Tag: expansion

  • भोपाल में एलएपीपी के नए विस्तार का उद्घाटन, बना दुनिया का सबसे बड़ा विनिर्माण संयंत्र

    भोपाल में एलएपीपी के नए विस्तार का उद्घाटन, बना दुनिया का सबसे बड़ा विनिर्माण संयंत्र

    भोपाल। केबल एवं कनेक्टिविटी समाधान के क्षेत्र में कार्यरत वैश्विक कंपनी एलएपीपी ने मध्य प्रदेश की राजधानी
    भोपाल स्थित अपने विनिर्माण संयंत्र के विस्तारित परिसर का उद्घाटन किया। विस्तार के बाद भोपाल संयंत्र कंपनी के विश्वभर में संचालित सभी विनिर्माण संयंत्रों में सबसे बड़ा बन गया है। नई सुविधा में पावर लो-वोल्टेज केबल के निर्माण की व्यवस्था की गई है।

    कंपनी के अनुसार, नई इकाई में तैयार होने वाली लो-वोल्टेज केबल का उपयोग कारखानों, व्यावसायिक भवनों, परिवहन प्रणालियों, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, उपयोगिता परियोजनाओं सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है। इस सुविधा का निर्माण वर्ष 2025 में शुरू किया गया था और अब यह पूरी तरह परिचालन में आ गई है।

    कंपनी ने यह विस्तार ऐसे समय में किया है, जब देश में बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ रहा है। इसके साथ ही पावर लो-वोल्टेज केबल की मांग में भी वृद्धि हो रही है। अनुमान के मुताबिक भारत में वर्तमान और आगामी वित्त वर्ष के दौरान बुनियादी ढांचा क्षेत्र में करीब 24 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। वहीं, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में प्रत्येक वर्ष लगभग 50 से 55 गीगावाट की वृद्धि होने की संभावना है।

    भारत कंपनी के लिए महत्वपूर्ण बाजार

    एलएपीपी समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैथियास लैप ने कहा कि भोपाल में किया गया निवेश ग्राहकों को बेहतर और तेज सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि कंपनी की ‘भारत में भारत के लिए’ रणनीति के तहत देश में ही उच्च गुणवत्ता वाले कनेक्टिविटी समाधान तैयार किए जा रहे हैं। भारत एलएपीपी के लिए एशिया का महत्वपूर्ण बाजार है, जबकि मध्य प्रदेश कंपनी के लिए एक अहम विनिर्माण केंद्र बन चुका है।

    एलएपीपी ने वर्ष 2012 में भोपाल में अपना विनिर्माण संयंत्र शुरू किया था। शुरुआती दौर में यहां एकल-कोर केबल का उत्पादन किया जाता था। समय के साथ कंपनी ने संयंत्र में बहु-कोर केबल, सौर केबल, कंपाउंडिंग और ई-बीम तकनीक जैसी नई क्षमताएं जोड़ीं।

    200 से अधिक लोगों को रोजगार

    वर्तमान में भोपाल संयंत्र में 200 से अधिक लोग कार्यरत हैं। कंपनी के विश्वभर के संयंत्रों में सबसे बड़ा होने के साथ ही यह केंद्र कई आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए भी महत्वपूर्ण है। यहां उन्नत पॉलिमर सामग्री का निर्माण भी कंपनी स्वयं करती है। इससे केबल की गुणवत्ता और प्रदर्शन पर बेहतर नियंत्रण संभव होता है।

    ई-बीम तकनीक के उपयोग से केबल को अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाने के साथ उनकी ताप सहने की क्षमता भी बढ़ाई जाती है। कंपनी के मुताबिक भोपाल संयंत्र का विस्तार एलएपीपी इंडिया के 30वें वर्ष में प्रवेश करने के अवसर पर हुआ है।

    जर्मनी के बाद भारत सबसे बड़ा बाजार

    एलएपीपी के लिए जर्मनी के बाद भारत सबसे बड़ा बाजार है और कंपनी इसे प्रमुख विकास बाजार के रूप में देखती है। कंपनी के शीर्ष प्रबंधन का भारत से पुराना जुड़ाव भी रहा है। समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैथियास लैप ने बचपन में अपने परिवार के साथ भारत की यात्राएं की थीं। वहीं, कंपनी के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंड्रियास लैप वर्ष 2000 से जर्मनी के दो राज्यों में भारत के मानद वाणिज्यदूत के रूप में भी सेवाएं दे रहे हैं।

