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  • मुख्यमंत्री बनते ही विजय का भावुक और दमदार जननायक’ रूप, परिवार की आंखें नम..

    मुख्यमंत्री बनते ही विजय का भावुक और दमदार जननायक’ रूप, परिवार की आंखें नम..

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में एक नया अध्याय उस समय शुरू हुआ जब अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राजधानी में आयोजित इस भव्य समारोह ने न केवल राजनीतिक हलकों में बल्कि आम जनता के बीच भी गहरी चर्चा पैदा कर दी। यह अवसर उनके जीवन का सबसे निर्णायक मोड़ माना जा रहा है, जहां एक फिल्मी करियर से निकलकर उन्होंने सीधे राज्य के शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली।

    शपथ ग्रहण के बाद विजय का व्यक्तित्व पूरी तरह बदला हुआ और आत्मविश्वास से भरा नजर आया। मंच पर आते ही उन्होंने जनता को संबोधित किया और अपने विचारों को स्पष्ट रूप से सामने रखा। उनका संदेश पूरी तरह जनसेवा और जिम्मेदारी पर केंद्रित था, जिसमें उन्होंने जनता के कल्याण को अपनी प्राथमिक प्राथमिकता बताया। इस दौरान उनके अंदाज में एक अलग ही गंभीरता और नेतृत्व क्षमता झलक रही थी, जिसे कई लोगों ने उनके ‘जननायक’ रूप से जोड़कर देखा।

    इस पूरे आयोजन का सबसे भावनात्मक पक्ष उनके परिवार की मौजूदगी रही। जैसे ही विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, उनके पिता और माता भावुक हो उठे। उनके चेहरे पर गर्व के साथ-साथ भावनाओं की गहराई भी साफ दिखाई दे रही थी। यह दृश्य केवल एक राजनीतिक क्षण नहीं बल्कि एक पारिवारिक उपलब्धि का प्रतीक बन गया, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया।

    इसी समारोह में विजय के करीबी लोगों की मौजूदगी ने भी इस पल को और खास बना दिया। अभिनेत्री तृषा कृष्णन इस आयोजन में विशेष रूप से शामिल हुईं और पूरे कार्यक्रम के दौरान बेहद भावनात्मक नजर आईं। बताया जाता है कि इस ऐतिहासिक क्षण के दौरान उनकी आंखों में नमी थी और वे इस उपलब्धि को बेहद करीब से महसूस कर रही थीं। उनकी उपस्थिति ने भी इस पूरे माहौल को और अधिक व्यक्तिगत और भावनात्मक बना दिया।

    कार्यक्रम के दौरान कई अन्य प्रमुख हस्तियां भी मौजूद रहीं, जिससे यह आयोजन एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मिलन के रूप में सामने आया। मंच पर और उसके बाद विजय का कई लोगों के साथ संवाद भी देखने को मिला, जिसमें एक नई शुरुआत और सहयोग की झलक स्पष्ट दिखाई दी।

    शपथ ग्रहण के बाद विजय सीधे सचिवालय पहुंचे, जहां उन्होंने औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला। यह क्षण उनके राजनीतिक सफर में एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत का प्रतीक बना। इस दौरान उनके समर्थकों में उत्साह और जोश का माहौल देखा गया, जो लगातार उनके नेतृत्व को लेकर आशान्वित नजर आ रहे थे।

    इस पूरे आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि विजय का राजनीतिक प्रवेश केवल एक व्यक्तिगत यात्रा नहीं है, बल्कि यह एक बड़े जन समर्थन और उम्मीदों से जुड़ा हुआ अध्याय है। भावनाओं, जिम्मेदारियों और नई उम्मीदों से भरा यह दिन तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

