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  • राजगढ़ में मिलावट और स्वास्थ्य संकट पर सांसद की चेतावनी, 27 बच्चों में गंभीर बीमारी का दावा

    राजगढ़ में मिलावट और स्वास्थ्य संकट पर सांसद की चेतावनी, 27 बच्चों में गंभीर बीमारी का दावा

    राजगढ़ में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सामने आए बयान ने पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा छेड़ दी है। इस कार्यक्रम में सांसद रोडमल नागर ने अपने संबोधन के दौरान मिलावटी खाद्य पदार्थों, नकली दूध और खेती में बढ़ते रासायनिक उपयोग को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार, यह स्थिति केवल एक सामाजिक समस्या नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ गंभीर संकट बनती जा रही है।

    सांसद ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में गांव और शहर दोनों ही क्षेत्रों में मिलावट का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से दूध और दैनिक उपयोग की सब्जियों में हो रही कथित मिलावट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर डाल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ स्थानों पर फसलों को जल्दी तैयार करने और उत्पादन बढ़ाने के लिए अनावश्यक रसायनों का उपयोग किया जा रहा है, जो लंबे समय में मिट्टी और मानव शरीर दोनों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

    अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक गंभीर दावा करते हुए बताया कि उनकी कॉलोनी में पिछले चार वर्षों में 27 बच्चों को ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ा है। इस बयान ने वहां मौजूद लोगों को चिंतित कर दिया और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया। हालांकि इस दावे को लेकर किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन इसने स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरणीय कारणों पर बहस को जरूर तेज कर दिया है।

    सांसद ने आगे कहा कि मिलावट का यह बढ़ता कारोबार केवल आर्थिक लालच का परिणाम है, जो समाज के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं भी नकली दूध या मिलावटी खाद्य पदार्थ बनाए जाने की जानकारी मिले तो उसे तुरंत प्रशासन तक पहुंचाया जाए ताकि इस पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि इस समस्या को केवल सरकार के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि समाज को भी जिम्मेदारी निभानी होगी।

    उन्होंने सब्जियों और दालों में होने वाली कथित मिलावट पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, आज के समय में कुछ उत्पादों को तेजी से बढ़ाने के लिए असामान्य तरीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे आम जनता के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बाजार में उपलब्ध कई खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर अब सवाल उठने लगे हैं, जो एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

    कृषि क्षेत्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि किसान अधिक उत्पादन की होड़ में रासायनिक खाद और यूरिया का अत्यधिक उपयोग कर रहे हैं, जिससे भूमि की गुणवत्ता धीरे-धीरे खराब हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले वर्षों में खेती की जमीन की उत्पादकता और स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    पूरे बयान के बाद क्षेत्र में मिलावट, स्वास्थ्य और कृषि पद्धतियों को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर जहां लोग इन मुद्दों पर चिंता जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि इन दावों की वास्तविकता और वैज्ञानिक आधार पर आगे क्या स्थिति सामने आती है।

  • साबरकांठा में ‘जहर का कारोबार’: डिटर्जेंट-यूरिया मिलाकर 5 साल से बन रहा था नकली दूध

    साबरकांठा में ‘जहर का कारोबार’: डिटर्जेंट-यूरिया मिलाकर 5 साल से बन रहा था नकली दूध


    नई दिल्ली। गुजरात के साबरकांठा जिले में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यहां डिटर्जेंट, यूरिया और अन्य खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल कर नकली दूध और छाछ बनाने वाली एक फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया है, जो पिछले करीब पांच वर्षों से अवैध रूप से संचालित हो रही थी। इस कार्रवाई में अधिकारियों ने करीब 71 लाख रुपये का सामान जब्त किया है और एक नाबालिग समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

