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  • दिल्ली में शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भड़का बांग्लादेश, भारत के सामने जताई कड़ी नाराजगी और प्रत्यर्पण की मांग दोहराई

    दिल्ली में शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भड़का बांग्लादेश, भारत के सामने जताई कड़ी नाराजगी और प्रत्यर्पण की मांग दोहराई


    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच राजनीतिक तनाव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने हसीना को भारत में मीडिया के सामने खुलकर अपनी बात रखने का अवसर दिए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई है। ढाका ने आरोप लगाया कि हसीना और उनके सहयोगियों ने भारत की जमीन से बांग्लादेश और उसके लोगों के खिलाफ जहरीली बयानबाजी की। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस कार्यक्रम को लेकर उसने पहले ही भारत सरकार के सामने अपनी चिंता रखी थी, इसके बावजूद प्रेस कॉन्फ्रेंस होने दी गई।

    बांग्लादेश सरकार ने हसीना के बयानों को इतिहास की धारा को पलटने की नाकाम कोशिश करार दिया। ढाका का कहना है कि जिस समय बांग्लादेश में जुलाई क्रांति की दूसरी बरसी मनाई जा रही थी, उसी समय भारत से हसीना का मीडिया को संबोधित करना वहां के लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है। बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने इसे देश की संप्रभुता और जुलाई आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के प्रति अपमान बताया। सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की ओर से जुलाई-अगस्त 2024 की हिंसा और नागरिकों की मौत से जुड़े तथ्यों का भी हवाला दिया।

    ढाका ने हसीना और उनके सहयोगियों के बयानों को खारिज करते हुए कहा कि बांग्लादेश के लोग देश को दोबारा उस दौर में नहीं ले जाना चाहते, जिसे वह फासीवाद का अंधेरा दौर बताता है। बांग्लादेश सरकार ने यह भी कहा कि देश किसी दूसरे राष्ट्र का क्लाइंट स्टेट नहीं बनेगा। इस बयान से स्पष्ट है कि हसीना के राजनीतिक भविष्य और उनके भारत में रहने को लेकर ढाका का रुख अभी भी बेहद सख्त है।

    बांग्लादेश ने भारत के साथ संबंधों को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह भारत के साथ संप्रभु समानता, आपसी सम्मान और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप के आधार पर रचनात्मक संबंध चाहता है। हालांकि, इसी के साथ ढाका ने हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा फिर उठा दिया। बांग्लादेश ने कहा कि वर्ष 2013 में दोनों देशों के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते के तहत वह शेख हसीना को वापस भेजने की मांग कई बार कर चुका है, लेकिन भारत की ओर से उसकी मांग पर अभी तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

    बांग्लादेश सरकार के मुताबिक, हसीना को भारत में खुले तौर पर मीडिया से बातचीत का अवसर मिलना वहां के लोगों के लिए बेहद पीड़ादायक है। ढाका ने आशंका जताई कि इस तरह की घटनाएं भारत-बांग्लादेश संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। दूसरी ओर, भारत में मौजूद हसीना की सार्वजनिक गतिविधियों को लेकर बांग्लादेश की आपत्ति इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच उनके प्रत्यर्पण का मुद्दा अभी भी संवेदनशील बना हुआ है।

    शेख हसीना को लेकर बांग्लादेश का रुख आने वाले समय में भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। ढाका एक तरफ भारत के साथ बेहतर और सम्मानजनक संबंधों की बात कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ हसीना के प्रत्यर्पण और दिल्ली में उनकी सार्वजनिक मौजूदगी को लेकर लगातार दबाव बना रहा है। ऐसे में दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद राजनीतिक मतभेदों को एक बार फिर सामने ला दिया है।

  • ऑपरेशन त्रिशूल के तहत 7 सालों में भारत लाए गए 274 भगोड़े, 17 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त

    ऑपरेशन त्रिशूल के तहत 7 सालों में भारत लाए गए 274 भगोड़े, 17 हजार करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने विदेशों में छिपे भगोड़े अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे ऑपरेशन त्रिशूल के तहत बड़ी सफलता प्राप्त करने का दावा किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार बीते सात वर्षों में 36 विभिन्न देशों से कुल 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है। इन भगोड़ों में आतंकवाद, वित्तीय धोखाधड़ी, मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध, हत्या और पोक्सो जैसे अति गंभीर मामलों के आरोपी शामिल हैं।

