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  • सीहोर में अवैध शराबखोरी पर पुलिस की दबिश, तीन ढाबों पर जांच में शराब पीते मिले लोग..

    सीहोर में अवैध शराबखोरी पर पुलिस की दबिश, तीन ढाबों पर जांच में शराब पीते मिले लोग..


    मध्य प्रदेश: के सीहोर में ढाबों पर कथित तौर पर अवैध रूप से शराब पिलाए जाने की शिकायतों के बाद कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस टीम ने शहर के तीन ढाबों पर अचानक दबिश देकर वहां की गतिविधियों की जांच की। इस दौरान कुछ लोग शराब का सेवन करते हुए मिले। पुलिस ने मौके से नियमों के उल्लंघन से जुड़े साक्ष्य जुटाए हैं और संबंधित ढाबा संचालकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस कार्रवाई का नेतृत्व कोतवाली थाना प्रभारी गिरीश दुबे ने किया।

    पुलिस को पिछले कुछ समय से शिकायतें मिल रही थीं कि शहर के कुछ ढाबों पर नियमों के विरुद्ध ग्राहकों को शराब परोसी जा रही है। शिकायतों में विशेष रूप से रात के समय और बंद कमरों में शराब पिलाए जाने की बात कही गई थी। इसके अलावा, ऐसे स्थानों पर असामाजिक तत्वों के जमावड़े की आशंका भी जताई गई थी। इन सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच की और संबंधित स्थानों पर कार्रवाई की योजना बनाई।

    योजना के तहत कोतवाली पुलिस की टीम ने शहर के तीन प्रमुख ढाबों पर औचक दबिश दी। अचानक पहुंची पुलिस टीम ने वहां मौजूद लोगों और गतिविधियों की पड़ताल की। जांच के दौरान कुछ लोग शराब का सेवन करते पाए गए। पुलिस ने मौके पर मौजूद परिस्थितियों का निरीक्षण किया और कथित अनियमितताओं से संबंधित साक्ष्य एकत्र किए। कार्रवाई का उद्देश्य शिकायतों की वास्तविकता की जांच करना और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाना था।

    पुलिस अब संबंधित ढाबा संचालकों के खिलाफ आबकारी अधिनियम और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि तीनों ढाबों में से प्रत्येक पर किस तरह का उल्लंघन पाया गया। इसी तरह, कितने लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है या किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।

    कोतवाली थाना प्रभारी गिरीश दुबे ने स्पष्ट किया कि सीहोर जिले और आसपास के क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अभियान जारी रखने की बात कही। पुलिस के अनुसार, इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    ढाबों पर रात के समय शराब परोसे जाने से संबंधित शिकायतों को देखते हुए पुलिस की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में शिकायतों की जांच और कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई आवश्यक है। फिलहाल, तीन ढाबों पर हुई दबिश के बाद संचालकों के खिलाफ प्रक्रिया शुरू की गई है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों से नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है या नहीं। पुलिस ने संकेत दिया है कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

  • शराब दुकानों के ठेकों और लाइसेंस ट्रांसफर में गड़बड़ी, 2.75 करोड़ की ई-एफडीआर पर बैंक ने उठाए सवाल

    शराब दुकानों के ठेकों और लाइसेंस ट्रांसफर में गड़बड़ी, 2.75 करोड़ की ई-एफडीआर पर बैंक ने उठाए सवाल

    मध्य प्रदेश। में शराब दुकानों के ठेके और लाइसेंस ट्रांसफर की प्रक्रिया में अनियमितताओं के मामले में आबकारी अधिकारी दीपम रायचूरा को निलंबित कर दिया गया है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने 12 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया। रायचूरा पर भोपाल में वर्ष 2024-25 के दौरान शराब दुकानों के ठेके आवंटित करने और लाइसेंस हस्तांतरित करने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं करने के आरोप हैं। मामले की जांच के लिए गठित दो सदस्यीय टीम की रिपोर्ट में उनकी भूमिका प्रथम दृष्टया संदिग्ध पाई गई थी। इसके बाद विभाग ने तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की।

