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  • लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे 18 दिन में 84 जगह धंसा, मरम्मत शुरू; गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर उठे सवाल

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे 18 दिन में 84 जगह धंसा, मरम्मत शुरू; गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर उठे सवाल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लगभग 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर सड़क धंसने और दरारें आने की घटनाएं सामने आने के बाद मरम्मत कार्य लगातार जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुरुआती 18 दिनों के भीतर कुल 84 स्थानों पर मरम्मत करनी पड़ी, जिसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

    बताया जा रहा है कि एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में सड़क की सतह बैठने, दरारें आने और पैचवर्क की आवश्यकता पड़ने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। कई स्थानों पर मरम्मत के बाद भी सड़क दोबारा प्रभावित होने की जानकारी मिली है। कुछ हिस्सों में जलभराव और सड़क किनारे बने शोल्डर के धंसने की भी शिकायतें सामने आई हैं। इसके चलते संबंधित एजेंसियां लगातार निगरानी और सुधार कार्य में लगी हुई हैं।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने निर्माण करने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने कंपनी को गैर-प्रदर्शन श्रेणी में रखते हुए उसके कुछ अधिकारियों को परियोजना से हटाने का निर्णय लिया है। साथ ही परियोजना की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने का फैसला भी लिया गया है। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम निर्माण कार्य, उपयोग की गई सामग्री और तकनीकी मानकों का परीक्षण करेगी।

    सड़क निर्माण क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी एक्सप्रेसवे पर इतने कम समय में बार-बार सड़क धंसने जैसी स्थिति सामने आती है तो निर्माण प्रक्रिया, मिट्टी की तैयारी, जल निकासी व्यवस्था और आधार परत की गुणवत्ता की गहन जांच आवश्यक हो जाती है। उनका कहना है कि यदि मूल संरचना में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है तो केवल ऊपरी सतह की मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी और प्रभावित हिस्सों का पुनर्निर्माण करना पड़ सकता है।

    यह एक्सप्रेसवे राज्य की प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल है। इसकी कुल लागत लगभग 4,700 करोड़ रुपये बताई गई है, जिससे यह प्रदेश की सबसे महंगी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में गिना जा रहा है। इस मार्ग के शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा समय कम करने तथा यातायात को सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि शुरुआती दिनों में सामने आई तकनीकी समस्याओं ने परियोजना की गुणवत्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    परियोजना का निर्माण एक निजी कंपनी द्वारा किया गया है। इस कंपनी को लेकर पहले भी विभिन्न मामलों में चर्चा होती रही है। हालांकि मौजूदा मामले में जांच का मुख्य केंद्र सड़क निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पालन है। संबंधित एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि सड़क धंसने के पीछे निर्माण संबंधी कमी, मौसम, जल निकासी व्यवस्था या अन्य कोई तकनीकी कारण जिम्मेदार है।

    फिलहाल एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में मरम्मत कार्य जारी है और कुछ स्थानों पर यातायात को डायवर्जन के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो और यात्रियों को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा का लाभ मिल सके।

  • लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सियासत तेज, पंखे से सड़क सुखाने के वीडियो पर अखिलेश का तंज

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सियासत तेज, पंखे से सड़क सुखाने के वीडियो पर अखिलेश का तंज


    लखनऊ।
    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मरम्मत के दौरान सड़क को पंखों से सुखाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधा है। वहीं, सड़क धंसने की घटनाओं के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले की जांच आईआईटी खड़गपुर को सौंपी गई है।

    अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर वायरल वीडियो साझा करते हुए तंज कसा, “भाजपाई तरक्की की नई हवा”। उन्होंने कहा कि जिस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कुछ ही दिन पहले हुआ हो, उसकी बार-बार मरम्मत होना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी पूछा कि जब सड़क उद्घाटन के दो-तीन सप्ताह के भीतर ही कई बार मरम्मत मांग रही है, तो उस पर तेज रफ्तार से सफर करने का जोखिम आखिर कौन उठाएगा।

    20 दिन में कई जगह सड़क धंसने के मामले
    करीब 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को किया गया था। लगभग 4,200 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के बाद करीब 20 दिनों के भीतर कई स्थानों पर सड़क धंसने और सतह खिसकने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।