    गृह मंत्रालय के अनुसार विदेशों में पहचान बदलकर रह रहे अपराधियों को खोजने के लिए डिजिटल फुटप्रिंट, सैटेलाइट इनपुट और जियो-लोकेशन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 70 भगोड़ों का प्रत्यर्पण कराया गया, जबकि वर्ष 2026 में जुलाई महीने तक 45 अन्य अपराधियों को भारत वापस लाने में सफलता मिली है।

    आर्थिक अपराधों पर लगाम लगाने के लिए चलाए गए इस अभियान के तहत धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये की अवैध संपत्तियां जब्त की गई हैं। इसके अलावा लगभग 18,762 करोड़ रुपये की राशि भी रिकवर की जा चुकी है। सरकार का मुख्य उद्देश्य अपराध से अर्जित अवैध कमाई को पूरी तरह से कुर्क कर अपराधियों के आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त करना है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपराधियों को घेरने के लिए इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की दर में भी अप्रत्याशित तेजी आई है। अकेले वर्ष 2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जबकि पिछले तीन सालों में यह संख्या 401 तक पहुंच गई है। वैश्विक पुलिस संस्थाओं के साथ बेहतर तालमेल के कारण भगोड़ों की गिरफ्तारी अब पहले से काफी सुगम हो गई है।

    अभियान को और अधिक धार देने के लिए जनवरी 2026 में एक विशेष खुफिया समन्वय समूह का गठन किया गया था, जो विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता वाले मामलों पर काम कर रहा है। इसके साथ ही देश में लागू नए और संशोधित आपराधिक कानूनों ने आरोपी की गैर-मौजूदगी में भी अदालती प्रक्रिया चलाकर न्याय सुनिश्चित करने का रास्ता साफ कर दिया है।

  • काजोल के 52वें जन्मदिन पर जानिए करियर के अनसुने किस्से, नेगेटिव रोल से रचा इतिहास और बनीं करण की लकी चार्म

    काजोल के 52वें जन्मदिन पर जानिए करियर के अनसुने किस्से, नेगेटिव रोल से रचा इतिहास और बनीं करण की लकी चार्म

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन त्रिशूल के तहत बड़ी सफलता का दावा किया है। सरकार के अनुसार पिछले सात वर्षों में 36 देशों से कुल 274 वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। इन अपराधियों में आतंकवाद, संगठित अपराध, आर्थिक अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में वांछित आरोपी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत कानूनी व्यवस्था के कारण प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हुई है।

    गृह मंत्रालय के अनुसार विदेशों में अलग-अलग पहचान के साथ छिपे अपराधियों का पता लगाने के लिए सैटेलाइट इनपुट, डिजिटल फुटप्रिंट, प्रोफाइल ट्रैकिंग और जियो-लोकेशन जैसी तकनीकों का व्यापक उपयोग किया गया। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप विभिन्न देशों की एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर कई बड़े अपराधियों को भारत लाया गया। सरकार ने बताया कि वर्ष 2025 में सबसे अधिक 70 भगोड़ों का प्रत्यर्पण हुआ, जबकि वर्ष 2026 में जुलाई तक 45 अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है।

    सरकार ने यह भी जानकारी दी कि धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत भगोड़े अपराधियों से जुड़ी 17,874 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गई हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 18,762 करोड़ रुपये की राशि भी वापस लाई गई है। अधिकारियों के अनुसार आर्थिक अपराधों से अर्जित अवैध संपत्ति पर कार्रवाई को इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है ताकि अपराध से अर्जित लाभ को समाप्त किया जा सके और कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो।

    इंटरपोल के सहयोग से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में भी उल्लेखनीय तेजी आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 401 नोटिस जारी हुए हैं, जिनमें वित्तीय अपराध, आतंकवाद, संगठित अपराध, हत्या, मादक पदार्थों की तस्करी, यौन अपराध और साइबर अपराध जैसे मामले प्रमुख रहे। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते सहयोग से भगोड़ों की तलाश और गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण मदद मिली है।

    जनवरी 2026 में खुफिया समन्वय को और मजबूत करने के उद्देश्य से एक विशेष समूह का गठन भी किया गया, जो विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने और प्राथमिकता वाले मामलों में कार्रवाई तेज करने का कार्य कर रहा है। सरकार के अनुसार जटिल मामलों में तकनीकी निगरानी और कूटनीतिक प्रयासों के संयोजन से प्रत्यर्पण प्रक्रिया को गति मिली है। इसी क्रम में कई चर्चित मामलों में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

    सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में लागू किए गए नए आपराधिक कानूनों और संशोधित कानूनी प्रावधानों ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाया है। अब कुछ मामलों में आरोपी की अनुपस्थिति में भी मुकदमा चलाने की व्यवस्था उपलब्ध है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित नहीं होती। केंद्र का दावा है कि आधुनिक तकनीक, वैश्विक सहयोग, खुफिया समन्वय और सख्त कानूनी ढांचे के माध्यम से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक मजबूत बनाया गया है तथा भविष्य में भी ऐसे अभियानों को प्राथमिकता के साथ जारी रखा जाएगा।

  • मियामी में एंड्रयू और ट्रिस्टन टेट गिरफ्तार, ब्रिटेन ने दुष्कर्म, मानव तस्करी और यौन अपराधों के नए आरोपों के साथ तेज की प्रत्यर्पण प्रक्रिया

    मियामी में एंड्रयू और ट्रिस्टन टेट गिरफ्तार, ब्रिटेन ने दुष्कर्म, मानव तस्करी और यौन अपराधों के नए आरोपों के साथ तेज की प्रत्यर्पण प्रक्रिया


    नई दिल्ली ।
    सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एंड्रयू टेट और उनके भाई ट्रिस्टन टेट एक बार फिर गंभीर कानूनी विवादों के केंद्र में आ गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने दोनों भाइयों को मियामी से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब ब्रिटेन में उनके खिलाफ दुष्कर्म, मानव तस्करी, यौन शोषण, गंभीर मारपीट और बाल अश्लील सामग्री से जुड़े कई नए आपराधिक आरोप दर्ज किए गए हैं। गिरफ्तारी के बाद दोनों भाइयों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही कानूनी प्रक्रिया ने नया मोड़ ले लिया है और अब उनके प्रत्यर्पण को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    बताया जा रहा है कि ब्रिटेन में अभियोजन पक्ष ने एंड्रयू टेट और ट्रिस्टन टेट के खिलाफ कुल 38 नए आरोप तय किए हैं। इनमें यौन शोषण के उद्देश्य से मानव तस्करी, दुष्कर्म, गंभीर हिंसा और अश्लील सामग्री से जुड़े मामलों को शामिल किया गया है। एंड्रयू टेट पहले से भी कई आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं, जबकि ट्रिस्टन टेट पर भी दुष्कर्म, मानव तस्करी और हिंसा से संबंधित कई मामले पहले से लंबित हैं। नए आरोप जुड़ने के बाद दोनों भाइयों के खिलाफ कानूनी चुनौती और अधिक गंभीर हो गई है।

    अमेरिकी अधिकारियों ने दोनों को एक न्यायिक वारंट के आधार पर हिरासत में लिया। गिरफ्तारी के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि आगे की सुनवाई के दौरान यह तय किया जाएगा कि दोनों भाइयों को ब्रिटेन भेजने की प्रक्रिया किस प्रकार आगे बढ़ेगी। ब्रिटेन पहले ही उनके प्रत्यर्पण की मांग कर चुका है ताकि वहां दर्ज मामलों में न्यायिक कार्रवाई पूरी की जा सके।

    एंड्रयू और ट्रिस्टन टेट लंबे समय से सोशल मीडिया पर अपने विवादित बयानों और जीवनशैली को लेकर चर्चा में रहे हैं। विशेष रूप से महिलाओं को लेकर दिए गए उनके कई बयान लगातार विवादों का कारण बने। इसके बावजूद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके बड़ी संख्या में समर्थक और अनुयायी मौजूद हैं। उनकी लोकप्रियता और विवाद एक साथ बढ़ते रहे हैं, जिसके कारण वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सुर्खियों में बने रहे।

