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  • 17.29 करोड़ के नकली नोटों का नेटवर्क कितना बड़ा? NIA ने तेज की जांच, संदिग्ध लेनदेन भी दायरे में

    17.29 करोड़ के नकली नोटों का नेटवर्क कितना बड़ा? NIA ने तेज की जांच, संदिग्ध लेनदेन भी दायरे में

    सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जांच तेज कर दी है। स्थानीय स्तर पर जांच कर चुकी सात सदस्यीय एसआईटी ने अब तक जुटाए गए साक्ष्यों, दर्ज बयानों और बरामदगी से जुड़े दस्तावेजों वाली केस डायरी NIA को सौंप दी है। एजेंसी अब इन तथ्यों को अपनी जांच से जोड़कर नकली नोटों के स्रोत, आरोपियों की भूमिका और नेटवर्क के फैलाव का पता लगाने में जुटी है। संदिग्ध लेनदेन के साथ विदेशी कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।

    एसआईटी ने जुटाए थे बयान और साक्ष्य
    29 अगस्त को PNB के नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे ने 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने के मामले में तीन बैंक प्रबंधकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामला सामने आने के बाद शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की। DIG अभिषेक सिंह के निर्देश पर SSP अभिनंदन सिंह ने सात सदस्यीय SIT गठित की थी। SIT के साथ क्राइम ब्रांच ने भी आरोपियों तक पहुंचने और साक्ष्य जुटाने का काम किया।

    जांच के दौरान दर्ज किए गए बयान, बरामदगी का विवरण, सामने आए तथ्य और अन्य साक्ष्यों को केस डायरी में शामिल किया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद यह केस डायरी NIA को सौंप दी गई है। अब एजेंसी इन तथ्यों को अपनी जांच में मिले साक्ष्यों से मिलाकर देखेगी। इससे जांच में सामने आए नए बिंदुओं और संभावित कड़ियों का पता चलने की उम्मीद है।

    नेटवर्क और लेनदेन पर NIA की नजर
    NIA की जांच का अहम बिंदु यह पता लगाना है कि नकली नोटों का नेटवर्क आखिर किस स्तर तक फैला हुआ है। एजेंसी यह भी देख रही है कि इसके पीछे कोई संगठित गिरोह तो सक्रिय नहीं था। नकली नोटों के स्रोत के अलावा संदिग्ध वित्तीय लेनदेन भी जांच के दायरे में हैं।

    एसपी सिटी व्योम बिंदल के मुताबिक, करेंसी चेस्ट मामले में एसआईटी ने जांच की थी और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद केस डायरी NIA को सौंप दी गई है। अब पूरे मामले की जांच NIA कर रही है।

    NIA के एसपी ने पुलिस अधिकारियों से ली थी जानकारी
    9 सितंबर को NIA के एसपी वैभव सक्सेना ने पुलिस लाइन में SSP अभिनंदन सिंह और SP सिटी व्योम बिंदल से मुलाकात की थी। इस दौरान करेंसी चेस्ट मामले में अब तक हुई जांच के साथ पुराने नकली नोट के मामलों की जानकारी भी ली गई थी। NIA ने पहले पकड़े गए नकली नोटों से जुड़े मामलों को भी अपनी जांच में शामिल किया है। एजेंसी विदेशी कनेक्शन की संभावनाओं को भी खंगाल रही है।

    मुख्य सुरक्षा अधिकारी फिर करेंसी चेस्ट पहुंचे
    PNB की करेंसी चेस्ट में नकली नोट पहुंचने का स्रोत और वहां से असली करेंसी निकलने से जुड़ी कड़ियां अभी स्पष्ट नहीं हो सकी हैं। मामले की जांच NIA के अलावा SIT और बैंक स्तर पर भी की जा चुकी है। अभी तक एक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी हुई है, जबकि दो आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

    इसी बीच शुक्रवार को PNB की मुख्य सुरक्षा अधिकारी सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट पहुंचीं। उन्होंने मामले से जुड़े बिंदुओं पर जांच-पड़ताल की और इसके बाद वापस लौट गईं।