    NHAI ने शुरू की सख्त कार्रवाई
    लगातार शिकायतों के बाद NHAI ने निर्माण एजेंसी PNC Infratech के खिलाफ नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को हटाकर उनके मूल विभाग भेज दिया गया है। इसके अलावा पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को आरोपपत्र जारी किया गया है।

    साथ ही प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक गुप्ता, रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार और स्वतंत्र अभियंता टीम के प्रमुख सुरेंद्र कुमार को दो वर्षों के लिए NHAI और सड़क परिवहन मंत्रालय की परियोजनाओं से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

    IIT खड़गपुर करेगी तकनीकी जांच
    NHAI का कहना है कि लगातार बारिश के कारण सड़क के नीचे की मिट्टी तक पानी पहुंचने से कुछ हिस्सों में स्लिपेज की स्थिति बनी है। हालांकि वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों की समिति गठित की गई है। इसके अलावा पूरे एक्सप्रेसवे का लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक से परीक्षण कराया जा रहा है।

    मरम्मत तक नहीं लगेगा टोल
    प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित हिस्सों की मरम्मत पर आने वाला करीब 3 करोड़ रुपये का खर्च निर्माण कंपनी ही वहन करेगी। मरम्मत पूरी होने तक एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली भी स्थगित रहेगी और इस दौरान यात्रियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। टोल से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई भी निर्माण एजेंसी से ही की जाएगी।

  • चार राज्यों को जोड़ने वाला हाईस्पीड कॉरिडोर तैयार, बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर एक्सप्रेसवे से घटेगा आधा सफर समय

    चार राज्यों को जोड़ने वाला हाईस्पीड कॉरिडोर तैयार, बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर एक्सप्रेसवे से घटेगा आधा सफर समय

    नई दिल्ली । भारत में बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के बीच एक और महत्वाकांक्षी परियोजना सुर्खियों में है, जो देश के दक्षिण और मध्य हिस्सों की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से विकसित किया जा रहा बेंगलुरु–हैदराबाद–नागपुर हाईस्पीड एक्सप्रेसवे एक ऐसा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर है, जो न केवल यात्रा को तेज बनाएगा बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी नई दिशा देगा।

    यह लगभग 1100 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे चार प्रमुख राज्यों से होकर गुजरेगा, जिनमें कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं। इस मार्ग में आने वाले प्रमुख शहरों में नागपुर, हिंगनघाट, आदिलाबाद, निजामाबाद, हैदराबाद, कुरनूल, अनंतपुर और चिक्काबल्लापुर जैसे महत्वपूर्ण केंद्र शामिल हैं। यह कॉरिडोर इन क्षेत्रों को सीधे एक हाईस्पीड नेटवर्क से जोड़ देगा, जिससे व्यापार और आवागमन दोनों में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिलेगा।

    वर्तमान समय में महाराष्ट्र के नागपुर से कर्नाटक के बेंगलुरु तक की यात्रा में लगभग 23 से 24 घंटे का समय लग जाता है। लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद यही सफर घटकर लगभग 11 से 12 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इसे 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुरक्षित और तेज हो जाएगी।

    इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 35 हजार करोड़ रुपये है। शुरुआत में इसे 6-लेन एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसे भविष्य में बढ़ते यातायात को देखते हुए 8 या 12 लेन तक विस्तारित करने की योजना भी शामिल है। यह एक एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे होगा, जिसमें प्रवेश और निकास के लिए सीमित स्थान निर्धारित किए जाएंगे, जिससे ट्रैफिक फ्लो सुचारू और नियंत्रित रहेगा।

    इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता इसके आसपास विकसित होने वाली औद्योगिक संरचना है। इसके किनारे विशेष आर्थिक क्षेत्र और औद्योगिक पार्क विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और रियल एस्टेट तथा व्यापारिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

    हाल ही की प्रगति के अनुसार, परियोजना के कई हिस्सों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर काम तेजी से चल रहा है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। हालांकि पर्यावरणीय मंजूरियों के कारण कुछ चरणों में देरी देखने को मिली, लेकिन अब परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    यह हाईस्पीड एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि एक व्यापक विकास मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और आर्थिक ढांचे को एक नई गति प्रदान करेगा।