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  • US ने 13 दिन बाद रोके हमले…, जहाज पर अटैक को लेकर अब यूक्रेन-ईरान के बीच ठनी

    US ने 13 दिन बाद रोके हमले…, जहाज पर अटैक को लेकर अब यूक्रेन-ईरान के बीच ठनी


    तेहरान।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में पिछले दो हफ्तों से लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच अचानक बड़ा मोड़ आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने शुक्रवार को अमेरिकी सेना को ईरान पर नए हवाई हमले नहीं करने का निर्देश दिया. इससे पहले ट्रंप लगातार 13 दिनों तक हर दिन सैन्य हमलों की मंजूरी दे रहे थे. वहीं दूसरी तरफ अब ईरान और यूक्रेन में एक जहाज पर हमले को लेकर ठनी हुई है. लेकिन पहले ईरान और अमेरिका की खबर समझ लेते हैं।

    भारतीय समय के मुताबक हर सुबह 5 बजे से पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड एक्स पर पोस्ट करके बताता था कि वह हमले कर रहा है. लेकिन 25 जुलाई को ऐसा कोई भी पोस्ट नहीं आया. हालांकि ट्रंप ने साफ किया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका दोबारा हमले शुरू कर सकता है, लेकिन फिलहाल उनकी प्राथमिकता बातचीत के जरिए समाधान निकालना है।

    व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका चाहे तो हमले जारी रख सकता है या उन्हें और तेज कर सकता है. लेकिन उन्होंने इसे ‘समझौते का सही समय’ बताते हुए कहा कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है और उन्हें लगता है कि तेहरान अब पहले से ज्यादा गंभीर नजर आ रहा है. एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी दौरान ओमान का एक प्रतिनिधिमंडल ईरान पहुंचा, जहां होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने से जुड़े संभावित समझौते पर बातचीत हुई. रिपोर्ट का दावा है कि इस बातचीत में कुछ प्रगति हुई है।


    इजरायल भी था बड़े हमले की तैयारी में

    रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के सुरक्षा तंत्र को उम्मीद थी कि शुक्रवार को अमेरिका ईरान पर एक और बड़ा हमला करेगा. इसी आशंका के चलते इजरायली सेना और सुरक्षा कैबिनेट हाई अलर्ट पर थे. बाद में उन्हें जानकारी दी गई कि ट्रंप ने नए हमलों की मंजूरी नहीं दी।


    यूक्रेन पर भड़का ईरान

    इसी बीच ईरान ने एक अलग मोर्चे पर यूक्रेन के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया कि कैस्पियन सागर जो रूस और ईरान को जोड़ता है वहां एक वाणिज्यिक जहाज पर यूक्रेन ने हमला किया. इस हमले में एक नाविक की मौत हो गई और दूसरा घायल हो गया. ईरान ने इस घटना को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताते हुए तेहरान में यूक्रेन के प्रभारी राजनयिक को तलब किया. विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख से बातचीत में भी इस घटना की निंदा करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से कार्रवाई की मांग की. वहीं ईरान से जुड़े कई टेलीग्राम चैनलों ने ईरानी मिसाइलों की रेंज दिखाते हुए धमकी दे रहे हैं कि कि वह यूक्रेन तक हमला कर सकते हैं।


    यूक्रेन का क्या कहना है?

    यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने इससे पहले कहा था कि उनकी सेना ने कैस्पियन सागर में एक रूसी युद्धपोत और ईरान से जुड़े सैन्य सामान ले जा रहे जहाजों को निशाना बनाया है. जेलेंस्की ने यह आरोप भी लगाया कि रूस खाड़ी देशों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सैटेलाइट तस्वीरें ईरान को उपलब्ध करा रहा है, ताकि ईरान हमलों की योजना बना सके. इन आरोपों पर रूस की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव और गहराया, ट्रंप बोले- समझौते का दौर खत्म; मध्य पूर्व में बढ़ी नई टकराव की आशंका

    अमेरिका-ईरान तनाव और गहराया, ट्रंप बोले- समझौते का दौर खत्म; मध्य पूर्व में बढ़ी नई टकराव की आशंका

