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  • ‘पेपर लीक अब रोग बन चुका है’, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी बोले- परीक्षाओं की सुरक्षा के लिए सरकारें सतर्क

    ‘पेपर लीक अब रोग बन चुका है’, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी बोले- परीक्षाओं की सुरक्षा के लिए सरकारें सतर्क


    पटना। देश में प्रतियोगी और अन्य परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक की घटनाओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक अब एक रोग बन चुका है और इससे निपटने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारें लगातार सतर्कता बरत रही हैं। सरकारों का प्रयास है कि परीक्षाएं निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल में आयोजित हों, ताकि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा की जा सके।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री पटना से दिल्ली रवाना होने के दौरान एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने पेपर लीक की समस्या के साथ बिहार की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलावों पर भी अपनी बात रखी।

    छात्रों के खर्च की भरपाई पर क्या बोले शिक्षा मंत्री?

    परीक्षा में पेपर लीक होने की स्थिति में विद्यार्थियों के खर्च का भुगतान शिक्षा विभाग की ओर से किए जाने संबंधी सवाल पर प्रह्लाद जोशी ने कहा कि संबंधित अध्यक्ष ने इस बारे में क्या बयान दिया है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में जनता पर अनावश्यक खर्च का बोझ नहीं पड़ना चाहिए।

    पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देने, यात्रा करने और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च करना पड़ सकता है। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना और गड़बड़ियों की आशंका कम करना महत्वपूर्ण है।

    बिहार की शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा

    प्रह्लाद जोशी ने बताया कि बिहार में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ बैठक हुई है। इसमें प्राथमिक शिक्षा सहित शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा विभाग समेत विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

    शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने परीक्षा संचालन में सतर्कता और पारदर्शिता की जरूरत पर भी जोर दिया।

    निष्पक्ष परीक्षा के लिए व्यवस्थाएं मजबूत करना जरूरी

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। केंद्र और राज्य सरकारें परीक्षाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए सावधानी बरत रही हैं। बिहार सरकार भी इस दिशा में जरूरी व्यवस्थाएं कर रही है।

    परीक्षा में गड़बड़ियों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देना जरूरी है। पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों की मेहनत, समय और भविष्य प्रभावित हो सकता है। ऐसे में परीक्षा प्रणाली को भरोसेमंद बनाना और अनियमितताओं की गुंजाइश कम करना सरकारों के सामने अहम चुनौती है।

  • MP बोर्ड परीक्षा रिजल्ट अपडेट: 10वीं-12वीं का 70% मूल्यांकन पूरा, रिजल्ट 14 अप्रैल तक आ सकता है

    MP बोर्ड परीक्षा रिजल्ट अपडेट: 10वीं-12वीं का 70% मूल्यांकन पूरा, रिजल्ट 14 अप्रैल तक आ सकता है


    भोपाल । मध्यप्रदेश बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट से जुड़ी बड़ी अपडेट सामने आई है। 10वीं और 12वीं कक्षा के उत्तर पुस्तिकाओं का लगभग 70 प्रतिशत मूल्यांकन पूरा हो चुका है। अनुमान है कि अप्रैल के पहले हफ्ते तक परिणाम तैयार हो जाएगा और 14 अप्रैल तक छात्र अपना रिजल्ट देख सकेंगे। इस साल लगभग 16 लाख छात्रों ने बोर्ड परीक्षा में भाग लिया।

    10वीं की परीक्षा 13 फरवरी से 6 मार्च 2026 तक आयोजित हुई थी जबकि 12वीं की परीक्षा 10 फरवरी से 7 मार्च 2026 तक हुई। दोनों परीक्षाएं सुबह 9 बजे से 12 बजे तक आयोजित की गई। इस बार नकल रोकने के लिए मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल ने कड़े सुरक्षा उपाय किए।

    प्रश्न पत्रों की डबल पैकिंग की गई। सभी पेपर सील्ड बॉक्स में लोहे की पेटी में रखे गए जिन्हें परीक्षा वाले दिन एग्जाम हॉल में खोला गया। इसके साथ ही मोबाइल एप के जरिए हर बंडल की लोकेशन ट्रेस की गई। परीक्षा केंद्रों पर प्रश्न पत्र खोलने वितरण मूल्यांकन केंद्र पर जमा करने तक की पूरी प्रक्रिया एप के माध्यम से रिकॉर्ड की गई।इस बार बोर्ड परीक्षा की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिली। मूल्यांकन कार्य में करीब 18 हजार शिक्षकों को लगाया गया है।

  • CBSE का स्पष्ट बयान: 12वीं गणित का प्रश्नपत्र पूरी तरह असली और सुरक्षित

    CBSE का स्पष्ट बयान: 12वीं गणित का प्रश्नपत्र पूरी तरह असली और सुरक्षित


    नई दिल्ली। कक्षा 12 के गणित प्रश्नपत्र को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा और संदेह के बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई ने मंगलवार को स्थिति स्पष्ट की। बोर्ड ने कहा कि 9 मार्च को आयोजित परीक्षा का प्रश्नपत्र पूरी तरह असली और सुरक्षित है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब छात्रों और अभिभावकों ने देखा कि प्रश्नपत्र पर मौजूद एक क्यूआर कोड को स्कैन करने पर वह यूट्यूब वीडियो से जुड़ने लगा। इससे प्रश्नपत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठने लगे और सोशल मीडिया में अफवाहें फैल गईं।

