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त्योहारी सीजन से पहले गोल्ड ईटीएफ एफओएफ में नए निवेश पर रोक, एसआईपी और लंपसम निवेशकों के लिए बदले नियम
नई दिल्ली ।त्योहारी सीजन में सोने की मांग बढ़ने से पहले कई म्यूचुअल फंड कंपनियों ने गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) से जुड़े फंड-ऑफ-फंड्स (एफओएफ) में नए निवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह व्यवस्था 16 अक्टूबर 2026 से लागू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके तहत नए एकमुश्त निवेश, नई सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के पंजीकरण और पहले से चल रही एसआईपी में अतिरिक्त निवेश से जुड़े कुछ अनुरोधों पर प्रतिबंध लगाया गया है।निवेशकों को भेजी गई सूचनाओं के अनुसार, यह रोक अगले आदेश तक लागू रहेगी। कुछ फंड हाउसों ने इसके दायरे में स्विच-इन लेनदेन और नई सिस्टेमेटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी) के पंजीकरण को भी शामिल किया है। हालांकि, सभी कंपनियों के नियम और प्रतिबंधों का दायरा एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। निवेशकों को संबंधित फंड हाउस की ओर से जारी सूचना के आधार पर अपने निवेश संबंधी फैसले लेने होंगे।गोल्ड ईटीएफ एफओएफ ऐसी म्यूचुअल फंड योजनाएं होती हैं, जो मुख्य रूप से गोल्ड ईटीएफ की इकाइयों में निवेश करती हैं। इनके माध्यम से निवेशक सीधे सोने के आभूषण या सिक्के खरीदे बिना सोने की कीमतों से जुड़े निवेश का विकल्प चुन सकते हैं। नए निवेश पर रोक का मतलब यह नहीं है कि इन योजनाओं में पहले से निवेश करने वाले सभी निवेशकों का पैसा निकालने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।फंड कंपनियों की ओर से जारी सूचनाओं में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध लागू होने से पहले पंजीकृत एसआईपी और एसटीपी की निर्धारित किस्तों का लेनदेन सामान्य रूप से जारी रहेगा। यानी पहले से पंजीकृत योजनाओं के तहत होने वाले नियमित निवेश पर सामान्य तौर पर असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, मौजूदा एसआईपी में अतिरिक्त राशि जोड़ने या निवेश बढ़ाने के अनुरोधों पर रोक लागू हो सकती है।निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि रिडेम्प्शन यानी निवेश की रकम वापस लेने और स्विच-आउट के अनुरोधों पर इन प्रतिबंधों का असर नहीं पड़ेगा। इससे पहले से निवेश कर चुके लोगों के लिए अपनी इकाइयां भुनाने या दूसरी योजना में स्थानांतरित करने का विकल्प बना रहेगा। संबंधित कंपनियों ने यह भी बताया है कि निर्धारित कट-ऑफ समय के बाद जमा किए गए कुछ आवेदन अस्वीकार किए जा सकते हैं और निवेशकों की राशि वापस की जा सकती है।हालांकि, म्यूचुअल फंड कंपनियों की ओर से जारी सूचनाओं में नए निवेश पर रोक लगाने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। एक फंड हाउस ने इसे नियामकीय स्तर पर हुई चर्चाओं के बाद उद्योग के माध्यम से मिले निर्देशों के अनुरूप उठाया गया कदम बताया है। इसलिए इस फैसले के पीछे किसी एक कारण को निश्चित रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान भारत में सोने की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। इस अवधि में लोग आभूषणों और अन्य रूपों में सोना खरीदते हैं। भारत घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर सोने के आयात पर निर्भर है। आयात में बढ़ोतरी से व्यापार घाटे पर दबाव पड़ सकता है और रुपये की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।इस वर्ष की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के संदर्भ में विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने की अपील की थी। उन्होंने नागरिकों से एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने का आग्रह किया था। प्रधानमंत्री ने समारोहों और अन्य अवसरों पर सोने के आभूषण नहीं खरीदने का संकल्प लेने की बात कही थी।फिलहाल गोल्ड ईटीएफ एफओएफ में नए निवेश पर लगी रोक अस्थायी है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। निवेश करने या एसआईपी में बदलाव करने की योजना बना रहे लोगों के लिए संबंधित म्यूचुअल फंड कंपनी की ताजा सूचना और लागू शर्तों की जांच करना जरूरी होगा। -

