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  • माता-पिता की संपत्ति पर नहीं चलेगा बच्चों का मनमाना हक, सुप्रीम कोर्ट ने बेदखली के ट्रिब्यूनल अधिकार को ठहराया सही

    माता-पिता की संपत्ति पर नहीं चलेगा बच्चों का मनमाना हक, सुप्रीम कोर्ट ने बेदखली के ट्रिब्यूनल अधिकार को ठहराया सही

    नई दिल्ली ।देश की सर्वोच्च अदालत ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007’ के तहत गठित ट्रिब्यूनल के पास यह पूरा अधिकार है कि वह बुजुर्गों की संपत्ति से उनके बच्चों को बेदखल करने का आदेश जारी कर सके।

    शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि ट्रिब्यूनल को लगता है कि माता-पिता के भरण-पोषण, सुरक्षा और सम्मानपूर्वक जीवन के लिए बच्चों को बेदखल करना आवश्यक है, तो वह ऐसा आदेश दे सकता है। अदालत ने अपने फैसले में रेखांकित किया कि बढ़ती उम्र किसी भी स्थिति में असुरक्षा का कारण नहीं बननी चाहिए। सभ्य समाज का असली पैमाना यही है कि वह अपने बुजुर्गों को कितना सम्मान, आदर और सुरक्षा प्रदान करता है।

    यह महत्वपूर्ण फैसला लखनऊ के विकासनगर निवासी रविकांत गुप्ता द्वारा दाखिल की गई याचिका का निपटारा करते हुए दिया गया। अपीलकर्ता अपने रिहायशी मकान के मालिक हैं और उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उच्च न्यायालय ने उनके बेटे और बहू के खिलाफ जारी बेदखली के आदेश को रद्द कर दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि उच्च न्यायालय ने ट्रिब्यूनल के बेदखली के आदेश में हस्तक्षेप करके गलती की थी। अदालत ने माना कि यह एक स्थापित कानूनी प्रक्रिया है जिसके तहत वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण और शांतिपूर्ण जीवन को सुनिश्चित करने के लिए ट्रिब्यूनल को बेदखली का निर्देश देने की पूरी शक्तियां प्राप्त हैं।

    पीठ ने अपने दूरगामी फैसले में सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों और सभ्यताओं में वरिष्ठ नागरिकों को ज्ञान, अनुभव और सामूहिक स्मृति के अमूल्य भंडार के रूप में देखा गया है। ऐसे में उनकी संपत्ति, भरण-पोषण और गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में बुजुर्गों के साथ होने वाले संपत्ति संबंधी विवादों और पारिवारिक प्रताड़ना के मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मील का पत्थर माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से उन वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी जो अपने ही बच्चों द्वारा अपनी ही संपत्ति में उपेक्षित या प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं।

  • रियालिटी शो 'लॉकअप 2' में गौरव खन्ना की धमाकेदार एंट्री, पत्नी आकांक्षा चमोला को सामने देख छलके आंसू

    रियालिटी शो 'लॉकअप 2' में गौरव खन्ना की धमाकेदार एंट्री, पत्नी आकांक्षा चमोला को सामने देख छलके आंसू

    नई दिल्ली । ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के मशहूर और विवादित रियलिटी शो ‘लॉकअप 2’ का आगामी एपिसोड बेहद धमाकेदार और भावनाओं से भरपूर होने वाला है। शो के मेकर्स द्वारा जारी किए गए नए प्रोमो वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। इस वीडियो में टीवी जगत के मशहूर अभिनेता गौरव खन्ना विजिटर के तौर पर अपनी पत्नी आकांक्षा चमोला से मिलने के लिए जेल के भीतर दाखिल होते हुए नजर आ रहे हैं। पिछले काफी समय से अपनी निजी जिंदगी और आपसी मतभेदों को लेकर चर्चा में चल रहे इस कपल का शो के भीतर आमना-सामना होते ही माहौल पूरी तरह से भावुक हो गया। लंबे समय बाद एक-दूसरे को अपने सामने पाकर दोनों ही कलाकार अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए।

