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  • ड्राई डे पर भी नहीं थमी शराब की बिक्री, वायरल वीडियो से खुली पोल, बरगी में दो युवक गिरफ्तार

    ड्राई डे पर भी नहीं थमी शराब की बिक्री, वायरल वीडियो से खुली पोल, बरगी में दो युवक गिरफ्तार


    जबलपुर । गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर को देशभर में ड्राई डे रहा लेकिन जबलपुर में इस दौरान शराब बिक्री के कथित मामले सामने आने से सवाल खड़े हो गए हैं। रांझी क्षेत्र में शराब दुकान बंद होने के बाद भी अंदर से शराब बेचे जाने का आरोप लगाया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दुकान के भीतर बनी कथित गुप्त खिड़की के जरिए ग्राहकों को शराब दिए जाने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि इस दौरान शराब निर्धारित कीमत से अधिक यानी ओवररेट में बेची गई। हालांकि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    मामला रांझी के बड़ा पत्थर स्थित शराब दुकान से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक 2 अक्टूबर को दुकान बंद रहने के बावजूद यहां दिन से लेकर देर रात तक शराब की कथित बिक्री की गई। दुकान नय्यर एंड कोहली ग्रुप की बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के बाद आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। ड्राई डे के दौरान शराब दुकानों को बंद रखने के नियम के बावजूद यदि बिक्री हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठ रही है।

    वायरल वीडियो में दुकान के अंदर से एक छोटे रास्ते या कथित गुप्त खिड़की के जरिए शराब दिए जाने का दावा किया गया है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि ग्राहकों से शराब की एमआरपी से ज्यादा रकम ली गई। हालांकि इस पूरे मामले में वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रही गतिविधियों की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर चर्चा तेज है और लोग ड्राई डे के दौरान दुकानों की निगरानी को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

    इसी बीच जबलपुर के ग्रामीण क्षेत्र बरगी में भी शराब बिक्री से जुड़ा एक मामला सामने आया। भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष संजू लाल ने कथित तौर पर शराब बेच रहे दो युवकों को पकड़े जाने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर बरगी पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को शराब के साथ थाने ले जाया गया। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शराब कहां से लाई गई थी और किस उद्देश्य से बेची जा रही थी।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि बरगी नगर चौकी क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। ऐसे में ड्राई डे के दिन सामने आए इस मामले ने एक बार फिर निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि प्रतिबंधित दिन पर शराब बिक्री रोकने के लिए प्रशासन और आबकारी विभाग की ओर से विशेष निगरानी की व्यवस्था की जाती है। इसके बावजूद यदि शराब बिक्री के मामले सामने आते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

    फिलहाल रांझी में वायरल वीडियो और बरगी में पकड़े गए दोनों युवकों के मामले में जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं और शराब बिक्री किस स्तर पर हुई इसकी पुष्टि जांच के आधार पर होगी। इस घटना ने ड्राई डे पर शराब दुकानों की निगरानी और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन के सामने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

  • भोपाल के तरावली गांव में अवैध शराब के अड्डे पर आबकारी का बड़ा छापा भट्टी समेत 30 से ज्यादा ड्रम जब्त

    भोपाल के तरावली गांव में अवैध शराब के अड्डे पर आबकारी का बड़ा छापा भट्टी समेत 30 से ज्यादा ड्रम जब्त


    भोपाल। भोपाल के तरावली गांव में मंगलवार सुबह आबकारी विभाग ने अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कच्ची शराब बनाने के ठिकाने का भंडाफोड़ किया। तड़के आबकारी विभाग की टीम भारी अमले के साथ गांव से दूर जंगल में पहुंची जहां अवैध रूप से हाथ भट्टी लगाकर शराब तैयार की जा रही थी। टीम ने मौके से कच्ची शराब बनाने में इस्तेमाल होने वाली भट्टी समेत बड़ी संख्या में सामान और 30 से ज्यादा खाली तथा भरे हुए ड्रम जब्त किए। कार्रवाई करीब दो घंटे तक चली। सुबह के समय अचानक पहुंची आबकारी टीम को देखकर अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया।