    दोनों भाइयों के खिलाफ केवल ब्रिटेन ही नहीं बल्कि रोमानिया में भी अलग-अलग आपराधिक मामले चल रहे हैं। वर्ष 2022 में वहां उनकी गिरफ्तारी के बाद उन पर दुष्कर्म, मानव तस्करी और संगठित आपराधिक गतिविधियों से जुड़े आरोप लगाए गए थे। इन मामलों की न्यायिक प्रक्रिया अभी भी जारी है। ऐसे में विभिन्न देशों में चल रही कानूनी कार्रवाइयों ने उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रत्यर्पण प्रक्रिया पूरी होती है तो दोनों भाइयों को ब्रिटेन में दर्ज मामलों का सामना करना पड़ेगा। वहीं अन्य देशों में लंबित मामलों की सुनवाई भी अपने-अपने कानूनी ढांचे के अनुसार जारी रहेगी। इस पूरे घटनाक्रम ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की जवाबदेही, अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सहयोग और गंभीर आपराधिक मामलों में सीमा-पार कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में अदालतों की कार्यवाही और विभिन्न देशों की कानूनी एजेंसियों के फैसले इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करेंगे।

  • मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है मेरी हत्या भी हो सकती है', फिर भी दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना; अदालत में आत्मसमर्पण का ऐलान

    मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है मेरी हत्या भी हो सकती है', फिर भी दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना; अदालत में आत्मसमर्पण का ऐलान


    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह दिसंबर 2026 में भारत से बांग्लादेश लौटेंगी और वहां की अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी गिरफ्तारी और यहां तक कि हत्या का भी खतरा है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने देश लौटने के फैसले से पीछे नहीं हटेंगी। उनका कहना है कि यदि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना है तो वह अपनी मातृभूमि की धरती पर ही करना चाहेंगी।

    शेख हसीना लंबे समय से भारत में रह रही हैं। वर्ष 2024 में बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसक छात्र आंदोलन के बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने भारत में शरण ली और तब से यहीं रह रही हैं। इस दौरान बांग्लादेश में उनके खिलाफ कई कानूनी कार्रवाइयां शुरू हुईं और राजनीतिक परिस्थितियां भी लगातार बदलती रहीं।

    पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके साथ अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी बांग्लादेश लौटने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे सभी अदालत की प्रक्रिया में शामिल होंगे और कानून के अनुसार अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है तथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। ऐसे माहौल के बावजूद उन्होंने वापसी का निर्णय लिया है।

    शेख हसीना ने कहा कि उन्हें इस बात का पूरा अंदेशा है कि स्वदेश लौटते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि यदि जीवन का अंत होना ही है तो वह अपने देश की मिट्टी पर होना चाहिए, जहां उनके परिवार की यादें जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि अपने देश और न्यायिक व्यवस्था का सामना करना उनका कर्तव्य है।

    बांग्लादेश की अदालत पहले ही वर्ष 2024 के राजनीतिक घटनाक्रम और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में शेख हसीना को दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ मौत की सजा का फैसला सुना चुकी है। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री लगातार इन आरोपों को निराधार बताती रही हैं और उनका कहना है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक कारणों से प्रेरित है। उनका दावा है कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए।

    इस बीच बांग्लादेश की सरकार लगातार भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करती रही है। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे को लेकर कूटनीतिक स्तर पर भी चर्चा होती रही है। भारत ने अब तक यह स्पष्ट किया है कि वह प्रत्यर्पण से जुड़े अनुरोधों की प्रक्रिया के अनुसार समीक्षा कर रहा है और दोनों देशों के बीच रचनात्मक संवाद बनाए रखने का पक्षधर है।

    शेख हसीना ने यह भी कहा कि उनकी वापसी किसी बाहरी दबाव या किसी विदेशी सरकार की पहल का परिणाम नहीं होगी। उन्होंने दोहराया कि वह स्वयं अपने निर्णय के आधार पर बांग्लादेश लौटेंगी और अदालत के समक्ष उपस्थित होकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगी। उनके इस ऐलान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि उनकी वापसी से देश के राजनीतिक समीकरणों और आगामी घटनाक्रम पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

  • भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के सभी कानूनी रास्ते बंद: मानवाधिकार अदालत में आखिरी लड़ाई भी हारा, प्रत्यर्पण की प्रशासनिक औपचारिकताएं शुरू

    भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के सभी कानूनी रास्ते बंद: मानवाधिकार अदालत में आखिरी लड़ाई भी हारा, प्रत्यर्पण की प्रशासनिक औपचारिकताएं शुरू

