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  • अमेरिकी F-35 को हमने मार गिराया’, ईरान का बड़ा दावा; अमेरिका को दी नई चेतावनी

    अमेरिकी F-35 को हमने मार गिराया’, ईरान का बड़ा दावा; अमेरिका को दी नई चेतावनी


    नई दिल्ली। Abbas Araghchi ने दावा किया है कि ईरान की सेना ने युद्ध के दौरान अमेरिका के अत्याधुनिक Lockheed Martin F-35 Lightning II लड़ाकू विमान को मार गिराया। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वाला ईरान दुनिया का पहला देश बन गया है।

    तेहरान में दिए गए बयान में अराघची ने अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ संघर्ष में कई सैन्य विमानों के नुकसान को स्वीकार किया है। ईरानी विदेश मंत्री ने इसे तेहरान के पुराने दावों की पुष्टि बताया और कहा कि युद्ध में ईरान की सैन्य क्षमता दुनिया के सामने आ चुकी है।

    अमेरिकी रिपोर्ट में क्या कहा गया?
    13 मई को प्रकाशित अमेरिकी कांग्रेस की संस्था Congressional Research Service (CRS) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ संघर्ष के दौरान अमेरिका के करीब 42 सैन्य विमान नष्ट हुए या क्षतिग्रस्त हुए। रिपोर्ट में कहा गया कि वास्तविक संख्या इससे अधिक भी हो सकती है क्योंकि कई जानकारियां अब भी गोपनीय हैं।

    रिपोर्ट में स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट और स्पेशल ऑपरेशन एयरक्राफ्ट को नुकसान पहुंचने का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने अब तक आधिकारिक तौर पर F-35 गिराए जाने की पुष्टि नहीं की है।

    ईरान ने दी नई चेतावनी
    अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि ईरान की सेना ने आधुनिक अमेरिकी तकनीक को चुनौती दी है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अगर दोबारा युद्ध शुरू हुआ तो दुनिया “और बड़े सरप्राइज” देखेगी।

    ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में बढ़ा तनाव
    रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ “Operation Epic Fury” नाम से 40 दिनों तक संयुक्त हवाई अभियान चलाया था। यह अभियान 28 फरवरी 2026 से शुरू हुआ था।

    सीआरएस ने अपनी रिपोर्ट अमेरिकी रक्षा विभाग, अमेरिकी सेंट्रल कमांड और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार की है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरान अभियान पर अमेरिका का सैन्य खर्च बढ़कर 29 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया है कि ईरानी सेना ने युद्ध के दौरान अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया। अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में भी ईरान संघर्ष में अमेरिकी सैन्य विमानों के नुकसान का जिक्र किया गया है, जिससे मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है।
    हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के दावों और अमेरिकी रिपोर्ट के बीच अब भी कई तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इसके बावजूद इस बयान ने मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ा दिया है।

  • बिना युद्ध के अमेरिका को चुनौती: दुर्लभ खनिजों के जरिए चीन की नई रणनीति

    बिना युद्ध के अमेरिका को चुनौती: दुर्लभ खनिजों के जरिए चीन की नई रणनीति



    नई दिल्ली। वैश्विक राजनीति में बढ़ते तनाव के बीच चीन एक ऐसी रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे वह बिना युद्ध किए भी अमेरिका की सैन्य ताकत को चुनौती दे सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन ने दुर्लभ खनिजों यानी Rare Earth Elements की आपूर्ति और तकनीकी सप्लाई चेन पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। इन खनिजों का उपयोग आधुनिक सैन्य उपकरणों में बड़े पैमाने पर होता है, जिनमें अमेरिकी F-35 Lightning II जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट भी शामिल हैं।

    रिपोर्टों के अनुसार चीन की रणनीति इन महत्वपूर्ण कच्चे संसाधनों के उत्पादन और प्रोसेसिंग पर नियंत्रण बनाए रखने की है। अगर भविष्य में इन खनिजों की आपूर्ति सीमित होती है, तो इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के कई उन्नत हथियारों के निर्माण और रखरखाव पर असर पड़ सकता है। आधुनिक जेट इंजन, रडार सिस्टम, सेंसर और मिसाइल तकनीक में इन धातुओं की अहम भूमिका होती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि चीन पहले से ही दुनिया में रेयर अर्थ खनिजों की प्रोसेसिंग का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करता है। हाल के वर्षों में उसने इनके निर्यात नियमों को भी सख्त किया है। इसके साथ ही चीन अपनी औद्योगिक नीतियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों पर भी तेजी से काम कर रहा है, ताकि तकनीकी और औद्योगिक बढ़त बनाए रखी जा सके।

    दूसरी ओर United States भी इस संभावित खतरे को समझ चुका है। अमेरिकी सरकार ने 2027 तक रक्षा क्षेत्र में चीनी रेयर अर्थ खनिजों पर निर्भरता कम करने की योजना बनाई है। इसके लिए नई खदानों के विकास और घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम शुरू किया गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रक्रिया में समय लगेगा।

    विश्लेषकों के अनुसार भविष्य में महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा केवल सैन्य ताकत से नहीं बल्कि संसाधनों, तकनीक और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर नियंत्रण से तय होगी। ऐसे में रेयर अर्थ खनिजों पर चीन की मजबूत पकड़ अमेरिका और अन्य देशों के लिए एक बड़ी रणनीतिक चुनौती बन सकती है।

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