Tag: Farmers Protest

  • सीहोर में किसानों-कांग्रेस नेताओं ने रोका शिवराज का काफिला, बोले- “आप हमारे भी प्रतिनिधि”; नीमच में विधायक को जनता का विरोध झेलना पड़ा

    सीहोर में किसानों-कांग्रेस नेताओं ने रोका शिवराज का काफिला, बोले- “आप हमारे भी प्रतिनिधि”; नीमच में विधायक को जनता का विरोध झेलना पड़ा


    सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर और नीमच जिलों में रविवार को जनप्रतिनिधियों को जनता के तीखे विरोध और सवालों का सामना करना पड़ा। एक ओर सीहोर में किसानों और कांग्रेस नेताओं ने केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan का काफिला रोककर अपनी समस्याएं सामने रखीं, तो दूसरी ओर नीमच में भाजपा विधायक ओमप्रकाश सकलेचा को ग्रामीणों के भारी विरोध के चलते अपना कार्यक्रम बीच में ही छोड़ना पड़ा।

    सीहोर में इछावर के आजाद मैदान की ओर जा रहे शिवराज सिंह चौहान का काफिला अचानक उस समय रुक गया जब कांग्रेस नेताओं और किसानों के एक समूह ने रास्ते में उन्हें घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि वे राजनीतिक रूप से भले ही कांग्रेस से जुड़े हों, लेकिन जनप्रतिनिधि के रूप में शिवराज सभी के प्रतिनिधि हैं, इसलिए वे अपनी समस्याएं उनके सामने रखना चाहते हैं।

    इस दौरान किसानों ने बताया कि पिछले कई दिनों से वे खाद और कृषि संबंधी कार्यों के लिए परेशान हैं। डिजिटल पोर्टल के सर्वर डाउन होने के कारण किसानों को घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है, जिससे उनकी समस्याएं बढ़ रही हैं। किसानों ने इस संबंध में केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन भी सौंपा।

    किसानों की बात सुनने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा और सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे जनता के प्रतिनिधि हैं और हर नागरिक की समस्या का समाधान करना उनकी जिम्मेदारी है।

    बाद में जनकल्याण शिविर में पहुंचे शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों पर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कुछ अधिकारी जनता के कामों में बाधा डाल रहे हैं और पात्र लोगों को योजनाओं से बाहर किया जा रहा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सभी आवेदनों की निष्पक्ष जांच हो और किसी गरीब का हक न छीना जाए।

    इसी बीच नीमच जिले के जावद क्षेत्र में स्थिति अलग रही, जहां विधायक ओमप्रकाश सकलेचा को जनता के तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा। वे बांगरेड गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, लेकिन स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए।

    ग्रामीणों का कहना था कि अस्पताल तो बन रहा है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। जब विधायक ने जवाब देने की कोशिश की, तो भीड़ और अधिक आक्रोशित हो गई और ‘विधायक वापस जाओ’ के नारे लगाने लगी। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षाकर्मियों के बीच हस्तक्षेप के बाद विधायक को कार्यक्रम बीच में छोड़कर जाना पड़ा। यह घटनाएं दर्शाती हैं कि जनता अब अपने मुद्दों को लेकर अधिक मुखर हो रही है और जनप्रतिनिधियों से सीधे जवाब की अपेक्षा रखती है।

  • यूरिया संकट से भड़के किसान, मोदीनगर में सहकारी समिति पर बड़ा बवाल

    यूरिया संकट से भड़के किसान, मोदीनगर में सहकारी समिति पर बड़ा बवाल

    गाजियाबाद । उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में यूरिया खाद की किल्लत को लेकर किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। मोदीनगर क्षेत्र के कादराबाद गांव स्थित साधन सहकारी समिति पर शनिवार सुबह उस समय स्थिति बेकाबू हो गई जब किसानों ने गोदाम से लगभग 350 यूरिया के कट्टे जबरन उठा लिए। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया और प्रशासन को मौके पर पहुंचकर हालात संभालने पड़े।

