नई दिल्ली में आयोजित 17वें टॉय बिज इंटरनेशनल बी2बी एक्सपो 2026 को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक खिलौना बाजार का आकार लगभग 120 अरब डॉलर है, जबकि इसमें भारत की हिस्सेदारी अभी भी बेहद सीमित है। उनका कहना था कि भारतीय उद्योग के सामने निर्यात बढ़ाने और दुनिया के प्रमुख बाजारों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करने का बड़ा अवसर मौजूद है।
उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में भारतीय खिलौनों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन इसे अंतिम उपलब्धि नहीं माना जाना चाहिए। उद्योग को नई तकनीक, बेहतर गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करनी होगी, ताकि भारत विश्व के प्रमुख खिलौना निर्यातक देशों में अपनी जगह बना सके।
पीयूष गोयल ने उद्योग जगत से हाल के वर्षों में भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों का अधिकतम लाभ उठाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि इन समझौतों के माध्यम से भारतीय कंपनियों के लिए कई विकसित देशों के बाजारों तक पहुंच आसान हुई है। उद्योग को विभिन्न देशों में व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भेजकर स्थानीय कंपनियों, सुपरमार्केट श्रृंखलाओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ नए व्यावसायिक संबंध विकसित करने चाहिए।
उन्होंने आधुनिक उत्पादन तकनीकों और अत्याधुनिक मशीनरी को अपनाने पर भी विशेष जोर दिया। उनके अनुसार, उत्पादों की गुणवत्ता ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सबसे बड़ी ताकत होती है। इसी उद्देश्य से उन्होंने सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का सुझाव दिया, जहां उत्पाद परीक्षण, डिजाइन विकास, अनुसंधान और नवाचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर को लेकर उद्योग में किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था घरेलू उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप बनाए रखने के लिए लागू की गई है। सरकार इसे जारी रखेगी और गुणवत्ता मानकों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। साथ ही अनुचित डंपिंग के खिलाफ भी आवश्यक कदम उठाए जाते रहेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत और कई देशों के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है। इन समझौतों के लागू होने से भारतीय खिलौना उद्योग को नए निर्यात बाजार उपलब्ध होंगे और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का दायरा और विस्तृत होगा। उनका मानना है कि यदि उद्योग गुणवत्ता, नवाचार और वैश्विक विपणन पर समान रूप से ध्यान दे तो भारत आने वाले वर्षों में विश्व के खिलौना बाजार में कहीं अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता है।