  • Akasa Air की उड़ान को मिलेगी नई रफ्तार, हर साल 12 से ज्यादा विमान जुड़ेंगे, तीन साल में 500 से अधिक पायलटों की भर्ती

    Akasa Air की उड़ान को मिलेगी नई रफ्तार, हर साल 12 से ज्यादा विमान जुड़ेंगे, तीन साल में 500 से अधिक पायलटों की भर्ती

    नई दिल्ली । भारतीय विमानन क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही Akasa Air ने आने वाले तीन वर्षों के लिए अपनी विस्तार योजना तैयार कर ली है। कंपनी की योजना हर साल 12 से ज्यादा नए विमान अपने बेड़े में शामिल करने की है। नए विमानों के साथ परिचालन का दायरा बढ़ाने के लिए एयरलाइन तीन साल में 500 से अधिक नए पायलटों की भर्ती भी करेगी। विमान डिलीवरी में सुधार के बाद कंपनी ने अपने विस्तार की गति बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर भी एयरलाइन की मौजूदगी मजबूत करने की योजना है।

    Akasa Air के विस्तार की योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब विमान निर्माता कंपनी Boeing की ओर से विमानों के उत्पादन और डिलीवरी में स्थिरता आने की उम्मीद बढ़ी है। विमानों की डिलीवरी में पहले आई बाधाओं के कारण एयरलाइन को पायलटों की भर्ती की गति सीमित करनी पड़ी थी। हालांकि, कंपनी ने अपने प्रशिक्षित पायलटों को बनाए रखा और अब नए विमानों की उपलब्धता बढ़ने के साथ भर्ती प्रक्रिया को फिर से तेज कर दिया है। एयरलाइन के पास फिलहाल 800 से अधिक पायलट हैं।

    कंपनी के अनुसार अगले दो से तीन वर्षों में 500 से ज्यादा पायलटों को जोड़ा जाएगा। इसके लिए कैडेट प्रोग्राम के साथ-साथ खुले बाजार से कमर्शियल पायलट लाइसेंस रखने वाले अनुभवी पायलटों की भर्ती भी की जाएगी। कैडेट प्रोग्राम के माध्यम से नए पायलट तैयार करने पर कंपनी का जोर रहेगा, जबकि परिचालन जरूरत के अनुसार अनुभवी पायलटों को भी सीधे भर्ती किया जाएगा। नए विमानों की संख्या बढ़ने के साथ प्रशिक्षित पायलटों की जरूरत भी बढ़ेगी, जिसे पूरा करने के लिए एयरलाइन ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है।

    Akasa Air के बेड़े में Boeing 737 MAX विमान शामिल हैं। कंपनी की योजना आने वाले वर्षों में लगातार नए विमान जोड़ने की है। अगस्त के अंत तक भी बेड़े में कई नए विमान शामिल होने की उम्मीद जताई गई है। नए विमानों की उपलब्धता बढ़ने से एयरलाइन को अधिक उड़ानें संचालित करने, नए शहरों को जोड़ने और मौजूदा रूट्स पर क्षमता बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इससे यात्रियों के लिए भी अधिक विकल्प उपलब्ध होने की संभावना है।

    कंपनी के विस्तार का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से जुड़ा है। Akasa Air आने वाले दो से तीन वर्षों में अपने विमानों की तैनाती में अंतरराष्ट्रीय रूट्स की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ाने की तैयारी कर रही है। फिलहाल एयरलाइन का बड़ा परिचालन घरेलू मार्गों पर केंद्रित है, लेकिन बेड़े में नए विमानों के शामिल होने के बाद विदेशों के लिए उड़ानों का नेटवर्क बढ़ाया जाएगा। कंपनी की रणनीति घरेलू और अंतरराष्ट्रीय परिचालन के बीच बेहतर संतुलन बनाने की है।

    एयरलाइन के मुताबिक आने वाले समय में उसके विमानों की तैनाती का अनुपात घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर करीब 60:40 तक पहुंच सकता है। नए विमान मिलने से सीट क्षमता में बढ़ोतरी होगी और कंपनी को अधिक यात्रियों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के विस्तार से नए बाजारों में प्रवेश और राजस्व बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

    Akasa Air की यह योजना विमान बेड़े, पायलटों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तीनों स्तरों पर विस्तार का संकेत देती है। लगातार नए विमानों को शामिल करने और बड़ी संख्या में पायलटों की भर्ती से कंपनी अपने परिचालन को तेज करने की तैयारी में है। आने वाले तीन वर्षों में बेड़े का विस्तार और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की बढ़ती हिस्सेदारी Akasa Air को भारतीय विमानन बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद कर सकती है। साथ ही नए रोजगार अवसर पैदा होने से एविएशन क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए भी यह विस्तार महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