    किसानों का आरोप है कि उन्हें पिछले कई दिनों से यूरिया खाद नहीं मिल रही थी, जबकि समिति के अधिकारी कथित तौर पर ऊंचे दामों पर खाद की बिक्री कर रहे थे। धान की बुवाई के इस महत्वपूर्ण समय में खाद न मिलने से किसानों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा था।

    जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात को समिति के गोदाम में यूरिया का एक ट्रक पहुंचा था, जिसे उतारकर गोदाम में रख दिया गया। जैसे ही शनिवार सुबह समिति का कार्यालय खुला, बड़ी संख्या में किसान वहां पहुंच गए और खाद की मांग को लेकर विरोध शुरू कर दिया। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब किसानों को तुरंत यूरिया उपलब्ध नहीं कराया गया।

    इसके बाद किसानों का सब्र टूट गया और वे नारेबाजी करते हुए गोदाम में घुस गए। देखते ही देखते हालात ऐसे हो गए कि किसानों ने गोदाम से यूरिया के लगभग 350 कट्टे उठा लिए। इस दौरान समिति के कर्मचारियों और सचिव के साथ धक्का-मुक्की की भी खबरें सामने आईं।

    सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। अधिकारियों ने किसानों को समझाकर शांत कराया और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उपजिलाधिकारी के अनुसार पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है।

    वहीं दूसरी ओर यह भी जानकारी सामने आई है कि समिति के सचिव और कर्मचारियों ने बाद में किसानों के घर-घर जाकर यूरिया के कट्टों की कीमत वसूली और लगभग 93 हजार रुपये की राशि जिला सहकारी बैंक में जमा कराई गई। इस पूरे मामले ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में खाद वितरण व्यवस्था और उसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब जांच के बाद आगे की कार्रवाई की बात कह रहा है।

  • मंडी शुल्क वृद्धि पर बवाल: कांग्रेस का विरोध तेज, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग

    मंडी शुल्क वृद्धि पर बवाल: कांग्रेस का विरोध तेज, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में कृषि उपज मंडियों में मंडी शुल्क को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.50 प्रतिशत किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। इस फैसले को लेकर मंदसौर जिले के पिपलियामंडी में कांग्रेस नेताओं, किसानों और व्यापारियों ने मिलकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।

    यह ज्ञापन ब्लॉक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा और जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष रामचंद्र करुण के नेतृत्व में मंडी सचिव जगदीशचंद्र भाभड़ को सौंपा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान और व्यापारी भी मौजूद रहे।

     किसानों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
    पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मंडी शुल्क में 0.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में यह अतिरिक्त शुल्क उन पर और आर्थिक दबाव बढ़ाएगा।

    उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई कृषि उत्पादक राज्यों में मंडी शुल्क 1 प्रतिशत या उससे भी कम है। ऐसे में मध्य प्रदेश में बढ़ा हुआ शुल्क व्यापारियों को अन्य राज्यों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में पीछे कर सकता है।

     किसानों और व्यापारियों में नाराजगी
    किसान बंशीलाल पाटीदार ने इस फैसले को किसान विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि खेती पहले से ही घाटे का सौदा बनती जा रही है और इन परिस्थितियों में शुल्क वृद्धि किसानों की समस्याओं को और बढ़ाएगी। जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष रामचंद्र करुण ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह निर्णय किसान और व्यापारी वर्ग के हितों के खिलाफ है। उन्होंने इसे “शोषणकारी” कदम बताया और तत्काल वापस लेने की मांग की।

    आंदोलन की चेतावनी
    कांग्रेस नेता बाबूखा मेवाती ने मंडी शुल्क वृद्धि को अन्यायपूर्ण बताते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो कांग्रेस आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी।

     व्यापक समर्थन
    इस मौके पर कई स्थानीय नेता, किसान और व्यापारी उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में मंडी शुल्क वृद्धि का विरोध किया और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।

    किसानों और व्यापारियों का कहना है कि यदि यह बढ़ोतरी लागू रहती है तो इसका सीधा असर उनकी आमदनी और व्यापार पर पड़ेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