    नकुड़ शाखा में किसान को मिला 500 का नकली नोट
    17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के मामले की जांच के बीच नकुड़ कस्बे की तहसील रोड स्थित PNB शाखा से ग्राहक को 500 रुपये का संदिग्ध नोट दिए जाने का मामला सामने आया है। छापुर गांव निवासी किसान अंकित का आरोप है कि चेक के जरिये बैंक से निकाली गई रकम में यह नोट मिला था।

    अंकित के मुताबिक, वह अपने साथी संजीव निवासी अंबेहटी के साथ बैंक से रुपये निकालने पहुंचे थे। दोनों ने चेक के माध्यम से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये निकाले। कैशियर ने मशीन से रकम गिनने के बाद उन्हें पैसे दिए। इसके बाद दोनों एक रेस्टोरेंट पहुंचे, जहां संजीव ने रकम में से 15 हजार रुपये एक व्यक्ति को दिए। इसी दौरान दोबारा नोट गिनते समय 500 रुपये का एक नोट संदिग्ध लगा। जांच कराने पर उसे नकली बताया गया।

    इसके बाद दोनों बैंक शाखा पहुंचे और शाखा प्रबंधन से नोट बदलने की मांग की। आरोप है कि शाखा प्रबंधक और कैशियर ने शुरुआत में यह मानने से इनकार कर दिया कि नोट बैंक से दिया गया था। इससे शाखा में काफी देर तक हंगामा हुआ। अंकित के अनुसार, बाद में बैंक कर्मचारियों ने संदिग्ध नोट वापस लेकर उसकी जगह दूसरा 500 रुपये का नोट दे दिया।

    शाखा प्रबंधक संजीव अग्रवाल से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि वह फिलहाल बाहर हैं। उन्होंने सोमवार को लौटने के बाद मामले में जानकारी देने की बात कही।

    क्या दोनों मामलों का आपस में संबंध है?
    नकुड़ शाखा में ग्राहक को मिले 500 रुपये के संदिग्ध नोट का मामला जिले की PNB करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों की जांच के बीच सामने आया है। इससे सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई कड़ी है। हालांकि, फिलहाल स्थानीय शाखा से मिले नोट और करेंसी चेस्ट में बरामद जाली नोटों के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। दोनों मामलों के बीच कोई कनेक्शन है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • PNB करेंसी चेस्ट में नकली नोट: CCTV में हाउस कीपर गड्डी से नोट निकालता दिखा, डेढ़ साल से यहीं था तैनात

    PNB करेंसी चेस्ट में नकली नोट: CCTV में हाउस कीपर गड्डी से नोट निकालता दिखा, डेढ़ साल से यहीं था तैनात


    सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की घंटाघर स्थित करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोटों की रकम बढ़कर 17 करोड़ 29 लाख रुपए हो गई है। मामले में पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल पर भी पुलिस की जांच का शिकंजा कस गया है। उसके परिजनों का दावा है कि मंगलवार देर रात पुलिस उसे पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। हालांकि, पुलिस ने उसकी हिरासत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    जांच के दौरान बालेली गांव निवासी विशाल की एक CCTV फुटेज सामने आई है, जिसमें वह करेंसी की गड्डी से नोट निकालता हुआ दिखाई दे रहा है। विशाल करीब चार साल से पीएनबी में सफाई कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा था और पिछले डेढ़ साल से करेंसी चेस्ट में पार्ट टाइम हाउस कीपर के रूप में तैनात था।

    दो FIR में दर्ज हुआ मामला
    करेंसी चेस्ट में हुई गड़बड़ी को लेकर सदर थाने में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराई गई हैं। एक FIR में नकली नोट मिलने का मामला है, जबकि दूसरी में 4.30 लाख रुपए गायब होने की जानकारी दी गई है।