    नई दिल्ली । पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के मुख्य आरोपी और लंबे समय से फरार चल रहे हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाए जाने की दिशा में एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) में अपनी आखिरी कानूनी लड़ाई हारने के बाद अब नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण पूरी तरह से तय हो गया है। राजनयिक और आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ब्रिटेन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीरव मोदी के पास मौजूद सभी कानूनी विकल्प अब पूरी तरह से समाप्त हो चुके हैं। इसके साथ ही ब्रिटिश सरकार की ओर से उसे भारत सौंपने की प्रशासनिक प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

    इससे पहले यह तथ्य सामने आया था कि स्ट्रैसबर्ग स्थित यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने नीरव मोदी द्वारा दायर की गई याचिका को पूरी तरह गोपनीय रखा था। इस अदालत की यह स्थापित प्रक्रिया है कि मामलों के लंबित रहने के दौरान वह किसी भी प्रकार की जानकारी सार्वजनिक नहीं करती है। नीरव मोदी ने ब्रिटेन की अदालतों में अपने सभी कानूनी रास्ते बंद होने के बाद अप्रैल 2026 में ईसीएचआर का दरवाजा खटखटाया था। इस कदम से ठीक पहले यूके सरकार ने उसे तुरंत भारत भेजने से संबंधित आवश्यक प्रत्यर्पण दस्तावेजों को अपनी मंजूरी दे दी थी, जिसे रोकने के लिए उसने मानवाधिकार अदालत की शरण ली थी।

    नीरव मोदी द्वारा अंतरराष्ट्रीय अदालत में यह याचिका तब दायर की गई थी, जब यूके हाईकोर्ट ने उसे प्रत्यर्पण के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत में अपील करने की अनुमति देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था। ब्रिटिश अदालत ने अपने फैसले में माना था कि भारत सरकार द्वारा भारतीय जेलों की स्थिति, चिकित्सा सुविधाओं और आरोपी की सुरक्षा को लेकर दिए गए आश्वासन पूरी तरह से पर्याप्त और संतोषजनक हैं। अब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार अदालत द्वारा भी किसी भी प्रकार की राहत देने से मना किए जाने के बाद उसके प्रत्यर्पण के मार्ग में मौजूद अंतिम तकनीकी और कानूनी अड़चन भी समाप्त हो गई है।

    उल्लेखनीय है कि नीरव मोदी मार्च 2019 में लंदन में अपनी गिरफ्तारी के बाद से ही वहां की वांड्सवर्थ जेल में न्यायिक हिरासत में बंद है। भारत में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडीडी) को पीएनबी धोखाधड़ी, कर्ज जालसाजी और मनी लॉन्ड्रिंग के बेहद गंभीर मामलों में उसकी लंबे समय से तलाश है। भारतीय जांच एजेंसियों ने ब्रिटेन की अदालत में बेहद प्रभावी ढंग से पैरवी की है, जिसके परिणामस्वरूप ब्रिटिश अधिकारियों ने अब उसे भारतीय कानून के हवाले करने की अंतिम कागजी कार्रवाई शुरू कर दी है और उसे किसी भी समय भारत लाया जा सकता है।

    इससे पूर्व, लंदन की हाईकोर्ट ऑफ जस्टिस ने नीरव मोदी की उस याचिका को भी पूरी तरह खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपने प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ बंद हो चुकी अदालती कार्यवाही को दोबारा शुरू करने की गुहार लगाई थी। नीरव मोदी ने ब्रिटेन के एक अन्य चर्चित मामले का हवाला देते हुए दावा किया था कि भारत भेजे जाने पर उसे प्रताड़ना और मानसिक टॉर्चर का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, भारतीय जांच एजेंसी सीबीआई के अधिकारियों ने अदालत में अकाट्य तथ्य और पुख्ता सबूत पेश कर नीरव मोदी के इन दावों को पूरी तरह से खारिज करवा दिया, जिसके बाद अदालत ने उसकी दलीलों को आधारहीन माना था।

  • नीरव मोदी की आखिरी कानूनी उम्मीद भी खत्म, यूरोपीय अदालत से झटका, भारत प्रत्यर्पण का रास्ता लगभग साफ

    नीरव मोदी की आखिरी कानूनी उम्मीद भी खत्म, यूरोपीय अदालत से झटका, भारत प्रत्यर्पण का रास्ता लगभग साफ


    नई दिल्ली।
    पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता अब लगभग साफ माना जा रहा है। यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स से भी राहत नहीं मिलने के बाद उसके पास उपलब्ध सभी प्रमुख कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके हैं। अब मामला मुख्य रूप से ब्रिटेन की प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर है, जिसके पूरा होने के बाद उसे भारत लाए जाने की दिशा में अगला कदम उठाया जा सकता है।

