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  • काले रंग और मोटे शरीर को लेकर पत्नी के ताने का आरोप तलाक मांगने पहुंचे पति को हाई कोर्ट से झटका

    काले रंग और मोटे शरीर को लेकर पत्नी के ताने का आरोप तलाक मांगने पहुंचे पति को हाई कोर्ट से झटका


    नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पति की अपील खारिज कर दी है। पति ने अपनी पत्नी पर कई आरोप लगाए थे और दावा किया था कि पत्नी उसे काले रंग और मोटे शरीर वाला बताकर परेशान करती थी। पति की ओर से इन बातों को वैवाहिक जीवन में क्रूरता का आधार बताया गया था लेकिन हाई कोर्ट ने माना कि केवल ऐसे आरोप तलाक की डिक्री देने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया जिसमें पति की तलाक की याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी थी।

    मामला जांजगीर चांपा जिले के 28 वर्षीय अक्ष घोष और रायगढ़ जिले की 25 वर्षीय पूजा सीत से जुड़ा है। दोनों की शादी 7 मार्च 2019 को रायगढ़ जिले के एक गांव में हुई थी। शादी के बाद पत्नी करीब दो से तीन महीने तक पति और उसके परिवार के साथ रही। पति का आरोप था कि इस दौरान पत्नी का व्यवहार उसके प्रति शत्रुतापूर्ण रहा। उसने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी और अक्सर अपने मायके चली जाती थी। पति के मुताबिक पत्नी उसकी अनुमति के बिना एक रिश्तेदार की शादी में राजस्थान गई और करीब 25 दिन बाद वापस लौटी। इसी दौरान उसने जुड़वां बच्चों के गर्भपात का भी जिक्र किया।

    दूसरी तरफ पत्नी ने पति के आरोपों से इनकार किया। महिला ने अपने पति पर दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाया। उसका कहना था कि इस जानकारी के बाद पति ने शराब पीना शुरू कर दिया था। महिला ने पति पर दुर्व्यवहार करने और गर्भावस्था के दौरान उचित इलाज नहीं कराने का भी आरोप लगाया। उसके अनुसार बीमार होने पर उसकी मां उसे रायगढ़ के अस्पताल लेकर गई थी। ठीक होने के बाद उसने पति और उसके परिवार से उसे वापस ले जाने का अनुरोध किया लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद महिला की मां ने 24 फरवरी 2020 को रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। महिला ने घरेलू हिंसा कानून के तहत भी पति और उसके परिवार के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में कार्रवाई शुरू की थी।

    मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से रखे गए आरोपों और उपलब्ध सबूतों की जांच की। अदालत ने पाया कि पति अपनी पत्नी की ओर से की गई कथित क्रूरता और परित्याग के आरोपों को ठोस सबूतों से साबित नहीं कर सका। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति ने कई आरोप लगाए लेकिन उन्हें प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य सामने नहीं रखे गए। पत्नी द्वारा पति को काले रंग या मोटे शरीर वाला बताने का आरोप भी अपने आप में तलाक देने का पर्याप्त आधार नहीं माना गया।

    हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि पति यह साबित करने में असफल रहा कि पत्नी बिना उचित कारण अपने माता पिता के साथ रह रही थी। इसके साथ ही वह यह भी साबित नहीं कर सका कि पत्नी ने वैवाहिक संबंध खत्म करने की मंशा से उसे छोड़ दिया था। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही माना और पति की अपील खारिज कर दी। फैमिली कोर्ट ने जहां पति की तलाक याचिका खारिज की थी वहीं पत्नी की ओर से दायर स्त्रीधन वापस करने की याचिका को मंजूर किया था। हाई कोर्ट ने बिना किसी लागत के अपील खारिज करते हुए डिक्री तैयार करने का निर्देश दिया।

  • इंस्टाग्राम की लव स्टोरी पहुंची कोर्ट, कैंसर पीड़ित पति की शिकायत पर पत्नी के खिलाफ वारंट

    इंस्टाग्राम की लव स्टोरी पहुंची कोर्ट, कैंसर पीड़ित पति की शिकायत पर पत्नी के खिलाफ वारंट


    रतलाम । रतलाम में सोशल मीडिया से शुरू हुई एक प्रेम कहानी अब कानूनी विवाद का बड़ा मामला बन गई है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे युवक ने अपनी पत्नी पर बिना कानूनी तलाक लिए दूसरी शादी करने का आरोप लगाया है। मामले में न्यायालय ने प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 82(1) के तहत कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अदालत ने आरोपी महिला को 25 जुलाई 2026 को पेश होने के निर्देश दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार रतलाम की राजस्व कॉलोनी निवासी आकाश जाट की मुलाकात इंस्टाग्राम के माध्यम से साक्षी नकुम से हुई थी। दोनों के बीच करीब छह महीने तक बातचीत चली और फिर परिवारों की सहमति के बाद 20 नवंबर 2022 को इंदौर के आर्य समाज मंदिर में विवाह किया गया। इसके बाद 13 दिसंबर 2022 को रतलाम में सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ दोबारा विवाह संपन्न हुआ। शुरुआती दिनों में दोनों का वैवाहिक जीवन सामान्य रहा लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं।

    आकाश के अनुसार अप्रैल 2023 में उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी। जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें सांस की नली का कैंसर होने की पुष्टि की। बीमारी का पता चलते ही पत्नी का व्यवहार बदल गया और उसने साथ निभाने के बजाय दूरी बनानी शुरू कर दी। आकाश का आरोप है कि पत्नी ने यह तक कहा कि यदि उनकी मृत्यु हो गई तो उसका भविष्य क्या होगा। इसी दौरान उसने महिला थाने में मारपीट की शिकायत भी दर्ज कराई, हालांकि मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। बाद में पत्नी ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर कर दी।

    इसी बीच विवाद तब और गहरा गया जब तलाक का मामला अदालत में लंबित रहने के बावजूद महिला ने 10 जून 2024 को छतरपुर निवासी युवक से दूसरी शादी कर ली। इस विवाह से एक बेटी भी होने की बात सामने आई है। जब आकाश को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटाकर अदालत का दरवाजा खटखटाया।

    इस मामले में फैमिली कोर्ट ने 18 अप्रैल 2026 को महिला की तलाक याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पत्नी के लगाए गए कई आरोप उपलब्ध रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। न्यायालय ने यह भी माना कि जब पति गंभीर बीमारी से जूझ रहा था तब उसके खिलाफ लगाए गए कुछ आरोप परिस्थितियों के अनुरूप प्रतीत नहीं होते।

    इसके बाद आकाश ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) अदालत में आपराधिक परिवाद दायर किया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर महिला के खिलाफ बिना वैध तलाक दूसरी शादी करने के आरोप में मामला दर्ज किया। कई बार समन जारी होने के बावजूद अदालत में पेश नहीं होने पर न्यायालय ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया।

    आकाश की व्यक्तिगत जिंदगी भी लगातार मुश्किलों से घिरी रही। कैंसर से उपचार के दौरान पहले पिता और फिर मां का निधन हो गया। अब वे अकेले रह रहे हैं और उनके इलाज तथा अन्य जरूरतों में दोस्त मदद कर रहे हैं। उनके अधिवक्ता भी बिना फीस लिए मुकदमा लड़ रहे हैं। आकाश का कहना है कि उन्हें अब न्यायपालिका से ही इंसाफ मिलने की उम्मीद है। वहीं मामले में आगे की सुनवाई 25 जुलाई को निर्धारित की गई है।