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह ईरान के साथ किसी भी नए समझौते के पक्ष में नहीं हैं और उनके अनुसार दोनों देशों के बीच समझौते की संभावना अब समाप्त हो चुकी है। ट्रंप के इस बयान ने पहले से तनावपूर्ण हालात के बीच नई कूटनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व और उसकी नीतियों की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी नए समझौते की कोई आवश्यकता नहीं है और अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देता रहेगा। उनके बयान को हाल के सैन्य घटनाक्रम और दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि हाल की घटनाओं के बाद उन्हें नहीं लगता कि संघर्ष विराम से जुड़े प्रयास प्रभावी रूप से लागू हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात यह दर्शाते हैं कि दोनों देशों के बीच विश्वास का स्तर काफी कमजोर हो चुका है। ऐसे में किसी नए समझौते की संभावना फिलहाल बेहद सीमित दिखाई देती है।

    हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों में भी तेजी देखने को मिली है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि उसने क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों और समुद्री मार्गों की रक्षा के उद्देश्य से आवश्यक कार्रवाई की है। वहीं दूसरी ओर ईरान भी लगातार अपने रुख पर कायम है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और अधिक बढ़ गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू बने हुए हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

    ट्रंप ने अपनी टिप्पणी के दौरान नाटो और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ सुरक्षा और रणनीतिक हितों पर लगातार विचार कर रहा है। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई विषयों पर नए सिरे से रणनीति तैयार करने की आवश्यकता है।

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों और ऊर्जा क्षेत्र पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, निवेशकों की बढ़ती सतर्कता और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी प्रभावित किया है। कई देशों ने स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखते हुए संयम और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले घटनाक्रम पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण होंगे। यदि तनाव कम करने के लिए प्रभावी कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में दुनिया की निगाहें दोनों देशों के अगले कदम और संभावित कूटनीतिक पहल पर टिकी हुई हैं।

  • मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने गहराई वैश्विक चिंता, विशेषज्ञ बोले- हालात एक और व्यापक युद्ध की ओर बढ़ने का दे रहे संकेत

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने गहराई वैश्विक चिंता, विशेषज्ञ बोले- हालात एक और व्यापक युद्ध की ओर बढ़ने का दे रहे संकेत

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालिया घटनाक्रम के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के प्रभावी प्रयास नहीं किए गए, तो आने वाले महीनों में स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है। उनका कहना है कि मौजूदा घटनाएं इस ओर संकेत करती हैं कि क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

    विदेश मामलों के जानकार डॉ. वाएल अव्वाद ने कहा कि हाल के घटनाक्रम ने पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है। उनके अनुसार, यदि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप जारी रखते हैं और सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं, तो इसका असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

    उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल बताए गए हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्र में तनाव कम करना और सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखना था। उनका मानना है कि यदि समझौते के प्रावधानों का पूरी तरह पालन नहीं होता, तो आपसी अविश्वास बढ़ सकता है और स्थिति अधिक संवेदनशील बन सकती है।

    विशेषज्ञ के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या नौवहन में बाधा अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है।

    डॉ. अव्वाद ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था में कई देशों की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है। उनका मानना है कि यदि तनाव लगातार बढ़ता है, तो विभिन्न अंतरराष्ट्रीय गठबंधन और सहयोगी देश भी इस घटनाक्रम से प्रभावित हो सकते हैं। इससे कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ सुरक्षा संबंधी रणनीतियों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दो से तीन महीने इस पूरे क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इस अवधि में यदि संवाद और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो तनाव और गहरा सकता है। उनका मानना है कि सभी पक्षों को संयम बरतते हुए बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने का प्रयास करना चाहिए।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहता। इसका सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, समुद्री व्यापार, निवेश, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और वित्तीय बाजारों पर भी पड़ता है। यही कारण है कि दुनिया के कई देश इस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और स्थिति के शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

    हाल के घटनाक्रम के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और संघर्ष की संभावनाओं को कम करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक वार्ता, आपसी विश्वास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ही ऐसे तनावपूर्ण माहौल में स्थायी समाधान का आधार बन सकते हैं। यदि संवाद की प्रक्रिया मजबूत होती है तो क्षेत्र में शांति बनाए रखने की संभावना बढ़ेगी, जबकि लगातार बढ़ता तनाव व्यापक क्षेत्रीय संकट का कारण बन सकता है।

  • यमन में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा, ईरानी विमान की लैंडिंग के बाद सऊदी गठबंधन की हूतियों को कड़ी चेतावनी, क्षेत्रीय तनाव गहराया

    यमन में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा, ईरानी विमान की लैंडिंग के बाद सऊदी गठबंधन की हूतियों को कड़ी चेतावनी, क्षेत्रीय तनाव गहराया

    नई दिल्ली । यमन में एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। राजधानी सना में ईरान के एक नागरिक विमान के उतरने के बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और हूती विद्रोहियों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। दोनों पक्षों की ओर से जारी चेतावनियों ने पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा स्थिति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र पहले से ही कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।