  • जुलाई में भारत के निजी क्षेत्र की रफ्तार धीमी, कंपोजिट पीएमआई 54.3 पर; निर्यात मांग ने मैन्युफैक्चरिंग को दिया मजबूत सहारा

    जुलाई में भारत के निजी क्षेत्र की रफ्तार धीमी, कंपोजिट पीएमआई 54.3 पर; निर्यात मांग ने मैन्युफैक्चरिंग को दिया मजबूत सहारा

    नई दिल्ली । जुलाई महीने में भारत के निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि का क्रम जारी रहा, हालांकि इसकी रफ्तार जून की तुलना में कुछ धीमी दर्ज की गई। ताजा आंकड़ों के अनुसार जुलाई में कंपोजिट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) 54.3 रहा। यह स्तर इस बात का संकेत है कि देश की आर्थिक गतिविधियां अब भी विस्तार के चरण में हैं, क्योंकि पीएमआई का 50 से ऊपर रहना आर्थिक वृद्धि का संकेत माना जाता है। हालांकि जून में यह सूचकांक 57.1 था, जिससे स्पष्ट है कि जुलाई में विकास की गति कुछ कम हुई है।

    जुलाई के दौरान निजी क्षेत्र के प्रदर्शन में सर्विस सेक्टर की सुस्ती प्रमुख कारण रही। कारोबार से जुड़े नए ऑर्डरों की रफ्तार कमजोर पड़ी और ग्राहकों की ओर से पूछताछ में कमी देखने को मिली। कई कंपनियों ने मांग में नरमी और कुछ ऑर्डर रद्द होने की वजह से सेवा गतिविधियों में अपेक्षाकृत धीमी बढ़ोतरी दर्ज की। इसके चलते सर्विस सेक्टर का बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स घटकर 53.1 पर पहुंच गया, जो पिछले 53 महीनों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।

    इसके विपरीत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। वैश्विक बाजारों से लगातार मिल रही मजबूत मांग और निर्यात ऑर्डरों में बढ़ोतरी के कारण उत्पादन गतिविधियां मजबूत बनी रहीं। मुख्य मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई में मामूली गिरावट के बावजूद फैक्ट्री उत्पादन सूचकांक में सुधार दर्ज किया गया। इससे संकेत मिलता है कि औद्योगिक उत्पादन की गति बनी हुई है और विनिर्माण क्षेत्र देश की आर्थिक गतिविधियों को सहारा देता रहा।

    व्यापारिक संस्थानों ने भविष्य की संभावित चुनौतियों को देखते हुए अपनी तैयारियां भी तेज कर दी हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ने वाले संभावित असर को ध्यान में रखते हुए कंपनियों ने कच्चे माल की खरीद बढ़ाई है। इसके साथ ही तैयार माल और इनपुट इन्वेंट्री में भी वृद्धि दर्ज की गई है, ताकि किसी भी आपूर्ति व्यवधान की स्थिति में उत्पादन प्रभावित न हो।

    सर्वेक्षण के अनुसार लागत का दबाव भी जुलाई में बढ़ा है। कच्चे माल और अन्य इनपुट की कीमतों में वृद्धि के कारण कंपनियों की लागत बढ़ी, जिसका असर उत्पादों और सेवाओं की कीमतों पर भी दिखाई दिया। कई कंपनियों ने बढ़ती लागत के बीच अपने लाभ मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए कीमतों में आवश्यक बदलाव किए। इसके बावजूद रोजगार के मोर्चे पर स्थिति सकारात्मक बनी रही और कंपनियों ने कर्मचारियों की नियुक्ति जारी रखी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों में उतार-चढ़ाव और क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का निजी क्षेत्र अभी भी मजबूती का संकेत दे रहा है। निर्यात आधारित मांग, उत्पादन गतिविधियों की स्थिरता और रोजगार सृजन जैसे कारक आर्थिक विस्तार को समर्थन दे रहे हैं। हालांकि घरेलू मांग में सुधार और सर्विस सेक्टर की गति बढ़ाना आने वाले महीनों में आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