    मामला 8 अक्टूबर को एक यूट्यूब चैनल पर प्रसारित खबर और 9 अक्टूबर को प्रकाशित समाचार के बाद सामने आया था। आरोपों की पड़ताल के लिए आबकारी विभाग ने दो सदस्यीय जांच दल बनाया। जांच में सात तरह की अनियमितताएं सामने आईं। इनमें 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपये की ई-एफडीआर, निर्धारित श्रेणी में शामिल नहीं होने वाले बैंक की प्रतिभूति स्वीकार करना, समय पर पूरी राशि जमा नहीं होना और लाइसेंस ट्रांसफर के दौरान निजी खाते की बैंक गारंटी तथा चेक स्वीकार करना शामिल है।

    जांच में सबसे गंभीर मामला AU स्मॉल फाइनेंस बैंक की ई-एफडीआर से संबंधित पाया गया। रिकॉर्ड में 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपये की ई-एफडीआर और उसके सत्यापन की रिपोर्ट दर्ज थी। विभाग ने बैंक से इस दस्तावेज की पुष्टि कराई। बैंक ने 12 अक्टूबर को जारी पत्र में स्पष्ट किया कि संबंधित ई-एफडीआर उसके द्वारा जारी नहीं की गई थी। इससे दस्तावेज की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हुए। जांच में यह भी सामने आया कि एफडीआर के सत्यापन के लिए मई 2024 में विभाग की ओर से पत्र जारी किया गया था, लेकिन संबंधित अधिकारी तक पत्र पहुंचने का रिकॉर्ड नहीं मिला। बैंक को सत्यापन के लिए पत्र भेजे जाने का प्रमाण भी फाइल में उपलब्ध नहीं था। इसके बजाय लाइसेंसी जसवंत के ई-मेल से मिली सत्यापन रिपोर्ट स्वीकार कर ली गई।

    जांच दल ने प्रतिभूति स्वीकार करने की प्रक्रिया में भी नियमों के उल्लंघन की बात कही। संबंधित प्रावधानों के अनुसार, केवल निर्धारित तीन श्रेणियों में आने वाले बैंकों की प्रतिभूतियां स्वीकार की जा सकती थीं। रिपोर्ट में कहा गया कि AU स्मॉल फाइनेंस बैंक उस समय इन श्रेणियों में शामिल नहीं था, फिर भी उसकी एफडीआर स्वीकार की गई। ठेकेदार ने प्रतिभूति की आधी राशि 1 करोड़ 37 लाख 76 हजार 768 रुपये नकद जमा की थी। शेष आधी राशि 30 अप्रैल 2024 तक जमा होनी थी, लेकिन यह रकम 12 मई 2024 को जमा की गई। यानी निर्धारित समयसीमा से 22 दिन की देरी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस देरी पर नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाय राशि स्वीकार कर ली गई।

    मेसर्स मां माइन्स के लाइसेंस ट्रांसफर में भी गड़बड़ियां सामने आईं। फर्म के लाइसेंस हस्तांतरण के लिए 10 जुलाई 2024 को आवेदन मिला था और भोपाल कलेक्टर ने 27 दिसंबर 2024 को आदेश जारी किया। जांच में पाया गया कि साझेदारी से जुड़े दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की गई। एक समझौता पत्र में विजय सिंह को फर्म का साझेदार बताया गया था, जबकि आबकारी पोर्टल पर उपलब्ध पूरक दस्तावेजों में उन्हें साझेदार नहीं बताया गया। नियमों के अनुसार, ट्रांसफर लेने वाली फर्म को पूरी प्रतिभूति जमा करनी थी, लेकिन फर्म के बजाय विजय सिंह की ओर से 76 लाख रुपये की बैंक गारंटी स्वीकार की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय विजय सिंह का फर्म से कोई दर्ज संबंध नहीं था।

    जांच रिपोर्ट में फर्म के खाते के बजाय विजय सिंह के निजी बैंक खाते के पोस्ट-डेटेड चेक स्वीकार करने पर भी सवाल उठाए गए। विभागीय पत्राचार में कुछ व्यक्तियों को मां माइन्स का साझेदार या लाइसेंसी बताकर पत्र भेजे गए, जबकि उपलब्ध दस्तावेजों में उनके साझेदार होने की पुष्टि नहीं थी। एक मामले में लाइसेंस ट्रांसफर का आवेदन मिलने से पहले ही संबंधित व्यक्ति को हस्तांतरण से जुड़ा पत्र जारी किए जाने का उल्लेख भी किया गया।

