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  • 17.29 करोड़ के नकली नोटों का नेटवर्क कितना बड़ा? NIA ने तेज की जांच, संदिग्ध लेनदेन भी दायरे में

    17.29 करोड़ के नकली नोटों का नेटवर्क कितना बड़ा? NIA ने तेज की जांच, संदिग्ध लेनदेन भी दायरे में

    सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जांच तेज कर दी है। स्थानीय स्तर पर जांच कर चुकी सात सदस्यीय एसआईटी ने अब तक जुटाए गए साक्ष्यों, दर्ज बयानों और बरामदगी से जुड़े दस्तावेजों वाली केस डायरी NIA को सौंप दी है। एजेंसी अब इन तथ्यों को अपनी जांच से जोड़कर नकली नोटों के स्रोत, आरोपियों की भूमिका और नेटवर्क के फैलाव का पता लगाने में जुटी है। संदिग्ध लेनदेन के साथ विदेशी कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।

    एसआईटी ने जुटाए थे बयान और साक्ष्य
    29 अगस्त को PNB के नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे ने 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने के मामले में तीन बैंक प्रबंधकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामला सामने आने के बाद शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस ने की। DIG अभिषेक सिंह के निर्देश पर SSP अभिनंदन सिंह ने सात सदस्यीय SIT गठित की थी। SIT के साथ क्राइम ब्रांच ने भी आरोपियों तक पहुंचने और साक्ष्य जुटाने का काम किया।

    जांच के दौरान दर्ज किए गए बयान, बरामदगी का विवरण, सामने आए तथ्य और अन्य साक्ष्यों को केस डायरी में शामिल किया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद यह केस डायरी NIA को सौंप दी गई है। अब एजेंसी इन तथ्यों को अपनी जांच में मिले साक्ष्यों से मिलाकर देखेगी। इससे जांच में सामने आए नए बिंदुओं और संभावित कड़ियों का पता चलने की उम्मीद है।

    नेटवर्क और लेनदेन पर NIA की नजर
    NIA की जांच का अहम बिंदु यह पता लगाना है कि नकली नोटों का नेटवर्क आखिर किस स्तर तक फैला हुआ है। एजेंसी यह भी देख रही है कि इसके पीछे कोई संगठित गिरोह तो सक्रिय नहीं था। नकली नोटों के स्रोत के अलावा संदिग्ध वित्तीय लेनदेन भी जांच के दायरे में हैं।

    एसपी सिटी व्योम बिंदल के मुताबिक, करेंसी चेस्ट मामले में एसआईटी ने जांच की थी और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद केस डायरी NIA को सौंप दी गई है। अब पूरे मामले की जांच NIA कर रही है।

    NIA के एसपी ने पुलिस अधिकारियों से ली थी जानकारी
    9 सितंबर को NIA के एसपी वैभव सक्सेना ने पुलिस लाइन में SSP अभिनंदन सिंह और SP सिटी व्योम बिंदल से मुलाकात की थी। इस दौरान करेंसी चेस्ट मामले में अब तक हुई जांच के साथ पुराने नकली नोट के मामलों की जानकारी भी ली गई थी। NIA ने पहले पकड़े गए नकली नोटों से जुड़े मामलों को भी अपनी जांच में शामिल किया है। एजेंसी विदेशी कनेक्शन की संभावनाओं को भी खंगाल रही है।

    मुख्य सुरक्षा अधिकारी फिर करेंसी चेस्ट पहुंचे
    PNB की करेंसी चेस्ट में नकली नोट पहुंचने का स्रोत और वहां से असली करेंसी निकलने से जुड़ी कड़ियां अभी स्पष्ट नहीं हो सकी हैं। मामले की जांच NIA के अलावा SIT और बैंक स्तर पर भी की जा चुकी है। अभी तक एक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी हुई है, जबकि दो आरोपी फरार बताए जा रहे हैं।

    इसी बीच शुक्रवार को PNB की मुख्य सुरक्षा अधिकारी सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट पहुंचीं। उन्होंने मामले से जुड़े बिंदुओं पर जांच-पड़ताल की और इसके बाद वापस लौट गईं।

    नकुड़ शाखा में किसान को मिला 500 का नकली नोट
    17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के मामले की जांच के बीच नकुड़ कस्बे की तहसील रोड स्थित PNB शाखा से ग्राहक को 500 रुपये का संदिग्ध नोट दिए जाने का मामला सामने आया है। छापुर गांव निवासी किसान अंकित का आरोप है कि चेक के जरिये बैंक से निकाली गई रकम में यह नोट मिला था।

    अंकित के मुताबिक, वह अपने साथी संजीव निवासी अंबेहटी के साथ बैंक से रुपये निकालने पहुंचे थे। दोनों ने चेक के माध्यम से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये निकाले। कैशियर ने मशीन से रकम गिनने के बाद उन्हें पैसे दिए। इसके बाद दोनों एक रेस्टोरेंट पहुंचे, जहां संजीव ने रकम में से 15 हजार रुपये एक व्यक्ति को दिए। इसी दौरान दोबारा नोट गिनते समय 500 रुपये का एक नोट संदिग्ध लगा। जांच कराने पर उसे नकली बताया गया।

