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  • कच्चे तेल की खोज….. समुद्र मंथन योजना पर 84084 करोड़ खर्च करेगा भारत

    कच्चे तेल की खोज….. समुद्र मंथन योजना पर 84084 करोड़ खर्च करेगा भारत


    नई दिल्‍ली।
    भारत (India) एनर्जी निर्भरता (Energy Dependence) को कम करने के लिए कई बड़े कदम उठा रहा है. अब भारत ने समुद्र से कच्‍चे तेल (Crude Oil) को निकालने के लिए एक योजना शुरू किया है. इस योजना के तहत समुद्र के नीचे अधिक तेल और प्राकृतिक गैस की खोज की जाएगी. यह एक लॉन्‍गटर्म स्‍कीम है. इस प्रोग्राम का नाम ‘समुद्र मंथन’ रखा गया है.

    नेशनल आफसोर एक्‍सप्‍लोरेशन योजना (समुद्र मंथन) के तहत 84,084 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है. यह खर्च वित्त वर्ष 2030-31 तक चलेगा, जिसका लक्ष्य गहरे जल क्षेत्रों में घरेलू तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है. समुद्र में उन जगहों पर तेल और गैस की खोज की जाएगी, जहां पर विशाल संसाधन मौजूद हैं और अभी तक किसी ने खोज नहीं की है।

    सरकार के अनुसार, यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस नजरिए को दर्शाती है, जिसे उन्होंने पहली बार 2025 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में चर्चा की थी, जिसमें भारत की ऊर्जा क्षमता को उजागर करने के लिए आधुनिक युग के समुद्र मंथन का संचालन करने की बात कही गई थी।

    यह कार्यक्रम ऐसे समय में शुरू किया गया है जब भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88-89% और प्राकृतिक गैस का लगभग आधा हिस्सा आयात करता है. यानी देश की ऊर्जा की बढ़ती मांग विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर है और जियो-पॉलिटिक तनाव के कारण भारत के लिए एनर्जी सप्‍लाई प्रभावित हुई है।


    इस योजना के तहत क्‍या होगा?

    भारत में कई आफशोर सेमीडेंट्र्री बेसिन हैं, जिनमें तेल और प्राकृतिक गैस मौजूद हो सकती है, लेकिन इनमें से कई अभी भी बड़े पैमाने पर अनछुए हैं क्योंकि वहां से तेल निकालना कठिन और महंगा है. इस योजना के तहत, सरकार बड़े पैमाने पर सर्वे, भूवैज्ञानिक अध्ययन, ड्रिलिंग और बुनियादी ढांचे के विकास जैसे प्रमुख प्रारंभिक चरण के कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराएगी।

    इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले भूवैज्ञानिक डेटा का उत्पादन करना है जो आशाजनक हाइड्रोकार्बन संसाधनों की पहचान कर सके और तेल-गैस निकालने में मदद कर सके. भारत के इस कदम से घरेलू स्‍तर पर तेल और गैस में बड़ा निवेश आ सकता है. साथ ही भारत का एनर्जी क्षमता मजबूत हो सकती है।


    समुद्र मंथन आखिर करेगा क्या?

    इस योजना के तहत आधुनिक टेक्‍नोलॉजी का उपयोग करते हुए उन जगहों की पहचानल की जाएगी, जहां पर तेल और गैस के होने की संभावना है. इसके बाद आशाजनक गहरे पानी और अति-गहरे पानी के क्षेत्रों में ड्रिलिंग की जाएगी. इस योजना के तहत सीमावर्ती जगहों में वैज्ञानिक ड्रिलिंग, सामान्य उत्पादन और निकासी, तेल और गैस विनिर्माण और सेवा क्षेत्र, आधुनिक टेक, डिजिटल प्रोगाम मैनेजमेंट और क्षमता निर्माण भी शामिल हैं।

    इससे क्‍या लाभ हो सकता है?
    सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से समय के साथ तेल और गैस भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक तेल के बराबर मात्रा जुड़ जाएगी. हालांकि व्यावसायिक उत्पादन में अभी कई साल लगेंगे, लेकिन सफल खोजों से भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, लॉन्‍गटर्म ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है, निवेश आकर्षित हो सकता है, रोजगार पैदा हो सकते हैं और देश की ऊर्जा क्षमताओं को बढ़ावा मिल सकता है।

  • तेल-गैस की खोज के लिए 80,000 करोड़ का पैकेज… मोदी सरकार कर रही समुद्र मंथन की तैयारी….

    तेल-गैस की खोज के लिए 80,000 करोड़ का पैकेज… मोदी सरकार कर रही समुद्र मंथन की तैयारी….