    आदेश में इन अनियमितताओं को मध्य प्रदेश राजपत्र में निर्धारित नियमों और आबकारी आयुक्त के निर्देशों का उल्लंघन बताया गया है। विभाग के अनुसार, इन प्रक्रियाओं से सरकारी राजस्व की सुरक्षा जोखिम में पड़ी और अधिकारी ने अपने पद से जुड़े दायित्वों का उचित पालन नहीं किया। इसी आधार पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत रायचूरा को निलंबित किया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर निर्धारित किया गया है। आदेश में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का भी उल्लेख है।

  • बस्तर में आबकारी विभाग की कार्रवाई, 8.28 लाख रुपये की गोवा शराब और टाटा वाहन जब्त, एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरा फरार

    बस्तर में आबकारी विभाग की कार्रवाई, 8.28 लाख रुपये की गोवा शराब और टाटा वाहन जब्त, एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरा फरार

    नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में अवैध शराब के परिवहन और बिक्री के खिलाफ आबकारी विभाग ने कार्रवाई की है। इस दौरान विभाग की टीम ने मध्य प्रदेश में बिक्री के लिए निर्धारित गोवा ब्रांड की विदेशी शराब की 20 पेटियां जब्त कीं। शराब को दूसरे राज्य से लाकर खपाने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दूसरा आरोपी फरार बताया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान शराब के परिवहन में इस्तेमाल किया जा रहा एक टाटा वाहन भी जब्त किया गया। शराब और वाहन की कुल अनुमानित कीमत 8 लाख 28 हजार रुपये बताई गई है।

    यह कार्रवाई जगदलपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम सोनारपाल के पास जांच के दौरान की गई। आबकारी विभाग के जगदलपुर वृत्त की टीम ने वाहन की जांच की तो उसमें विदेशी शराब मिली। जब्त शराब की मात्रा 180 लीटर बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, शराब मध्य प्रदेश में बिक्री के लिए निर्धारित थी, लेकिन उसे दूसरे राज्य में ले जाकर खपाने की आशंका के आधार पर कार्रवाई की गई। विभाग ने शराब की खेप और उसके परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे वाहन को अपने कब्जे में ले लिया है।

    जब्त की गई गोवा ब्रांड की विदेशी शराब की कीमत करीब 1 लाख 28 हजार रुपये आंकी गई है। वहीं, शराब ले जाने के लिए इस्तेमाल किए गए टाटा वाहन का अनुमानित मूल्य करीब 7 लाख रुपये बताया गया है। इस तरह शराब और वाहन दोनों को मिलाकर जब्त किए गए सामान की कुल कीमत 8 लाख 28 हजार रुपये है। आबकारी विभाग ने अवैध शराब के परिवहन से जुड़े मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    इस प्रकरण में दुर्ग जिले के सुपेला स्थित शास्त्री नगर निवासी 33 वर्षीय देवेंद्र कुमार जांगड़े को आरोपी बनाया गया है। कार्रवाई के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। वहीं, जोगेन्दर कश्यप उर्फ जोगी फरार बताया जा रहा है। विभाग की टीम उसकी तलाश में जुटी है। मामले में दोनों आरोपियों की भूमिका और शराब के परिवहन से जुड़े तथ्यों को लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    आबकारी विभाग ने इस मामले में आबकारी अधिनियम, 1915 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। जब्त शराब और वाहन को कार्रवाई का हिस्सा बनाया गया है। विभाग की टीम मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। फरार आरोपी की तलाश के साथ ही अवैध शराब के परिवहन से जुड़े मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

    बस्तर जिले में की गई इस कार्रवाई में खास तौर पर उस शराब की खेप को पकड़ा गया, जो मध्य प्रदेश में बिक्री के लिए निर्धारित थी। जगदलपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोनारपाल के पास हुई जांच के दौरान 20 पेटियां और 180 लीटर विदेशी शराब बरामद हुई। विभाग ने शराब के साथ वाहन भी जब्त किया है। इस कार्रवाई में एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है, जबकि दूसरे आरोपी के फरार होने के कारण उसकी तलाश जारी है।

  • मध्य प्रदेश में एक करोड़ रुपये के कथित शराब रिश्वत मामले में घिरे डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचूरा पद से हटाए गए

    मध्य प्रदेश में एक करोड़ रुपये के कथित शराब रिश्वत मामले में घिरे डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के ओएसडी दीपम रायचूरा पद से हटाए गए