  • पिपरसमा मंडी के बाहर सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली से जाम, प्याज की भारी आवक से 3 घंटे ठप रहा रास्ता

    पिपरसमा मंडी के बाहर सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली से जाम, प्याज की भारी आवक से 3 घंटे ठप रहा रास्ता


    मध्यप्रदेश । शिवपुरी जिले की पिपरसमा अनाज मंडी के बाहर बुधवार को प्याज की भारी आवक के चलते सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मुख्य मार्ग पर करीब तीन से चार किलोमीटर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। इस कारण किसान, राहगीर और अन्य वाहन चालक घंटों तक फंसे रहे।

    जानकारी के अनुसार, मंडी में प्याज की आवक सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रही। बड़ी संख्या में किसान अपनी फसल लेकर पहुंचे, लेकिन पर्याप्त व्यवस्थाओं की कमी के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को सड़क पर ही खड़ा करना पड़ा। इससे मंडी के बाहर मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह रुक गया और स्थिति धीरे-धीरे गंभीर जाम में बदल गई।

    जाम के कारण मंडी में होने वाली प्याज की नीलामी (डाक) भी प्रभावित हुई। कई किसानों ने मंडी प्रशासन की अव्यवस्था पर नाराजगी जताई और कहा कि हर साल आवक बढ़ने पर इसी तरह की स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया जाता।

    करीब तीन घंटे तक चले इस जाम में सैकड़ों वाहन फंसे रहे और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गर्मी और भीड़भाड़ के बीच लोग लंबे समय तक सड़क पर ही फंसे रहे।

    मंडी सचिव बालेश शुक्ला ने बताया कि प्याज की आवक असामान्य रूप से अधिक होने के कारण यह स्थिति बनी। कुछ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के सड़क पर खड़े होने से जाम बढ़ गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मंडी का दूसरा गेट खोलकर वाहनों को अंदर प्रवेश दिलाया गया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य हो सका। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने इसके लिए अतिरिक्त व्यवस्था पर विचार किया जाएगा।

  • बमोरी में हंगामा: खाद न मिलने पर किसानों का प्रदर्शन, तहसीलदार के आश्वासन के बाद खुला रास्ता

    बमोरी में हंगामा: खाद न मिलने पर किसानों का प्रदर्शन, तहसीलदार के आश्वासन के बाद खुला रास्ता

    नई दिल्ली। गुना जिले के बमोरी क्षेत्र स्थित बागेरी डबल लॉक केंद्र पर सोमवार को उस समय हंगामा मच गया जब बड़ी संख्या में किसान खाद लेने पहुंचे। किसानों के पास निर्धारित तारीख के ऑनलाइन टोकन थे, लेकिन केंद्र पर सर्वर डाउन होने के कारण खाद का वितरण शुरू नहीं हो सका। ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत किसानों को पहले स्वयं टोकन जनरेट करना होता है और उसी दिन केंद्र पर पहुंचकर खाद प्राप्त करनी होती है। लेकिन तकनीकी खराबी ने पूरी व्यवस्था को ठप कर दिया।

    नाराज किसानों ने किया चक्काजाम
    खाद न मिलने और बार-बार हो रही परेशानियों से आक्रोशित किसानों ने सड़क पर ट्रैक्टर खड़े कर चक्काजाम कर दिया। किसानों का कहना था कि यदि आज का टोकन एक्सपायर हो जाता है तो उन्हें फिर से पूरी प्रक्रिया दोहरानी पड़ेगी, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होगी। जाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

    प्रशासन मौके पर पहुंचा, समझाइश से शांत हुआ मामला
    स्थिति बिगड़ती देख बमोरी पुलिस और तहसीलदार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर उनकी समस्या सुनी और समाधान का आश्वासन दिया। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि किसानों के आज के टोकन मान्य रहेंगे और इन्हीं के आधार पर उन्हें अगले दिन खाद उपलब्ध कराई जाएगी। इस आश्वासन के बाद किसानों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया और सड़क यातायात बहाल हो गया।

