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  • भारत-ओमान व्यापार समझौते से निर्यात में बड़ा उछाल, 50% बढ़ोतरी की उम्मीद

    भारत-ओमान व्यापार समझौते से निर्यात में बड़ा उछाल, 50% बढ़ोतरी की उम्मीद


    नई दिल्ली। भारत और ओमान के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) सोमवार से लागू हो गया है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में तेज़ी आने की उम्मीद है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत के निर्यात को बढ़ावा देना और द्विपक्षीय व्यापार को नए स्तर पर ले जाना है।

    सरकारी अनुमान के अनुसार, इस समझौते के लागू होने के बाद भारत का ओमान को वस्तु निर्यात अगले तीन वर्षों में लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। वर्तमान में भारत का ओमान को निर्यात करीब 4.06 अरब डॉलर का है, जिसे बढ़ाकर 6 अरब डॉलर तक पहुंचाने और मध्य अवधि में 10 अरब डॉलर का लक्ष्य रखा गया है।

    समझौते के तहत ओमान ने भारत को अपनी 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शून्य शुल्क (Zero Duty) की सुविधा दी है। इसका लाभ भारत के लगभग 99.38 प्रतिशत निर्यात को मिलेगा। इससे जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, चमड़ा, जूता उद्योग, खेल सामग्री, प्लास्टिक, फर्नीचर, इंजीनियरिंग उत्पाद, फार्मा, मेडिकल डिवाइस और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

    वहीं भारत ने भी ओमान के लिए 77.79 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर शुल्क में रियायत दी है, जो मूल्य के हिसाब से ओमान के भारत को होने वाले आयात का लगभग 94.81 प्रतिशत हिस्सा कवर करता है। हालांकि, भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों जैसे कृषि उत्पाद, डेयरी, चाय, कॉफी, रबर, तंबाकू, सोना-चांदी और कुछ श्रम-प्रधान उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते से भारत के सेवा क्षेत्र (Service Sector) को भी बड़ा लाभ मिल सकता है, क्योंकि ओमान का सेवा आयात लगभग 12.52 अरब डॉलर का है, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।

    भारत और ओमान ने इस समझौते पर पिछले वर्ष दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मस्कट यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए थे। इसके अलावा भारत हाल के वर्षों में ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ भी व्यापार समझौतों को आगे बढ़ा चुका है।

  • भारत के इंजीनियरिंग निर्यात ने पकड़ी रफ्तार, अप्रैल में 10.4 अरब डॉलर का कारोबार

    भारत के इंजीनियरिंग निर्यात ने पकड़ी रफ्तार, अप्रैल में 10.4 अरब डॉलर का कारोबार


    नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में लॉजिस्टिक चुनौतियों के बावजूद भारत के इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात ने वित्त वर्ष 2026-27 की मजबूत शुरुआत की है। अप्रैल 2026 में देश का इंजीनियरिंग निर्यात सालाना आधार पर करीब 9 प्रतिशत बढ़कर 10.35 अरब डॉलर पहुंच गया।

    इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) इंडिया द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष अप्रैल में यह निर्यात 9.52 अरब डॉलर था। इस बार कई प्रमुख सेक्टर्स में मजबूत मांग और बेहतर प्रदर्शन के कारण निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    डेटा के मुताबिक एल्युमीनियम और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि तांबा और उससे संबंधित उत्पादों में 80 प्रतिशत का बड़ा उछाल दर्ज किया गया। इसके अलावा इलेक्ट्रिकल मशीनरी और उपकरणों के निर्यात में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

    ऑटोमोबाइल सेक्टर ने भी निर्यात वृद्धि में अहम योगदान दिया। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के निर्यात में 36 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि ऑटो कंपोनेंट्स और पार्ट्स के निर्यात में 7.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

    EEPC इंडिया के अनुसार, इंजीनियरिंग गुड्स के कुल 34 पैनलों में से 28 ने अप्रैल महीने में सकारात्मक निर्यात वृद्धि दर्ज की, जो सेक्टर की व्यापक मजबूती को दर्शाता है।

    ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि मध्य पूर्व में जारी तनाव और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बावजूद अधिकांश क्षेत्रों और बाजारों में भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत-ओमान व्यापार समझौते के कारण ओमान को निर्यात में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

