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  • सीएम डॉ. मोहन यादव ने पीएम मोदी से की भेंट, किसान कल्याण वर्ष की गतिविधियों से कराया अवगत

    सीएम डॉ. मोहन यादव ने पीएम मोदी से की भेंट, किसान कल्याण वर्ष की गतिविधियों से कराया अवगत


    भोपाल/नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सौजन्य भेंट की और उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर सीएम ने पीएम मोदी को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों की जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि किसान कल्याण वर्ष के तहत कृषि विकास किसानों की आय वृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रदेश में कई पहलें की जा रही हैं। पीएम मोदी ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए मार्गदर्शन और आशीर्वाद दिया।

    सीएम डॉ. यादव ने कहा “प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी के बताए मार्ग के अनुसार चार श्रेणियों किसान महिला गरीब और युवा के लिए काम कर रही है। करीब 16 विभागों को जोड़कर कृषि पशुपालन मछली पालन और बागवानी जैसे क्षेत्रों में अच्छी पहल की जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने हमारे काम को आगे बढ़ाने का आशीर्वाद दिया है।

    नई दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने संसद भवन का भ्रमण भी किया और विभिन्न सांसदों से मुलाकात कर मध्यप्रदेश के विकास केंद्र राज्य समन्वय और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनता के हित में विकास कार्यों को और गति देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।  सीएम ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य के समन्वय से प्रदेश में निवेश रोजगार और किसान कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल होंगी।

  • कृषक कल्याण वर्ष पर सियासी घमासान, जीतू पटवारी का मोहन सरकार पर हमला, बोले- सीएम पहलवान, लेकिन अफसरों के दांव में चित; 60% पद खाली, किसान बेहाल

    कृषक कल्याण वर्ष पर सियासी घमासान, जीतू पटवारी का मोहन सरकार पर हमला, बोले- सीएम पहलवान, लेकिन अफसरों के दांव में चित; 60% पद खाली, किसान बेहाल


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में किसानों के मुद्दे को लेकर सियासत तेज हो गई है। Jitu Patwari ने प्रदेश सरकार के “कृषक कल्याण वर्ष” पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री Mohan Yadav पर तीखा हमला बोला। भोपाल स्थित Madhya Pradesh Congress Committee कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने कहा कि सरकार एक तरफ किसानों के कल्याण की बात कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उनके साथ इस दौरान Mukesh Nayak, Abhay Dubey और Sukhdev Panse भी मौजूद थे।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि शुरुआती दिनों में डॉ. मोहन यादव पहलवानी करते थे और Ujjain में उन्हें पहलवान के नाम से जाना जाता था। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि जब कोई अधिकारी उनके सामने “पहलवानी का दांव” चलता है तो मुख्यमंत्री खुद ही चित हो जाते हैं। पटवारी ने कहा कि यह स्थिति एक-दो बार नहीं बल्कि लगभग हर महीने देखने को मिलती है, जिससे सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने किसानों को लेकर भाजपा की चुनावी गारंटियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय किसानों से वादा किया गया था कि गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल, धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल और सोयाबीन 6000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से खरीदी जाएगी। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि Ujjain Mandi में गेहूं का भाव करीब 1800 से 1900 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। पटवारी ने कहा कि यह स्थिति मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र की मंडी की है, जिससे साफ है कि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

    पटवारी ने कहा कि कांग्रेस ने इस मामले को लेकर वीडियो भी जारी किया था, जिसमें मंडी में किसानों को कम दाम पर गेहूं बेचते देखा जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ किसानों के हित की बात करती है, लेकिन बाजार में किसानों को उनकी उपज का सही दाम तक नहीं मिल पा रहा है।

    उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि वे पिछले 20 साल की नहीं बल्कि केवल पिछले एक साल की उपलब्धियों का हिसाब प्रदेश की जनता के सामने रखें। पटवारी के अनुसार अगर सरकार वास्तव में किसानों के हित में काम कर रही है तो उसे अपने कामकाज का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में पटवारी ने कृषि तंत्र की स्थिति को भी चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि से जुड़े विभागों में भारी संख्या में पद खाली पड़े हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कृषि विभाग में स्वीकृत 14,537 पदों में से 8,468 पद रिक्त हैं, यानी लगभग 60 प्रतिशत पद खाली हैं। इसके अलावा मत्स्य पालन विभाग में 1,290 में से 722 पद खाली हैं, जबकि उद्यानिकी विभाग में 3,079 में से 1,459 पद रिक्त पड़े हैं। पशुपालन और डेयरी विभाग में भी बड़ी संख्या में पद खाली होने से किसानों से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं।

    पटवारी ने कहा कि जब कृषि से जुड़े विभागों में इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारी ही नहीं हैं तो सरकार किसानों के कल्याण की बात किस आधार पर कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार जल्द से जल्द इन रिक्त पदों को भरे और किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि प्रदेश के किसान आर्थिक संकट से बाहर निकल सकें।

  • नागलवाड़ी में पहली कृषि कैबिनेट, लोक देवता भीलट देव से समृद्धि की कामना

    नागलवाड़ी में पहली कृषि कैबिनेट, लोक देवता भीलट देव से समृद्धि की कामना


    भोपाल/बड़वानी। किसान कल्याण वर्ष के संकल्प के साथ मध्यप्रदेश सरकार की पहली कृषि कैबिनेट की शुरुआत आस्था और परंपरा के वातावरण में हुई। मुख्यमंत्री मोहन यादव और मंत्रि परिषद के सदस्यों ने बड़वानी जिले के नागलवाड़ी स्थित भीलट देव मंदिर में निमाड़ मालवा के लोक देवता भीलट देव के दर्शन कर प्रदेश के किसानों की सुख समृद्धि की कामना की। सतपुड़ा की सुरम्य पहाड़ियों पर बसे इस तपोभूमि में आयोजित कैबिनेट बैठक ने विकास और संस्कृति के समन्वय का संदेश दिया।

    दर्शन के उपरांत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि निमाड़ मालवा क्षेत्र के आराध्य भीलट देव के आशीर्वाद से जो भी निर्णय लिए जाएंगे, वे किसानों और प्रदेशवासियों के हित में होंगे। मुख्यमंत्री ने निमाड़ क्षेत्र को मां नर्मदा का वरदान बताते हुए कहा कि नर्मदा के जल से सिंचित यह भूमि किसानों को समृद्ध और प्रगतिशील बना रही है। सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से बड़वानी सहित पूरे निमाड़ क्षेत्र में खेती को नई मजबूती मिली है।

    उन्होंने वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाना है। मुख्यमंत्री ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उत्पादन कम हो सकता है, लेकिन इससे मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ेगी और दीर्घकाल में उत्पादन क्षमता में स्थायी वृद्धि होगी। किसानों की आर्थिक उन्नति को ही प्रदेश की समग्र उन्नति का आधार बताते हुए उन्होंने कृषि सुधारों को सरकार की प्राथमिकता बताया।

    मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर की भव्यता और सकारात्मक ऊर्जा की सराहना करते हुए कहा कि सतपुड़ा की वादियों में बसा नागलवाड़ी का यह धाम आध्यात्मिक शक्ति से परिपूर्ण है। मंदिर के जीर्णोद्धार में संत श्री सियाराम बाबा के योगदान का भी उन्होंने स्मरण किया। दर्शन के बाद मुख्यमंत्री और मंत्रि परिषद सदस्यों ने सामूहिक रूप से मंदिर परिसर में फोटो भी खिंचवाया।

    कैबिनेट बैठक से पूर्व मुख्यमंत्री ने निमाड़ क्षेत्र की कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में प्राकृतिक खेती के प्रभावी मॉडल, वोकल फॉर लोकल, केला विकास मॉडल, डॉलर चना की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला, बड़वानी मिर्च प्लास्टर, तिल को उभरती फसल के रूप में प्रोत्साहन, गन्ना आधारित आर्थिक मॉडल, मिशन सिकलसेल उन्मूलन और वन्य ग्राम समृद्धि अभियान जैसी थीम प्रस्तुत की गईं। बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह ने विभिन्न कृषि पहलों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया।

