े सैन्य कदम के संकेत



    वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच हालात और गंभीर होते नजर आ रहे हैं। Iran, United States और Israel के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच अब संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका बड़ा कदम उठा सकता है, जिससे जंग और फैलने की आशंका बढ़ गई है।

    19 दिन से जारी भीषण टकराव
    पिछले करीब तीन हफ्तों से जारी संघर्ष में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए हैं। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के शीर्ष ठिकानों और नेतृत्व को निशाना बनाया, वहीं ईरान ने जवाब में इजरायल और खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं।

    हाल ही में ईरान ने Saudi Arabia, Qatar और United Arab Emirates के तेल-गैस ठिकानों को भी निशाना बनाया, जिससे युद्ध का दायरा और बढ़ गया है।

    हजारों अमेरिकी सैनिक भेजने की तैयारी
    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने पर विचार कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि हजारों अमेरिकी सैनिकों की तैनाती का प्लान तैयार किया जा रहा है, ताकि ईरान के खिलाफ ऑपरेशन को और मजबूत किया जा सके।

    क्या है अमेरिका की रणनीति?
    सूत्रों के अनुसार, सैनिकों की तैनाती से अमेरिका को कई सैन्य विकल्प मिल सकते हैं। इनमें सबसे अहम है Strait of Hormuz में तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना।

    यह मिशन मुख्य रूप से एयरफोर्स और नेवी के जरिए चलाया जा सकता है। हालांकि कुछ विकल्प ऐसे भी हैं, जिनमें ईरान के तटीय इलाकों के पास सैनिकों की तैनाती की बात सामने आई है।

    खतरनाक योजना: खर्ग द्वीप पर नजर
    अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि Kharg Island पर जमीनी सेना भेजने के विकल्प पर चर्चा हुई है।

    यह द्वीप ईरान के लगभग 90% तेल निर्यात का केंद्र है, इसलिए यहां कोई भी सैन्य कार्रवाई बेहद संवेदनशील और जोखिम भरी मानी जा रही है। ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता इसे और खतरनाक बना देती है।

    राजनीतिक जोखिम भी कम नहीं
    विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी सैनिकों की सीधी तैनाती Donald Trump के लिए राजनीतिक रूप से भारी पड़ सकती है।

    अमेरिकी जनता में इस युद्ध को लेकर समर्थन सीमित है

    ट्रंप पहले ही मिडिल ईस्ट में नए युद्ध से दूर रहने का वादा कर चुके हैं

    हाल में एक अमेरिकी अधिकारी ने नाराजगी जताते हुए इस्तीफा भी दिया है

    इसके अलावा, इस संघर्ष में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की मौत और करीब 200 के घायल होने की खबर है।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के संभावित सैन्य कदम हालात को और विस्फोटक बना सकते हैं। यदि सैनिकों की तैनाती होती है, तो यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

  • एयरस्ट्राइक के बाद अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर तनाव तेज

    एयरस्ट्राइक के बाद अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर तनाव तेज

    नई दिल्ली। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव तेजी से बढ़ गया है। पाकिस्तान द्वारा कथित तौर पर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर की गई एयरस्ट्राइक के बाद अब अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू करने का दावा किया है।
    पिछले करीब 48 घंटों से जारी छिटपुट गोलीबारी अब भारी हथियारों के इस्तेमाल तक पहुंच गई है।

    तालिबान का जवाबी कार्रवाई का दावा
    तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बिहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि नागरिकों की मौत के जवाब में अफगान बलों ने पाकिस्तानी सैन्य चौकियों और ठिकानों को निशाना बनाया। उनके अनुसार, कार्रवाई में मल्टी-बैरेल रॉकेट लॉन्चर, टैंक, आर्टिलरी और मोर्टार जैसे भारी हथियारों का इस्तेमाल किया गया।

    15 चौकियों पर कब्जे का दावा
    तालिबान प्रवक्ता ने दावा किया कि नंगरहार-खैबर और कुनार-बाजौर सीमाई इलाकों में हमले कर पाकिस्तान की 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है।
    बताया गया कि नंगरहार सीमा के पास दो, गोश्ता क्षेत्र के आसपास तीन और कुनार सीमा पर दो चौकियों पर अफगान बलों की मौजूदगी है। हालांकि इन दावों की पाकिस्तान की ओर से स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
    22 फरवरी की एयरस्ट्राइक से बढ़ा विवाद
    तनाव की शुरुआत 22 फरवरी को हुई, जब पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने नंगरहार प्रांत के खोग्यानी और गनी खेल जिलों तथा पक्तिका के बेरमल और अर्गुन क्षेत्रों में हवाई हमले किए।

    स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इन हमलों में एक ही परिवार के 16 नागरिकों की मौत हुई।

    पाकिस्तान का कहना था कि कार्रवाई आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ की गई, जबकि तालिबान प्रशासन ने इसे नागरिकों पर हमला बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

    क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

    दोनों देशों के बीच सीमा पार गतिविधियों और उग्रवादी संगठनों को लेकर पहले भी आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। मौजूदा सैन्य टकराव ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो यह संघर्ष व्यापक रूप ले सकता है।