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  • सोशल मीडिया पर शाहरुख खान के नाम से फैलाई गई भ्रामक पोस्ट वायरल दावा निकला पूरी तरह फर्जी

    सोशल मीडिया पर शाहरुख खान के नाम से फैलाई गई भ्रामक पोस्ट वायरल दावा निकला पूरी तरह फर्जी


    नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सोशल मीडिया पर बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के नाम से एक पोस्ट तेजी से वायरल होने लगी। इस पोस्ट में दावा किया गया कि शाहरुख खान ने छात्रों से आंदोलन जारी रखने और किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटने की अपील की है। इतना ही नहीं इस वायरल पोस्ट को सलमान खान के हालिया बयान से जोड़ते हुए यह भी कहा गया कि शाहरुख ने अप्रत्यक्ष रूप से सलमान की अपील का जवाब दिया है। देखते ही देखते यह पोस्ट सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म पर लाखों लोगों तक पहुंच गई और इसे सच मानकर बड़ी संख्या में साझा भी किया जाने लगा।

    वायरल पोस्ट में लिखा गया था कि जब लड़ाई अधिकारों की हो तब चुप रहना समझदारी नहीं बल्कि शांति से डटे रहना ही सही रास्ता है। साथ ही यह भी कहा गया कि जब तक भरोसा दोबारा कायम न हो जाए तब तक आंदोलन जारी रहना चाहिए क्योंकि यह लड़ाई केवल वर्तमान की नहीं बल्कि भविष्य को सुरक्षित बनाने की है। पोस्ट की भाषा और प्रस्तुति ऐसी थी कि पहली नजर में यह किसी आधिकारिक बयान जैसी दिखाई दे रही थी।

    हालांकि जब इस दावे की जांच की गई तो सच्चाई बिल्कुल अलग निकली। शाहरुख खान के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर इस तरह का कोई भी पोस्ट मौजूद नहीं मिला। इसके बाद यह स्पष्ट हो गया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट अभिनेता की नहीं थी। जांच में सामने आया कि यह पोस्ट एक फैन पेज से साझा की गई थी जिसने शाहरुख खान जैसी प्रोफाइल फोटो और लगभग मिलता जुलता यूजरनेम इस्तेमाल किया था। इसी वजह से कई लोग भ्रमित हो गए और उसे अभिनेता का आधिकारिक अकाउंट समझ बैठे।

    सोशल मीडिया पर इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं जहां किसी मशहूर व्यक्ति के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर फर्जी पोस्ट वायरल कर दी जाती हैं। कई बार ऐसे पोस्ट लोगों की भावनाओं को प्रभावित करते हैं और बिना पुष्टि के तेजी से फैल जाते हैं। यही कारण है कि किसी भी वायरल दावे पर विश्वास करने से पहले संबंधित व्यक्ति के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट या विश्वसनीय स्रोत से उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी होता है।

    छात्र आंदोलन और उससे जुड़े मुद्दों पर कई सार्वजनिक हस्तियों ने अपनी राय जरूर रखी है लेकिन शाहरुख खान की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में उनके नाम से वायरल हो रहा यह संदेश पूरी तरह भ्रामक साबित हुआ। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि डिजिटल दौर में फर्जी खबरें और नकली सोशल मीडिया अकाउंट कितनी तेजी से लोगों को भ्रमित कर सकते हैं।

    विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि किसी भी वायरल पोस्ट को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें। केवल प्रोफाइल फोटो या नाम देखकर किसी अकाउंट को असली मान लेना सही नहीं है क्योंकि फर्जी अकाउंट बनाने वालों का उद्देश्य अक्सर भ्रम फैलाना और वायरलिटी हासिल करना होता है। सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करना और तथ्य आधारित जानकारी साझा करना आज पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

  • भारत विरोधी दुष्प्रचार की फिर नाकाम कोशिश: रक्षा मंत्री के नाम पर फैलाए गए झूठे दावे की खुली पोल, फर्जी नैरेटिव पर बड़ा खुलासा

    भारत विरोधी दुष्प्रचार की फिर नाकाम कोशिश: रक्षा मंत्री के नाम पर फैलाए गए झूठे दावे की खुली पोल, फर्जी नैरेटिव पर बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली।भारत के खिलाफ भ्रामक सूचनाओं और झूठे प्रचार के जरिए माहौल प्रभावित करने की कोशिशें लगातार सामने आती रही हैं। एक बार फिर ऐसा मामला चर्चा में आया, जब सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री के नाम से एक कथित बयान को वायरल कर भारत की छवि को प्रभावित करने की कोशिश की गई। दावा किया गया कि रक्षा मंत्री ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को लेकर भारत के समर्थन से जुड़ा बयान दिया है। यह खबर तेजी से प्रसारित होने लगी और इसे कई लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। हालांकि जांच पड़ताल के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यह दावा पूरी तरह झूठा, मनगढ़ंत और तथ्यों से परे था। इसके बाद पूरे मामले ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैल रही फर्जी खबरों और दुष्प्रचार के गंभीर खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

    जांच के दौरान यह सामने आया कि रक्षा मंत्री द्वारा ऐसा कोई बयान कभी दिया ही नहीं गया था। वायरल सामग्री को तथ्यों से जोड़कर देखने पर उसमें कई विसंगतियां दिखाई दीं, जिसके बाद यह स्पष्ट हुआ कि इसके पीछे भ्रम पैदा करने और लोगों को गुमराह करने की मंशा थी। अधिकारियों ने भी साफ कर दिया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही जानकारी का वास्तविक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है। इस तरह की गतिविधियां केवल अफवाह फैलाने और लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा करने का काम करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में डिजिटल माध्यमों पर गलत सूचनाओं का प्रसार पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज हो गया है।

    हाल के वर्षों में राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े विषयों को लेकर कई बार इस तरह की फर्जी जानकारियां सामने आई हैं। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अब तस्वीरों, वीडियो और ऑडियो में बदलाव कर उन्हें वास्तविक जैसा दिखाना पहले से अधिक आसान हो गया है। यही कारण है कि कई बार सामान्य लोग ऐसी सामग्री को सच मान लेते हैं और बिना जांच किए आगे साझा कर देते हैं। ऐसे मामलों में झूठी सूचनाएं कुछ ही समय में लाखों लोगों तक पहुंच जाती हैं और भ्रम की स्थिति पैदा कर देती हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर जानकारी पर आंख बंद करके विश्वास करना सही नहीं है। किसी भी संवेदनशील विषय, विशेष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकारी मामलों से जुड़ी खबरों की पुष्टि करना बेहद आवश्यक हो गया है। गलत सूचना केवल समाज में भ्रम नहीं फैलाती बल्कि कई बार राष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर प्रभाव छोड़ सकती है। इसलिए लोगों को जागरूक रहने और किसी भी संदिग्ध जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच करने की आवश्यकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल दौर में सूचना जितनी तेजी से लोगों तक पहुंच रही है, उतनी ही तेजी से झूठ और भ्रम भी फैल रहे हैं। ऐसे में जिम्मेदार नागरिक होने के नाते प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। सतर्कता, जागरूकता और तथ्यों की जांच ही फर्जी खबरों के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार साबित हो सकती है।