    यह कार्रवाई सहायक आबकारी आयुक्त वीरेंद्र सिंह धाकड़ के निर्देशन में की गई। कंट्रोलर वर्षा उइके के नेतृत्व में आबकारी विभाग की टीम तड़के तरावली क्षेत्र में पहुंची। टीम ने पहले उस इलाके की घेराबंदी की जहां जंगल के बीच शराब बनाने का काम चलने की सूचना थी। गांव से काफी दूर सुनसान जगह पर शराब बनाने का ठिकाना बनाया गया था ताकि सामान्य तौर पर वहां लोगों की आवाजाही कम रहे और अवैध गतिविधि की जानकारी आसानी से बाहर न पहुंच सके। आबकारी टीम ने मौके पर पहुंचकर शराब बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही हाथ भट्टी और अन्य संसाधनों को जब्त किया।

    कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में ड्रम भी मिले। इनमें कुछ खाली थे जबकि कुछ में शराब बनाने से संबंधित सामग्री मौजूद थी। आबकारी विभाग ने मौके से मिले सामान को जब्त कर लिया। विभाग की टीम ने जंगल में काफी देर तक तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के बाद जब्त सामग्री को मौके से बाहर लाया गया। इस दौरान टीम के साथ मौजूद कर्मचारियों ने अवैध शराब बनाने के ठिकाने से जुड़े अन्य सामान को भी कब्जे में लिया।

    तरावली क्षेत्र में कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस इलाके में लंबे समय से कच्ची शराब बनाए जाने और उसकी बिक्री की शिकायतें सामने आती रही हैं। भोपाल से करीब 40 किलोमीटर दूर बैरसिया रोड पर लक्ष्मणपुरा गांव के पास शराब की बिक्री का एक प्रमुख ठिकाना बताया जाता है। इसी रास्ते से तरावली मंदिर की ओर जाने का रास्ता भी है। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि तरावली और आसपास के गांवों में तैयार होने वाली शराब को यहां लाकर बेचा जाता है।

    बताया जाता है कि लक्ष्मणपुरा क्षेत्र में करीब एक किलोमीटर के दायरे में पन्नियों में शराब की छोटी मात्रा बेची जाती है। इसकी कीमत 10 से 20 रुपए तक बताई जाती है। कम कीमत में शराब उपलब्ध होने के कारण यहां खरीदारी करने वालों की आवाजाही बनी रहती है। आबकारी विभाग पहले भी इस क्षेत्र में कार्रवाई कर चुका है लेकिन स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जाता है कि कार्रवाई के कुछ समय बाद फिर से अवैध शराब की बिक्री शुरू हो जाती है।

    तरावली में हुई ताजा कार्रवाई के बाद अब आबकारी विभाग की नजर उन इलाकों पर भी है जहां जंगल या सुनसान स्थानों का इस्तेमाल अवैध शराब बनाने के लिए किया जा सकता है। विभाग की इस कार्रवाई से फिलहाल अवैध शराब बनाने वालों में हड़कंप है। अब आगे की कार्रवाई में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि जब्त शराब और सामग्री का इस्तेमाल कौन कर रहा था और तैयार की गई शराब को किन इलाकों में खपाया जा रहा था।

  • अब अवैध शराब पर चौतरफा वार: अचानक छापे, रात में गश्त और वाहनों की जांच, गड़बड़ी नजरअंदाज करने वालों पर होगी कार्रवाई

    अब अवैध शराब पर चौतरफा वार: अचानक छापे, रात में गश्त और वाहनों की जांच, गड़बड़ी नजरअंदाज करने वालों पर होगी कार्रवाई