    विशाल के पिता बीरम सिंह के मुताबिक, मंगलवार देर रात पुलिस टीम उनके घर पहुंची और विशाल को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। उन्होंने बताया कि परिवार की ओर से बार-बार पूछने के बावजूद पुलिस टीम ने ज्यादा जानकारी नहीं दी।

    परिवार के कई सदस्य बैंकिंग क्षेत्र में
    बीरम सिंह ने बताया कि उनका परिवार खेती-बाड़ी करता है। उनका बड़ा बेटा और बहू पीएनबी की सहारनपुर शाखा में तैनात हैं। उनसे छोटा बेटा ग्रामीण बैंक में काम करता है, जबकि एक अन्य बेटा निजी नौकरी करता है। विशाल परिवार का सबसे छोटा बेटा है।

    परिजनों के अनुसार, विशाल करीब चार साल से पीएनबी में सफाई कर्मचारी के पद पर काम कर रहा था। करीब डेढ़ साल पहले उसकी तैनाती करेंसी चेस्ट में की गई थी।

    29 लाख के नकली नोट और मिले
    पीएनबी की करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलने का आंकड़ा बुधवार को करीब 29 लाख रुपए और बढ़ गया। इससे नकली नोटों की कुल रकम अब 17 करोड़ 29 लाख रुपए तक पहुंच गई है।

    शुरुआत में करेंसी चेस्ट से 7 करोड़ 40 लाख रुपए के नोट नकली पाए गए थे। इसके बाद यह आंकड़ा बढ़कर 17 करोड़ रुपए हुआ और अब करीब 29 लाख रुपए के नकली नोट और मिलने के बाद कुल रकम 17.29 करोड़ रुपए हो गई है।

    मामले की जांच के लिए बुधवार को लखनऊ से आरबीआई के कई अधिकारी और पांच सदस्यीय फॉरेंसिक टीम भी सहारनपुर पहुंची। टीम करीब 11 बजे सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट शाखा पहुंची और अन्य जांच टीमों के साथ मिलकर देर शाम तक नोटों की गिनती और जांच करती रही।

    एसपी सिटी व्योम बिंदल ने बताया कि बैंक की ओर से मिली जानकारी के अनुसार नकली नोटों की कुल संख्या 17 करोड़ 29 लाख रुपए तक पहुंच गई है। मामले की गहन जांच की जा रही है और फरार आरोपियों के घर भी खंगाले गए हैं।

    आरबीआई, पीएनबी, SIT और फॉरेंसिक टीम जांच में जुटी
    करेंसी चेस्ट में नकली नोट मिलने के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आरबीआई, पीएनबी, एसआईटी और फॉरेंसिक टीम अपने-अपने स्तर पर मामले की जांच कर रही हैं। जिन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी, उनके स्थान पर नया स्टाफ भी तैनात किया गया है।

    पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल से पूछताछ किए जाने की बात सामने आ रही है, हालांकि पुलिस की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं, मामले की जांच के लिए बृहस्पतिवार को एनआईए की टीम के भी पहुंचने की संभावना जताई गई है।

    मेरठ के पीएनबी हेड ऑफिस में भी जांच
    सहारनपुर करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोटों की जांच का दायरा मेरठ तक पहुंच गया है। बुधवार को मेरठ बाईपास स्थित वेदव्यासपुरी के पीएनबी हेड ऑफिस का मुख्य द्वार बंद कर शाम तक जांच की गई। पीएनबी के जीएम अजय कुमार टिबरेवाल के पीए सचिन बिश्नोई ने कहा कि मामले से जुड़ी सभी जानकारी सहारनपुर से ही दी जा सकती है।

    स्ट्रांग रूम में प्रवेश की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
    फॉरेंसिक टीम करेंसी चेस्ट में मौजूद फिंगरप्रिंट, CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच इस बिंदु पर भी केंद्रित है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट स्ट्रांग रूम तक कैसे पहुंचे।