    ऑनलाइन सिस्टम पर उठे सवाल
    इस घटना ने खाद वितरण की ऑनलाइन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि सर्वर डाउन और तकनीकी खराबी के कारण उन्हें बार-बार परेशानी झेलनी पड़ रही है, जबकि समय पर खाद न मिलने से खेती प्रभावित हो रही है।

    बमोरी की यह घटना साफ दर्शाती है कि डिजिटल व्यवस्था के बावजूद जमीनी स्तर पर तकनीकी खामियां किसानों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई हैं। प्रशासनिक आश्वासन के बाद भले ही मामला शांत हो गया हो, लेकिन सिस्टम की खामियों को सुधारने की जरूरत अब और ज्यादा महसूस की जा रही है।

  • कम रेट का झांसा फिर बढ़ी कीमतें बैतूल में किसानों ने बोरिंग माफिया पर लगाए शोषण के आरोप

    कम रेट का झांसा फिर बढ़ी कीमतें बैतूल में किसानों ने बोरिंग माफिया पर लगाए शोषण के आरोप


    बैतूल । मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में किसानों की परेशानियां एक बार फिर सामने आई हैं जहां आमला ब्लॉक सहित आसपास के क्षेत्रों में बोरिंग मशीन संचालकों पर शोषण के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। रबी फसल और गन्ने की कटाई के बाद सिंचाई की जरूरत बढ़ने के साथ ही बोर खनन की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है और इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ बाहरी एजेंटों द्वारा कथित रूप से मनमानी वसूली की जा रही है।

    स्थानीय किसानों का कहना है कि हर साल फरवरी से अप्रैल के बीच बोरिंग का काम तेजी से बढ़ता है और इस दौरान मशीन संचालकों की मांग अधिक हो जाती है। इसी दबाव का फायदा उठाते हुए बाहर से आए कुछ लोग अनियमित तरीके से काम कर रहे हैं और किसानों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं।

    आरोप है कि शुरुआत में कम रेट बताकर किसानों को काम के लिए तैयार किया जाता है लेकिन जैसे ही काम शुरू होता है बीच में ही कीमतें बढ़ा दी जाती हैं। ऐसे में किसान मजबूरी में बढ़ी हुई रकम देने को विवश हो जाते हैं क्योंकि काम अधूरा छोड़ना उनके लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।

    किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि यदि कोई बढ़ी हुई कीमत देने से मना करता है तो मशीन संचालक काम बीच में ही रोक देते हैं। इतना ही नहीं कुछ मामलों में किसानों को धमकाने और जान से मारने तक की धमकी देने की बातें भी सामने आई हैं जिससे ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों बढ़ गए हैं।

    आमला और आसपास के क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं बढ़ने से किसानों की चिंता और गहरा गई है। पहले से ही लागत और मौसम की मार झेल रहे किसान अब इस तरह की अवैध वसूली से और अधिक दबाव में आ गए हैं।

    किसानों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए और बोरिंग मशीन संचालकों के लिए स्पष्ट दरें तय करनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की मनमानी पर रोक लग सके। साथ ही ऐसे एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई जा रही है जो किसानों का शोषण कर रहे हैं।

    यह मामला न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में कानून व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और किसानों को इस संकट से कितनी राहत मिल पाती है।

  • डालर चने के दाम पर किसानों का गुस्सा, ट्रैक्टरों से हाईवे जाम

    डालर चने के दाम पर किसानों का गुस्सा, ट्रैक्टरों से हाईवे जाम


    खरगोन। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में डालर चने के कम दाम को लेकर किसानों का आक्रोश खुलकर सामने आया। किसानों ने बावड़ी बस स्टैंड के पास चित्तौड़गढ़-भुसावल राजमार्ग पर ट्रैक्टर खड़े कर रास्ता जाम कर दिया और जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि डालर चने का उचित समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है। वर्तमान में 6 से 7 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी हो रही है, जबकि उनकी मांग है कि भाव कम से कम 10 से 12 हजार रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए। किसानों के मुताबिक उत्पादन लागत, बीज, खाद और मजदूरी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए मौजूदा दर घाटे का सौदा साबित हो रही है।