    मध्य प्रदेश। के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अपने विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) दीपम रायचूरा को पद से हटा दिया है। रायचूरा पर वर्ष 2024-25 में शराब ठेके दिलाने के बदले एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत लेने के आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद देवड़ा ने संबंधित वाणिज्यिक कर विभाग को जल्द जांच करने के निर्देश दिए हैं। आरोपों का आधार करीब 930 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में आरोपी मोहित गोगिया का कथित बयान बताया जा रहा है। हालांकि, इस बयान में किए गए दावों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। रायचूरा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत और मनगढ़ंत बताया है।

    उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने इस मामले में कहा कि दीपम रायचूरा वर्तमान में उनके ओएसडी हैं, लेकिन वर्ष 2024-25 में वे भोपाल में सहायक आबकारी अधिकारी के पद पर तैनात थे। उस समय रायचूरा उनके ओएसडी नहीं थे। देवड़ा के अनुसार, शराब ठेकों में कथित गड़बड़ियों की जानकारी उन्हें अखबारों के माध्यम से मिली। इसके बाद उन्होंने संबंधित विभाग को मामले की जल्द जांच करने के निर्देश दिए और रायचूरा को ओएसडी के पद से हटा दिया। अब मामले में विभागीय जांच के जरिए आरोपों की पड़ताल की जानी है।

    मोहित गोगिया के नाम से सामने आए कथित बयान में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र की दो शराब दुकानों का उल्लेख है। आरोप है कि वर्ष 2024-25 में इन दुकानों के ठेके दिलाने के बदले कुल एक करोड़ रुपये लिए गए। कथित बयान के मुताबिक, इसमें 50 लाख रुपये नकद और बाकी 50 लाख रुपये बैंक खाते के माध्यम से दिए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा शराब ठेकों के लिए आवश्यक बैंक गारंटी से संबंधित फर्जी सावधि जमा रसीद यानी एफडीआर के इस्तेमाल का भी दावा किया गया है। आरोपों में फर्जी एफडीआर को मंजूरी दिलाने में मदद करने और बिना लाइसेंस शराब उपलब्ध कराने में सहयोग की बात भी शामिल है। कथित बयान में बिचौलियों की भूमिका और एक मोबाइल नंबर पर बातचीत होने का दावा भी किया गया है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में सत्यापित कॉल रिकॉर्ड या चैट की जानकारी उपलब्ध नहीं है और दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी सामने नहीं आई है।

    दीपम रायचूरा ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मोहित गोगिया से उनका नाम जोड़कर जो बातें कही जा रही हैं, वे पूरी तरह मनगढ़ंत हैं। रायचूरा के मुताबिक, भोपाल में सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर रहते हुए गोगिया से लाइसेंसधारी के तौर पर मुलाकात हुई होगी, लेकिन उन्होंने उससे किसी अन्य संबंध की बात स्वीकार नहीं की है। उन्होंने रिश्वत लेने के आरोपों को भी झूठा बताया है। ऐसे में मामले में एक ओर कथित बयान के आधार पर आरोप लगाए गए हैं, जबकि दूसरी ओर रायचूरा ने उन्हें गलत बताते हुए अपना पक्ष रखा है।

    इस मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। पटवारी ने मामले की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग रखी है। उनकी मांगों में शराब ठेकों के आवंटन, बैंक एफडीआर और कथित लेन-देन की जांच शामिल है। उन्होंने 50-50 लाख रुपये के बताए गए भुगतानों और संबंधित बैंक खातों की पड़ताल के साथ जांच के लिए समय-सीमा निर्धारित करने की मांग भी की है। पटवारी ने जांच और कार्रवाई की जानकारी जनता के सामने रखने तथा आरोप सिद्ध होने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। ये कांग्रेस की ओर से रखी गई मांगें हैं, सरकार का घोषित निर्णय नहीं।

    फिलहाल वाणिज्यिक कर विभाग को जांच के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी में जांच पूरी करने की निश्चित समय-सीमा या विस्तृत जांच प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है। कथित बयान में किए गए दावों की सत्यता, बैंक लेन-देन और एफडीआर से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। एसआईटी गठित करने की मांग पर सरकार का निर्णय भी सामने नहीं आया है। ओएसडी को पद से हटाने की कार्रवाई हो चुकी है, जबकि आरोपों की वास्तविकता और आगे की संभावित कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

