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  • पूर्व नेता का नया भेष देख पुलिस भी हैरान, भंते बनकर मठ में रहा, विदेश यात्रा के बाद गिरफ्तारी

    पूर्व नेता का नया भेष देख पुलिस भी हैरान, भंते बनकर मठ में रहा, विदेश यात्रा के बाद गिरफ्तारी


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश में सामने आए फर्जी पासपोर्ट कांड की जांच के दौरान स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ को एक और अहम सुराग मिला है। शुक्रवार रात एसटीएफ ने भिंड निवासी राहुल प्रकाश उर्फ नृत्या भंते को रायसेन से पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। राहुल प्रकाश बहुजन संघर्ष दल का पूर्व प्रदेश महासचिव बताया जा रहा है। आरोप है कि उसने अपनी पहचान छिपाकर भोपाल के गोविंदपुरा स्थित एक बौद्ध मठ में भंते के रूप में रहते हुए नए पते के आधार पर पासपोर्ट बनवाया था। इसी पासपोर्ट से उसके थाईलैंड और म्यांमार जाने की बात जांच में सामने आई है। हालांकि फिलहाल एसटीएफ की ओर से राहुल प्रकाश की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    पूछताछ से जुड़ी जानकारी के मुताबिक राहुल प्रकाश मूल रूप से भिंड जिले के एक गांव का रहने वाला है। वह दलित समाज की राजनीति में सक्रिय था और बहुजन संघर्ष दल से जुड़कर प्रदेश स्तर पर संगठन में जिम्मेदारी संभाल चुका है। बताया जा रहा है कि वह भविष्य में चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहा था। इसी दौरान करीब साढ़े तीन साल पहले उसने अपनी पहचान छिपाकर भोपाल के एक बौद्ध विहार में भंते के रूप में रहना शुरू किया।

    जांच के अनुसार वर्ष 2025 की शुरुआत में राहुल प्रकाश ने नए पते का इस्तेमाल करते हुए पासपोर्ट बनवाया। आरोप है कि पासपोर्ट के लिए दिए गए पते और पहचान से जुड़ी जानकारी में गड़बड़ी की गई थी। पासपोर्ट बनने के बाद उसने विदेश यात्रा भी की। एसटीएफ को उसके इसी पासपोर्ट से थाईलैंड और म्यांमार जाने के संबंध में जानकारी मिली है। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि उसने नेता से भंते बनने का फैसला क्यों किया और पासपोर्ट तैयार कराने में उसकी मदद किसने की।

    एसटीएफ इस पूरे मामले में कथित फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। राहुल प्रकाश से उसके फर्जी पते पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया विदेश यात्राओं और उसके संपर्क में रहे लोगों के बारे में पूछताछ की जा रही है। खासतौर पर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या वह किसी ऐसे नेटवर्क के संपर्क में था जो दूसरे लोगों के लिए भी इसी तरह फर्जी दस्तावेज तैयार कराता था।

    जांच में अब तक मध्य प्रदेश के सात जिलों में 75 से अधिक फर्जी पासपोर्ट सामने आने की जानकारी दी गई है। इन पासपोर्ट के जरिए 100 से ज्यादा विदेश यात्राओं के सबूत मिलने की बात कही जा रही है। इसके अलावा गुजरात और महाराष्ट्र में भी इसी तरह के फर्जी पासपोर्ट तैयार किए जाने के संकेत जांच एजेंसी को मिले हैं। एसटीएफ को इस मामले में आठ भंतों की तलाश होने की जानकारी भी सामने आई है।

    अब राहुल प्रकाश से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने में कौन लोग शामिल थे और इन दस्तावेजों का इस्तेमाल विदेश यात्रा के लिए किस तरह किया गया। जांच आगे बढ़ने के साथ इस कथित नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना है।

  • एक मठ का पता और 40+ पासपोर्ट! भंते को भनक तक नहीं कैसे हुआ पूरा खेल अब पुलिस- STF जांचेगी हर कड़ी