    ट्रैक्टरों से रोका यातायात

    आक्रोशित किसानों ने अपने ट्रैक्टर सड़क पर खड़े कर हाईवे पूरी तरह जाम कर दिया। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात बाधित हो गया। यात्री बसें, ट्रक और अन्य वाहन घंटों फंसे रहे। स्थिति की जानकारी मिलते ही एसडीएम वीरेंद्र कटारे और कर्नाटक टीआई बीएल मंडलोई पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से चर्चा कर समाधान निकालने की कोशिश की। बाद में किसानों और प्रशासन के बीच मंडी परिसर में बातचीत शुरू हुई।

    वाजिब दाम नहीं तो आंदोलन तेज होगा
    प्रदर्शन कर रहे किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि डालर चने के दाम में बढ़ोतरी नहीं की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर समर्थन मूल्य बढ़ाना चाहिए, ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। फिलहाल प्रशासन किसानों से संवाद कर रास्ता निकालने का प्रयास कर रहा है। हालांकि किसानों के तेवर देखते हुए यह मुद्दा क्षेत्र में बड़ा आंदोलन बन सकता है।

  • पांगरी बांध परियोजना: अब बच्चों ने संभाली आंदोलन की कमान; CM को लिखा पत्र, माँगा जमीन का दोगुना मुआवजा

    पांगरी बांध परियोजना: अब बच्चों ने संभाली आंदोलन की कमान; CM को लिखा पत्र, माँगा जमीन का दोगुना मुआवजा


    बुरहानपुर । मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में पांगरी बांध परियोजना को लेकर चल रहा विवाद अब एक भावुक मोड़ पर पहुँच गया है। अपनी पुश्तैनी जमीन और आजीविका बचाने की जंग लड़ रहे किसानों के बाद अब उनके मासूम बच्चों ने भी आंदोलन के मैदान में कदम रख दिया है। रविवार को प्रभावित किसानों के छोटे-छोटे बच्चों ने हाथों में विरोध की तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम पत्र लिखकर अपनी व्यथा सुनाई। बच्चों की एक ही मांग है हमारी जमीन का सही दाम दो, हमें दोगुना मुआवजा दो।

    अनोखे प्रदर्शनों के बाद भी सरकार मौन मुआवजे की मांग को लेकर पांगरी बांध प्रभावित किसान लंबे समय से संघर्षरत हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकलने के कारण आक्रोश बढ़ता जा रहा है। किसान इससे पहले अपनी बात सरकार तक पहुँचाने के लिए ‘पत्थर खाओ आंदोलन’, ‘भैंस के आगे बीन बजाना’ और ‘अर्धनग्न प्रदर्शन’ जैसे कई अनूठे तरीके अपना चुके हैं। इन तमाम कोशिशों के बावजूद जब शासन-प्रशासन की नींद नहीं टूटी, तो अब घर के नौनिहालों ने अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए मोर्चा खोल दिया है।

    हाथों में तख्तियां और आँखों में भविष्य की चिंता रविवार का नजारा बेहद हृदयविदारक था, जब स्कूल जाने की उम्र वाले बच्चे अपने माता-पिता के साथ आंदोलन स्थल पर डटे नजर आए। बच्चों के हाथों में मौजूद तख्तियों पर मुख्यमंत्री से गुहार लगाते संदेश लिखे थे। बच्चों का कहना है कि उनकी जमीन ही उनके भविष्य का आधार है; यदि उसका उचित मुआवजा नहीं मिला, तो उनकी पढ़ाई और जीवन पर संकट आ जाएगा। उन्होंने पत्र के माध्यम से मांग की है कि वर्तमान बाजार दर के हिसाब से जमीन का दोगुना मुआवजा दिया जाए ताकि विस्थापन के बाद परिवार दोबारा खड़ा हो सके।