    गौरव खन्ना की इस शो में एंट्री को बेहद फिल्मी और भव्य अंदाज में फिल्माया गया है। प्रोमो में गौरव खन्ना का चेहरा सामने आने से पहले बैकग्राउंड में उनकी ही आवाज में एक बेहद दर्दभरी और दिल छू लेने वाली शायरी गूंजती है। गौरव कहते हैं कि एक समंदर है जो काबू में है, लेकिन एक कतरा है जो मुझसे संभाला नहीं जाता। एक उम्र बितानी है उसके बगैर और एक लम्हा है जो मुझसे गुजारा नहीं जाता। इस बेहद भावुक शायरी के बाद गौरव खन्ना सीधे कैदियों की सेल की तरफ कदम बढ़ाते हैं और अपनी पत्नी आकांक्षा की सेल के पास जाकर रुक जाते हैं। आकांक्षा को देखते ही उनके मुंह से पहला वाक्य निकलता है कि ‘बैंड बजा दिया तूने’, जिसे सुनकर आकांक्षा खुद को संभाल नहीं पाती हैं।

    दरअसल, गौरव खन्ना के जेल में पहुंचने से ठीक पहले वाले एपिसोड में आकांक्षा चमोला का एक बेहद उग्र और हिंसक रूप दर्शकों को देखने को मिला था। जेल के अंदर सह-प्रतियोगी श्रेया कालरा और आकांक्षा चौधरी के बीच किसी बात को लेकर तगड़ी बहस शुरू हो गई थी। यह आपसी विवाद देखते ही देखते इतना बढ़ गया कि इस हाथापाई के दौरान आकांक्षा के चेहरे पर गंभीर चोट लग गई। चेहरे पर चोट लगते ही आकांक्षा ने पूरी तरह से अपना आपा खो दिया और जेल के नियमों को ताक पर रखकर भारी बवाल काट दिया। उन्होंने गुस्से में आकर श्रेया का पूरा बिस्तर बेड से उठाकर नीचे फेंक दिया और वहां मौजूद माधुरी के बेड को भी पानी डालकर पूरी तरह गीला कर दिया।

    आकांक्षा का यह हिंसक और आक्रामक रवैया देखकर जेल में मौजूद अन्य सभी कैदी और टीवी दर्शक पूरी तरह हैरान रह गए। इतना ही नहीं, उन्होंने शिल्पा शिंदे और श्रेया पर बेहद तीखे पर्सनल अटैक भी किए। आकांक्षा ने शिल्पा के अतीत पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर उनके खुद के बच्चे होते तो उन्हें समझ आता कि एक मां पर क्या बीतती है। वहीं दूसरी तरफ, उन्होंने श्रेया को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि वह उनके सारे राज दुनिया के सामने खोल देंगी और उनके बाहरी संबंधों का पर्दाफाश कर देंगी। जेल में मचे इस अभूतपूर्व उपद्रव के बाद जब शो की होस्ट फराह खान वहां पहुंचीं, तो उन्होंने सभी कैदियों को कड़ी फटकार लगाई और साफ किया कि इस दुर्व्यवहार के लिए उन्हें बख्शा नहीं जाएगा और इसका फैसला जजमेंट डे पर होगा।

    मध्य प्रदेश। जेल के भीतर मचे इस भारी बवाल के तुरंत बाद गौरव खन्ना की एंट्री ने इस शो के रोमांच को दोगुना कर दिया है। दर्शक इस कड़वे मोड़ पर गौरव के आने से बेहद उत्साहित हैं, क्योंकि इसी शो के दौरान आकांक्षा ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया था कि वह और गौरव खन्ना पिछले एक साल से एक-दूसरे से अलग रह रहे हैं। आकांक्षा ने शो के सह-प्रतियोगी राम कपूर से बात करते हुए यह भी साफ कर दिया था कि गौरव से तलाक लेने के बाद वह अपनी पूरी जिंदगी अकेले गुजारेंगी और दोबारा कभी शादी नहीं करेंगी। उन्होंने राम कपूर से इंडस्ट्री में दोबारा काम शुरू करने के लिए मार्गदर्शन और मदद भी मांगी थी, जिस पर राम कपूर ने उन्हें पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया था।