    भोपाल। सागर में जहरीली शराब पीने से 20 से अधिक लोगों की मौत के बाद मध्यप्रदेश में अवैध शराब के खिलाफ सरकार और आबकारी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेशभर में अब विशेष अभियान चलाकर केवल अवैध शराब की बिक्री ही नहीं बल्कि इसके निर्माण संग्रहण और परिवहन से जुड़े पूरे नेटवर्क पर नजर रखी जाएगी। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सभी जिलों के कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अवैध मदिरा के कारोबार पर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गंभीर गड़बड़ी को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

    जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद जारी निर्देशों में प्रदेश के सभी जिलों में संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने को कहा गया है। ऐसे इलाकों में जहां अवैध शराब के निर्माण संग्रहण परिवहन या बिक्री की आशंका रहती है वहां नियमित जांच के साथ अचानक छापेमारी की जाएगी। संदिग्ध व्यक्तियों और स्थानों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी ताकि अवैध शराब का कारोबार शुरू होने से पहले ही उस पर कार्रवाई की जा सके।

    विशेष अभियान में सूचना तंत्र को भी मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। अवैध शराब से संबंधित मिलने वाली हर विश्वसनीय सूचना का तत्काल सत्यापन किया जाएगा। सूचना सही पाए जाने पर मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 और लागू नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। विभाग ने सूचना देने वाले लोगों की पहचान गोपनीय रखने के भी निर्देश दिए हैं ताकि लोग बिना किसी डर के अवैध शराब के कारोबार की जानकारी प्रशासन तक पहुंचा सकें।

    अवैध शराब बनाने वाली भट्ठियों अड्डों संग्रहण केंद्रों और बिक्री स्थलों पर विशेष दबिश देने की तैयारी है। तलाशी और जब्ती की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी और पंचनामा समेत सभी दस्तावेजों को सही तरीके से तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। अधिकारियों को विशेष रूप से साक्ष्यों की गुणवत्ता पर ध्यान देने के लिए कहा गया है ताकि कार्रवाई के बाद मामले अदालत में मजबूती के साथ पेश किए जा सकें और आरोपी कानूनी प्रक्रिया की कमियों का फायदा न उठा सकें।

    अवैध शराब के परिवहन पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। संवेदनशील मार्गों जिला सीमाओं और चिन्हित स्थानों पर वाहनों की आकस्मिक जांच होगी। संदिग्ध वाहनों में अवैध शराब या अन्य प्रतिबंधित सामग्री मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। वाहन नंबर चालक और मालिक समेत जरूरी जानकारी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। अंतर जिला और अंतर राज्यीय शराब तस्करी की आशंका वाले मार्गों पर संबंधित जिलों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई भी होगी।

    आबकारी विभाग ने लंबित मामलों की समीक्षा करने के भी निर्देश दिए हैं। जिन मामलों में गिरफ्तारी की कार्रवाई बाकी है उनकी समीक्षा कर फरार और वांछित आरोपियों की अलग सूची तैयार की जाएगी। जमानत राजसात अभिरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण न्यायालयीन मामलों में भी लंबित कार्रवाई को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

    लाइसेंसी शराब दुकानों और परिसरों की भी विशेष जांच की जाएगी। यदि वहां अवैध शराब के विक्रय भंडारण लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन या किसी अन्य गंभीर अनियमितता की सूचना मिलती है तो तत्काल निरीक्षण और नियमानुसार कार्रवाई होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि गंभीर अनियमितताओं को किसी भी परिस्थिति में अनदेखा नहीं किया जाएगा।

    अभियान की निगरानी के लिए दैनिक प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य की गई है। दबिश तलाशी वाहन जांच जब्ती दर्ज प्रकरण गिरफ्तारियां फरार आरोपी और जब्त शराब समेत हर कार्रवाई का विवरण प्रतिदिन दर्ज कर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजना होगा। कोई भी कॉलम खाली नहीं छोड़ा जाएगा और कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में शून्य अंकित करना होगा।

    सबसे अहम बात यह है कि अब अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। विश्वसनीय सूचना मिलने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं करने गंभीर गड़बड़ी की उपेक्षा करने या दायित्व के निर्वहन में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। सहायक आबकारी आयुक्त और जिला आबकारी अधिकारियों को अपने जिलों में व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