गोल्ड ईटीएफ में सितंबर के दौरान निवेश 71.4 प्रतिशत बढ़कर 4,451 करोड़ रुपये पहुंचा, इक्विटी फंड और एसआईपी में भी निवेशकों की मजबूत भागीदारी
नई दिल्ली ।सितंबर 2026 में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। इस दौरान गोल्ड ईटीएफ में शुद्ध निवेश अगस्त के 2,597 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,451 करोड़ रुपये हो गया। महीने-दर-महीने आधार पर इसमें 71.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़ा दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान सोने से जुड़े निवेश विकल्पों की ओर बढ़ा है। हालांकि, सोने में निवेश बढ़ने के बावजूद व्यापक म्यूचुअल फंड उद्योग को सितंबर में शुद्ध निकासी का सामना करना पड़ा।सितंबर के दौरान पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग से कुल 1.33 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। इसके विपरीत, अगस्त में उद्योग में 41,353 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया था। इस बड़े बदलाव की प्रमुख वजह फिक्स्ड इनकम से जुड़ी म्यूचुअल फंड योजनाओं से भारी निकासी रही। खासतौर पर डेट म्यूचुअल फंड से निवेशकों ने बड़ी रकम निकाली, जिससे उद्योग के कुल निवेश प्रवाह पर दबाव पड़ा।
सितंबर में डेट म्यूचुअल फंड योजनाओं से शुद्ध निकासी बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि अगस्त में यह आंकड़ा 8,127 करोड़ रुपये था। डेट फंड से इतनी बड़ी निकासी का असर म्यूचुअल फंड उद्योग की कुल प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियों यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) पर भी दिखाई दिया। अगस्त में उद्योग का कुल एयूएम 87.08 लाख करोड़ रुपये था, जो सितंबर में घटकर 82.64 लाख करोड़ रुपये रह गया। इस तरह एक महीने में कुल एयूएम में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।
दूसरी ओर, इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेशकों की भागीदारी मजबूत बनी रही। सितंबर में इक्विटी फंड में शुद्ध निवेश 30.6 प्रतिशत बढ़कर 38,307 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि अगस्त में यह 29,328 करोड़ रुपये था। इक्विटी श्रेणी में स्मॉल-कैप फंड निवेशकों की पसंद बने रहे। इन योजनाओं में सितंबर के दौरान 9,039 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जो अगस्त के 7,973 करोड़ रुपये से अधिक था।
मिड-कैप फंड में भी निवेश बढ़ा। सितंबर में इन योजनाओं में 7,835 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया, जबकि अगस्त में यह 6,989 करोड़ रुपये था। इसी तरह फ्लेक्सी-कैप फंड में शुद्ध निवेश अगस्त के 5,059 करोड़ रुपये से बढ़कर सितंबर में 6,702 करोड़ रुपये हो गया। सेक्टोरल और थीमैटिक फंड में भी निवेशकों की भागीदारी बढ़ी। इन योजनाओं में सितंबर में 3,640 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जबकि पिछले महीने यह 1,713 करोड़ रुपये था।
लार्ज-कैप फंड भी सितंबर में सकारात्मक स्थिति में लौट आए। अगस्त में इन योजनाओं से 1,147 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई थी, लेकिन सितंबर में इनमें 859 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। वहीं, मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड में निवेश लगभग स्थिर रहा। सितंबर में इन योजनाओं को 3,667 करोड़ रुपये मिले, जबकि अगस्त में यह राशि 3,671 करोड़ रुपये थी।