    बताया गया है कि करेंसी चेस्ट के स्ट्रांग रूम में प्रवेश के लिए कई औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। प्रवेश से पहले फिंगरप्रिंट स्कैन किया जाता है और सत्यापन के बाद ही आगे की प्रक्रिया होती है। स्ट्रांग रूम की दो चाबियां अलग-अलग लोगों के पास रहती हैं और उसे खोलने के लिए दोनों चाबियों का इस्तेमाल जरूरी होता है।

    दोनों चाबियां लगाए जाने और दोनों संबंधित व्यक्तियों के फिंगरप्रिंट स्कैन होने के बाद ही स्ट्रांग रूम में प्रवेश संभव होता है। फॉरेंसिक टीम यह पता लगाने में जुटी है कि नकली नोट रखने के लिए इस पूरी सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं की गई।

    इसके अलावा नकली नोटों में इस्तेमाल कागज, स्याही और प्रिंटर की भी जांच की जा रही है। जांच की जिम्मेदारी पीएनबी हेड ऑफिस और आरबीआई की टीम ने संभाली हुई है।

    नोडल अधिकारी की शिकायत पर दर्ज हुई थीं FIR
    करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ रुपए के जाली नोट मिलने के मामले में नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे की ओर से सदर थाने में दो अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।

    इन मामलों में वरिष्ठ प्रबंधक मंडल कार्यालय रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक शर्मा, करेंसी चेस्ट खरा बाजार जगाधरी के प्रबंधक अमित कुमार और पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल को आरोपी बनाया गया है।

  • UP : ₹17 करोड़ की जाली करेंसी का खुला राज, PNB के करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोट, 3 अधिकारी सस्पेंड

    UP : ₹17 करोड़ की जाली करेंसी का खुला राज, PNB के करेंसी चेस्ट में मिले नकली नोट, 3 अधिकारी सस्पेंड

    सहारनपुर। सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट में करीब 17 करोड़ रुपये मूल्य के जाली नोट मिलने से हड़कंप मच गया है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी का खुलासा महज 4.30 लाख रुपये की कमी से हुआ। आरबीआई के जयपुर कार्यालय भेजी गई रकम की जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद बैंक की टीम ने करेंसी चेस्ट की जांच शुरू की, जिसमें एक-एक नोट की पड़ताल के दौरान नकली नोटों का बड़ा जखीरा सामने आया।

    11.50 करोड़ रुपये भेजे गए थे जयपुर

    सहारनपुर में पीएनबी की करीब 72 शाखाएं हैं और दो करेंसी चेस्ट संचालित होते हैं। इनमें एक घंटाघर के पास सोफिया मार्केट और दूसरा गंगोह में है। 5 अगस्त से सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट से 11.50 करोड़ रुपये आरबीआई के जयपुर कार्यालय भेजे गए थे। इसमें सड़े-गले और कटे-फटे नोट भी शामिल थे।

    जयपुर में जमा रकम की जांच के दौरान अधिकारियों को 4,30,900 रुपये की कमी मिली। इसकी जानकारी मेरठ कार्यालय को दी गई। इसके बाद बैंक मुख्यालय से टीम सहारनपुर पहुंची और करेंसी चेस्ट में रखी रकम की जांच शुरू की गई।

    पहले मिले ₹7.40 करोड़ के नकली नोट

    जांच टीम ने करेंसी चेस्ट में रखे नोटों की बारीकी से जांच शुरू की। शुरुआती पड़ताल में करीब 7.40 करोड़ रुपये मूल्य के जाली नोट मिलने की जानकारी सामने आई। जांच आगे बढ़ी तो नकली नोटों की संख्या और रकम भी बढ़ती गई।

    बैंक की टीम के मुताबिक, सोमवार देर रात तक करीब 17 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने का दावा किया गया है। जांच अभी जारी है, इसलिए रकम और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    4-5 दिन से चल रही नोटों की जांच

    करेंसी चेस्ट में रखे नोटों की जांच पिछले चार-पांच दिनों से चल रही है। मेरठ और दिल्ली स्थित बैंक मुख्यालय से पहुंची टीमें एक-एक नोट की पड़ताल कर रही हैं। इतनी बड़ी मात्रा में नकली करेंसी मिलने के बाद बैंक के स्थानीय अधिकारियों से लेकर मुख्यालय तक हड़कंप मचा हुआ है।

    करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे नकली नोट?

    इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नकली करेंसी बैंक के करेंसी चेस्ट तक पहुंची कैसे। बैंक में रकम जमा होने से पहले नोटों की जांच की जाती है। ऐसे में जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि असली नोटों के बंडलों में नकली नोट किस स्तर पर शामिल हुए और वे करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे।

    बड़े नेटवर्क की आशंका भी

    करीब 17 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने के बाद किसी बड़े नेटवर्क की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नकली नोट कहां तैयार किए गए, इनमें किस तरह के कागज और स्याही का इस्तेमाल हुआ और इन्हें असली नोटों के बीच किस स्तर पर मिलाया गया।

    तीन अधिकारी निलंबित, हाउसकीपर हटाया

    पीएनबी की मुख्य बैंक प्रबंधक निशा सिंह के मुताबिक, करेंसी चेस्ट में जाली नोट मिलने के बाद मुख्यालय से टीम भेजी गई है और जांच जारी है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जबकि पार्ट टाइम हाउसकीपर को हटा दिया गया है।

    जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट करेंसी चेस्ट तक कैसे पहुंचे और इस पूरे मामले में किन लोगों की भूमिका सामने आती है।

  • इंदौर में 200 रुपये का नकली नोट चलाने पहुंचा युवक धराया 40 हजार के जाली नोट और प्रिंटिंग मशीन बरामद

    इंदौर में 200 रुपये का नकली नोट चलाने पहुंचा युवक धराया 40 हजार के जाली नोट और प्रिंटिंग मशीन बरामद


    इंदौर । इंदौर में 200 रुपये का नकली नोट चलाने की एक कोशिश ने जाली करेंसी के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। एक युवक रेस्टोरेंट में नकली नोट देकर भुगतान करने पहुंचा था लेकिन संचालक की सतर्कता के कारण उसकी चालाकी सफल नहीं हो सकी। पूछताछ के बाद पुलिस ने उसके दो साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से 40 हजार रुपये के नकली नोट और नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली प्रिंटिंग मशीन बरामद की गई है। पुलिस का कहना है कि गिरोह लंबे समय से नकली नोट तैयार कर उन्हें बाजार में खपाने की कोशिश कर रहा था।

    गांधी नगर थाना पुलिस के अनुसार 25 जून को राजनगर स्थित सांवरिया रेस्टोरेंट पर संचालक यशवंत यादव मौजूद थे। इसी दौरान दीपक नाम का युवक वहां पहुंचा और भुगतान के लिए 200 रुपये का नोट दिया। नोट को देखते ही संचालक को उस पर शक हुआ। उन्होंने कर्मचारियों की मदद से युवक को वहीं रोक लिया और तत्काल पुलिस को सूचना दी।

    पुलिस पूछताछ में दीपक ने अपने साथी संजय का नाम बताया। इसके बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए संजय और उसके साथी रवि को भी गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से 40 हजार रुपये के नकली नोट और नोट छापने में इस्तेमाल होने वाली प्रिंटिंग मशीन जब्त की गई। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने नकली नोट बाजार में चलाए हैं और इनके संपर्क में कौन कौन लोग थे।

    जांच में सामने आया कि दीपक और संजय पहले एक शराब दुकान पर सेल्समैन के रूप में साथ काम करते थे। वहीं दोनों की पहचान हुई थी। इसी दौरान संजय ने दीपक को बताया था कि उसका एक परिचित बिल्कुल असली जैसे दिखने वाले नकली नोट तैयार करता है। कुछ समय बाद दीपक ने नौकरी छोड़ दी और ट्रक ड्राइवर बन गया जबकि संजय इंदौर आ गया। बाद में दोनों के बीच फिर संपर्क हुआ और नकली नोटों के कारोबार की योजना बनाई गई।

