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  • अगस्त 2026 में ईवी बिक्री रिकॉर्ड 2.98 लाख यूनिट पार, बाजार हिस्सेदारी 12.3 प्रतिशत पहुंची, चारों सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन

    अगस्त 2026 में ईवी बिक्री रिकॉर्ड 2.98 लाख यूनिट पार, बाजार हिस्सेदारी 12.3 प्रतिशत पहुंची, चारों सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन

    नई दिल्ली ।भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार मजबूत हो रही है। अगस्त 2026 में देश में ईवी की खुदरा बिक्री 52.9 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ रिकॉर्ड 2,98,448 यूनिट पर पहुंच गई। इसके साथ कुल वाहन बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 12.3 प्रतिशत हो गई, जबकि अगस्त 2025 में यह 9.5 प्रतिशत थी।

    अगस्त में इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, यात्री वाहन और वाणिज्यिक वाहन, चारों प्रमुख श्रेणियों में अब तक की सबसे अधिक मासिक खुदरा बिक्री दर्ज की गई। आंकड़ों से संकेत मिलता है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रही है।

    इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री अगस्त में 67.05 प्रतिशत बढ़कर 1,83,204 यूनिट रही। हालांकि जुलाई 2026 में दर्ज 2,04,362 यूनिट की तुलना में अगस्त में बिक्री कुछ कम रही। इस श्रेणी में टीवीएस मोटर 48,938 यूनिट के साथ पहले स्थान पर रही। बजाज ऑटो ने 41,114 और एथर एनर्जी ने 28,757 यूनिट बेचीं। ओला इलेक्ट्रिक की बिक्री 13,852 यूनिट रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 29 प्रतिशत कम है। इलेक्ट्रिक दोपहिया की बाजार हिस्सेदारी 7.7 प्रतिशत से बढ़कर 10.7 प्रतिशत हो गई।

    इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की बिक्री 25.28 प्रतिशत बढ़कर 79,846 यूनिट पहुंच गई। इस श्रेणी में इलेक्ट्रिक वाहनों की पैठ 56.6 प्रतिशत से बढ़कर 65.3 प्रतिशत हो गई। बजाज ऑटो ने 13,833 यूनिट के साथ सबसे अधिक बिक्री की। महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी ने 12,806 और टीवीएस मोटर ने 4,415 यूनिट बेचीं।

    इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहन सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेगमेंट के रूप में सामने आए। अगस्त में इनकी बिक्री करीब तीन गुना बढ़कर 4,702 यूनिट रही, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 1,631 यूनिट था। बाजार हिस्सेदारी भी 2.06 प्रतिशत से बढ़कर 5.18 प्रतिशत हो गई। टाटा मोटर्स ने 1,416 यूनिट के साथ इस श्रेणी में बढ़त बनाए रखी। यूलर मोटर्स ने 849 और सैनी हेवी इंडस्ट्री इंडिया ने 605 यूनिट बेचीं।

    इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की बिक्री 51.89 प्रतिशत बढ़कर 30,696 यूनिट रही। इस श्रेणी में ईवी की बाजार हिस्सेदारी 5.8 प्रतिशत से बढ़कर 7.6 प्रतिशत हो गई। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने 13,158 यूनिट के साथ सबसे अधिक बिक्री दर्ज की। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 6,464 और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर इंडिया ने 4,622 यूनिट बेचीं। नई कंपनियों में विनफास्ट ऑटो इंडिया की बिक्री 2,199 यूनिट और टेस्ला इंडिया मोटर्स एंड एनर्जी की बिक्री 116 यूनिट रही।

    फाडा के अध्यक्ष साई गिरिधर ने अगस्त 2026 को भारतीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी उद्योग के इतिहास का सबसे बड़ा अगस्त महीना बताया। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहन सेगमेंट के प्रदर्शन को खास तौर पर उल्लेखनीय बताया और कहा कि फ्लीट विद्युतीकरण अब परीक्षण से आगे बढ़कर वास्तविक खरीद निर्णयों तक पहुंच गया है।

    उन्होंने कहा कि गैर-त्योहारी मौसम के बावजूद इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है, जबकि इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहन संरचनात्मक रूप से इलेक्ट्रिक श्रेणी में बदल चुके हैं। उनके अनुसार, ईवी की वृद्धि अब केवल सरकारी प्रोत्साहनों तक सीमित नहीं है। कम परिचालन लागत, बढ़ता चार्जिंग नेटवर्क, उपभोक्ताओं का बढ़ता विश्वास, पीएम ई-ड्राइव योजना और राज्यों की अनुकूल नीतियां मिलकर इस बदलाव को आगे बढ़ा रही हैं।