  • सतना में अवैध शराब कारोबारियों का CCTV नेटवर्क उजागर, गलियों में कैमरे लगाकर पुलिस और आबकारी टीम पर रखते थे नजर

    सतना में अवैध शराब कारोबारियों का CCTV नेटवर्क उजागर, गलियों में कैमरे लगाकर पुलिस और आबकारी टीम पर रखते थे नजर

    मध्य प्रदेश: के सतना में अवैध शराब के कारोबार पर कार्रवाई के दौरान पुलिस और आबकारी अमले को चौंकाने वाली जानकारी मिली है। कबाड़ी टोला इलाके में अवैध शराब की फुटकर बिक्री के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई के दौरान पता चला कि आरोपी और उसके सहयोगियों ने मोहल्ले में आने-जाने वाले रास्तों पर CCTV कैमरे लगा रखे थे। इन कैमरों के जरिए पुलिस और आबकारी विभाग की गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी।

    अधिकारियों के मुताबिक सोमवार दोपहर मुखबिर से अवैध शराब की बिक्री की सूचना मिली थी। इसके बाद सतना सर्किल क्रमांक-1 की टीम ने कबाड़ी टोला में घेराबंदी कर कार्रवाई की। टीम ने 24 वर्षीय राजेश उर्फ नंगा लोधी को पकड़ा। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 113 पाव अंग्रेजी और देशी शराब बरामद की गई। जब्त शराब की कीमत 15 हजार 123 रुपये बताई गई है।

    कार्रवाई के बाद आरोपी से पूछताछ की गई। पूछताछ में अवैध शराब के कारोबार में उसके साथ जुड़े अन्य लोगों और कथित सरपरस्तों से संबंधित जानकारी सामने आने की बात कही गई है। अधिकारियों ने इस जानकारी की तस्दीक शुरू कर दी है और संबंधित ठिकानों पर आगे छापेमारी की जा रही है।

    मामले की जांच के दौरान CCTV कैमरों का नेटवर्क सामने आना कार्रवाई का अहम हिस्सा रहा। जानकारी के मुताबिक राजेश लोधी और उसके सहयोगियों ने कबाड़ी टोला में मोहल्ले के प्रवेश मार्गों पर गोपनीय तरीके से कैमरे लगाए थे। इन कैमरों की लाइव फीड राजेश के घर में लगी टीवी स्क्रीन पर देखी जाती थी।

    इस व्यवस्था का इस्तेमाल पुलिस और आबकारी अमले की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता था। जब भी टीम के इलाके में पहुंचने की जानकारी कैमरों के जरिए मिलती थी, आरोपी और उसके साथी कथित तौर पर शराब को छिपाकर वहां से निकल जाते थे। इस तरह वे कार्रवाई से बचने की कोशिश करते थे।

    आबकारी टीम ने कार्रवाई के दौरान CCTV कैमरों के साथ उनका DVR भी जब्त कर लिया है। अब जब्त उपकरणों की तकनीकी जांच की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि कैमरों और DVR से अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों तथा उसकी निगरानी व्यवस्था के बारे में और जानकारी मिल सकती है।

    इस कार्रवाई से यह भी सामने आया कि अवैध शराब की बिक्री में शामिल लोगों ने अपने ठिकाने की निगरानी के लिए तकनीकी साधनों का इस्तेमाल किया था। आमतौर पर सुरक्षा के लिए लगाए जाने वाले CCTV कैमरों का इस्तेमाल यहां कार्रवाई से बचने के लिए किया जा रहा था। आबकारी विभाग अब जब्त किए गए उपकरणों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रहा है।

    आरोपी के खिलाफ अवैध शराब से संबंधित प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पूछताछ में सामने आए अन्य नामों और ठिकानों की भी पुष्टि की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार जांच आगे बढ़ने के साथ इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी सामने आ सकती है।

    कार्रवाई में आबकारी विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही। फिलहाल आरोपी से बरामद 113 पाव शराब, CCTV कैमरों और DVR को जांच का हिस्सा बनाया गया है। विभाग की कार्रवाई का अगला चरण पूछताछ और तकनीकी जांच से मिलने वाली जानकारी पर निर्भर करेगा।

