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  • MP: भोपाल के हमीदिया अस्पताल में QR कोड वाले फर्जी डॉक्टर ने कई लोगों को लूटा… ऐसा हुआ भंडाफोड़

    MP: भोपाल के हमीदिया अस्पताल में QR कोड वाले फर्जी डॉक्टर ने कई लोगों को लूटा… ऐसा हुआ भंडाफोड़


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के भोपाल (Bhopal) में हमीदिया अस्पताल (Hamidia Hospital) से एक सनसनीखेज धोखाधड़ी का मामला सामने आया । यहां एक जालसाज (Fraudulent) डॉक्टर ( Doctor) बनकर मरीजों के परिजनों को लूट रहा था। आरोपी जितेंद्र खागरे केवल फोन पर ही डॉक्टर नहीं बनता था, बल्कि अस्पताल के भीतर जाकर परिजनों से आमने-सामने मिलता था और उनका भरोसा जीतकर इलाज के नाम पर पैसे ऐंठता था। जांच में पता चला है कि इस बड़े घोटाले में कथित तौर पर अस्पताल के ही कुछ कर्मचारी शामिल थे, जो मरीजों की निजी जानकारी, वार्ड नंबर और बीमारी की रिपोर्ट आरोपी को लीक करते थे। बदले में इन कर्मचारियों को 20 प्रतिशत तक का कमीशन मिलता था।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक जालसाजी का तरीका बेहद शातिर थी। वह परिजनों को फोन कर डराता था कि उनका मरीज खतरे में है और जल्दी इलाज या टेस्ट के लिए तुरंत पैसे जमा करने होंगे। एक मामले में उसने दिल की बीमारी से जूझ रहे बच्चे के पिता को एक महीने तक इंतजार करने के बजाय तुरंत इकोकार्डियोग्राम कराने का झांसा देकर 10,000 रुपये ऐंठ लिए। उसने पिता से कहा कि आप पैसे भेजिए और मैं तुरंत टेस्ट करवा दूंगा। बाद में मैं एंबुलेंस का इंतजाम भी करवा दूंगा। एक अन्य पीड़ित को उसने डराया कि उसकी गर्भवती पत्नी और नवजात की जान जोखिम में है और उनसे हजारों रुपये ट्रांसफर करवा लिए। पुलिस को मिले ऑडियो रिकॉर्डिंग से खुलासा हुआ है कि वह क्यूआर कोड भेजकर तुरंत पेमेंट का दबाव बनाता था और पैसे मिलते ही नंबर ब्लॉक कर देता था।


    10 परिवारों के साथ ठगी

    अस्पताल प्रशासन को लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस और साइबर टीम ने आरोपी को इंदौर से गिरफ्तार कर लिया है। अब तक कम से कम 10 परिवारों के साथ ठगी की बात सामने आई है, जिनमें से तीन पीड़ितों ने 30,000 रुपये से अधिक के नुकसान की बात की है। पुलिस अब उन संदिग्ध अस्पताल कर्मचारियों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने डेटा लीक कर इस गैंग की मदद की। अस्पताल के अधीक्षक ने लोगों को सचेत किया है कि कोई भी असली डॉक्टर या स्टाफ कभी क्यूआर कोड भेजकर पैसे नहीं मांगता, और ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत सुरक्षा विभाग या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।

    वहीं पुलिस प्रमुख (सीएसपी) अनिल बाजपेयी ने कहा, हमने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है जो हमीदिया अस्पताल में भर्ती मरीजों के रिश्तेदारों से डॉक्टर बनकर संपर्क करता था और उन्हें ठगता था। हमें अधीक्षक से शिकायत मिली, जिसके आधार पर कोहेफिजा पुलिस स्टेशन और क्राइम ब्रांच की टीम ने गिरफ्तारी की। अपने बयान में उसने बताया कि अस्पताल के कर्मचारियों ने उसे जानकारी दी थी। संभव है कि वे एक गैंग के रूप में काम कर रहे थे।

  • मेदांता के नाम पर किडनी डोनेशन का झांसा, फर्जी डॉक्टर बन महिला ने मांगे 3 करोड़, साइबर ठगी का बड़ा खुलासा

    मेदांता के नाम पर किडनी डोनेशन का झांसा, फर्जी डॉक्टर बन महिला ने मांगे 3 करोड़, साइबर ठगी का बड़ा खुलासा

    नई दिल्ली।
    गुरुग्राम में साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसमें एक महिला ने खुद को देश के प्रतिष्ठित मेदांता दी मेडिसिटी अस्पताल की डॉक्टर बताकर लोगों को किडनी डोनेशन के बदले तीन करोड़ रुपये देने का झांसा दिया। आरोपी महिला की पहचान प्रिया संतोष के रूप में हुई है जो सोशल मीडिया फर्जी वेबसाइटों और वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए लोगों से संपर्क कर रही थी। मेदांता अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संजय दुरानी की शिकायत पर सदर थाना पुलिस ने आरोपी महिला और उसके अज्ञात साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि आरोपी महिला ने अस्पताल के नाम और लोगो का अवैध इस्तेमाल कर एक फर्जी वेबसाइट तैयार की थी। इस वेबसाइट पर दावा किया गया था कि मेदांता अस्पताल को किडनी की सख्त जरूरत है और जो व्यक्ति अपनी किडनी डोनेट करेगा उसे इसके बदले तीन करोड़ रुपये दिए जाएंगे। लोगों का भरोसा जीतने के लिए आरोपी खुद को मेदांता की डॉक्टर बताती थी और फर्जी स्टाफ आईडी भी दिखाती थी।पुलिस के अनुसार यह गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए जरूरतमंद या आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को टारगेट करता था। उन्हें बड़ी रकम का लालच देकर पहले रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर पैसे ऐंठे जाते थे और फिर अलग-अलग बहानों से और रकम मांगी जाती थी। इस ठगी का पर्दाफाश तब हुआ जब एक महिला प्रतीक्षा पुजारी इस जाल में फंस गई।

    पीड़िता प्रतीक्षा पुजारी ने बताया कि प्रिया संतोष ने खुद को मेदांता की डॉक्टर बताकर उससे संपर्क किया और किडनी डोनेशन के बदले तीन करोड़ रुपये देने का वादा किया। शुरुआत में उससे पंजीकरण शुल्क के तौर पर आठ हजार रुपये लिए गए। इसके बाद ठगों ने उससे बीस हजार रुपये और जमा करने को कहा। जब महिला को संदेह हुआ तो उसने सीधे मेदांता अस्पताल प्रशासन से संपर्क किया। यहीं से पूरा मामला उजागर हो गया।अस्पताल प्रशासन ने तुरंत स्पष्ट किया कि प्रिया संतोष नाम की कोई भी डॉक्टर मेदांता में कार्यरत नहीं है और न ही अस्पताल किसी प्रकार के किडनी डोनेशन के बदले पैसे देने जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी द्वारा दिखाई गई स्टाफ आईडी पूरी तरह फर्जी थी और वेबसाइट भी नकली थी।

    मेदांता अस्पताल की ओर से कहा गया है कि यह गिरोह न केवल आम लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रहा है बल्कि अस्पताल की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि ऐसे किसी भी झांसे में न आएं और संदिग्ध कॉल वेबसाइट या मैसेज की तुरंत पुलिस को सूचना दें।फिलहाल गुरुग्राम पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी महिला व उसके अन्य साथियों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े और भी लोग सामने आ सकते हैं।