    कुल मिलाकर जुलाई के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था विस्तार के मार्ग पर बनी हुई है, लेकिन विकास की गति को बनाए रखने के लिए घरेलू मांग को मजबूत करना, निवेश बढ़ाना और वैश्विक अनिश्चितताओं के प्रभाव को सीमित करना आवश्यक होगा। यदि आने वाले महीनों में मांग और कारोबारी विश्वास में सुधार होता है तो निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां फिर से तेज रफ्तार पकड़ सकती हैं।

  • E20 लक्ष्य के बाद इथेनॉल मिशन का नया चरण, किचन फ्यूल, एथेनॉल एटीएम, एविएशन और निर्यात के जरिए बढ़ेगा उपयोग का दायरा

    E20 लक्ष्य के बाद इथेनॉल मिशन का नया चरण, किचन फ्यूल, एथेनॉल एटीएम, एविएशन और निर्यात के जरिए बढ़ेगा उपयोग का दायरा

    नई दिल्ली । पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E20 लक्ष्य हासिल करने के बाद भारत सरकार अब इथेनॉल के उपयोग को नई दिशा देने की तैयारी में है। सरकार का फोकस अब केवल वाहन ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इथेनॉल को घरेलू रसोई ईंधन, एथेनॉल एटीएम, विमानन क्षेत्र के टिकाऊ ईंधन और निर्यात जैसे नए क्षेत्रों में भी बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य देश में तेजी से बढ़ रही इथेनॉल उत्पादन क्षमता का अधिकतम उपयोग करना, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और किसानों के लिए नए बाजार तैयार करना है।

    पिछले कुछ वर्षों में भारत के इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण का स्तर लगभग 1.5 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है, विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और गन्ना तथा अनाज उत्पादक किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला है। इस नीति के चलते देशभर में चीनी मिलों और अनाज आधारित डिस्टिलरी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश भी हुआ है।

    हालांकि इस सफलता के साथ एक नई चुनौती भी सामने आई है। देश की इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में इसके लगभग 24 अरब लीटर वार्षिक स्तर तक पहुंचने का अनुमान है। इसके मुकाबले E20 कार्यक्रम के लिए सालाना लगभग 11 अरब लीटर इथेनॉल की आवश्यकता है। वहीं पेय पदार्थ, दवा और रासायनिक उद्योगों की संयुक्त मांग भी कुल उत्पादन क्षमता से काफी कम है। ऐसे में बड़ी मात्रा में उपलब्ध अतिरिक्त क्षमता के बेहतर उपयोग के लिए सरकार नए विकल्पों पर तेजी से काम कर रही है।

    इसी दिशा में इथेनॉल को घरेलू कुकिंग फ्यूल के रूप में विकसित करने की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। प्रस्तावित एथेनॉल एटीएम मॉडल के तहत उपभोक्ता विशेष कंटेनर में इथेनॉल भरवा सकेंगे और उसे विशेष रूप से तैयार किए गए स्टोव में इस्तेमाल कर सकेंगे। यदि यह मॉडल सफल होता है तो रसोई गैस पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को भी अतिरिक्त मजबूती प्रदान कर सकता है।

    सरकार की योजना केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है। भारत इथेनॉल के निर्यात की संभावनाओं पर भी सक्रियता से काम कर रहा है। ऐसे देशों की पहचान की जा रही है जहां इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य तो निर्धारित हैं, लेकिन उत्पादन क्षमता सीमित है। इससे भारतीय उत्पादकों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल सकते हैं और अतिरिक्त उत्पादन का बेहतर उपयोग संभव होगा।

    विमानन क्षेत्र भी सरकार की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सतत विमानन ईंधन यानी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल के उपयोग को बढ़ाने के लिए चरणबद्ध लक्ष्य तय किए गए हैं। इस दिशा में इथेनॉल आधारित तकनीक से जेट ईंधन तैयार करने की परियोजनाओं पर काम चल रहा है। यदि ये परियोजनाएं सफल रहती हैं तो देश में स्वच्छ विमानन ईंधन के उत्पादन को नई गति मिलेगी और कार्बन उत्सर्जन कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी समर्थन मिलेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल के उपयोग का दायरा बढ़ने से केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि कृषि, उद्योग और निर्यात को भी दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। सरकार की नई रणनीति का उद्देश्य अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को आर्थिक अवसर में बदलना और भारत को वैश्विक बायोफ्यूल क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाना है।

  • दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई रफ्तार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 45 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का किया शुभारंभ

    दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई रफ्तार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 45 नए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का किया शुभारंभ