  • भिंड के दबोह क्षेत्र में संगठित अवैध शराब नेटवर्क: ‘कंजर व्हिस्की’ 30 रुपए में, महिलाओं के भरोसे चलता कारोबार

    भिंड के दबोह क्षेत्र में संगठित अवैध शराब नेटवर्क: ‘कंजर व्हिस्की’ 30 रुपए में, महिलाओं के भरोसे चलता कारोबार


    भिंड । मध्य प्रदेश शहर से लगभग 85 किमी दूर दबोह क्षेत्र में स्थित कंजर डेरा आज एक संगठित और बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध शराब नेटवर्क के रूप में चर्चा में है, जहां कच्ची शराब खुलेआम बिना किसी रोक टोक के बिक रही है। स्थानीय लोगों और जांचकर्ताओं के अनुसार यहाँ का यह नेटवर्क इतना व्यवस्थित है कि खरीदारों को कहीं भटकना नहीं पड़ता, बल्कि एक तय शुदा प्रक्रिया के मुताबिक शराब आसानी से उपलब्ध कराई जाती है।

    कंजर डेरे में शराब को स्थानीय लोग कंजर व्हिस्की के नाम से जानते हैं, जिसका एक एक पॉलिथीन पाउच महज 30 रुपए में बिकता है। इस कच्ची शराब की बिक्री एक अनूठे तरीके से होती है प्रत्येक घर के बाहर एक चारपाई रखी होती है जिस पर एक थैला होता है जिसमें आठ से दस पाउच शराब रखे रहते हैं। ग्राहक उस थैले को पहचानकर थैलों में से पाउच लेते हैं और पैसे वहीं रख देते हैं। इस तरीके से शराब विक्रेताओं और ग्राहकों के बीच न्यूनतम संपर्क होता है और बिक्री आसान एवं तेजी से होती है।

    डेरे के गिरोह में शामिल महिलाओं की भूमिका प्रमुख रूप से सामने आती है। कई महिलाओं ने रिपोर्टरों से बातचीत में स्वीकार किया कि यही उनकी आमदनी का साधन है और इसी से परिवार का भरण पोषण होता है। पुरुष इस दौरान डेरे से बाहर रहते हैं और शराब के निर्माण तथा आपूर्ति से जुड़े कामों में लगे रहते हैं। गलियों के बीच सात पक्के मकानों के नेटवर्क में सप्ताह के हर दिन के लिए अलग अलग घर शराब की बिक्री का काम संभालता है, जिससे किसी प्रकार की आपसी प्रतिस्पर्धा और टकराव नहीं होता।

    स्थानीय ग्राहकों के अलावा, यह अवैध शराब नेटवर्क कुछ शराब ठेकेदारों तक भी कच्ची शराब की आपूर्ति करता है, जो इसे पाउचों और बोतलों में पैक कर आसपास के गांवों और इलाकों में बेचते हैं। इससे व्यापारियों को दो से चार गुना तक मुनाफा होता है, और यह नेटवर्क और भी अधिक फैलता जा रहा है।

    रेहकोला माता मंदिर के निकट स्थित इस डेरे में रहने वाले कुछ परिवारों का कहना है कि वे शराब को या तो स्वयं बनाते हैं या बाहर से लाते हैं, हालांकि उसके स्रोत स्पष्ट रूप से बताने से इनकार कर देते हैं। पुरुष शराब बनाने के लिए आसपास के बीहड़ों में जाते हैं, जहाँ गड्ढों में स्टॉक छिपाया जाता है और ज़रूरत के समय उसे लाकर बेचा जाता है।

    यह अवैध शराब कारोबार स्थानीय आबकारी कानूनों और प्रतिबंधों के खिलाफ चल रहा है, जिससे सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि कई लोग इस कच्ची शराब को सरकारी या कानूनी समझकर भी पी लेते हैं, जबकि गांवों के कुछ लोगों को डर होता है कि यदि वे प्रशासन को सूचना देंगे तो उन्हें प्रतिकूल परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

    विशेष रूप से यह नेटवर्क स्थानीय आबकारी अधिकारियों या पुलिस की निगरानी को चुनौती देता प्रतीत होता है, क्योंकि यह व्यापार बिना किसी तत्काल कार्रवाई के चलता दिखाई दे रहा है। वहीं, आबकारी विभाग और पुलिस को ऐसी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि अवैध शराब के कारण होने वाले स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभावों से लोगों को बचाया जा सके।