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  • वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ा मान, खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास में योगदान के लिए पीएम मोदी को मिला प्रतिष्ठित ‘एग्रीकोला मेडल

    वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ा मान, खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास में योगदान के लिए पीएम मोदी को मिला प्रतिष्ठित ‘एग्रीकोला मेडल


    नई दिल्ली । भारत की कृषि नीतियों और खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा और किसानों के कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘एग्रीकोला मेडल’ से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान वैश्विक स्तर पर कृषि और खाद्य प्रबंधन के क्षेत्र में दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में माना जाता है। इस उपलब्धि के बाद देशभर में खुशी का माहौल है और इसे भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है।

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस सम्मान को देश के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई बड़े और प्रभावी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन में सुधार लाने और आधुनिक तकनीक को खेती से जोड़ने के लिए लगातार काम किया गया है। यही कारण है कि आज भारत कृषि क्षेत्र में तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है और दुनिया भारत के मॉडल को गंभीरता से देख रही है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में कृषि क्षेत्र में रिसर्च, नवाचार और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया गया है। खासतौर पर मोटे अनाज यानी श्री अन्ना को वैश्विक पहचान दिलाने में भारत की भूमिका बेहद अहम रही है। सरकार अब इस दिशा में और तेजी से काम कर रही है ताकि किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ मिल सके। कृषि अनुसंधान संस्थानों को भी आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, जिससे खेती को अधिक वैज्ञानिक और टिकाऊ बनाया जा सके।

    कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि भारत आने वाले समय में वैश्विक खाद्य सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाने वाला देश बन सकता है। इसके लिए पूर्वी भारत समेत कई क्षेत्रों में कृषि विकास को नई दिशा देने का काम किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि छोटे और सीमांत किसानों तक नई तकनीक, रिसर्च और आधुनिक संसाधनों का लाभ पहुंचे ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके। इसके साथ ही खेती की गुणवत्ता बढ़ाने और उत्पादन लागत कम करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी को मिला यह सम्मान ऐसे समय में आया है जब भारत कृषि उत्पादन, खाद्यान्न निर्यात और किसानों के हितों से जुड़े कई बड़े फैसलों के कारण वैश्विक स्तर पर चर्चा में है। पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण जैसे विषयों पर विशेष फोकस किया गया है। इसका असर अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दिखाई देने लगा है।

    इस सम्मान को केवल प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि देश के करोड़ों किसानों के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की कृषि नीतियों को वैश्विक स्तर पर और मजबूती मिलेगी। साथ ही भारतीय कृषि उत्पादों और रिसर्च को भी नई पहचान हासिल होगी। देश के किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों में इस उपलब्धि को लेकर उत्साह देखा जा रहा है और इसे भारत के कृषि भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

  • डॉ मोहन यादव का बड़ा फैसला किसानों को टोल छूट और प्रदेश में तेज होगा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास

    डॉ मोहन यादव का बड़ा फैसला किसानों को टोल छूट और प्रदेश में तेज होगा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास


    भोपाल । मध्यप्रदेश में किसान हित और आधारभूत संरचना विकास को लेकर सरकार ने एक साथ कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के संचालक मंडल की बैठक में किसानों को राहत देने के साथ साथ सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में बड़े निर्णय लिए गए

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में सार्थक बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं इसी क्रम में कृषि कार्य में उपयोग होने वाले कंबाइन हार्वेस्टर को टोल प्लाजा पर शुल्क से छूट देने का निर्णय लिया गया है यह फैसला सीधे तौर पर किसानों की लागत को कम करेगा और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद करेगा

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कंबाइन हार्वेस्टर फसल कटाई का एक महत्वपूर्ण उपकरण है और इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में किसानों को टोल शुल्क देना पड़ता था जिससे लागत बढ़ती थी अब टोल से छूट मिलने के बाद परिवहन खर्च में कमी आएगी और इसका सकारात्मक असर कृषि उत्पादन की लागत और अंततः बाजार कीमतों पर भी पड़ेगा यह निर्णय किसानों के लिए राहत और प्रोत्साहन दोनों के रूप में देखा जा रहा है

