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  • किसानों के समर्थन में प्रदर्शन पड़ा भारी शाजापुर में कांग्रेस नेताओं पर केस दर्ज

    किसानों के समर्थन में प्रदर्शन पड़ा भारी शाजापुर में कांग्रेस नेताओं पर केस दर्ज

    शाजापुर । शाजापुर में किसानों के समर्थन में कांग्रेस द्वारा किए गए कलेक्ट्रेट कार्यालय घेराव का मामला अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए 12 कांग्रेस नेताओं को नामजद करते हुए करीब 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और कांग्रेस ने प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।

    जानकारी के अनुसार बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता किसानों की समस्याओं को लेकर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे थे। इस दौरान प्रदर्शन उग्र हो गया और कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश कर गए। प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती देने वाले इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने बाद में पूरे मामले की जांच कर कानूनी कार्रवाई की।

    लालघाटी थाना पुलिस ने जिन नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है उनमें कांग्रेस के जिला अध्यक्ष नरेश्वर प्रताप सिंह, कालापीपल के पूर्व विधायक और राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी, सीताराम पवैया, यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष जयंत रामवीर सिंह सिकरवार, किसान कांग्रेस के अध्यक्ष कमल चौधरी और पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष इरशाद खान सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

    इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेताओं ने खुलकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन सरकार के दबाव में काम कर रहा है और किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों का गेहूं समय पर नहीं खरीद पा रही है और जब कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाती है तो उसके कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं।

    कुणाल चौधरी ने तीखे शब्दों में कहा कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है। उन्होंने प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि कांग्रेस न तो अंग्रेजों से डरी थी और न ही अब किसी दबाव में आएगी। उन्होंने साफ कहा कि यदि किसानों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए जेल जाना पड़े तो कांग्रेस कार्यकर्ता पीछे नहीं हटेंगे।

    कांग्रेस नेताओं ने यह भी मांग की कि सरकार स्पष्ट करे कि किसानों का गेहूं कब खरीदा जाएगा और किसानों पर हो रही वसूली कब बंद होगी। उन्होंने कर्ज माफी और फसल भुगतान जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।

    इस पूरे मामले के बाद शाजापुर में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। एक ओर प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रहा है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इसे किसानों की आवाज दबाने की कोशिश बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

  • किसानों के मुद्दे पर गरजे जीतू पटवारी शिवराज और बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप

    किसानों के मुद्दे पर गरजे जीतू पटवारी शिवराज और बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप


    भोपाल । भोपाल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने किसानों की स्थिति और राज्य की कृषि नीतियों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट बढ़ गई है।

    जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में किसानों के साथ लगातार धोखा हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कृषि आय को बढ़ाने के बड़े बड़े दावे किए लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग ही नजर आती है। उन्होंने कहा कि बार बार किए गए वादों के बावजूद किसानों की आमदनी में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।

    उन्होंने यह भी कहा कि मंडियों में किसानों को अपनी उपज बेचने में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा है। कई बार फसल खुले में पड़ी रह गई और समय पर खरीद नहीं हो सकी। इसके कारण किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। पटवारी ने आरोप लगाया कि नीतियों की खामियों का फायदा कुछ चुनिंदा व्यापारियों को मिला है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने खाद और उर्वरक की समस्या को भी प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी चीजों की उपलब्धता को लेकर लगातार संकट की स्थिति बनी रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने के दावे किए जाते रहे हैं लेकिन वास्तविकता इससे अलग रही है।

    पटवारी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर सिस्टम में पारदर्शिता की कमी है और कई निर्णयों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है कांग्रेस अध्यक्ष ने वल्लभ भवन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि वहां पर फैसलों में अनियमितताओं की बात सामने आती रही है। उन्होंने इसे प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी कमजोरी बताया।

    इसके अलावा उन्होंने मुरैना और इंदौर से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीतिक स्तर पर कई मुद्दों को अलग तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और संस्कृति के मुद्दों पर किसी को भी किसी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है और हर दल को अपनी प्राथमिकता तय करने का अधिकार है।

    जीतू पटवारी ने अंत में कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने घोषणा की कि वह किसानों के मुद्दों को लेकर आगे भी आंदोलनात्मक रुख अपनाएंगे और जरूरत पड़ी तो विरोध स्वरूप उपवास भी करेंगे। इस बयान के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सत्तापक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।