  • बाइक, कार, ट्रैक्टर और EV की बढ़ती मांग से ऑटो सेक्टर में उछाल, मई में रिटेल बिक्री 9.55 फीसदी बढ़ी

    बाइक, कार, ट्रैक्टर और EV की बढ़ती मांग से ऑटो सेक्टर में उछाल, मई में रिटेल बिक्री 9.55 फीसदी बढ़ी

    नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल बाजार ने मई 2026 में नई ऊंचाई हासिल करते हुए रिटेल बिक्री का रिकॉर्ड बनाया है। महंगाई, ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव और भीषण गर्मी जैसी चुनौतियों के बावजूद वाहन खरीदारी की मजबूत मांग देखने को मिली। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में ग्राहकों की सक्रिय भागीदारी ने ऑटो सेक्टर को मजबूती प्रदान की, जिसके परिणामस्वरूप कुल रिटेल बिक्री 25 लाख यूनिट के आंकड़े को पार कर गई।

    ऑटो डीलर नेटवर्क से जुड़े ताजा आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में देशभर में कुल 25.31 लाख से अधिक वाहनों की रिटेल बिक्री दर्ज की गई। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 9.55 फीसदी अधिक रही। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ता मांग में निरंतर सुधार, विवाह सीजन का प्रभाव और बेहतर वित्तपोषण विकल्पों ने बिक्री को गति दी है।

    मई का महीना आमतौर पर ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए अपेक्षाकृत धीमा माना जाता है, लेकिन इस बार स्थिति अलग रही। दोपहिया वाहनों, यात्री वाहनों, तीन-पहिया वाहनों और ट्रैक्टरों की बिक्री में उल्लेखनीय मजबूती देखने को मिली। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने और कृषि क्षेत्र से जुड़ी सकारात्मक उम्मीदों ने वाहन खरीदारी को प्रोत्साहन दिया।

    दोपहिया वाहन खंड ने बिक्री में सबसे बड़ा योगदान दिया। मई के दौरान 18 लाख से अधिक बाइक और स्कूटरों की बिक्री हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, कम ईंधन खर्च वाले वाहनों और इलेक्ट्रिक विकल्पों की बढ़ती लोकप्रियता ने इस श्रेणी को मजबूत आधार दिया। ईंधन की बढ़ती लागत के बीच उपभोक्ता अब अधिक किफायती और टिकाऊ विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

    यात्री वाहन श्रेणी में भी शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। कारों और एसयूवी की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। नए मॉडल लॉन्च, बेहतर फीचर्स और इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति बढ़ती रुचि ने ग्राहकों को आकर्षित किया। उद्योग जगत का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आय और उपभोक्ताओं का भरोसा इस वृद्धि के पीछे प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

    इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में भी लगातार तेजी बनी हुई है। खासकर इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ग्राहकों की ओर से ईंधन बचाने वाले और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों के प्रति बढ़ती रुचि स्पष्ट दिखाई दे रही है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी भारतीय ऑटो बाजार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।

    कॉमर्शियल वाहन और तीन-पहिया वाहन खंड में भी सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। माल ढुलाई, छोटे व्यवसायों और शहरी परिवहन गतिविधियों में बढ़ोतरी का असर इन श्रेणियों की बिक्री पर दिखाई दिया। वहीं ट्रैक्टरों की मांग ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत दिया है, जो आगामी कृषि सीजन के प्रति किसानों के सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

    उद्योग से जुड़े डीलरों का मानना है कि जून में भी मांग बनी रह सकती है। मानसून की प्रगति, ग्रामीण क्षेत्रों में नकदी प्रवाह और खरीफ सीजन की तैयारियां बाजार को अतिरिक्त समर्थन दे सकती हैं। हालांकि गर्मी, ईंधन कीमतों में संभावित बदलाव और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े लागत दबाव अभी भी चुनौतियां बने हुए हैं।

    ऑटो उद्योग के जानकारों का कहना है कि मई के आंकड़े भारतीय बाजार की मजबूत उपभोक्ता क्षमता को दर्शाते हैं। यदि मानसून सामान्य रहता है और आर्थिक गतिविधियां इसी तरह जारी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में भी ऑटोमोबाइल क्षेत्र की विकास गति बरकरार रहने की संभावना है।