    हालांकि पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका (WANA) क्षेत्र में संघर्ष के कारण निर्यात पर दबाव बना हुआ है। वहीं आसियान देशों में भी मांग कमजोर रहने और ऑटोमोबाइल शिपमेंट में गिरावट के चलते निर्यात अपेक्षाकृत धीमा रहा।

    अप्रैल में अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के प्रमुख बाजार रहे। वहीं चीन को होने वाला निर्यात 81.7 प्रतिशत बढ़कर 301 मिलियन डॉलर से अधिक पहुंच गया।

    क्षेत्रीय स्तर पर उत्तरी अमेरिका में 7.1 प्रतिशत और यूरोपीय संघ में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि यूएई, सिंगापुर और सऊदी अरब को होने वाले निर्यात में गिरावट देखने को मिली।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में देश के कुल व्यापारिक निर्यात में इंजीनियरिंग गुड्स की हिस्सेदारी 23.8 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 24.9 प्रतिशत थी।

  • भारत न्यूजीलैंड एफटीए से खुलेगा व्यापार .का नया दौर निर्यात निवेश और रोजगार को मिलेगा बड़ा बूस्ट

    भारत न्यूजीलैंड एफटीए से खुलेगा व्यापार .का नया दौर निर्यात निवेश और रोजगार को मिलेगा बड़ा बूस्ट


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा है कि यह समझौता आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा उन्होंने स्पष्ट किया कि यह करार केवल वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि इससे कई नए क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं खुलेंगी

    मंत्री के अनुसार इस एफटीए के तहत भारत से न्यूजीलैंड निर्यात होने वाले अधिकांश उत्पादों पर अब शून्य शुल्क लागू होगा इससे भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और निर्यात में तेजी आएगी खासतौर पर छोटे और मध्यम उद्यमों को इससे बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है

    पीयूष गोयल ने बताया कि इस समझौते के जरिए न्यूजीलैंड का बाजार भारत के लिए करीब 140 सेवा क्षेत्रों में खुल गया है इसमें शिक्षा खेल संस्कृति कृषि उत्पादकता और तकनीकी सहयोग जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर शामिल हैं उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बौद्धिक संपदा और पारंपरिक चिकित्सा विशेष रूप से आयुष से जुड़े क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा

    फार्मास्यूटिकल सेक्टर को लेकर उन्होंने इसे बेहद अहम करार दिया मंत्री ने बताया कि यदि भारत में बनी कोई दवा पहले से अमेरिका या यूरोप जैसे विकसित देशों में स्वीकृत है तो न्यूजीलैंड में उसे तेज प्रक्रिया के जरिए मंजूरी मिल सकेगी इससे भारतीय दवा कंपनियों के लिए वैश्विक बाजार में प्रवेश आसान होगा और उनकी पहुंच मजबूत होगी

    निवेश के क्षेत्र में भी इस समझौते को गेम चेंजर माना जा रहा है मंत्री के अनुसार पिछले 25 वर्षों में न्यूजीलैंड ने भारत में करीब 70 मिलियन डॉलर का निवेश किया है लेकिन अब अगले 15 वर्षों में लगभग 20 बिलियन डॉलर का निवेश करने की योजना बनाई जा रही है यह निवेश देश में उद्योगों के विस्तार और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

    उन्होंने यह भी बताया कि इस समझौते को जल्द ही न्यूजीलैंड की संसद में पेश किया जाएगा जहां इसे सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों का समर्थन मिल रहा है ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि इसे मंजूरी मिलने के बाद इस वर्ष के अंत तक लागू कर दिया जाएगा

    पीयूष गोयल ने कहा कि यह एफटीए भारत के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा और अमृत काल के दौरान देश की आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान करेगा उन्होंने भरोसा जताया कि यह समझौता दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करेगा और व्यापारिक साझेदारी को नए आयाम देगा

  • भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौते का असर: निर्यात दोगुने से अधिक, रिश्ते मजबूत

    भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार समझौते का असर: निर्यात दोगुने से अधिक, रिश्ते मजबूत