    यह छापेमारी श्री सत्य डेयरी प्रोडक्ट्स नाम की यूनिट पर की गई, जहां कथित तौर पर पानी, मिल्क पाउडर, कास्टिक सोडा, रिफाइंड पामोलिन तेल, सोयाबीन तेल, डिटर्जेंट पाउडर और यूरिया खाद मिलाकर बड़े पैमाने पर नकली दूध तैयार किया जा रहा था। यह मिलावटी दूध आसपास के कई गांवों में पाउच में पैक कर सप्लाई किया जाता था, जिससे हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा था।

    300 लीटर असली दूध से बनाते थे 1800 लीटर नकली दूध

    जांच में सामने आया कि आरोपी बेहद संगठित तरीके से इस धंधे को चला रहे थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आरोपी रोजाना लगभग 300 लीटर असली दूध का इस्तेमाल करते थे। इसमें विभिन्न केमिकल और पाउडर मिलाकर वे 1,700 से 1,800 लीटर तक नकली दूध तैयार कर लेते थे। यानी कम मात्रा में असली दूध को आधार बनाकर उसकी मात्रा छह गुना तक बढ़ा दी जाती थी। इसके बाद इस दूध को पाउच में पैक कर गांव-गांव पहुंचाया जाता था, जहां आम लोग इसे असली समझकर इस्तेमाल करते थे। इसी तरह मिलावटी छाछ भी तैयार की जाती थी, जिससे यह कारोबार और अधिक फैल गया था।

    छापे में मिली खतरनाक सामग्री

    लोकल क्राइम ब्रांच, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी FSL और फूड एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट की संयुक्त टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर इस फैक्ट्री पर कार्रवाई की। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में खतरनाक केमिकल और मिलावट में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया गया। जब्त किए गए सामान में 450 किलो व्हे पाउडर, 625 किलो स्किम्ड मिल्क पाउडर, 300 किलो प्रीमियम SMP पाउडर, यूरिया खाद, कास्टिक सोडा, डिटर्जेंट पाउडर, सोयाबीन तेल और पामोलिन तेल शामिल हैं। इसके अलावा मौके से 1,962 लीटर तैयार मिलावटी दूध और 1,180 लीटर मिलावटी छाछ भी बरामद की गई, जिन्हें बाजार में भेजने की तैयारी थी।  अधिकारियों के अनुसार, इन केमिकल्स का इस्तेमाल दूध की मोटाई, झाग और प्रोटीन की मात्रा को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए किया जाता था, ताकि देखने में यह असली लगे और ग्राहक आसानी से धोखा खा जाएं।

    स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिटर्जेंट, यूरिया और कास्टिक सोडा जैसे तत्वों का सेवन शरीर के लिए बेहद खतरनाक होता है। लंबे समय तक ऐसे मिलावटी दूध का सेवन करने से पेट, किडनी और लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह और भी ज्यादा हानिकारक साबित हो सकता है।

    पांच साल से चल रहा था गोरखधंधा

    जांच में यह भी सामने आया है कि यह फैक्ट्री करीब पांच वर्षों से लगातार चल रही थी। इतने लंबे समय तक इस यूनिट का संचालन होना इस बात का संकेत है कि यह नेटवर्क काफी संगठित और योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा था। गांवों में इसकी नियमित सप्लाई के कारण इसका दायरा भी काफी बड़ा हो गया था। छापेमारी के दौरान फैक्ट्री से दूध बनाने और पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण भी बरामद किए गए। अधिकारियों ने मौके पर ही यूनिट को सील कर दिया है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

    एक नाबालिग समेत पांच गिरफ्तार

    इस मामले में एक नाबालिग सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस धंधे से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे और सप्लाई चेन कितनी दूर तक फैली हुई थी। जांच के दौरान और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। साथ ही, जिन इलाकों में यह दूध सप्लाई किया गया, वहां लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मिलावट के खिलाफ सख्ती जारी

    फूड एंड ड्रग्स विभाग ने साफ किया है कि इस तरह की अवैध गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा। खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि आम लोगों की सेहत से कोई समझौता न हो।