    नई दिल्ली ।राजधानी दिल्ली में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने 45 नए आयुष्मान जन आरोग्य मंदिरों को जनता के लिए समर्पित किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शकूरपुर से इन स्वास्थ्य केंद्रों का शुभारंभ करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को उसके घर और कॉलोनी के नजदीक बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। नए केंद्रों के शुरू होने से राजधानी में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और क्षमता दोनों में विस्तार होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थानीय स्तर तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। इसी सोच के तहत आयुष्मान जन आरोग्य मंदिरों का लगातार विस्तार किया जा रहा है, ताकि लोगों को छोटी बीमारियों और नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। उन्होंने विश्वास जताया कि इन केंद्रों के माध्यम से समय पर उपचार और बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

    सरकार के अनुसार, राजधानी में वर्तमान समय में 415 से अधिक आयुष्मान जन आरोग्य मंदिर संचालित हो रहे हैं। आने वाले समय में इनकी संख्या बढ़ाकर 1,100 से अधिक करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस योजना के विस्तार के साथ दिल्ली के अधिक से अधिक क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का मजबूत नेटवर्क विकसित करने की तैयारी की जा रही है।

    इन स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी सेवाओं के साथ मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल, टीकाकरण, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता तथा लगभग 80 प्रकार की निशुल्क जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा सामान्य बीमारियों का उपचार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए आवश्यक परामर्श भी दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होने से बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव भी कम होगा।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर केवल उपचार केंद्र नहीं होंगे, बल्कि बीमारी की रोकथाम, स्वास्थ्य जागरूकता और शुरुआती स्तर पर रोगों की पहचान के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि इन केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को समय पर चिकित्सा सलाह और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे गंभीर बीमारियों की संभावना को शुरुआती स्तर पर ही कम किया जा सके।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक स्थापित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बड़ी संख्या में अर्बन सब हेल्थ सेंटर और अर्बन प्राइमरी हेल्थ सेंटर शामिल हैं। इन केंद्रों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को प्रत्येक मोहल्ले और कॉलोनी तक पहुंचाना है, ताकि लोगों को रोजमर्रा की स्वास्थ्य जरूरतों के लिए दूरस्थ अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े। इससे बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का कहना है कि दिल्ली में आधुनिक, समावेशी और नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने के लिए लगातार बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का नेटवर्क इसी व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और भरोसेमंद बनाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इन केंद्रों का विस्तार राजधानी की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती देगा और लोगों को उनके घर के आसपास ही गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

  • नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानों का विस्तार, इंडिगो ने 8 नए शहर जोड़े, अकासा एयर ने मुंबई के लिए शुरू की सेवा

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ानों का विस्तार, इंडिगो ने 8 नए शहर जोड़े, अकासा एयर ने मुंबई के लिए शुरू की सेवा


    नई दिल्ली। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हवाई कनेक्टिविटी लगातार मजबूत हो रही है। देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन इंडिगो (IndiGo) ने एयरपोर्ट से आठ नए शहरों के लिए उड़ानें शुरू कर अपने नेटवर्क का बड़ा विस्तार किया है। वहीं, अकासा एयर (Akasa Air) ने भी 2 जुलाई से मुंबई के लिए अपनी नियमित फ्लाइट सेवा शुरू कर दी है। इससे नोएडा एयरपोर्ट से यात्रियों के लिए हवाई सफर के विकल्प और बढ़ गए हैं।

    इंडिगो ने 8 नए शहरों को जोड़ा
    15 जून 2026 को शुरू हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इंडिगो ने शुरुआत में बेंगलुरु, हैदराबाद, लखनऊ, जम्मू और अमृतसर के लिए उड़ानें संचालित की थीं।

    अब 1 जुलाई से एयरलाइन ने जयपुर, जोधपुर, चंडीगढ़, देहरादून, धर्मशाला, भोपाल, बरेली और पंतनगर के लिए भी फ्लाइट सेवा शुरू कर दी है। इसके अलावा 2 जुलाई से किशनगढ़ को भी नेटवर्क में शामिल किया जा रहा है। इसके साथ ही नोएडा एयरपोर्ट से इंडिगो के गंतव्यों (डेस्टिनेशन) की संख्या बढ़कर 15 हो जाएगी।

    मुंबई के लिए अकासा एयर की नई उड़ान
    अकासा एयर ने 2 जुलाई से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ने वाली नई उड़ान सेवा शुरू कर दी है।