    जानकारी के अनुसार, हूती नियंत्रण वाले सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक ईरानी विमान के उतरने के दौरान तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई। हूती पक्ष का दावा है कि विमान को रोकने की कोशिश के जवाब में उन्होंने अपने वायु रक्षा तंत्र को सक्रिय किया। वहीं दूसरी ओर सऊदी समर्थित गठबंधन इस घटनाक्रम को क्षेत्रीय सुरक्षा और यमन की स्थिति के लिए गंभीर मान रहा है।

    सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने स्पष्ट किया है कि यदि उसकी सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता या यमन की संप्रभुता को चुनौती देने की कोई भी कोशिश की गई तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। गठबंधन का कहना है कि हाल के घटनाक्रम केवल सैन्य चुनौती नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर डाल सकते हैं।

    उधर हूती विद्रोहियों ने भी अपने हालिया बयानों में सऊदी अरब के विभिन्न रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि उनके नियंत्रण वाले क्षेत्रों में हस्तक्षेप जारी रहा तो वे जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे। इस बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया है।

    यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने भी पूरे घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की है। सरकार की ओर से आयोजित आपात बैठक में ईरानी विमान की लैंडिंग पर आपत्ति जताते हुए इसे देश की संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा बताया गया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्षेत्र में तनाव कम करने तथा हालात को नियंत्रण में रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल यमन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव हो सकते हैं। सऊदी अरब और ईरान लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रीय मुद्दों पर अलग-अलग पक्षों का समर्थन करते रहे हैं। ऐसे में यमन में बढ़ता तनाव दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद संवेदनशील समीकरणों को और जटिल बना सकता है।

    यमन वर्ष 2015 से लगातार संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। लंबे समय से जारी गृहयुद्ध के कारण लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और देश गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठन समय-समय पर संघर्ष विराम और राजनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल सका है।

    ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि यदि सभी पक्ष संयम नहीं बरतते, तो यमन में सैन्य टकराव का नया दौर शुरू हो सकता है। फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन, हूती विद्रोहियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आगामी रणनीति पर बनी हुई है, क्योंकि किसी भी बड़े कदम का असर पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ सकता है।

  • यूक्रेन के ड्रोन हमलों के बाद रूस का बड़ा पलटवार, कीव समेत कई ठिकानों पर मिसाइलों की बरसात; युद्ध में बढ़ा नया तनाव

    यूक्रेन के ड्रोन हमलों के बाद रूस का बड़ा पलटवार, कीव समेत कई ठिकानों पर मिसाइलों की बरसात; युद्ध में बढ़ा नया तनाव

    नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। हाल के दिनों में यूक्रेन द्वारा रूस के ऊर्जा और सैन्य प्रतिष्ठानों पर किए गए ड्रोन हमलों के बाद रूस ने राजधानी कीव सहित कई क्षेत्रों में व्यापक हवाई और मिसाइल हमले किए हैं। इन हमलों के बाद राजधानी में बड़े पैमाने पर नुकसान और जनहानि की खबरें सामने आई हैं, जबकि कई इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।

    लगातार हो रहे हमलों के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अपना विदेश दौरा बीच में समाप्त कर तत्काल देश लौटने का निर्णय लिया। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के साथ हालात की समीक्षा की तथा नागरिकों से एयर अलर्ट का पालन करने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं को भी सक्रिय कर दिया है ताकि राहत कार्यों में तेजी लाई जा सके।

    रूसी सेना ने इस अभियान में लंबी दूरी की मिसाइलों और रणनीतिक हवाई क्षमता का इस्तेमाल किया। राजधानी के अलावा कई अन्य स्थानों पर भी हमलों की सूचना मिली है। कई इमारतों, सार्वजनिक ढांचों और बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। कुछ स्थानों पर आग लगने और मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं।

    रूस का कहना है कि हमलों का उद्देश्य यूक्रेन के सैन्य और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना था। उसके अनुसार हाल के सप्ताहों में यूक्रेन ने रूसी क्षेत्र में स्थित ऊर्जा प्रतिष्ठानों, तेल भंडारण केंद्रों और सैन्य परिसरों पर ड्रोन हमले किए थे, जिनके जवाब में यह कार्रवाई की गई है। दूसरी ओर यूक्रेन का आरोप है कि हमलों का दायरा केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा और कई नागरिक क्षेत्रों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

