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  • थायरॉइड की बीमारी आंखों पर भी कर सकती है अटैक नजर जाने तक की आ सकती है नौबत इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

    थायरॉइड की बीमारी आंखों पर भी कर सकती है अटैक नजर जाने तक की आ सकती है नौबत इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज


    नई दिल्ली । थायरॉइड की बीमारी को अक्सर लोग वजन बढ़ने या घटने थकान कमजोरी और हार्मोन के असंतुलन से जोड़कर देखते हैं लेकिन इसका असर केवल शरीर के वजन या ऊर्जा के स्तर तक सीमित नहीं रहता। कुछ मरीजों में थायरॉइड की बीमारी आंखों को भी प्रभावित कर सकती है। इसे थायरॉइड आई डिजीज कहा जाता है। इस स्थिति में आंखों में सूजन लालिमा जलन आंखों का बाहर की ओर उभरना और दोहरा दिखाई देना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में मरीज की आंखों की रोशनी भी प्रभावित होने का खतरा रहता है। इसी को देखते हुए दुनियाभर के विशेषज्ञों ने बीमारी की पहचान और इलाज को लेकर नई ग्लोबल गाइडलाइंस जारी की हैं।

    नई गाइडलाइंस वर्ल्ड सोसाइटी ऑफ ऑप्थेलमिक प्लास्टिक रिकंस्ट्रक्टिव एंड एस्थेटिक सर्जरी और इंटरनेशनल थायराइड आई डिजीज सोसाइटी की ओर से तैयार की गई हैं। इन्हें मेडिकल जर्नल ऑप्थेलमिक प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी में प्रकाशित किया गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य अलग अलग देशों में मरीजों की बीमारी की गंभीरता के हिसाब से जांच और उपचार की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है।

    विशेषज्ञों के अनुसार थायरॉइड आई डिजीज में शरीर का इम्यून सिस्टम आंखों के आसपास मौजूद मांसपेशियों और टिश्यू को प्रभावित करने लगता है। इसके कारण आंखों के आसपास सूजन और लालपन हो सकता है। आंखों में जलन महसूस हो सकती है और कुछ मरीजों में आंखें बाहर की तरफ उभरने लगती हैं। आंखों की मांसपेशियों पर असर पड़ने से दोहरा दिखाई देने की समस्या भी हो सकती है। ऐसे लक्षणों को केवल सामान्य थायरॉइड समस्या समझकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।

    सबसे गंभीर स्थिति तब बन सकती है जब बीमारी के कारण आंख के पीछे मौजूद ऑप्टिक नर्व पर दबाव पड़ने लगे। इससे नजर कमजोर होने का खतरा बढ़ सकता है और गंभीर मामलों में रोशनी जाने तक की स्थिति बन सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक थायरॉइड आई डिजीज के मामले बढ़ रहे हैं। महिलाओं में इस बीमारी के मामले अधिक देखे जा सकते हैं जबकि पुरुषों में गंभीर आंखों की समस्या और दृष्टि प्रभावित होने का खतरा ज्यादा हो सकता है। हाइपरथायरायडिज्म यानी थायरॉइड हार्मोन बढ़ने की स्थिति वाले मरीजों में भी इसका खतरा अधिक माना जाता है।

    नई ग्लोबल गाइडलाइंस में थायरॉइड आई डिजीज को तीन स्तरों में बांटने की सिफारिश की गई है। इनमें बेसिक इंटरमीडिएट और एडवांस स्तर शामिल हैं। इसका उद्देश्य बीमारी की गंभीरता के अनुसार मरीज का उपचार तय करना है। अगर किसी मरीज की स्थिति ज्यादा गंभीर है तो उसे बेहतर सुविधाओं वाले बड़े अस्पताल या विशेषज्ञ केंद्र में रेफर करने की व्यवस्था भी की जा सकती है।