  • शक्ति कपूर का खुलासा: ऑनस्क्रीन सीन देखकर थिएटर से उठकर चले गए थे माता-पिता

    शक्ति कपूर का खुलासा: ऑनस्क्रीन सीन देखकर थिएटर से उठकर चले गए थे माता-पिता


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के लीजेंडरी एक्टर शक्ति कपूर ने हाल ही में अपने करियर और परिवार के साथ जुड़ी एक दिलचस्प याद साझा की। शक्ति कपूर ने बताया कि उनके माता-पिता को उनके नेगेटिव किरदार और फिल्मों में महिलाओं के साथ निभाए गए सीन देखकर अक्सर शर्मिंदगी महसूस होती थी। एक बार तो ऐसा हुआ कि जब शक्ति कपूर के पहले ही सीन में उन्होंने एक लड़की का दुपट्टा खींचा, तो उनके माता-पिता थिएटर से उठकर बाहर चले गए।

    थिएटर में माता-पिता का रिएक्शन
    शक्ति कपूर ने अल्फा नियॉन स्टूडियोज के साथ बातचीत में बताया, मेरी दो बड़ी फिल्में रिलीज़ हो चुकी थीं और एक और फिल्म ‘इंसानियत के दुश्मन’ रिलीज़ हुई। मैंने अपने माता-पिता को फिल्म देखने के लिए बुलाया। लेकिन पहले ही सीन में मुझे एक लड़की का दुपट्टा खींचते देखा तो मेरे पापा ने तुरंत मेरी मां से कहा कि बाहर चले जाएं। उन्होंने कहा, ‘यह पहले बाहर ऐसा करता था और अब बड़े पर्दे पर भी कर रहा है। मैं यह फिल्म नहीं देखना चाहता।’”

    माता-पिता का सवाल: गुंडों के रोल क्यों?
    शक्ति कपूर ने आगे बताया कि उनके माता-पिता ने उनसे पूछा, “तुम गुंडों के रोल क्यों कर रहे हो? तुम्हें अच्छे इंसान के किरदार निभाने चाहिए। हेमा मालिनी और जीनत अमान जैसी एक्ट्रेस के साथ क्यों ऐसा काम कर रहे हो? लेकिन शक्ति कपूर ने अपनी राह चुनी। उन्होंने कहा, “मैंने उनसे कहा कि आपने मुझे जन्म दिया है और सिर्फ यही चेहरा दिया है। इस चेहरे को देखकर कोई मुझे अच्छे इंसान या हीरो का रोल नहीं देगा।

    मैं अपनी पहचान के अनुसार ही रोल चुनता हूँ।”

    बेटी श्रद्धा कपूर को भी होती थी शर्मिंदगी
    शक्ति कपूर की बेटी श्रद्धा कपूर, जो आज बॉलीवुड की सफल एक्ट्रेस हैं, भी बचपन में अपने पिता के निगेटिव रोल्स से शर्मिंदा हुआ करती थीं। श्रद्धा ने एक इंटरव्यू में कहा, “जब मैं छोटी थी, तो उनके विलेन रोल्स देखकर मैं नाराज हो जाती थी। मुझे यह पसंद नहीं आता था, लेकिन मेरी मां ने समझाया कि यह सिर्फ एक्टिंग है। अब मैं समझ गई हूँ कि पिता अपनी कला के प्रति कितने समर्पित हैं।”

    शक्ति कपूर के यादगार निगेटिव रोल
    1990 के दशक में शक्ति कपूर ने कई यादगार निगेटिव किरदार निभाए, जिन्होंने उन्हें बॉलीवुड में अलग पहचान दिलाई।

    भले ही उनके माता-पिता को शुरुआती दौर में ये रोल स्वीकार्य नहीं लगे, लेकिन शक्ति कपूर ने अपनी कला और अभिनय के दम पर नेगेटिव किरदारों में भी दर्शकों का दिल जीत लिया।

    शक्ति कपूर का यह खुलासा दर्शाता है कि बॉलीवुड में संघर्ष और परिवार की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण होता है। माता-पिता का विरोध, बेटी की नाराजगी और आलोचना के बावजूद शक्ति कपूर ने अपनी कला और पहचान बनाए रखी। यह कहानी दर्शकों को यह भी याद दिलाती है कि सच्ची प्रतिभा और आत्मविश्वास के सामने किसी भी आलोचना का असर कम होता है।