    युद्ध के मौजूदा चरण में दोनों पक्ष लगातार नई सैन्य रणनीतियां अपना रहे हैं। यूक्रेन की ओर से ड्रोन हमलों की क्षमता में वृद्धि देखी गई है, जबकि रूस लंबी दूरी की मिसाइलों और हवाई हमलों के जरिए जवाबी कार्रवाई तेज कर रहा है। इससे संघर्ष का दायरा और अधिक व्यापक होता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियां आने वाले समय में युद्ध को और जटिल बना सकती हैं।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा है कि उनका देश संघर्ष समाप्त करने के प्रयासों के पक्ष में है, लेकिन लगातार हो रहे हमले शांति प्रक्रिया को कठिन बना रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यूक्रेन की सुरक्षा और पुनर्निर्माण में सहयोग जारी रखने की अपील की। वहीं रूस ने अपने सुरक्षा हितों और सैन्य लक्ष्यों को प्राथमिकता बताते हुए अभियान जारी रखने के संकेत दिए हैं।

    चार वर्ष से अधिक समय से जारी इस युद्ध ने यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर गहरा प्रभाव डाला है। मौजूदा घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी कम होने के संकेत नहीं हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर फिर से चर्चा तेज हो सकती है, हालांकि फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रणनीतिक रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं।

  • ईरान-इजरायल तनाव पर पूर्व सुरक्षा अधिकारी का बड़ा दावा, कहा- युद्ध बढ़ा तो दुनिया दो धड़ों में बंट सकती है

    ईरान-इजरायल तनाव पर पूर्व सुरक्षा अधिकारी का बड़ा दावा, कहा- युद्ध बढ़ा तो दुनिया दो धड़ों में बंट सकती है

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताओं को एक बार फिर बढ़ा दिया है। दोनों देशों के बीच हाल के हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के बाद क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को लेकर गंभीर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसी बीच पूर्व सुरक्षा अधिकारी और पूर्व एनएसजी कमांडो लकी बिष्ट के कुछ बयानों ने भू-राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

    लकी बिष्ट ने दावा किया है कि वर्तमान संघर्ष भविष्य में और अधिक व्यापक रूप ले सकता है। उनके अनुसार यदि क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ता रहा तो इसमें अन्य वैश्विक शक्तियों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भागीदारी भी देखने को मिल सकती है। उन्होंने यह आशंका भी व्यक्त की कि दुनिया की प्रमुख शक्तियां अलग-अलग पक्षों में खड़ी हो सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय तनाव और बढ़ सकता है।

    हालांकि अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के दावे फिलहाल विश्लेषण और व्यक्तिगत आकलन की श्रेणी में आते हैं। किसी संभावित युद्ध, सैन्य गठबंधन की भागीदारी या भविष्य की सैन्य कार्रवाई को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए ऐसे दावों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रमों ने निश्चित रूप से वैश्विक चिंता बढ़ाई है। ईरान और इजरायल के बीच मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा संबंधी एडवाइजरी जारी की हैं। ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी इन घटनाओं का प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान स्थिति का सबसे बड़ा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, शेयर बाजारों में अस्थिरता और निवेशकों की बढ़ती चिंता पहले से दिखाई देने लगी है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर दुनिया के कई देशों की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।

    चीन और ताइवान को लेकर भी समय-समय पर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों द्वारा संभावित तनाव की आशंकाएं व्यक्त की जाती रही हैं। हालांकि मौजूदा समय में किसी बड़े सैन्य संघर्ष की आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

    इस बीच कई वैश्विक नेता संयम बरतने और बातचीत के रास्ते को प्राथमिकता देने की अपील कर रहे हैं। विभिन्न देशों की सरकारें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और संभावित जोखिमों का आकलन कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी तनाव कम करने और संघर्ष को व्यापक रूप लेने से रोकने पर जोर दिया है।

    भू-राजनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि वर्तमान समय में सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता तथ्यों और आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित विश्लेषण की है। युद्ध और वैश्विक संघर्षों को लेकर सामने आने वाले दावों और अनुमानों के बीच सत्यापित जानकारी को प्राथमिकता देना जरूरी है, ताकि अनावश्यक भ्रम और आशंकाओं से बचा जा सके।

    पश्चिम एशिया की स्थिति फिलहाल अंतरराष्ट्रीय राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय घटनाक्रम, कूटनीतिक प्रयास और वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रियाएं यह तय करेंगी कि हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। फिलहाल दुनिया की नजरें इसी क्षेत्र पर टिकी हुई हैं।