    बढ़ता दबाव और प्रशासनिक चुनौती किसानों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत उनकी बर्बादी से न चुकाई जाए। बच्चों के आंदोलन में कूदने से इस मामले ने अब मानवीय और नैतिक रूप ले लिया है, जिससे जिला प्रशासन और राज्य सरकार पर दबाव बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर बच्चों के प्रदर्शन की तस्वीरें वायरल होने के बाद अब इस मुद्दे पर प्रदेश भर की नजरें टिकी हैं। पांगरी बांध परियोजना का भविष्य फिलहाल अधर में नजर आ रहा है, क्योंकि किसान अपनी मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इन बच्चों की पुकार पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या प्रशासन संवाद का कोई नया रास्ता खोज पाता है।

  • महाराष्ट्र में 8 साल बाद भी 6.56 लाख किसानों को नहीं मिली ऋण माफीसरकार ने केवल 500 करोड़ का किया प्रावधान

    महाराष्ट्र में 8 साल बाद भी 6.56 लाख किसानों को नहीं मिली ऋण माफीसरकार ने केवल 500 करोड़ का किया प्रावधान


    महाराष्ट्र । महाराष्ट्र सरकार की छत्रपति शिवाजी महाराज शेतकरी सम्मान योजना 2017 में किसानों को ऋण माफी देने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इस योजना के तहत 6.56 लाख किसानों को ऋण माफी का लाभ देने का निर्णय लिया गया थालेकिन आठ साल का वक्त गुजरने के बावजूदइन किसानों को यह लाभ प्राप्त नहीं हो सका है। इस मुद्दे ने महाराष्ट्र के किसानों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी हैक्योंकि राज्य सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए पर्याप्त राशि का प्रावधान नहीं किया है

    सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने विधानसभा में एक लिखित उत्तर में स्वीकार किया कि इस योजना के तहत पात्र किसानों को ऋण माफी देने के लिए 5,975.51 करोड़ रुपये की आवश्यकता हैलेकिन सरकार ने केवल 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार किसानों के साथ मजाक कर रही है और क्या न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है?

    किसान नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर सरकार की आलोचना की है। शिवसेना ठाकरे गुट के नेता भास्कर जाधव ने विधानसभा में इस मामले को उठाया और बताया कि उच्च न्यायालय ने भी सरकार को इस योजना को लागू करने का आदेश दिया थाफिर भी सरकार ने इसकी पूरी आवश्यकता का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा आवंटित किया है।

    इतना ही नहींमुख्यमंत्री सहायता निधि में अक्टूबर महीने में 1 अरब रुपये जमा हुएलेकिन अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को सिर्फ 75 हजार रुपये की सहायता दी गई। इस मामले को लेकर भी RTI कार्यकर्ता वैभव कोकाट ने जांच की और पाया कि सरकार की मदद किसानों तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके अलावाई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी न होनेबैंक और आधार जानकारी में अंतरऔर पोर्टल पर तकनीकी त्रुटियों के कारण5 लाख 42 हजार 141 किसानों को घोषित मदद नहीं मिल पाई है।

    राज्य सरकार द्वारा घोषित 31,628 करोड़ रुपये की सहायता पैकेज भी केवल दिखावे का हिस्सा बनकर रह गया हैक्योंकि योजना की क्रियान्वयन में गंभीर समस्याएं आई हैं। इस सब के बीचकिसानों को प्राकृतिक आपदाओंफसल नुकसान और कर्ज जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैऔर वे उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्द ही इस मामले में ठोस और प्रभावी कदम उठाएगी।

    किसानों के हित में यदि सरकार जल्द से जल्द ऋण माफी योजना को लागू नहीं करती और उनकी परेशानियों को ध्यान में नहीं रखतीतो यह राज्य में किसानों के बीच और अधिक असंतोष पैदा कर सकता है। इस बीचयह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि आखिरकार किसानों को अपनी मेहनत का क्या फल मिलेगाजब सरकार द्वारा घोषित योजनाओं का लाभ उन्हें समय पर नहीं मिल रहा है।