    सागर की घटना के बाद शुरू होने वाला यह विशेष अभियान प्रदेश में अवैध शराब के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लगातार जांच छापेमारी और सख्त निगरानी से जहरीली और अवैध शराब के कारोबार पर कितनी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

  • रेवाबाग में आबकारी का छापा, 63 बल्क लीटर अवैध शराब बरामद; तस्कर फरार

    रेवाबाग में आबकारी का छापा, 63 बल्क लीटर अवैध शराब बरामद; तस्कर फरार


    देवास । देवास में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 पेटी देशी शराब जब्त की है। मुखबिर से मिली सूचना पर रेवाबाग क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई के दौरान करीब 63 बल्क लीटर अवैध शराब बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत 33,400 रुपए बताई जा रही है। हालांकि कार्रवाई के दौरान आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहा। आबकारी विभाग ने उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है।

    आबकारी विभाग को सूचना मिली थी कि रेवाबाग क्षेत्र में एक व्यक्ति अपने घर के पास बड़ी मात्रा में अवैध शराब छिपाकर रखता है और स्कूटर के जरिए शहर की अलग-अलग गलियों में इसकी सप्लाई करता है। सूचना के आधार पर विभाग की टीम ने शुक्रवार को इलाके में दबिश दी।

    छापेमारी के दौरान टीम ने मौके से 4 पेटी देशी मसाला और 3 पेटी देशी प्लेन शराब बरामद की। कुल मिलाकर 63 बल्क लीटर अवैध मदिरा जब्त की गई। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी आबकारी टीम के पहुंचने से पहले ही मौके से भाग निकला।

    आबकारी विभाग ने जब्त शराब को अपने कब्जे में लेकर आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। अब उसके ठिकानों और संभावित संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि जल्द गिरफ्तारी की जा सके।

    कार्रवाई आबकारी उपनिरीक्षक प्रेम यादव के नेतृत्व में की गई। विभाग का कहना है कि जिले में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा तथा ऐसे कारोबार में शामिल लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • फोन पर ऑर्डर, घर तक डिलीवरी: देवास में अवैध शराब सप्लाई नेटवर्क का खुलासा, 79 हजार की शराब जब्त

    फोन पर ऑर्डर, घर तक डिलीवरी: देवास में अवैध शराब सप्लाई नेटवर्क का खुलासा, 79 हजार की शराब जब्त


    मध्यप्रदेश। देवास में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता मिली है। अधिकारियों ने एक ऐसे कथित नेटवर्क का खुलासा किया है, जो मोबाइल फोन के माध्यम से ऑर्डर लेकर ग्राहकों तक शराब पहुंचाने का काम कर रहा था। कार्रवाई के दौरान करीब 79 हजार रुपये मूल्य की 84 बल्क लीटर अवैध शराब जब्त की गई है। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

    जानकारी के अनुसार आबकारी विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि शहर के जयप्रकाश नगर क्षेत्र में एक मकान से अवैध शराब का कारोबार संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने संबंधित स्थान पर दबिश दी। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में शराब बरामद हुई, जिसके बाद मौके पर मौजूद अमित राठौर नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से मोबाइल फोन के जरिए ग्राहकों से संपर्क करता था। ग्राहकों से ऑर्डर प्राप्त होने के बाद शराब को तय स्थानों पर पहुंचाया जाता था। अधिकारियों के अनुसार यह गतिविधि एक संगठित डिलीवरी व्यवस्था की तरह संचालित की जा रही थी। हालांकि पूरे नेटवर्क की वास्तविक संरचना और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

    आबकारी विभाग का कहना है कि आरोपी के कब्जे से बरामद शराब को जब्त कर लिया गया है और उसके स्रोत की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शराब कहां से लाई जा रही थी और इसकी आपूर्ति किन क्षेत्रों तक की जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक अवैध शराब का कारोबार केवल बिक्री तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसके पीछे अक्सर एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय रहता है, इसलिए मामले की गहन जांच की जा रही है।