    नई गाइडलाइंस में मरीज की आंखों की जांच के साथ थायरॉइड हार्मोन आंखों की रोशनी और डबल विजन जैसी समस्याओं का मूल्यांकन करने पर जोर दिया गया है। जरूरत पड़ने पर CT स्कैन MRI और अन्य एडवांस जांच भी कराई जा सकती हैं। इसलिए अगर थायरॉइड की समस्या के साथ आंखों में सूजन आंखों का उभरना लालिमा धुंधला दिखाई देना या दोहरा दिखना जैसे लक्षण सामने आएं तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। समय पर बीमारी की पहचान होने से गंभीर जटिलताओं को रोकने और आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखने की संभावना बेहतर हो सकती है।

  • आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक 8 पोषक खाद्य पदार्थ, गाजर के अलावा भी मिलते हैं कई प्राकृतिक विकल्प

    आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक 8 पोषक खाद्य पदार्थ, गाजर के अलावा भी मिलते हैं कई प्राकृतिक विकल्प


    नई दिल्ली:
    आज की जीवनशैली में आंखों पर पड़ने वाला दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मोबाइल फोन, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन के अधिक उपयोग के कारण आंखों में थकान, सूखापन, जलन और धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। ऐसे में आंखों की सेहत को बनाए रखना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। आमतौर पर यह धारणा रही है कि आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए गाजर सबसे प्रभावी विकल्प है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि कई अन्य खाद्य पदार्थ भी आंखों को मजबूत बनाने और उनकी कार्यक्षमता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    शकरकंद को आंखों के लिए एक बेहद उपयोगी खाद्य पदार्थ माना जाता है क्योंकि इसमें विटामिन ए की प्रचुर मात्रा होती है। यह तत्व आंखों की सतह यानी कॉर्निया को स्वस्थ रखने में मदद करता है और दृष्टि क्षमता को बेहतर बनाए रखता है। इसके नियमित सेवन से आंखों की कार्यक्षमता लंबे समय तक संतुलित रह सकती है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी और अन्य हरी सब्जियां आंखों के स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं। इनमें मौजूद ल्यूटिन और ज़ीएक्सैंथिन जैसे पोषक तत्व रेटिना की सुरक्षा करते हैं और तेज रोशनी या स्क्रीन के हानिकारक प्रभाव से आंखों को बचाते हैं। ये तत्व उम्र बढ़ने के साथ होने वाली दृष्टि संबंधी समस्याओं को भी कम करने में सहायक होते हैं।

    अंडे आंखों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माने जाते हैं। इनमें मौजूद तत्व आंखों की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं और दृष्टि को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। नियमित रूप से संतुलित मात्रा में अंडे का सेवन आंखों की सेहत को सपोर्ट कर सकता है।

    जिंक से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे दालें, बीन्स और नट्स आंखों की कोशिकाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह पोषक तत्व आंखों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाए रखने और उन्हें आंतरिक रूप से मजबूत करने में मदद करता है। इसी तरह बादाम भी विटामिन ई का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो आंखों को ऑक्सीडेटिव तनाव और फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है।

    ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर मछली आंखों के सूखेपन को कम करने में सहायक होती है और उन्हें प्राकृतिक रूप से नमी प्रदान करती है। यह आंखों की सतह को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है और लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाली समस्याओं को कम कर सकती है। पपीता विटामिन सी का अच्छा स्रोत माना जाता है, जो आंखों के ऊतकों को मजबूती प्रदान करता है और उम्र के प्रभाव को धीमा करने में मदद करता है।

    इसके अलावा बीन्स और साबुत अनाज भी आंखों के लिए लाभकारी माने जाते हैं। ये शरीर में ऊर्जा संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ आंखों की समग्र सेहत को समर्थन देते हैं। संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली आंखों की रोशनी को लंबे समय तक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पर्याप्त नींद, स्क्रीन टाइम में नियंत्रण और नियमित अंतराल पर आंखों को आराम देना भी आंखों की सुरक्षा के लिए आवश्यक माना जाता है।