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  • जबलपुर की पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में भीषण आग, आठ से ज्यादा दमकल गाड़ियां मौके पर, कारणों की जांच शुरू

    जबलपुर की पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में भीषण आग, आठ से ज्यादा दमकल गाड़ियां मौके पर, कारणों की जांच शुरू


    मध्य प्रदेश: के जबलपुर स्थित रिछाई औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार दोपहर पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। आग पर काबू पाने के लिए आठ से अधिक दमकल गाड़ियों को लगाया गया है। घटनास्थल पर आग बुझाने के साथ बचाव अभियान भी चलाया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, फिलहाल किसी की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है।

    यह घटना आधारताल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रिछाई औद्योगिक क्षेत्र में हुई। फैक्ट्री में आग लगने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। दमकलकर्मी लगातार आग बुझाने के प्रयास में जुटे हैं। आग की स्थिति को देखते हुए बचाव अभियान भी जारी रखा गया है। फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पाने और घटनास्थल की स्थिति सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    पुलिस के मुताबिक, आग लगने का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों से मिली शुरुआती जानकारी में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है। हालांकि, इसे आग लगने की पुष्ट वजह नहीं माना गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनीष भारद्वाज ने बताया कि फिलहाल घटना में किसी की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है। आग लगने की वजह की पुष्टि के लिए जांच जरूरी है। इसके लिए फॉरेंसिक साइंस लैब यानी एफएसएल की टीम की जांच और आकलन महत्वपूर्ण होगा। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग किन परिस्थितियों में लगी और इसके पीछे क्या कारण रहे।

    फैक्ट्री में आग लगने की घटना के बाद वहां हुए नुकसान का आकलन भी किया जाना बाकी है। आग से भवन, मशीनों, कच्चे माल और तैयार उत्पादों को कितना नुकसान पहुंचा है, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। दमकलकर्मियों के आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद ही नुकसान की स्थिति का सही आकलन किया जा सकेगा।

    औद्योगिक क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद फिलहाल प्राथमिकता आग बुझाने और बचाव कार्य पूरा करने की है। पुलिस और दमकल की टीमें मौके पर मौजूद हैं। आग के कारणों की जांच के साथ यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि घटना किस तरह शुरू हुई और किन परिस्थितियों में फैली। शुरुआती स्तर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका सामने आई है, लेकिन जांच से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है।

    फिलहाल, जबलपुर की पारले-जी बिस्कुट फैक्ट्री में आग बुझाने का अभियान जारी है। पुलिस के अनुसार, अभी तक किसी की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं मिली है। आग पर पूरी तरह नियंत्रण, संभावित नुकसान और घटना के वास्तविक कारणों को लेकर स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • भोपाल में दिवाली से पहले पटाखा फैक्ट्री सील, तय सीमा से ज्यादा विस्फोटक सामग्री मिली

    भोपाल में दिवाली से पहले पटाखा फैक्ट्री सील, तय सीमा से ज्यादा विस्फोटक सामग्री मिली

    भोपाल जिले। में दिवाली से पहले पटाखा निर्माण और विस्फोटक सामग्री के भंडारण को लेकर प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। इसी क्रम में बैरसिया क्षेत्र के ग्राम बांदीखेड़ी में संचालित एक पटाखा फैक्ट्री का जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने निरीक्षण किया। जांच के दौरान फैक्ट्री परिसर में लाइसेंस या निर्धारित क्षमता के मुकाबले अधिक विस्फोटक सामग्री रखी मिली। इसके साथ ही फैक्ट्री के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई अनियमितताएं भी अधिकारियों के सामने आईं।

    फैक्ट्री की जांच के लिए एसडीएम बैरसिया शिवांगी बघेल, एसडीओपी वैशाली सिंह, तहसीलदार दुर्गा पटले और गुनगा थाना प्रभारी रिंकू जाटव की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान परिसर में रखी विस्फोटक सामग्री की स्थिति का जायजा लिया। इसके साथ ही फैक्ट्री में अपनाई जा रही सुरक्षा व्यवस्था और संचालन से संबंधित व्यवस्थाओं की भी जांच की गई। निरीक्षण के दौरान निर्धारित सीमा से अधिक विस्फोटक सामग्री रखे जाने की बात सामने आई।