    जांच एजेंसियों ने आरोपी के मोबाइल फोन को भी जब्त कर लिया है। पुलिस अब कॉल डिटेल्स और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कथित नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। इसके अलावा आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और उसके संपर्कों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

    अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड से इस अवैध कारोबार के दायरे और अवधि के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    आबकारी और पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों ने कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और अवैध कारोबार को किसी भी स्थिति में पनपने नहीं दिया जाएगा।

    फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही नेटवर्क के आकार और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।

  • सिस्टम फेल तो महिलाएं बनीं 'चंडी': खंडवा में अवैध शराब माफिया को पहनाई चप्पलों की माला, सड़क पर निकाला जुलूस

    सिस्टम फेल तो महिलाएं बनीं 'चंडी': खंडवा में अवैध शराब माफिया को पहनाई चप्पलों की माला, सड़क पर निकाला जुलूस


    खंडवा । मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के पंधाना थाना क्षेत्र के बिहार गांव में शराबियों और अवैध शराब माफियाओं के आतंक से तंग आकर महिलाओं का धैर्य जवाब दे गया। जब बार-बार की शिकायतों के बाद भी प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली, तो महिलाओं ने खुद ही ‘रणचंडी’ का रूप धारण कर लिया और अवैध शराब बेचने वाले एक युवक को पकड़कर उसे चप्पलों की माला पहनाई और पूरे गांव में उसका जुलूस निकाला।

    प्रशासनिक अनदेखी ने किया मजबूर इस आक्रोश की जड़ें महीनों पुरानी हैं। बिहार गांव की महिलाएं लंबे समय से गांव में अवैध रूप से कच्ची शराब बनाने और उसे बेचे जाने का विरोध कर रही थीं। शराब के कारण न केवल गांव का माहौल खराब हो रहा था, बल्कि घरेलू हिंसा और आर्थिक तंगी ने भी परिवारों को बर्बाद करना शुरू कर दिया था। महिलाओं का आरोप है कि उन्होंने जिला मुख्यालय पर जनसुनवाई से लेकर आबकारी विभाग तक कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें कीं, लेकिन रसूखदार शराब माफियाओं के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। विभागीय सुस्ती ने अंततः महिलाओं को खुद मोर्चा संभालने पर मजबूर कर दिया।

    सरेराह निकाला सबक सिखाने वाला जुलूस बीते दिन जब गांव का ही एक युवक अवैध रूप से शराब तैयार कर खुलेआम बेच रहा था, तब गांव की दर्जनों महिलाओं ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। गुस्से से भरी महिलाओं ने पहले उसे जमकर फटकार लगाई और फिर चप्पलों की एक माला तैयार कर उसके गले में डाल दी। इसके बाद महिलाओं ने युवक को पूरे गांव की गलियों में घुमाया और नारेबाजी की। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें महिलाएं यह संदेश देती नजर आ रही हैं कि यदि वर्दी अपना फर्ज नहीं निभाएगी, तो उन्हें ही समाज की शुद्धि के लिए आगे आना होगा।

    खौफ में माफिया चर्चा में साहस जुलूस निकाले जाने के दौरान गांव में अफरा-तफरी का माहौल रहा, लेकिन किसी ने भी महिलाओं को रोकने की हिम्मत नहीं की। यह घटना अन्य अवैध कारोबारियों के लिए एक कड़ा संदेश बन गई है। हालांकि कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह कानून हाथ में लेना सही नहीं है, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब रक्षक ही मौन हो जाएं, तो पीड़ित के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। फिलहाल इस वायरल वीडियो के बाद पंधाना पुलिस मामले की जांच की बात कह रही है, लेकिन असली सवाल अब भी बरकरार है—क्या अब आबकारी विभाग की नींद खुलेगी?