    नई दिल्ली।
    ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-America War) से उपजे तेल और गैस संकट से भारत (India) ने सबक लिया है। मोदी सरकार (Modi government) तेल-गैस की खोज के लिए अब ‘समुद्र मंथन’ की तैयारी कर रही है। इसके तहत भारत सरकार का पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय डीपवॉटर यानी गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देने के लिए 80,000 करोड़ रुपये का एक विशेष प्रोत्साहन पैकेज तैयार कर रहा है। इस पैकेज के तहत विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने के लिए खोजी कुओं की ड्रिलिंग लागत का आधा हिस्सा सरकार वहन करेगी।

    यह पहल ‘National Deepwater Exploration Mission’ यानी ‘समुद्र मंथन’ कार्यक्रम का हिस्सा है। खास बात यह है कि यह योजना पिछले दशक में की गई अन्य सुधारों से कहीं आगे जाती है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर एक्प्लोरेशन लागत की फाइनेंसिंग की जाएगी। पिछली नीतियां वैश्विक तेल कंपनियों से बड़ा निवेश नहीं जुटा पाई थीं।

    भारत ओपन एकरेज लाइसेंसिंग कार्यक्रम के तहत 18 डीपवॉटर और अल्ट्रा-डीपवॉटर ब्लॉकों की नीलामी भी कर रहा है। बोली लगाने की आखिरी तारीख 17 सितंबर तक बढ़ा दी गई है, और सरकार को उम्मीद है कि तब तक प्रोत्साहन पैकेज को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।


    कैसे काम करेगी योजना?

    प्रस्ताव के अनुसार, सरकार डीपवॉटर खोजी कुओं की ड्रिलिंग लागत का 50 प्रतिशत तक रिइम्बर्समेंट करेगी। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी अन्य मंत्रालयों के साथ चर्चा के दौर में है और कैबिनेट के सामने पेश किए जाने से पहले इसमें बदलाव संभव है।

    हर कुएं के लिए वित्तीय सहायता की एक सीमा तय की जाएगी, ताकि लागत बढ़ने पर नियंत्रण रखा जा सके। सरकार 3D भूकंपीय सर्वेक्षणों के लिए भी आंशिक वित्तपोषण कर सकती है। इस सहायता का मुख्य उद्देश्य एक्स्प्लोरिंग के रिस्क को कम करना और ऐसी वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करना है, जिनके पास डीपवॉटर की विशेषज्ञता और उन्नत तकनीकें मौजूद हैं।


    इतनी अधिक लागत क्यों?

    उच्च लागत और भारत में खोज की मामूली सफलता दर लंबे समय से विदेशी कंपनियों को दूर रखती रही है। भूवैज्ञानिक जटिलताओं के आधार पर एक सिंगल डीपवॉटर कुएं की ड्रिलिंग में 1,000 से 1,200 करोड़ रुपये तक खर्च आ सकता है, जबकि अल्ट्रा-डीपवॉटर कुएं की लागत इससे कुछ सौ करोड़ अधिक होती है।


    किन कंपनियों को मिलेगा लाभ?

    ये प्रोत्साहन सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की कंपनियों के लिए उपलब्ध होंगे। ओएनजीसी ने शनिवार को ‘समुद्र मंथन’ कार्यक्रम के तहत अपना पहला डीपवॉटर खोजी कुआं खोदना शुरू कर दिया है, जो इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


    विदेशी कंपनियां क्यों नहीं आ पाईं?

    भारत मौजूदा व्यवस्था में, कंपनियों को ब्लॉक मिलने के बाद न्यूनतम कार्य कार्यक्रम पूरा करना होता है, जिसमें भूकंपीय सर्वेक्षण और खोजी कुएं शामिल होते हैं। अगर भूकंपीय आंकड़े कमर्शियल एक्सप्लोरेशन की कम संभावना दिखाते हैं, तो कंपनियां अक्सर ड्रिलिंग नहीं करना चुनती हैं। कई बार वे जोखिम भरे कुएं में सैकड़ों करोड़ निवेश करने के बजाय ब्लॉक वापस कर देती हैं, क्योंकि नियमों का पालन न करने पर दंड का प्रावधान भी है।


    जोखिम कम करने की कोशिश

    यह प्रोत्साहन योजना पुरानी व्यवस्था से बड़ा बदलाव है, क्योंकि इसमें सरकार सीधे तौर पर खोज के जोखिम को कम करने में मदद करेगी। इसके अलावा, सरकार अन्वेषणकर्ताओं के लिए उपलब्ध भूवैज्ञानिक डेटा की गुणवत्ता में भी सुधार कर रही है। इसके लिए ऑफशोर 2D भूकंपीय डेटा अधिग्रहण में भारी निवेश किया गया है और अब पुराने डेटासेट को उन्नत तकनीकों से दोबारा प्रोसेस करने के लिए निजी कंपनियों को लाने की योजना है।