    जानकारी के अनुसार नीरव मोदी ने ब्रिटेन की अदालतों से राहत नहीं मिलने के बाद अप्रैल 2026 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स का दरवाजा खटखटाया था। उसने अपने प्रत्यर्पण को रोकने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। हालांकि अदालत ने उसे कोई राहत नहीं दी, जिससे उसके प्रत्यर्पण की राह में मौजूद अंतिम कानूनी बाधा भी समाप्त हो गई है। अब ब्रिटेन की संबंधित एजेंसियां प्रत्यर्पण की औपचारिक प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती हैं।

    इससे पहले ब्रिटेन की हाई कोर्ट ने भी नीरव मोदी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने प्रत्यर्पण आदेश को चुनौती देने की अनुमति मांगी थी। अदालत ने माना था कि भारत की ओर से जेल की सुरक्षा, कैद की परिस्थितियों और कानूनी अधिकारों को लेकर दिए गए आश्वासन पर्याप्त हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि इस मामले में ऐसे असाधारण हालात नहीं हैं, जिनके आधार पर प्रत्यर्पण रोका जाए।

    नीरव मोदी ने अपनी याचिकाओं में यह तर्क दिया था कि भारत लौटने पर उसे प्रताड़ना और अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि जांच एजेंसियों और भारतीय पक्ष ने इन दावों का विरोध करते हुए अदालत में विस्तृत तथ्य और सुरक्षा संबंधी आश्वासन प्रस्तुत किए। इन्हीं आधारों पर ब्रिटेन की अदालतों ने उसके तर्कों को स्वीकार नहीं किया और प्रत्यर्पण प्रक्रिया को वैध माना।

    यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स में दायर याचिका की सुनवाई गोपनीय रही। अदालत ने प्रक्रिया के दौरान मामले की जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी। अब वहां से भी राहत नहीं मिलने के बाद राजनयिक स्तर पर यह माना जा रहा है कि कानूनी दृष्टि से प्रत्यर्पण के खिलाफ कोई बड़ा अवरोध शेष नहीं बचा है। इसके बाद संबंधित प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने पर नीरव मोदी को भारत भेजने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

    नीरव मोदी मार्च 2019 से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। उसके खिलाफ पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में जांच चल रही है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहे हैं ताकि भारत में उसके खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई आगे बढ़ाई जा सके।

    ब्रिटेन की अदालतों में नीरव मोदी ने अपने पक्ष में कई कानूनी दलीलें दी थीं। इनमें भारत की जेलों की स्थिति, मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दे और पूर्व के कुछ मामलों का हवाला भी शामिल था। लेकिन अदालत ने प्रत्येक स्तर पर उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद उसके तर्कों को पर्याप्त आधार नहीं माना। अब माना जा रहा है कि यदि प्रशासनिक प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है तो नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण जल्द संभव हो सकता है, जिससे देश के सबसे चर्चित आर्थिक अपराध मामलों में कानूनी कार्रवाई को नई गति मिल सकती है।

  • नीरव मोदी का नया दांव: यूरोपियन कोर्ट पहुंचा मामला, ‘रूल 39’ से लटक सकता है प्रत्यर्पण

    नीरव मोदी का नया दांव: यूरोपियन कोर्ट पहुंचा मामला, ‘रूल 39’ से लटक सकता है प्रत्यर्पण


    मुंबई। पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने भारत प्रत्यर्पण टालने के लिए अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आखिरी कानूनी चाल चल दी है। उसने फ्रांस के स्ट्रासबर्ग स्थित यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय (ECtHR) में ‘रूल 39’ के तहत याचिका दायर कर अपने प्रत्यर्पण पर अस्थायी रोक लगाने की मांग की है।
    ब्रिटेन में खत्म हो चुके सभी रास्ते
    इससे पहले लंदन उच्च न्यायालय ने 25 मार्च को नीरव मोदी की अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपने प्रत्यर्पण केस को दोबारा खोलने की मांग की थी। इस फैसले के बाद ब्रिटेन में उसके पास कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा था, जिसके चलते उसने यूरोपियन कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    नियमों के मुताबिक, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) तय समयसीमा के भीतर उसे भारत ला सकती थी, लेकिन ‘रूल 39’ की अर्जी लंबित रहने तक प्रत्यर्पण पर रोक लग गई है।