    एयरलाइन के बुकिंग पोर्टल के अनुसार, मुंबई रूट पर प्रतिदिन दो नई उड़ानें संचालित की जाएंगी। इससे पहले अकासा एयर देश की पहली एयरलाइन बनी थी, जिसने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे दो नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को आपस में जोड़ने की शुरुआत की थी।

    जुलाई में रोजाना 40 से अधिक उड़ानों का लक्ष्य
    इंडिगो और अकासा एयर ने 16 जून से नोएडा एयरपोर्ट पर अपना परिचालन शुरू किया था। उस समय दोनों एयरलाइंस मिलकर प्रतिदिन 12 उड़ानें संचालित कर रही थीं, जिनमें आठ इंडिगो और चार अकासा एयर की थीं।

    इंडिगो द्वारा शुरू किए गए नए रूटों में बरेली, जोधपुर और किशनगढ़ के लिए उड़ानें एक दिन छोड़कर संचालित होंगी, जबकि अन्य सभी शहरों के लिए दैनिक उड़ानें उपलब्ध रहेंगी।

    इसके अलावा इंडिगो 13 जुलाई से चंडीगढ़ रूट पर दो अतिरिक्त दैनिक उड़ानें भी शुरू करने जा रही है। इन नई सेवाओं के साथ जुलाई के दौरान नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से प्रतिदिन 40 से 42 उड़ानें संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है।

  • नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अकासा एयर की उड़ानों का आगाज, नवी मुंबई और बेंगलुरु के लिए मिली सीधी हवाई कनेक्टिविटी

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अकासा एयर की उड़ानों का आगाज, नवी मुंबई और बेंगलुरु के लिए मिली सीधी हवाई कनेक्टिविटी


    नई दिल्ली
    । देश के विमानन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण विकास के तहत नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अकासा एयर ने अपनी वाणिज्यिक उड़ान सेवाओं की औपचारिक शुरुआत कर दी है। इस कदम के साथ एयरलाइन उन शुरुआती कंपनियों में शामिल हो गई है जिन्होंने देश के इस नए और महत्वाकांक्षी हवाई अड्डे से नियमित संचालन शुरू किया है। कंपनी ने पहले चरण में नवी मुंबई और बेंगलुरु के लिए सीधी उड़ान सेवाएं शुरू की हैं, जिससे यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।

    नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ानों का संचालन शुरू होना क्षेत्रीय और राष्ट्रीय हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों के यात्रियों को अब वैकल्पिक हवाई यात्रा सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे दिल्ली क्षेत्र के अन्य हवाई अड्डों पर दबाव कम करने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।

    एयरलाइन के अनुसार, नवी मुंबई से रवाना हुई पहली उड़ान निर्धारित समय पर नोएडा पहुंची और इसके बाद वापसी सेवा भी संचालित की गई। इसी क्रम में बेंगलुरु के लिए भी सीधी उड़ानों की शुरुआत की गई है। इन नई सेवाओं से व्यापारिक यात्रियों, कॉर्पोरेट सेक्टर, छात्रों और पर्यटन गतिविधियों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।

    कंपनी ने कहा कि नोएडा एयरपोर्ट से शुरुआती चरण में परिचालन शुरू करना उसकी दीर्घकालिक विकास रणनीति का हिस्सा है। एयरलाइन तेजी से विकसित हो रहे शहरों और नए विमानन बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है। इसके साथ ही आधुनिक विमानन अवसंरचना के विकास में भागीदारी को भी कंपनी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आने वाले वर्षों में उत्तर भारत के प्रमुख विमानन केंद्रों में शामिल हो सकता है। ऐसे में शुरुआती दौर में सेवाएं शुरू करने वाली एयरलाइनों को भविष्य में यात्री आधार और नेटवर्क विस्तार के मामले में महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है। अकासा एयर का यह कदम इसी रणनीतिक सोच का हिस्सा माना जा रहा है।

    एयरलाइन प्रबंधन ने कहा कि नोएडा से उड़ान संचालन की शुरुआत कंपनी की विकास यात्रा में एक अहम उपलब्धि है। कंपनी का लक्ष्य यात्रियों को सुरक्षित, भरोसेमंद और सुविधाजनक यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना है। इसके लिए नए मार्गों के विकास और बेहतर सेवा गुणवत्ता पर लगातार ध्यान दिया जाएगा।

    वहीं हवाई अड्डा प्रबंधन ने भी अकासा एयर के परिचालन को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए सकारात्मक कदम बताया है। अधिकारियों के अनुसार, नई उड़ानों से यात्रियों को अधिक विकल्प मिलेंगे और हवाई यात्रा का दायरा विस्तारित होगा। इससे नोएडा एयरपोर्ट के विकास को भी गति मिलेगी और भविष्य में अन्य शहरों के लिए नई सेवाओं का मार्ग प्रशस्त होगा।

