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  • अन्नदाता बनेगा 'ऊर्जादाता': नितिन गडकरी ने बताया क्यों जरूरी है 100% एथनॉल, अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट।

    अन्नदाता बनेगा 'ऊर्जादाता': नितिन गडकरी ने बताया क्यों जरूरी है 100% एथनॉल, अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट।


    नई दिल्ली। भारत के ऊर्जा भविष्य और परिवहन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण साझा किया है। एक हालिया कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि देश को निकट भविष्य में सौ प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिंग प्राप्त करने का लक्ष्य रखना चाहिए। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, वैश्विक स्तर पर विशेषकर पश्चिम एशिया में जारी तेल आपूर्ति की अनिश्चितताओं को देखते हुए भारत के लिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना समय की मांग है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसे कम करना आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोणों से आवश्यक है।

    एथनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है जिसे गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। जब इसे पेट्रोल के साथ मिलाया जाता है, तो इसे ‘फ्लेक्स फ्यूल’ कहा जाता है। गडकरी ने जोर देकर कहा कि फ्लेक्स फ्यूल तकनीक न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि यह किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने ब्राजील जैसे देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां शत-प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिंग का सफल प्रयोग पहले से ही किया जा रहा है। भारत में भी इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए बीस प्रतिशत एथनॉल मिश्रण के लक्ष्य को प्राप्त करने के बाद अब और बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ने का समय आ गया है।

    आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग सतासी प्रतिशत आयात करता है, जिस पर सालाना करीब बाईस लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं। भारी मात्रा में जीवाश्म ईंधन का आयात न केवल अर्थव्यवस्था पर बोझ डालता है, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण में भी बड़ी हिस्सेदारी रखता है। केंद्रीय मंत्री ने ऑटोमोबाइल कंपनियों से आग्रह किया कि वे लागत के बजाय गुणवत्ता और नई तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करें ताकि भविष्य के वाहनों को पूरी तरह से वैकल्पिक ईंधन पर चलाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि पेट्रोल-डीजल वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करना आवश्यक है, लेकिन इसके लिए तकनीकी विकल्प तैयार करना सबसे प्रभावी तरीका होगा।

    भविष्य के ईंधन के रूप में गडकरी ने ग्रीन हाइड्रोजन के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन पंपों के संचालन की लागत को कम करना और परिवहन की चुनौतियों का समाधान करना प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि हाइड्रोजन की उत्पादन लागत को कम कर एक डॉलर प्रति किलोग्राम के स्तर पर लाया जा सके, तो भारत न केवल अपनी जरूरतें पूरी करेगा बल्कि ऊर्जा के एक प्रमुख निर्यातक के रूप में भी उभर सकता है। जैव ईंधन और हरित ऊर्जा के इन समन्वित प्रयासों से देश को प्रदूषण मुक्त बनाने और विदेशी मुद्रा भंडार की बचत करने में बड़ी सफलता मिल सकती है।

  • सरकार का 'फ्लेक्स फ्यूल' पर बड़ा दांव, एथेनॉल के दम पर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी!

    सरकार का 'फ्लेक्स फ्यूल' पर बड़ा दांव, एथेनॉल के दम पर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी!


    नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी दिखाई है। सरकार का उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में एथेनॉल के उपयोग को बढ़ाना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है। यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नीति स्तर पर इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श की तैयारी की जा रही है, जिसमें तेल कंपनियों, ऑटोमोबाइल क्षेत्र और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर एक स्पष्ट रणनीति तैयार की जाएगी। इस प्रक्रिया में ऐसे उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो मौजूदा ईंधन नीतियों को आगे बढ़ाते हुए एथेनॉल मिश्रण के स्तर को बढ़ा सकें और फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के उपयोग को आसान बना सकें।

    वर्तमान में देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम लागू है। अब सरकार ऐसे वाहनों को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है जो उच्च स्तर के एथेनॉल मिश्रण, यहां तक कि 85 प्रतिशत तक, पर भी आसानी से चल सकें। इससे न केवल वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि एथेनॉल उत्पादन में कृषि आधारित कच्चे माल का उपयोग किया जाता है।

    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को अपनाना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही, सरकार एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्यों को पहले तय समय से पहले हासिल करने की दिशा में भी काम कर रही है, जिससे इस क्षेत्र में तेजी लाई जा सके।

    एथेनॉल उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें कच्चे माल के दायरे का विस्तार, उत्पादन के लिए कृषि क्लस्टर विकसित करना और अतिरिक्त खाद्यान्न का उपयोग शामिल है। चावल और चीनी जैसे संसाधनों का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन के लिए निर्धारित किया गया है, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके। इसके अलावा, एथेनॉल की खरीद के लिए तय मूल्य और कर में रियायत जैसे कदम भी इस क्षेत्र को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

    यह पहल न केवल पर्यावरणीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक स्थिरता के लिए भी लाभकारी मानी जा रही है। फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के माध्यम से भारत वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो भविष्य में परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलाव का संकेत देता है।