    अब जब गौरव खन्ना खुद इस शो का हिस्सा बनकर आकांक्षा के सामने आ चुके हैं, तो हर कोई यह जानने के लिए बेताब है कि वह अपनी टूटती शादी और तलाक के फैसले पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या इस शो के मंच पर दोनों के बीच की कड़वाहट दूर होगी या फिर दूरियां और ज्यादा बढ़ जाएंगी, यह आने वाले एपिसोड में साफ हो जाएगा। फिलहाल, गौरव को अपनी सेल के सामने खड़ा देखकर आकांक्षा बुरी तरह टूट गईं और रोते हुए अपने आंसू पोंछती नजर आईं। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और पारिवारिक इमोशन्स के कॉम्बिनेशन ने ‘लॉकअप 2’ की टीआरपी और दर्शकों की उत्सुकता को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

  • ब्रिटिश दौर से सत्ता के गलियारों तक: दिल्ली जिमखाना क्लब की चमकदार विरासत अब बड़े बदलाव के मोड़ पर

    ब्रिटिश दौर से सत्ता के गलियारों तक: दिल्ली जिमखाना क्लब की चमकदार विरासत अब बड़े बदलाव के मोड़ पर


    नई दिल्ली। देश की राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली संस्थानों में गिने जाने वाले दिल्ली जिमखाना क्लब का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया है। ब्रिटिश दौर से लेकर आधुनिक भारत तक सत्ता, प्रशासन और प्रभावशाली वर्ग की पहचान रहे इस ऐतिहासिक क्लब के भविष्य को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। सरकार ने सुरक्षा और सार्वजनिक आवश्यकताओं का हवाला देते हुए क्लब के परिसर को अपने नियंत्रण में लेने का निर्णय किया है। इस फैसले ने न केवल एक संस्थान बल्कि एक लंबे इतिहास, परंपरा और रसूख के प्रतीक को नई बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।

    करीब एक सदी से भी अधिक पुराने इस क्लब की पहचान केवल एक सामाजिक संस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह देश के प्रभावशाली लोगों की गतिविधियों और मेलजोल का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी रहा है। ब्रिटिश अधिकारियों और सैन्य अफसरों के लिए स्थापित यह स्थान समय के साथ भारत के शीर्ष नौकरशाहों, राजनयिकों, सैन्य अधिकारियों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों के लिए एक खास जगह बन गया। राजधानी के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्थित यह परिसर लंबे समय तक अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखने में सफल रहा।

    दिल्ली जिमखाना क्लब की सबसे बड़ी पहचान उसकी सदस्यता व्यवस्था रही है। इस क्लब की सदस्यता को प्रतिष्ठा और सामाजिक प्रभाव का प्रतीक माना जाता था। एक समय ऐसा भी रहा जब यहां सदस्य बनने के लिए लोगों को वर्षों नहीं बल्कि कई दशकों तक इंतजार करना पड़ता था। कुछ लोगों को सदस्यता पाने के लिए 30 से 40 वर्षों तक प्रतीक्षा सूची में रहना पड़ा। सीमित सदस्य संख्या और विशेष चयन प्रक्रिया ने इसे देश के सबसे विशिष्ट क्लबों की सूची में शामिल कर दिया था। निजी श्रेणी के आवेदकों के लिए लाखों रुपये तक की सदस्यता प्रक्रिया भी इसकी विशिष्टता को और बढ़ाती रही।

    हालांकि वर्षों के दौरान क्लब कई विवादों से भी घिरा रहा। समय-समय पर वित्तीय अनियमितताओं, प्रशासनिक निर्णयों और सदस्यता प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठते रहे। जांच और कानूनी प्रक्रियाओं के बाद क्लब के संचालन और व्यवस्थाओं पर कई बार गंभीर चर्चाएं हुईं। बीते वर्षों में इन विवादों ने इसकी छवि को भी प्रभावित किया और प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई।

    अब सरकार द्वारा परिसर वापस लेने के फैसले ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। बताया जा रहा है कि यह निर्णय सुरक्षा, रणनीतिक जरूरतों और सार्वजनिक परियोजनाओं से जुड़ी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। राजधानी के अत्यंत संवेदनशील इलाके में स्थित यह स्थान प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और इसी कारण इसे लेकर कार्रवाई तेज हुई है।

    दिल्ली जिमखाना क्लब की कहानी केवल एक भवन या क्लब की कहानी नहीं है बल्कि यह बदलते भारत, सत्ता के गलियारों और सामाजिक प्रतिष्ठा के लंबे सफर की कहानी भी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले समय में यह ऐतिहासिक विरासत किस दिशा में आगे बढ़ती है और इसका भविष्य किस नए अध्याय की शुरुआत करता है।