    क्या है ‘रूल 39’? समझिए आसान भाषा में
    ‘रूल 39’ यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय का एक आपातकालीन प्रावधान है, जिसके तहत अदालत किसी व्यक्ति को “अपरिवर्तनीय नुकसान” से बचाने के लिए अंतरिम आदेश जारी कर सकती है।

    कोई खुली सुनवाई नहीं होती: पूरा मामला लिखित दलीलों के आधार पर तय होता है
    48 घंटे में फैसला संभव: आमतौर पर जज जल्द निर्णय देते हैं
    अस्थायी राहत मिलती है: अंतिम फैसला नहीं, सिर्फ रोक लगाने का अंतरिम उपाय
    प्रत्यर्पण पर रोक: जब तक अर्जी पर फैसला नहीं, तब तक संबंधित देश व्यक्ति को नहीं भेजता

    विशेषज्ञों के मुताबिक, याचिकाकर्ता को यह साबित करना होता है कि उसे तुरंत और गंभीर नुकसान का खतरा है, और उसने अपने देश में सभी कानूनी विकल्प इस्तेमाल कर लिए हैं।

    लंबी खिंच सकती है कानूनी प्रक्रिया
    ‘रूल 39’ के तहत मिली राहत स्थायी नहीं होती, लेकिन इससे मामला वर्षों तक खिंच सकता है।

    जानकारों का मानना है कि पूरी प्रक्रिया 3 से 5 साल तक चल सकती है।

    क्या होगा आगे?
    फिलहाल क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) ने भी पुष्टि की है कि नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तय थी, लेकिन अब यूरोपीय अदालत में दाखिल अर्जी के चलते इस पर अस्थायी ब्रेक लग गया है।

    कुल मिलाकर, नीरव मोदी ने एक ऐसा कानूनी रास्ता चुना है जो भले ही अंतिम तौर पर उसे राहत दिलाए या न दिलाए, लेकिन भारत लाए जाने की प्रक्रिया को फिलहाल टालने में जरूर असरदार साबित हो सकता है।

  • गोवा अग्निकांड: लूथरा ब्रदर्स को जल्द लाया जा सकता है भारतथाइलैंड से प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू

    गोवा अग्निकांड: लूथरा ब्रदर्स को जल्द लाया जा सकता है भारतथाइलैंड से प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू


    नई दिल्ली । गोवा के बर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब में 6 दिसंबर को हुए भयंकर अग्निकांड में कम से कम 25 लोग मारे गए थेजिनमें क्लब के कई कर्मचारी भी शामिल थे। इस हादसे के बाद नाइटक्लब के मालिक सौरभ और गौरव लूथरादोनों भाईथाइलैंड के फुकेट भाग गए थे। गोवा पुलिस ने उनकी तलाश शुरू कर दी थीऔर अब खबर है कि उन्हें अगले 24 से 48 घंटे में भारत लाया जा सकता है।

    सरकारी सूत्रों के अनुसारलूथरा भाइयों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही हैऔर जल्द ही उन्हें थाइलैंड से भारत लाया जा सकता है। विदेश मंत्रालय ने उनके पासपोर्ट को कैंसल कर दिया है और इंटरपोल ने उनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया है। इसके अलावादिल्ली की एक अदालत ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी थीजिसमें उन्होंने यह दावा किया था कि गोवा में उनकी जान को खतरा है और उन्हें पीट-पीट कर मार डाला जाएगा।

    अग्निकांड के बाद गोवा पुलिस ने क्लब के पांच कर्मचारियों और प्रबंधकों को गिरफ्तार किया है। इन कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही हैजबकि सौरभ और गौरव लूथरा की गिरफ्तारी के लिए कार्यवाही चल रही है। जांच समितिजो इस घटना की गहन जांच कर रही हैने गोवा के अन्य प्रमुख व्यक्तियोंजैसे क्लब के जमीन के मालिक प्रदीप घाडी अमोणकर और आरपोरा-नागोवा के सरपंच रोशन रेडकर से भी पूछताछ की है। अमोणकर को गहन पूछताछ के लिए शनिवार देर रात तक तलब किया गया था।
    सरकार की ओर से लूथरा भाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उनके प्रत्यर्पण के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस भीषण अग्निकांड के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को न्याय दिलाया जा सके।