नियमित निवेश के मामले में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए योगदान मजबूत बना रहा। सितंबर में मासिक एसआईपी निवेश बढ़कर रिकॉर्ड 32,490 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि अगस्त में यह 32,297 करोड़ रुपये था। इस तरह गोल्ड ईटीएफ और इक्विटी फंड में बढ़ते निवेश के साथ एसआईपी योगदान ने भी निवेशकों की निरंतर भागीदारी को दर्शाया। वहीं, डेट फंड से भारी निकासी सितंबर के दौरान म्यूचुअल फंड उद्योग की सबसे प्रमुख वित्तीय गतिविधियों में शामिल रही।
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सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी, अगस्त के छह दिनों में निवेशकों को मिला मजबूत तेजी का संकेत
नई दिल्ली । घरेलू सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर जोरदार तेजी दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव प्रति 10 ग्राम ₹2,735 बढ़कर ₹1,48,361 पर पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमत ₹931 की बढ़त के साथ ₹2,25,493 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। अगस्त महीने की शुरुआत से अब तक केवल छह दिनों के भीतर सोना ₹5,501 और चांदी ₹7,198 महंगी हो चुकी है। लगातार बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों और आभूषण खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।देश के प्रमुख शहरों में भी सोने के दाम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। दिल्ली, जयपुर और लखनऊ जैसे शहरों में 24 कैरेट सोना लगभग ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया है। भोपाल, पटना और अहमदाबाद में भी कीमतें लगभग इसी स्तर पर बनी हुई हैं, जबकि मुंबई, कोलकाता और रायपुर में भाव कुछ कम रहने के बावजूद रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास बने हुए हैं। इससे स्पष्ट है कि पूरे देश में सर्राफा बाजार में तेजी का माहौल कायम है।
कैरेट के आधार पर भी सोने की कीमतों में उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला। 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,48,361, 22 कैरेट का ₹1,35,899, 18 कैरेट का ₹1,11,271 और 14 कैरेट सोने का भाव ₹86,791 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। शुद्धता के अनुसार कीमतों में यह अंतर उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत और बजट के अनुरूप विकल्प चुनने का अवसर देता है।
यदि पूरे वर्ष के प्रदर्शन पर नजर डालें तो वर्ष 2026 में अब तक सोने की कीमत में लगभग ₹15 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। वर्ष 2025 के अंतिम कारोबारी दिन सोने का भाव करीब ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम था, जो अब बढ़कर ₹1.48 लाख के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि चांदी की कीमत साल की शुरुआत की तुलना में अभी भी कुछ नीचे बनी हुई है। वर्ष के दौरान दोनों धातुओं ने अपने उच्चतम स्तर भी छुए थे, जिसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्तर पर भी सोना और चांदी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। उनका सुझाव है कि निवेश एकमुश्त करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से किया जाए, जिससे कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सके। उनका अनुमान है कि यदि वैश्विक और घरेलू परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो वर्ष के अंत तक सोना ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2.80 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है।
जो निवेशक भौतिक सोना या चांदी खरीदने के बजाय बाजार आधारित विकल्प चाहते हैं, उनके लिए गोल्ड और सिल्वर ETF भी एक प्रभावी माध्यम माने जा रहे हैं। इन योजनाओं में निवेश शेयर बाजार की तरह डीमैट खाते के माध्यम से किया जा सकता है। इसमें वास्तविक धातु की डिलीवरी नहीं मिलती, बल्कि निवेशक को उस समय के बाजार मूल्य के अनुसार लाभ या हानि प्राप्त होती है। कम राशि से निवेश शुरू करने की सुविधा के कारण यह विकल्प छोटे निवेशकों के बीच भी लगातार लोकप्रिय हो रहा है।