    नागलवाड़ी में आयोजित यह पहली कृषि कैबिनेट केवल प्रशासनिक बैठक नहीं रही, बल्कि यह संदेश भी दिया कि सरकार परंपरा, प्रकृति और प्रगति को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहती है। लोक आस्था के आंगन से शुरू हुआ यह संकल्प किसानों की समृद्धि और प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • MP: सौगातें लेकर आएगा कृषक कल्याण वर्ष…. हर किसान के पास होगा सोलर पंप

    MP: सौगातें लेकर आएगा कृषक कल्याण वर्ष…. हर किसान के पास होगा सोलर पंप


    भोपाल।
    कृषक कल्याण वर्ष (Farmers’ Welfare Year) किसानों के लिए कई सौगातें लेकर आएगा. सौर ऊर्जा (Solar energy) से संचालित सिंचाई पंपों से न केवल किसान दिन में ही खेतों में सिंचाई कर पाएंगे अपितु इससे बचने वाली बिजली से प्रदेश ऊर्जा में सरप्लस हो जाएगा. हर किसान के पास सोलर पंप होगा.किसान सौर ऊर्जा से खेती करेंगे।

    प्रदेश में 52 हजार किसानों के खेत में सोलर पंप स्थापित करने की योजना प्रारंभ की गई है। सोलर पंप स्थापित हो जाने से अब प्रदेश का किसान अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता भी बनेगा। अब प्रदेश के किसान सूरज से खेती करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) की इस अभिनव पहल के तहत 34 हजार 600 इकाइयों को लेटर ऑफ अवार्ड जारी कर 33 हजार कार्यदेश जारी किए जा चुके हैं। किसान के खेत में सोलर पम्प स्थापित होने से अब उन्हें विद्युत प्रदाय पर बिजली बिल का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। सोलर पम्प से उत्पादित अतिरिक्त ऊर्जा को किसान सरकार को बेच कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा लगातार किसानों को सोलर प्रोजेक्ट लगाने के लिए विभिन्न योजनाओं में लाभ प्रदान कर सक्षम बनाया जा रहा है।


    प्रदेश की सिंचाई क्षमता 100 लाख हैक्टयर तक बढ़ाएंगे

    किसान कल्याण वर्ष में प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा. विभिन्न सिंचाई परियोजना और सिंचाई की आधुनिकतम तकनीकी के प्रयोग से सिंचाई का रकबा अधिक से अधिक बढ़ाने का प्रयास रहेगा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संकल्प है प्रदेश में सिंचाई क्षमता को आगामी वर्षों में 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाना.

    प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित हुई है। प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी। प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी। पार्वती-काली-सिंध और चम्बल अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना, केन-बेतवा अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना की स्वीकृति केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि है. महाराष्ट्र राज्य के साथ क्रियान्वित होने वाली मेगा तापी भूजल भरण परियोजना विश्व की अनूठी परियोजना है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं।

    राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया है। इस सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी। इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपए होगी। सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे। राज्य की नदियों में बाढ़, जल प्रबंधन, जल के समुचित उपयोग नदी कछारों में पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से राज्य की नदियों को आपस में जोड़ने के लिए तकनीकी दल का गठन भी गया।

    भोपाल की झील की प्राचीन तकनीक का अध्ययन कर इस तर्ज पर कम लागत में सुरक्षित जलाशय एवं बांध निर्माण की अवधारणा पर भी कार्य किया जा रहा है. राज्य में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

    सिंहस्थ- 2028 में दुनिया भर से उज्जैन में आने वाले श्रद्धालुओं को शिप्रा के शुद्ध जल में स्नान कराने के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं. सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना उज्जैन निर्माणाधीन है, जिसकी लागत 614.53 करोड़ रुपए है। इसी तरह कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना उज्जैन की लागत 919.94 करोड़ है। सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य भी किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है।