    नई दिल्ली भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक सहयोग को नई सूची बनाने वाला भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौता (ईसीटीए) अब अपने प्रभाव के चार साल पूरे कर चुका है। 2 अप्रैल 2022 को इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए, दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलावों का गवाह बनना पड़ा। बिजनेस इयर्स में एक्टर्स इंडियन एक्टर्स को नई रेटिंग दी गई है और स्मैश ट्रेड को मजबूत आधार प्रदान किया गया है।

    एकल में रिकॉर्ड पैकेज, डबल हुआ पात्र
    भारत के ऑस्ट्रेलिया में ईसीईटी लागू होने के बाद तेजी से बढ़ोतरी हुई है। जहां वित्त वर्ष 2020-21 में यह करीब 4 अरब डॉलर था, वहीं 2024-25 तक यह उछाल 8.5 अरब डॉलर से भी अधिक हो गया। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि भारतीय खिलाड़ियों ने ऑस्ट्रेलियाई बाजार में बेहतर पहुंच और लोकप्रियता हासिल की है। वहीं, प्रोटोटाइप आधार पर भी करीब 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस आंकड़े की सफलता को दर्शाता है।

    कुल व्यापार में दस्तावेज़, आंकड़े दे रहे कागजात
    दोनों देशों के बीच कुल व्यापार भी लगातार मजबूत हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 में सकल व्यापार 24.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि 2025-26 (फरवरी तक) में यह 19.3 अरब डॉलर दर्ज किया गया। यह संकेत देता है कि आने वाले समय में यह पात्र और वृद्धि हो सकती है। इस प्लास्टिक में व्यावसायिक उद्यमों के लिए नए अवसरों के द्वार नीचे दिए गए हैं।

    तिपाई में राहत, बाज़ार तक आसान पहुँच
    इस अधिनियम के तहत भारत ने अपनी 70.3 प्रतिशत टैरिफ योग्यता पर प्राथमिकता के आधार पर बाजार तक पहुंच बनाई है, जो कुल व्यापार मूल्य के 90.6 प्रतिशत को कवर करती है। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया ने भारत से आने वाले 100 प्रतिशत व्यवसाय को प्राथमिकता बाजार तक पहुंच प्रदान की है। खास बात यह है कि 98.3 प्रतिशत वर्ग पर लागू होने वाली बात पर ही शुल्क समाप्त कर दिया गया है, जबकि बाकी को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा रहा है। 1 जनवरी 2026 को भारतीय कम्युनिस्टों ने ऑस्ट्रेलियाई बाजार के लिए पूरी तरह से जीरो-ड्यूटी का भुगतान किया है।

    सेक्टरवार मिला बड़ा फायदा
    ईसीटीए का प्रभाव विभिन्न सेक्टरों में स्पष्ट रूप से देखा गया है। विशेष रूप से टेक्सटाइल, मेडिसिनस्यूटिकल, केमिकल और कृषि बाजार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं, भारत को बेस मेटल, कच्चा सिक्का, सेंट्रल, केमिकल और दाल जैसे जरूरी कच्चा माल की आसान मसाला मिला है। यह समेकित व्यापार ढाँचा देश के विनिर्माण क्षेत्र को एक स्थान देता है और क्रिस्टोफर चेन को स्थिर बनाता है।

    बायोलॉजिकल ऑर्थोडॉक्स में नया पहला, बढ़ा हुआ भरोसा
    दोनों देशों के सहयोग को और मजबूत करने के लिए 24 सितंबर 2025 को बायोलॉजिकल डॉक्युमेंट्स के लिए धर्मशास्त्र व्यवस्था (मैथियोसाइट्स) पर हस्ताक्षर किए गए। इस सबसे पहले सर्ट दुकान में दुकान लगाई गई है और लागत में समय की बचत हुई है। इसी तरह के प्रयोगशाला के व्यापार में तेजी आने की उम्मीद है और देशों के बीच विश्वास भी बढ़ा है।

    व्यापार समझौता बना मजबूत आधार
    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि ईसीटी ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक मूल्यांकन को नई दिशा दी है। इससे न केवल बड़ी कंपनी बल्कि एमएसएमई, क्रैस्टर और स्टार्स को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलता है। आने वाले वर्षों में यह समझौता और अधिक अवसर पैदा हो सकता है।