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  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज 6 देशों की यात्रा पर होंगे रवाना….देखें पूरा शेड्यूल

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज 6 देशों की यात्रा पर होंगे रवाना….देखें पूरा शेड्यूल


    नई दिल्ली।
    विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) रविवार से छह देशों के दौरे (Six-Nation Tour) पर रवाना होंगे। वह कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, बेल्जियम और अमेरिका का दौरा करेंगे।

    विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, यह यात्रा 5 जुलाई से 10 जुलाई तक खाड़ी देशों की होगी। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं।

    खाड़ी देशों की यात्रा पूरी करने के बाद विदेश मंत्री न्यूयॉर्क जाएंगे। वहां वह 13 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत के 2028-29 कार्यकाल के लिए आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद यात्रा के अंतिम चरण में वह ब्रसेल्स जाएंगे, जहां वह भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की तीसरी बैठक में शामिल होंगे।


    विदेश मंत्रालय ने क्या बताया जयशंकर का कार्यक्रम?

    विदेश मंत्री जयशंकर 5 जुलाई से 10 जुलाई तक कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। यात्रा के दौरान जयशंकर इन देशों के समकक्षों और शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है और साथ ही क्षेत्रीय घटनाक्रमों और साझा हितों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है।

    विदेश मंत्री 13 जुलाई को न्यूयॉर्क में भारत की यूएनएससी 2028-29 की आधिकारिक उम्मीदवारी की शुरुआत करेंगे। इसके बाद वह 14 और 15 जुलाई को ब्रसेल्स में होने वाली तीसरी भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद बैठक (भारत-ईयू टीटीसी) में शामिल होंगे और यूरोपीय संघ तथा बेल्जियम के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे।


    टीटीसी की शुरुआत कब हुई और इसका मकसद क्या है?

    मंत्रालय के अनुसार, टीटीसी की शुरुआत 2022 में हुई थी, जिसका मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर और साइबर सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग बढ़ाना है।

  • त्रिनिदाद संसद में जयशंकर का गर्मजोशी भरा स्वागत, स्पीकर की ‘फिसली जुबान’ से सदन में ठहाके

    त्रिनिदाद संसद में जयशंकर का गर्मजोशी भरा स्वागत, स्पीकर की ‘फिसली जुबान’ से सदन में ठहाके


    नई दिल्ली। पोर्ट ऑफ स्पेन, त्रिनिदाद एंड टोबैगो में आयोजित विशेष संसदीय सत्र के दौरान उस समय माहौल हल्का और दिलचस्प हो गया जब संसद के स्पीकर ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का स्वागत करते हुए उन्हें गलती से “त्रिनिदाद के विदेश मंत्री” कह दिया। अपनी भूल का एहसास होते ही उन्होंने तुरंत सुधार किया और “भारत के विदेश मंत्री” कहा, जिस पर सदन में मौजूद सांसदों और प्रतिनिधिमंडल में मुस्कुराहट फैल गई।

    सूत्रों के अनुसार, यह पल पूरी तरह औपचारिक कार्यक्रम के बीच अचानक सामने आया, जिससे माहौल कुछ समय के लिए बेहद सहज और अनौपचारिक हो गया।

    पीएम कमला प्रसाद बिसेसर ने भी लिया हल्के अंदाज में
    इस मौके पर त्रिनिदाद एंड टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर ने भी मुस्कुराते हुए टिप्पणी की और कहा कि स्पीकर से यह एक छोटी-सी चूक हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. जयशंकर को त्रिनिदाद से जुड़ा मानना अपने आप में स्वाभाविक है, क्योंकि दोनों देशों के रिश्ते ऐतिहासिक और गहरे हैं। उनकी यह प्रतिक्रिया सदन में मौजूद लोगों के बीच और भी मुस्कुराहट का कारण बनी।

    ‘मिनी इंडिया’ से गहरे जुड़े हैं रिश्ते
    त्रिनिदाद एंड टोबैगो को अक्सर “मिनी इंडिया” कहा जाता है, क्योंकि यहां की आबादी में बड़ी संख्या भारतीय मूल के लोगों की है।

    देश की कुल आबादी का लगभग 40% से अधिक हिस्सा भारतीय मूल का है

    करीब 5.5 लाख से ज्यादा भारतीय मूल के लोग यहां रहते हैं

    दोनों देशों के संबंध 19वीं सदी के प्रवासी इतिहास से जुड़े हैं

    औपनिवेशिक काल में बड़ी संख्या में भारतीय मजदूर यहां लाए गए थे, जिन्होंने बाद में देश के सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे को गहराई से प्रभावित किया।

    भारत-त्रिनिदाद सहयोग को नई दिशा
    अपने दौरे के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी विस्तार की बात कही—

    प्रमुख क्षेत्र

    डिजिटल पेमेंट (UPI): भारत की UPI प्रणाली अपनाने की दिशा में त्रिनिदाद अग्रणी कैरेबियन देश बन रहा है

    फार्मा सेक्टर: भारत की जेनेरिक दवाओं के आयात और सहयोग को बढ़ावा

    ऊर्जा क्षेत्र: रिफाइनिंग और निवेश में नए अवसर

    तकनीक व इंफ्रास्ट्रक्चर: द्विपक्षीय साझेदारी को विस्तार देने पर जोर



    क्यों अहम है यह दौरा
    विशेषज्ञों के अनुसार यह यात्रा सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है—

    कैरेबियन क्षेत्र में भारत की उपस्थिति मजबूत होगी

    प्रवासी भारतीय समुदाय के संबंध और प्रगाढ़ होंगे

    डिजिटल और ऊर्जा सहयोग को नई गति मिलेगी

    त्रिनिदाद संसद में हुआ यह हल्का-फुल्का वाकया भले ही एक जुबानी चूक था, लेकिन इसने भारत और त्रिनिदाद एंड टोबैगो के बीच गहरे, आत्मीय और ऐतिहासिक संबंधों को और अधिक जीवंत बना दिया। जयशंकर की यह यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।