    इसके बाद दोनों बैंक शाखा पहुंचे और शाखा प्रबंधन से नोट बदलने की मांग की। आरोप है कि शाखा प्रबंधक और कैशियर ने शुरुआत में यह मानने से इनकार कर दिया कि नोट बैंक से दिया गया था। इससे शाखा में काफी देर तक हंगामा हुआ। अंकित के अनुसार, बाद में बैंक कर्मचारियों ने संदिग्ध नोट वापस लेकर उसकी जगह दूसरा 500 रुपये का नोट दे दिया।

    शाखा प्रबंधक संजीव अग्रवाल से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि वह फिलहाल बाहर हैं। उन्होंने सोमवार को लौटने के बाद मामले में जानकारी देने की बात कही।

    क्या दोनों मामलों का आपस में संबंध है?
    नकुड़ शाखा में ग्राहक को मिले 500 रुपये के संदिग्ध नोट का मामला जिले की PNB करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों की जांच के बीच सामने आया है। इससे सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई कड़ी है। हालांकि, फिलहाल स्थानीय शाखा से मिले नोट और करेंसी चेस्ट में बरामद जाली नोटों के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। दोनों मामलों के बीच कोई कनेक्शन है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • Bihar: सीमांचल में अबैध घुसपैठ, जाली नोट, नशा-तस्करी के खिलाफ चलेगा बड़ा ऑपरेशन…

    Bihar: सीमांचल में अबैध घुसपैठ, जाली नोट, नशा-तस्करी के खिलाफ चलेगा बड़ा ऑपरेशन…


    पटना।
    बिहार (Bihar) के सीमांचल में अवैध घुसपैठ (Illegal Intrusion) के साथ ही भारतीय जाली नोट, मानव व्यापार और नशे के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलेगा। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) के तीन दिवसीय दौरे के बाद केन्द्रीय एजेंसियां समेकित रूप से इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने में जुट गयी हैं। अभियान में एसएसबी, बीएसएफ, आईटीबीपी, एनआईए, ईडी, आईबी सहित स्थानीय प्रशासन और बिहार पुलिस का आपसी सहयोग रहेगा।

    दरअसल, केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि नेपाल से जुड़े बिहार के सीमाई इलाकों में अवैध घुसपैठ के साथ ही जाली भारतीय नोट, मानव व्यापार और नशीली दवाओं की तस्करी का बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है। यह नेटवर्क भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के साथ ही क्षेत्रीय संतुलन भी बिगाड़ रहा है। इसके लिए केन्द्रीय एजेंसियों को समन्वय के साथ काम करने का निर्देश मिला है। सूत्रों के मुताबिक एसएसबी, आईबी, बीएसएफ और आईटीबीपी को इंटेलिजेंस शेयरिंग कर तस्करी रूटों के लाइव मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी मिली है।

    एनआईए और ईडी जाली नोट, नारकोटिक्स और मानव व्यापार के नेटवर्कों की बड़े स्तर पर जांच करेंगे। इसमें बिहार पुलिस का भी सहयोग मिलेगा। बैठक के बाद केन्द्रीय एजेंसियां इन नेटवर्क के अहम कड़ियों की पहचान और इसके फंडिंग पैटर्न को समझने में जुटी है।


    मदरसों की फंडिंग और चीनी भाषियों पर नजर

    केन्द्रीय बल और जांच एजेंसियों की सीमाई क्षेत्रों के मदरसों की विदेशी फंडिंग पर भी नजर है। संदिग्ध मदरसों के फंडिंग की जांच कराने का निर्देश है। खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली है कि सीमाई क्षेत्र में चीनी भाषा सीखने-सिखाने वाले कई संस्थान खुल गए हैं। पहले इन संस्थानों को सिर्फ शैक्षिक इकाई के रूप में देखा जाता था, लेकिन, अब चीनी इंफ्लुएंसर्स की पहचान करते हुए उनके बैकग्राउंड को खंगाला जा सकता है। आशंका है कि जासूसी या सॉफ्ट वारफेयर के लिए चीनी भाषा प्रभावित लोगों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    सूत्रों के मुताबिक बैठक में सीमा से सटे इलाके में सुनियोजित रूप से कई अवैध बस्तियां बसाये जाने की सूचना मिली है। केन्द्रीय गृह मंत्री के निर्देश पर अब सीमा क्षेत्र के अंदर 10 किमी तक ऐसी अवैध बस्तियों को हटाया जाएगा। बॉर्डर इलाके में रोहिंग्याओं की बढ़ी हुई सक्रियता को देखते हुए किशनगंज इलाके में सैन्य संगठनों की तैनाती बढ़ाने पर भी विचार हो रहा है।