    विमानन उद्योग के जानकारों का कहना है कि उत्तर भारत में बढ़ती हवाई यात्रा मांग, बेहतर अवसंरचना और नए हवाई अड्डों के विकास के बीच यह पहल पूरे क्षेत्र के आर्थिक और परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आने वाले समय में अधिक एयरलाइनों के जुड़ने से नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के प्रमुख विमानन केंद्रों में अपनी पहचान स्थापित कर सकता है।

  • बाजार खुलते ही निवेशकों की नजर इन चुनिंदा शेयरों पर, कॉरपोरेट घोषणाओं के बाद बढ़ सकती है ट्रेडिंग गतिविधि

    बाजार खुलते ही निवेशकों की नजर इन चुनिंदा शेयरों पर, कॉरपोरेट घोषणाओं के बाद बढ़ सकती है ट्रेडिंग गतिविधि

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार ने गुरुवार को सीमित दायरे में कारोबार करते हुए लगभग सपाट स्तर पर दिन का समापन किया। हालांकि बाजार सूचकांकों में बड़ी हलचल देखने को नहीं मिली, लेकिन कई कंपनियों की ओर से जारी महत्वपूर्ण कॉरपोरेट घोषणाओं ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। ऐसे में शुक्रवार के कारोबारी सत्र में कुछ चुनिंदा शेयरों में गतिविधि बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार किसी कंपनी द्वारा विस्तार योजनाओं, नए ऑर्डर, डिविडेंड भुगतान, वैश्विक मान्यता या व्यवसायिक लक्ष्यों से जुड़ी जानकारी साझा किए जाने का असर अक्सर उसके शेयरों पर दिखाई देता है। इसी कारण निवेशक आगामी सत्र में उन कंपनियों पर विशेष नजर रखेंगे जिन्होंने हाल के दिनों में महत्वपूर्ण अपडेट जारी किए हैं।

    हिंडाल्को इंडस्ट्रीज उन कंपनियों में शामिल है जिस पर बाजार की निगाहें बनी रहेंगी। कंपनी ने प्रीमियम बिल्डिंग सॉल्यूशंस सेगमेंट में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए नई दिल्ली में नया एक्सपीरियंस सेंटर शुरू करने की घोषणा की है। कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में अपने इंजीनियर्ड एल्युमीनियम डोर और विंडो कारोबार को बड़े स्तर पर विस्तार देना है। रियल एस्टेट और प्रीमियम निर्माण क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए इस घोषणा को कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    डिफेंस और इंजीनियरिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारत फोर्ज भी निवेशकों के रडार पर रहेगी। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अंतिम डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट घोषित की है। डिविडेंड से जुड़ी घोषणाएं आमतौर पर निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं क्योंकि इससे शेयरधारकों को मिलने वाले प्रतिफल की स्पष्ट तस्वीर सामने आती है। ऐसे में इस अपडेट का असर कंपनी के शेयर में देखने को मिल सकता है।

    सौर ऊर्जा क्षेत्र की कंपनी प्रीमियर एनर्जीज ने भी हाल ही में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी को वैश्विक स्तर की प्रतिष्ठित सोलर मॉड्यूल निर्माता रैंकिंग में शीर्ष भारतीय कंपनियों में स्थान मिला है। यह उपलब्धि कंपनी की विनिर्माण क्षमता, तकनीकी दक्षता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती उपस्थिति को दर्शाती है। अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं के बीच यह खबर निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

    पिलानी इन्वेस्टमेंट एंड इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन ने भी अपने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड की घोषणा की है। हालांकि रिकॉर्ड डेट की जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन कंपनी के इस फैसले ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। डिविडेंड भुगतान की घोषणा अक्सर बाजार में निवेशकों के भरोसे और कंपनी की वित्तीय स्थिति का संकेत मानी जाती है।

    वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर और टोल संचालन क्षेत्र से जुड़ी कंपनी इनोविजन को मध्य प्रदेश में एक महत्वपूर्ण परियोजना के संचालन के लिए लेटर ऑफ इंटेंट प्राप्त हुआ है। कंपनी को राष्ट्रीय राजमार्ग के एक प्रमुख हिस्से पर टोल संचालन और शुल्क संग्रहण का कार्य सौंपा गया है। नए ऑर्डर से कंपनी के ऑर्डर बुक और भविष्य की आय संभावनाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों में कॉरपोरेट अपडेट्स निवेशकों के निर्णयों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। ऐसे में शुक्रवार के कारोबारी सत्र में इन कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की गतिविधि बढ़ सकती है। हालांकि किसी भी निवेश निर्णय से पहले निवेशकों को कंपनी के मूलभूत आंकड़ों, जोखिम कारकों और बाजार परिस्थितियों का सावधानीपूर्वक आकलन करना चाहिए।

  • MP कैबिनेट: उज्जैन में 590 करोड़ से होगा हवाई पट्टी का विस्तार, बोइंग और एयरबस का होगा संचालन…

    MP कैबिनेट: उज्जैन में 590 करोड़ से होगा हवाई पट्टी का विस्तार, बोइंग और एयरबस का होगा संचालन…


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने उज्जैन हवाई पट्टी (Ujjain airstrip) के विस्तार के लिए 590 करोड़ रुपये की लागत से 437 एकड़ भूमि के अधिग्रहण को मंजूरी दे दी है। उड़ान योजना के तहत यहां बोइंग और एयरबस (Boeing and Airbus.) जैसे बड़े विमानों के संचालन के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के साथ समझौता किया गया है। उज्जैन एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र है जहां प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) स्थित है। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2,923 करोड़ रुपये के 22 विकास कार्यों को मंजूरी दी है जिन्हें दिवाली 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

    उज्जैन हवाई पट्टी का होगा विकास
    एक अधिकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत उज्जैन हवाई पट्टी के विकास के लिए राज्य सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बीच समझौता हुआ है ताकि यहां बोइंग और एयरबस 320 जैसे बड़े विमानों का संचालन हो सके। सरकारी हवाई पट्टी के विकास और विस्तार के लिए आवश्यक समझौते और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हो चुके हैं।


    437.5 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को मंजूरी

    अधिकारी ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने इस परियोजना के लिए 437.5 एकड़ जमीन के अधिग्रहण को मंजूरी दी है। इसके लिए 590 करोड़ रुपये की रकम मंजूर की गई है।उज्जैन एक धार्मिक नगरी है। महाकालेश्वर मंदिर की वजह से यह पर्यटन के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। महाकालेश्वर मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। उज्जैन में सांदीपनी आश्रम भी है।


    महाकुंभ के कामों को पूरा करने के लिए तय की डेडलाइन

    अधिकारी ने बताया कि उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होता है जहां दूर-दूर से बहुत से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। उज्जैन सेवा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ता हुआ शहर है इसलिए यहां की हवाई पट्टी को सुधारना बहुत जरूरी है। सिंहस्थ मेले के लिए बनी कैबिनेट कमेटी ने तय किया है कि साल 2028 के महाकुंभ से जुड़े सभी कामों को दिवाली 2027 तक पूरा कर लिया जाए।


    9 अप्रैल से गेहूं की खरीद

    कैबिनेट ने शिक्षा, खेती, सिंचाई, प्रशासन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाली योजनाओं के लिए 16,720 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। साथ ही कैबिनेट ने किसानों के हित में एक बड़ा फैसला लेते हुए गेहूं की खरीद 10 अप्रैल के बजाय 9 अप्रैल से ही शुरू करने की मंजूरी दे दी है।


    विकास कार्यों का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट

    वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कैबिनेट समिति की 5वीं बैठक में कहा कि बुनियादी ढांचे के सभी काम अच्छी क्वालिटी के साथ तय समय पर पूरे होने चाहिए। समिति ने 2,923.84 करोड़ रुपये के 22 कामों को मंजूरी दी। सीएम मोहन यादव ने निर्देश दिया कि सिंहस्थ 2028 के कामों का थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाए ताकि काम की गुणवत्ता पक्की हो सके।


    100 किलोमीटर के दायरे में होगे काम

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में बन रहे भवनों का निर्माण ऐसा हो कि वे बाद में भी वार्षिक कार्यक्रमों के काम आ सकें। उन्होंने निर्देश दिया कि महाकाल मंदिर और अन्य तीर्थों तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़कें बनाई जाएं। मुख्यमंत्री ने दूर से आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए उज्जैन के 100 किलोमीटर के दायरे में होमस्टे, पार्किंग और जन-सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने क्षिप्रा नदी पर पैदल चलने वालों के लिए एक अलग पुल बनाने का भी आदेश दिया।