    एक मठ का पता और 40+ पासपोर्ट! भंते को भनक तक नहीं कैसे हुआ पूरा खेल अब पुलिस- STF जांचेगी हर कड़ी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के मामले की जांच अब भोपाल तक पहुंच गई है। STF की जांच में गोविंदपुरा क्षेत्र स्थित अशोक बुद्ध विहार मठ का पता भी सामने आया है। दावा है कि इसी एक पते का इस्तेमाल 40 से ज्यादा पासपोर्ट बनवाने के लिए किया गया। मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को लेकर खड़ा हो गया है। आखिर एक ही पते पर रहने वाले अलग अलग लोगों के नाम से इतनी बड़ी संख्या में पासपोर्ट के आवेदन कैसे आगे बढ़े और सत्यापन के दौरान यह गड़बड़ी पकड़ में क्यों नहीं आई।

     टीम ने मामले की पड़ताल के लिए अशोक बुद्ध विहार मठ पहुंचकर वहां मौजूद भंते कश्यप आनंद से बातचीत की। भंते के मुताबिक उन्हें मठ के पते का इस्तेमाल कर पासपोर्ट बनाए जाने की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि वह मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं और करीब दो दिन पहले ही मठ में आए हैं। उनके आने के बाद अब तक न STF की टीम जांच के लिए मठ पहुंची और न ही किसी दूसरी जांच एजेंसी ने उनसे इस मामले में पूछताछ की है।

    भंते कश्यप आनंद ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि मठ के पते से कितने लोगों के पासपोर्ट बनाए गए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति ने मठ का पता देकर पासपोर्ट के लिए आवेदन किया होगा तो नियमानुसार पुलिस को पते का सत्यापन करना चाहिए था। हालांकि उनकी जानकारी में ऐसा कोई पुलिस वेरिफिकेशन नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार वह भोजन के लिए मठ से बाहर चले जाते हैं इसलिए उनकी गैरमौजूदगी में कोई टीम आई हो इसकी संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन मठ में मौजूद किसी अन्य व्यक्ति ने भी उन्हें ऐसी किसी कार्रवाई की जानकारी नहीं दी।

    यही बात अब STF की जांच को और गंभीर बना रही है। अगर जांच एजेंसी के मुताबिक एक ही मठ के पते से 40 से ज्यादा पासपोर्ट बने हैं तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि इन आवेदनों में दिए गए दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई। पुलिस वेरिफिकेशन में आवेदकों की पहचान और उनके वास्तविक निवास की पुष्टि कैसे की गई। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि मठ का पता पासपोर्ट आवेदनों में किसने उपलब्ध कराया और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो काम नहीं कर रहा था।

    इस पूरे मामले की शुरुआत डबरा के सिमरिया टेकरी स्थित बौद्ध विहार के पते से सामने आए संदिग्ध पासपोर्ट से हुई थी। जांच आगे बढ़ी तो मध्य प्रदेश के अलग अलग स्थानों के पतों से करीब 70 संदिग्ध पासपोर्ट बनाए जाने की जानकारी सामने आई। STF के मुताबिक इनमें 22 मामलों की पुष्टि हो चुकी है जबकि बाकी मामलों की जांच जारी है। जांच में फर्जी आधार कार्ड वोटर आईडी निवास प्रमाण पत्र और 10वीं की अंकसूची जैसे दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।

    STF ने मामले में रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के अनुसार रियाल कई पासपोर्ट में गवाह बना था और उसके नाम से भी चार पासपोर्ट मिलने की जानकारी सामने आई है। आरोपियों के कनेक्शन असम समेत दूसरे राज्यों से जुड़े होने की बात कही जा रही है। STF अब इस मामले में संभावित अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की दिशा में भी जांच कर रही है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मठ के एक पते से 40 से ज्यादा पासपोर्ट जारी होने के बावजूद सत्यापन प्रक्रिया में यह असामान्य स्थिति पकड़ में क्यों नहीं आई। अब STF पासपोर्ट आवेदन से लेकर दस्तावेज तैयार होने और पुलिस वेरिफिकेशन के बाद पासपोर्ट जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच से यह साफ होने की उम्मीद है कि मठ का पता किसने इस्तेमाल किया दस्तावेज कहां तैयार हुए और इतनी बड़ी संख्या में पासपोर्ट जारी होने के पीछे असली नेटवर्क कितना बड़ा है।