    बैठक में केवल किसान हित ही नहीं बल्कि प्रदेश के सड़क विकास को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए संचालक मंडल ने इंदौर उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग और उज्जैन जावरा ग्रीन फील्ड मार्ग के निर्माण को मंजूरी दी है इन परियोजनाओं को नॉन एक्सेस कंट्रोल के रूप में विकसित किया जाएगा जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रा समय में कमी आएगी

    इसके अलावा पश्चिम भोपाल बायपास के परिवर्तित एलाइनमेंट को भी अनुमोदन प्रदान किया गया है इस परियोजना से राजधानी क्षेत्र में यातायात दबाव कम होगा और शहरी परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी यह निर्णय आने वाले समय में भोपाल के यातायात ढांचे को नई दिशा देगा

    बैठक में वार्षिक लेखों और अन्य प्रशासनिक विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई और आवश्यक निर्णय लिए गए इस दौरान लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे

    कुल मिलाकर यह बैठक किसानों और आम नागरिकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है एक ओर जहां किसानों को सीधी आर्थिक राहत दी गई है वहीं दूसरी ओर सड़क परियोजनाओं के जरिए प्रदेश के विकास को गति देने की मजबूत आधारशिला रखी गई है सरकार का यह कदम समृद्ध किसान और विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है

  • प्रहलाद पटेल के साथ दिल्ली में मिले सीएम मोहन यादव, सरसों और तुअर किसानों को बड़ी राहत

    प्रहलाद पटेल के साथ दिल्ली में मिले सीएम मोहन यादव, सरसों और तुअर किसानों को बड़ी राहत

    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। इस बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा किसानों की फसलों से जुड़ी समस्याओं और उनकी आय बढ़ाने के उपाय थे।

    बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि यह चर्चा मुख्यतः सरसों और तुअर की फसल से संबंधित रही। लंबे समय से लंबित सरसों की खरीद पर भावांतर भुगतान योजना को हरी झंडी दे दी गई है। इसका लाभ सीधे किसानों के बैंक खातों में मिलेगा और यह उनके लिए बड़ी राहत साबित होगी। इससे प्रदेश के लाखों सरसों उत्पादक किसानों को बाजार मूल्य और समर्थन मूल्य के अंतर की राशि मिल सकेगी।

    इसके अलावा, तुअर की पूरी फसल 100 प्रतिशत सरकारी खरीद के तहत खरीदी जाएगी। शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को इस योजना का स्वीकृति पत्र भी सौंपा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम मध्य प्रदेश के दलहन उत्पादन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा।

    दिल्ली में हुई इस बैठक की पृष्ठभूमि में एमपी विधानसभा का हालिया बजट सत्र भी रहा। सत्र के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयानों से सीएम और उनके बीच अंदरूनी मतभेद नजर आए थे। इसके बाद पिछले हफ्ते सीएम मोहन यादव, कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल ने अलग-अलग समय पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। हालांकि इस बार कैलाश विजयवर्गीय निजी कार्यक्रम में व्यस्त रहे और बैठक में शामिल नहीं हो पाए।

    बैठक में यह भी तय किया गया कि वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। इसमें मध्य प्रदेश को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इस वर्ष में मूंग, उड़द, सोयाबीन और अन्य तिलहनों पर विशेष फोकस रहेगा। सरकार किसानों के लिए योजनाओं की प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर निगरानी भी सुनिश्चित करेगी।

    शिवराज-मोहन-प्रहलाद की यह बैठक किसानों के हितों के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि भावांतर भुगतान योजना और तुअर की पूरी सरकारी खरीद से किसान आर्थिक रूप से सशक्त होंगे और राज्य में दलहन उत्पादन में तेजी आएगी।

    प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार मिलकर किसानों की आय बढ़ाने, फसल की सही कीमत सुनिश्चित करने और उत्पादन को प्रोत्साहित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। यह बैठक किसानों के लिए वास्तविक राहत और लंबे समय से प्रतीक्षित निर्णयों का परिणाम साबित होगी।