    सीबीएसई ने अपने बयान में कहा कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए गए हैं और क्यूआर कोड सुरक्षा उपायों का हिस्सा है। इसका उद्देश्य संभावित सुरक्षा उल्लंघनों की स्थिति में प्रश्नपत्र की सत्यता को प्रमाणित करना है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि इस क्यूआर कोड से जुड़े संदेह के कारण ही छात्रों और अभिभावकों में भ्रम उत्पन्न हुआ था, जबकि प्रश्नपत्र की वास्तविकता में कोई कमी नहीं है।

    बोर्ड ने यह भी कहा कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा में किसी भी तरह की सेंध नहीं लगी है। परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज ने कहा कि छात्रों और अभिभावकों को किसी भी अफवाह पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने पूरी गंभीरता से इस घटना की समीक्षा की है और भविष्य में इस तरह की समस्याओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    9 मार्च को आयोजित परीक्षा के दौरान वितरित किए गए सभी प्रश्नपत्र पूरी तरह असली हैं। सीबीएसई ने छात्रों और अभिभावकों को आश्वस्त किया कि सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी है और प्रश्नपत्र की प्रामाणिकता को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं हुआ है। बोर्ड ने यह भी बताया कि भविष्य में क्यूआर कोड से जुड़ी किसी भी तकनीकी समस्या को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। इससे छात्रों को यह भरोसा मिलेगा कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित, व्यवस्थित और निष्पक्ष है।

    इस मामले में बोर्ड का संदेश स्पष्ट है: किसी भी तरह की अफवाह या सोशल मीडिया में फैल रही झूठी जानकारी पर ध्यान न दें। प्रश्नपत्र असली हैं, सुरक्षा सुनिश्चित है और परीक्षा प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से जारी रहेगी। सीबीएसई ने आश्वासन दिया कि तकनीकी पहलुओं की समीक्षा कर भविष्य में ऐसी किसी भी समस्या से निपटने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों से अनुरोध किया गया कि वे पूरी प्रक्रिया में विश्वास रखें और अफवाहों में घबराएँ नहीं।

  • मध्य प्रदेश में बोर्ड पैटर्न लागू, नकल और लीक से निपटने की तैयारी

    मध्य प्रदेश में बोर्ड पैटर्न लागू, नकल और लीक से निपटने की तैयारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस साल 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं पूरी तरह से बोर्ड पैटर्न पर आयोजित की जा रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव परीक्षा के प्रश्नपत्रों की सुरक्षा में किया गया है। अब प्रश्नपत्र स्कूलों में नहीं, बल्कि सीधे पुलिस थानों में सुरक्षित रखे जाएंगे। परीक्षा के दिन ही केंद्राध्यक्ष की निगरानी में इन बंडलों को थाने से परीक्षा केंद्र तक लाया जाएगा और परीक्षा शुरू होने से ठीक 60 मिनट पहले खोला जाएगा।

    इस कदम से नकल और प्रश्नपत्र लीक जैसी समस्याओं को रोकने की तैयारी की जा रही है। मध्य प्रदेश राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा तैयार किए गए प्रश्नपत्र अब जिला शिक्षा अधिकारी और केंद्राध्यक्षों के माध्यम से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित हो।

    कक्षा 11वीं की परीक्षाएं 23 फरवरी से 17 मार्च 2026 तक आयोजित होंगी जबकि कक्षा 9वीं की परीक्षाएं 2 मार्च से 17 मार्च 2026 तक होंगी। दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं एक ही पाली में होंगी और दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक चलेंगी।

    सभी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 23 मार्च 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। मूल्यांकन प्रक्रिया माध्यमिक शिक्षा मंडल की अंक योजना के अनुसार होगी, जिससे सभी छात्रों को निष्पक्ष अंक मिलें और मूल्यांकन में पारदर्शिता बनी रहे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, प्रश्नपत्रों की थाने में सुरक्षा व्यवस्था से नकल की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे स्कूल स्तर पर लीक की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। साथ ही, परीक्षा अधिकारियों और पुलिस की निगरानी यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी अनुचित गतिविधि न हो।

    अभिभावक और शिक्षक इस बदलाव से संतुष्ट हैं और उनका मानना है कि इससे परीक्षा का स्तर और विश्वसनीयता दोनों बढ़ेंगे। छात्रों को भी समय से पहले प्रश्नपत्र खोलने की प्रक्रिया से अतिरिक्त तनाव कम होगा और वे बेहतर तैयारी के साथ परीक्षा में शामिल हो पाएंगे।

    मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग का कहना है कि यह कदम राज्य में परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है। भविष्य में इसे अन्य कक्षाओं और बोर्ड परीक्षाओं में भी लागू किए जाने की संभावना है।

    इस प्रकार इस साल 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं केवल पाठ्यक्रम की समझ ही नहीं, बल्कि अनुशासन और ईमानदारी की परीक्षा भी होंगी। छात्रों और शिक्षकों के लिए यह नई प्रणाली चुनौतीपूर्ण, लेकिन पारदर्शिता और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।