    पुलिस के अनुसार दोनों के बीच ऐसा सौदा तय हुआ था जिसमें एक हजार रुपये देने पर चार हजार रुपये के नकली नोट उपलब्ध कराए जाते थे। दीपक पहली बार ही नकली नोट लेकर उन्हें बाजार में चलाने निकला था लेकिन रेस्टोरेंट संचालक की सतर्कता के कारण वह पकड़ा गया और पूरा मामला सामने आ गया।

    जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी संजय के खिलाफ पहले से ही एसटीएफ में नकली नोटों से जुड़े दो मामले दर्ज हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि गिरोह के अन्य सदस्य कौन हैं और नकली नोट तैयार करने का सामान कहां से लाया जाता था। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितने लोगों को इस नेटवर्क के जरिए जाली करेंसी उपलब्ध कराई गई। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

  • बिहार में पकड़ा जाली नोटों का सरगना 'लादेन', हथियार तस्करों से कनेक्शन का संदेह

    बिहार में पकड़ा जाली नोटों का सरगना 'लादेन', हथियार तस्करों से कनेक्शन का संदेह


    मधुबनी । नेपाल के रास्ते पाकिस्तान में छपी नकली भारतीय मुद्रा भारत में लाकर बाजार में खपाने वाले गिरोह के सरगना अबुल इनाम उर्फ लादेन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार देर रात बासोपट्टी और नगर थाने की संयुक्त कार्रवाई में उसे कोतवाली चौक स्थित आवास से दबोचा गया।गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने लादेन से कई घंटों तक पूछताछ की। इस दौरान गिरोह के नेटवर्क और विदेशी संपर्कों से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए। पुलिस अब पाकिस्तानी नागरिक अंसारी उर्फ मो. मस्तान की तलाश कर रही है। जयनगर डीएसपी राघव दयाल ने बताया कि यह कार्रवाई पाकिस्तान में छपी जाली भारतीय मुद्रा की बरामदगी के मामले में हुई है।

    गिरोह का खुलासा मार्च 2025 में
    पुलिस के अनुसार, 2 मार्च 2025 को जाली नोट खपाने वाले गिरोह के तीन सदस्य रशीद जमाल, हाजी मोहम्मद ओवैस और ताहिर को गिरफ्तार किया गया था। उनके कब्जे से 13,800 रुपये की नकली भारतीय मुद्रा, 8,000 रुपये के नकली नेपाली नोट और कई संदिग्ध दस्तावेज मिले थे। रशीद जमाल को कोतवाली चौक से, हाजी मोहम्मद ओवैस को पंडौल के बिठुआर से और ताहिर को जयनगर के बलडीहा से पकड़ा गया था। इनकी पूछताछ के दौरान अबुल इनाम का नाम सामने आया।

    हथियार तस्करों और सोना व्यापारी से कनेक्शन

    पुलिस को संदेह है कि अबुल इनाम का गिरोह अवैध हथियार तस्करों और सोना व्यापारियों से भी जुड़े हुए हैं। डीएसपी राघव दयाल ने बताया कि बरामद मोबाइल में अवैध हथियार और सोने के व्यापार से जुड़े कई सबूत मिले हैं। पूर्व में गिरफ्तार ताहिर के मोबाइल में देशी-विदेशी पिस्टल और सोने के बिस्किट की तस्वीरें भी मिली हैं। गिरफ्तारी के बाद लादेन को मंगलवार शाम मधुबनी व्यवहार न्यायालय में पेश किया गया, जहां न्यायालय ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

    पुलिस जांच और आपराधिक इतिहास

    मधुबनी के एसपी योगेद्र कुमार ने बताया कि अबुल इनाम के खिलाफ बासोपट्टी थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर कार्रवाई की गई। पुलिस के पास उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं और उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है, ताकि गिरोह की अन्य कड़ियों को भी जोड़ा जा सके।