    प्रशासन के अनुसार, फैक्ट्री परिसर में जितनी मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखने की अनुमति निर्धारित थी, उससे अधिक सामग्री वहां मौजूद मिली। जांच के दौरान केवल भंडारण की मात्रा से जुड़ी अनियमितता ही सामने नहीं आई, बल्कि फैक्ट्री की सुरक्षा और संचालन व्यवस्था से संबंधित अन्य कमियां भी अधिकारियों ने पाईं। इन परिस्थितियों को देखते हुए संयुक्त टीम ने मौके पर ही फैक्ट्री को सील करने की कार्रवाई की।

    जिला प्रशासन के मुताबिक, निरीक्षण में सामने आई अनियमितताएं विस्फोटक अधिनियम, 1884 और विस्फोटक नियम, 2008 के प्रावधानों से संबंधित पाई गईं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि विस्फोटक सामग्री के निर्माण, इस्तेमाल, रखरखाव और भंडारण के दौरान निर्धारित कानूनी और सुरक्षा प्रावधानों का पालन करना आवश्यक है। फैक्ट्री में तय सीमा से अधिक सामग्री पाए जाने के साथ सुरक्षा और संचालन व्यवस्था में मिली कमियों को भी इसी संदर्भ में देखा गया।

    अधिकारियों के अनुसार, पटाखों और अन्य विस्फोटक सामग्री से जुड़े प्रतिष्ठानों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी जनसुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। इसी वजह से निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को गंभीरता से लेते हुए फैक्ट्री को सील किया गया। प्रशासन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन प्रतिष्ठानों में नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बांदीखेड़ी स्थित फैक्ट्री पर की गई कार्रवाई इसी जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। दिवाली से पहले पटाखा निर्माण और भंडारण से जुड़े प्रतिष्ठानों की व्यवस्था की जांच के दौरान प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने निर्धारित सीमा, सुरक्षा और संचालन से संबंधित प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए निरीक्षण किया।

  • दिल्ली में नकली नमक, घी और घरेलू सामान बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़… 4 गिरफ्तार

    दिल्ली में नकली नमक, घी और घरेलू सामान बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़… 4 गिरफ्तार


    नई दिल्ली।
    दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की ईस्टर्न रेंज-एक क्राइम ब्रांच ने नकली घरेलू सामान (Counterfeit Household Goods) बनाने और बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गैंग उत्तम नगर और कंझावला औद्योगिक क्षेत्र में सक्रिय था। पुलिस ने इस मामले में उत्तम नगर निवासी नितिन कुमार, रजत सिंघल उर्फ चिंटू, सुरेंद्र गुज्जर और मंगोलपुरी निवासी मुजाहिद उर्फ कार्तिक को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से भारी मात्रा में नकली खाद्य और घरेलू उत्पाद (Counterfeit food and household products) बरामद हुए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है।

    पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब पांच हजार किलोग्राम टाटा का नकली नमक, 1,100 लीटर से अधिक नकली घी (पतंजलि, अमूल और मधुसूदन ब्रांड के नाम पर), 8,640 ईनो सैशे, 1,200 ऑलआउट की शीशियां, 1,152 वीट पैक, बड़ी संख्या में खाली पैकिंग सामग्री, पाउच सिलाई मशीन, पैकिंग मशीनें, एक टेंपो, कच्चा तेल, खाली कंटेनर और नकली रैपर जब्त किए हैं। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ कर रहा था।


    टेंपो से बड़ी खेप बरामद

    पुलिस उपायुक्त विक्रम सिंह ने बताया कि 29 दिसंबर को क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग उत्तम नगर इलाके में नकली ब्रांडेड सामान की बड़ी खेप सप्लाई करने वाले हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मेट्रो पिलर संख्या 680 के पास जाल बिछाया और दोपहर करीब 2:15 बजे एक टेंपो को रोककर तलाशी ली। टेंपो में सवार चारों आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। तलाशी के दौरान टेंपो से नकली सामान की बड़ी खेप बरामद हुई, जिसमें 345 लीटर मधुसूदन, 255 लीटर पतंजलि और 531 लीटर अमूल ब्रांड के नाम से पैक किया गया नकली घी शामिल था।


    ऐसे हुआ खुलासा

    पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर निलोठी एक्सटेंशन स्थित एक गोदाम पर छापा मारा, जहां से 2,000 किलोग्राम अतिरिक्त नकली टाटा नमक, वजन और पैकिंग मशीन, पाउच सीलिंग मशीन, सिलाई मशीन और बड़ी मात्रा में खाली पैकिंग सामग्री जब्त की गई। इस तरह कुल 5,000 किलोग्राम नकली टाटा नमक बरामद हुआ। पुलिस ने जब इस माल की जांच कराई तो टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने पुष्टि की कि बरामद नमक और पैकिंग सामग्री पूरी तरह नकली थी।


    मुनाफे का 50 फीसदी हिस्सा बांटते थे

    आरोपी रजत सिंघल उर्फ चिंटू और सुरेंद्र गुज्जर भी लंबे समय से थोक व्यापारी है जो नितिन के साथ मिलकर नकली उत्पादों की सप्लाई करते थे। रजत ग्राहकों से संपर्क और ऑर्डर जुटाने का काम करता था, जबकि सुरेंद्र बिक्री और नकद लेनदेन संभालता था। तीनों आपस में मुनाफे का 50 प्रतिशत हिस्सा बांटते थे। क्राइम ब्रांच अब आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के अन्य सदस्यों, सप्लाई चेन और नकली माल के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से नकली ब्रांडेड सामान की तस्करी पर बड़ा प्रहार हुआ है और आगे भी ऐसे रैकेट के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।


    गोदामों में स्टोर करते थे सामान

    मुख्य आरोपी 38 वर्षीय नितिन कुमार ने खुलासा किया कि वह पिछले 10 से 12 वर्षों से घरेलू सामान की थोक सप्लाई का काम कर रहा था। इसी दौरान उसकी पहचान नकली सामान बनाने वाले लोगों से हुई। बाद में उसने कंझावला औद्योगिक क्षेत्र में एक अवैध फैक्टरी स्थापित की, जहां नकली घी तैयार कर उसे अमूल, पतंजलि, मधुसूदन और मदर डेयरी जैसे नामी ब्रांडों की पैकिंग में भरकर बाजार में उतारा जाता था। तैयार माल को वह उत्तम नगर और डाबड़ी स्थित गोदामों में स्टोर कर स्थानीय बाजारों और साप्ताहिक बाजारों में सप्लाई करता था।


    लिवर, किडनी और पाचन तंत्र को खतरा
    दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. गिरीश त्यागी ने बताया कि नकली घी में मिलाए गए रसायन उपभोक्ताओं के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं। यदि रसायन न भी हों और वनस्पति तेल से देसी घी तैयार किया गया हो, तब भी इसका सेवन लिवर, किडनी और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे घी में अत्यधिक फैट होता है, जो लंबे समय तक उपयोग से अंगों पर अतिरिक्त दबाव डालता है और हृदय रोग का जोखिम बढ़ाता है। कमजोर इम्युनिटी के कारण बुजुर्ग और बच्चे इससे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, नकली नमक के सेवन से थायरॉयड से जुड़ी समस्याएं पैदा होने की आशंका रहती है।


    ऐसे पहचान करें

    – पैकिंग, प्रिंटिंग और रंगों की गुणवत्ता की जांच कर लें, ये अक्सर असली से भिन्न होते हैं।
    – स्पेलिंग या फॉन्ट में गड़बड़ी पर सतर्क हों
    – एमआरपी, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट देखें
    – बारकोड/क्यूआर कोड स्कैन कर पुष्टि करें
    – टूटी या ढीली सील का सामान न लें
    – बहुत सस्ती कीमत पर शक करें और दुकानदार से पूछताछ करें
    – संदेह होने पर कंपनी के कस्टमर केयर से पुष्टि करें